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एनआरसी के तहत भारत सरकार एक भी घुसपैठिए को देश के अन्दर रहने नही देगी- गृहमंत्री अमित शाह

एनआरसी के तहत भारत सरकार एक भी घुसपैठिए को देश के अन्दर रहने नही देगी- गृहमंत्री अमित शाह

केन्द्रीय गृह मंत्री और भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने अभी हाल ही में असम के गुवाहाटी में आयोजित नॉर्थ-ईस्ट डेमोक्रेटिक अलायंस (नेडा) की चौथी बृहद बैठक को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के अनुसार नार्थ-ईस्ट का मतलब एनई  नहीं बल्कि न्यू इंजन ऑफ इंडियन ग्रोथ है और भारत की विकास गाथा का नया इंजन नार्थ-ईस्ट बन सकता है। केंद्र की नरेन्द्र मोदी सरकार के लिए नार्थ-ईस्ट कोई पोलिटिकल डेस्टिनेशन नहीं बल्कि विकासका डेस्टिनेशन है।

शाह ने कहा कि एक समय नार्थ-ईस्ट मे उग्रवाद, घुसपैठ, बंद, हथियार और मादक पदार्थों की तस्करी, जातीय तनाव की चर्चा थी लेकिन 2014-19 के 5 सालों के दौरान विकास, कनेक्टिविटी, इन्फ्रास्ट्रक्चर और एक्ट-ईस्ट नीति के कारण नार्थ-ईस्ट की एक विशिष्ट पहचान बनी है। नार्थ-ईस्ट डेमोके्रटिक अलायन्स, पॉलिटिकल अलायंस और रीजनल अलायंस के साथ-साथ एक जीयो कल्चरल अलायंस भी है, यह पूरे नॉर्थ-ईस्ट को सांस्कृतिक रूप से एकजुट करने का एक मंच है जिसे नार्थ-ईस्ट के सभी आठों राज्यों की जनता का समर्थन प्राप्त है।

उन्होंने आगे कहा कि सांस्कृतिक और भोगौलिक विविधता से भरे नॉर्थ-ईस्ट को एकजुट रखते हुए पूर्वोत्तर का विकास करना प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी और एनडीए सरकार की प्रमुख प्राथमिकता है। नार्थ-ईस्ट भारत में प्राण वायु का स्रोत है। क्योंकि यहां देश के कुल वन क्षेत्र का 26 प्रतिशत नार्थ-ईस्ट के अंतर्गत आता है जो देश को ऑक्सीजन देने का काम करता है।

एनआरसी पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि एनआरसी का काम एक समय मर्यादा के अंदर हुआ है और यह हमारा संकल्प है कि भारत सरकार एक भी घुसपैठिए को देश के अन्दर रहने नहीं देगी। सिटीजनशिप बिल की जो कल्पना भारत सरकार के पास है उसके तहत 31 दिसंबर 2014 तक जो शरणार्थी भारत आए हैं उन्हें ही इसके अंतर्गत मान्यता मिलेगी। जब भारत और बांग्लादेश के बीच सीमा विवाद का समाधान हो सकता है तो हमारे राज्यों के बीच क्यों नहीं हो सकता। समय आ गया है कि हम सीमा विवाद से ऊपर उठें। हर राज्य एक दूसरे का पूरक बनते हुए आगे बढ़ो।

कांग्रेस पर हमला करते हुए गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि आजादी के बाद से वर्ष 2014 तक कांग्रेस पार्टी ने नार्थ-ईस्ट के अन्दर जनजातियों, राज्यों, भाषाओं और विभिन्न संस्कृतियों के बीच इतने झगड़े लगवाये कि नार्थ-ईस्ट अशांति का शिकार बना रहा। नार्थ-ईस्ट के अन्दर विकास की बजाय भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने का पाप यदि किसी एक पार्टी ने किया है तो वह कांग्रेस पार्टी है। नार्थ-ईस्ट के अन्दर जितने भी हथियार तस्करी गु्रप थे, आतंकवाद था इसे जड़ मूल से समाप्त करने के लिए कांग्रेस ने कोई सार्थक प्रयास नहीं किया, बल्कि इन समस्याओं को ज्यादा से ज्यादा उलझाने का काम किया ताकि उनकी सत्ता बनी रहे। कांग्रेस की इसी फूट डालो-शासन करो की नीति के कारण नार्थ-ईस्ट स्वयं को देश से अलग-थलग महसूस करता रहा। इसलिए ये जरुरी था कि एक ऐसा नार्थ-ईस्ट बनाया जाए जो भारत की ताकत बने और भारत के विकास के लिए उर्जा प्रदान करे। इस भावना को नार्थ-ईस्ट के सुदूर तक पहुंचाने के लिए आवश्यक था कि नार्थ-ईस्ट कांग्रेस मुक्त बने।

(उदय इंडिया ब्यूरो)

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