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”कर्नाटक में हार के बावजूद कांग्रेस और जेडीएस का साथ आना सबसे बड़ी अनैतिकता थी’’

”कर्नाटक में हार के बावजूद कांग्रेस और जेडीएस का साथ आना सबसे बड़ी अनैतिकता थी’’

”कांग्रेस ने 2013-18 तक शासन किया। लेकिन 2018 के इस चुनाव में लोगों ने कांग्रेस को हराया। जेडीएस को दुबारा हराया। अत: 2018 चुनाव का परिणाम दोनों दलों के खिलाफ था और भाजपा के पक्ष में था। कांग्रेस और जेडीएस का साथ आना लोगों के जनादेश के खिलाफ और अनैतिक  था। उनके पास चुनावी वैधता नहीं थी। इसके अतिरिक्त कांग्रेस और जेडीएस ने यह तर्क दिया कि इन दोनों दलों ने अपवित्र गठजोड़ इसलिए किया ताकि वे  मोदी को 2019 में प्रधानमंत्री बनने से रोक सकें और भाजपा को सत्ता से बाहर कर सकें। लेकिन क्या ऐसा हुआ? नहीं, भाजपा ने इन सबका सफाया कर दिया और ये दोनों केवल एक सीट ही जीत सके। नैतिकता तो इसी में होती की 2018 में मुंह की खाने के बाद ये दोनों दल चुपचाप सत्ता से हट जाते। यह कर्नाटक के लोगों के लिए एक बुरा समय था। वे इस सरकार के जाने का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे। अब जब यह हो गया है, तो लोगों को राहत मिली है,’’ यह कहना है कर्नाटक के मुख्यमंत्री बी. एस. येदियुरप्पा का उदय इंडिया के वरिष्ठ संवाददाता एस. ए. हेमंत कुमार से हुई खास बातचीत के दौरान। प्रस्तुत है बातचीत के मुख्य अंश:

  

विधानसभा में विश्वास मत हासिल करने के बाद आप कैसा महसूस कर रहे हैं?

अब दायित्व का आभास हो रहा है। मैं भगवान से प्रार्थना करता हूं कि मैं लोगों की उम्मीदों पर खरा उतर सकूं। मुझे अपने नेता प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी और राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह जी के विश्वास पर भी खरा उतरना है। सबसे महत्वपूर्ण बात तो यह है कि यह दायित्व तब और बढ़ जाता है, जब आपके पास गतिशील, जीवंत और कठिन परिश्रम करने वाला प्रधानमंत्री हो। मुझे विश्वास है कि मैं राज्य के लोगों और अपनी पार्टी के नेतृत्व करने वालों की आशाओं पर खरा उतरूंगा। इसके लिए मुझे मीडिया के सहयोग और मार्गदर्शन की भी जरूरत है।

आप राज्य में शासन व्यवस्था को किस प्रकार  से आगे ले जाना चाहेंगे?

अपने मुख्यमंत्री कार्यकाल के दौरान, मैंने कई अपने क्रांतिकारी और ऐतिहासिक योजनाएं शुरू कीं, जिससे वास्तव में आम लोगों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार हुआ। उदाहरण के तौर पर भाग्यलक्ष्मी, गरीब छात्रों के लिए साईकल, संध्या सुरक्षा और प्रोत्साहन के रूप में 2 रुपये प्रति लीटर दूध देने, जिसने ग्रामीण महिलाओं की दैनिक आर्थिक स्थिति में सुधार किया, जैसी योजनाएं हमारी सरकार ने लाने का काम किया। नई गतिशीलता और उत्साह के साथ इन योजनाओं को जारी रखने के अलावा, मैं कुछ और अभिनव योजनाओं पर भी विचार करूंगा, जिससे आम आदमी के जीवन की गुणवत्ता में सुधार हो।

आपकी चुनौतियां क्या है?

प्रशासन के पास कुशल अधिकारी होने के बावजूद, पिछले कुछ वर्षो में अच्छे  राजनीतिक नेतृत्व के अभाव में शासन का पतन हो गया। यदि राजनीतिक नेतृत्व प्रभावी और कुशल है तो नौकरशाही अवश्य कार्य करेगी। कांग्रेस के 2013-18 के कार्यकाल तथा पिछली सरकार के 14 महिनों के कार्यकाल में राजनीतिक इच्छाशक्ति का बिल्कुल ही अभाव दिखा, जिससे शासन व्यवस्था बिल्कुल ही अलग-थलग पड़ गया। इसलिए मेरे लिए सबसे पहला कार्य शासन व्यवस्था को ठीक करना होगा, जो गतिशील, जीवंत और लोगों के हित में हो।

दूसरी सबसे बड़ी चुनौती राज्य के आर्थिक हालात को सुधारने की होगी। जब मैं विपक्ष में था तो मैंने सरकार से कहा था कि राज्य की आर्थिक हालात ठीक नहीं है। और पिछले दो दिनों में अधिकारियों से बात करने के बाद मुझे ऐसा लगा कि मैं सही था। इसके सुधार के लिए मैं आर्थिक मामलों के जानकार तथा अपने केंद्रिय नेतृत्व से बात करूंगा कि आखिर किस प्रकार राज्य के विकास कार्य को बढ़ाया जाए। मैं भाग्यशाली हूं कि  प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, अमित शाह और निर्मला सीतारमण जैसे नेतृत्व करने वाले मेरे ऊपर है। मैं उनसे कर्नाटक की आर्थिक हालात के सुधार के लिए चर्चा करूं गा।

आप केन्द्र से किस प्रकार की सहायता चाहते है?

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी  राज्यों के साथ कभी भेदभाव नहीं करते। वे यह नहीं देखते हैं कि राज्य में कौन सा राजनीतिक दल शासन कर रहा है। वह पार्टी के सिद्धांत पर कार्य करते हंै, जो यह कहता है कि सभी को न्याय, किसी का तुष्टिकरण नहीं; सभी को समानता और किसी से भेदभाव नहीं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भारत के विकास में क्रांति ला दी है। यदि हम एक अच्छे प्लान के तहत राज्य के विकास के लिए केन्द्र सरकार से फंड की मांग करें तो वह जीएसटी लागू होने के पश्चात

नये फाईनेन्सियल आर्डर के तहत अवश्य ही कुछ  प्रोविजन करेंगे।

मेरे पास सटीक परियोजनाएं के लिए धन प्राप्त करने की विशिष्ट योजनाएं हैं ताकि प्रदर्शन और उपलब्धियां ”दृश्यमान और स्पष्ट’’ हों। ये परियोजनाएं ज्यादातर पूरे राज्य में बुनियादी ढांचागत विकास के लिए हैं। मेरा उदे्श्य यह भी है कि मैं इस कार्यकाल में गांव से लेकर जिला मुख्यालय तक पक्की सड़कों का निर्माण करूं। हमारे लोग अच्छी सड़कों के लायक हैं। हमारे युवा अच्छे खेल के मैदान के लायक हैं। हमारे वरिष्ठ नागरिक अच्छे पार्क के हकदार हैं। मैं बैंगलुरू की संरचना उसी प्रकार करना चाहता हूं, जैसाकि इसका पूरे विश्वभर में नाम है। लेकिन अभी वर्तमान की बात करें तो यह दयनीय हालात में हैं। लेकिन मैं बैंगलुरू के रूपरेखा को अतिशीघ्र बदलने के लिए बाध्य हूं। इस संदर्भ में मैं बैंगलुरू की विधायकों, एमएलसी और सांसदों से भी बात करूंगा।

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आप नरेन्द्र मोदी सरकार की योजनाओं पर क्या कहना चाहेंगे?

मोदी जी की योजनाएं क्रांतिकारी हैं और ये भारत का चेहरा बदलने की क्षमता रखती हैं। उदाहरण के लिए मुद्रा योजना; कौशल प्रशिक्षण; बेटी बचाओ – बेटी पढ़ाओ  जैसी योजनाएं क्रांतिकारी हैं। मेरी इच्छा कृषि को किसानों के लिए लाभ का उपक्रम बनाने की है। मैं चाहता हूं कि गांवों में लाखों की संख्या में कुटीर उद्योग लगें, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों से शहरों की ओर युवाओं का होने वाला प्रवास रूके। ऐसा करने के लिए, हमें ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे में सुधार करने की आवश्यकता है। हमें  सड़क, पेयजल, स्कूल, कॉलेज, स्थानीय रोजगार; बाजार लिंकेज; अस्पतालों; पशु चिकित्सा केंद्र; ठंडा भंडारण आदि पर काम करना होगा। यह कर्नाटक के चेहरे को बदल देगा और इससे लोगों का प्रवास भी रूकेगा। स्लम क्या है? यह ग्रामीण गरीबी का विस्तार है। यदि हम गांवों में लड़कों और लड़कियों को अच्छी बुनियादी सुविधाओं के साथ शिक्षा और रोजगार प्रदान करते हैं, तो वे शहरों में नहीं जायेंगे। मैं कर्नाटक में गांवों को बदलने के लिए मोदी जी की योजनाओं का सबसे अच्छा उपयोग करने का प्रयास करूंगा।

अब कुछ राजनीतिक  सवाल करते हैं…

मैं भी उत्तर देने का प्रयास करूंगा

कांग्रेस और जेडीएस का कहना है कि भाजपा अनैतिक तरीके से सत्ता में आयी है। इस पर आप क्या कहना चाहेंगे?

क्या ये नैतिकता थी जब ये दोनों दल  2018 के विधानसभा चुनाव में हारने के बावजूद भी सत्ता में आने के लिए एक साथ आये? कांग्रेस ने 2013-18 तक शासन किया। लेकिन 2018 के चुनाव में लोगों ने कांग्रेस को हराया। जेडीएस को दुबारा हराया। अत: 2018 चुनाव का परिणाम दोनों दलों के खिलाफ था और भाजपा के पक्ष में था। कांग्रेस और जेडीएस का साथ आना लोगों के जनादेश के खिलाफ और अनैतिक  था। उनके पास चुनावी वैधता नहीं थी। इसके अतिरिक्त कांग्रेस और जेडीएस ने यह तर्क दिया कि इन दोनों दलों ने अपवित्र गठजोड़ इसलिए किया ताकि वे  मोदी को 2019 में प्रधानमंत्री बनने से रोक सकें और भाजपा को सत्ता से बाहर कर सकें। लेकिन क्या ऐसा हुआ? नहीं, भाजपा ने इन सबका सफाया कर दिया और ये दोनों केवल एक सीट ही जीत सके। नैतिकता तो इसी में होती की 2018 में मुंह की खाने के बाद ये दोनों दल चुपचाप सत्ता से हट जाते। यह कर्नाटक के लोगों के लिए एक बुरा समय था। वे इस सरकार के जाने का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे। अब जब यह हो गया है, तो लोगों को राहत मिली है। भाजपा ने लोगों की 2018 की आकांक्षाओं और जनादेश को पूरा करने के लिए सार्थक प्रतिक्रिया दी है। अब हमारे पास एक चुनी हुई वैध सरकार है।

लेकिन भाजपा पर खरीद-परोख्त का भी आरोप लग रहा है।

कांग्रेस और जेडीएस के विधायक अपने दल से नाखुश थे इसलिए वे अपने ही नेतृत्व के खिलाफ गये। इसमें भाजपा का कोई योगदान नहीं है। अत: यह आरोप बेबुनियाद, दुर्भावनापूर्ण और सत्य से बहुत दूर हैं। कृपया कांग्रेस और जेडीएस के बागियों के बयानों को पढ़ें। यह इस बात का प्रतिबिंब है कि गठबंधन में क्या हो रहा था। एक परिपक्व दल होने के नाते भाजपा ने इस गैप को भरने के लिए संवैधानिक कदम उठाये हैं। यह एच. डी. कुमारस्वामी ही थे जिन्होंने अविश्वास प्रस्ताव लाने की मांग की। बीजेपी अविश्वास प्रस्ताव नहीं लायी। जब कुमारस्वामी बहुमत साबित नहीं कर सके और चले गये, उसके बाद बीजेपी ने यह कदम उठाया।

आप पार्टी के कैडर को किस प्रकार से समझायेंगे जो इन बागी विधायकों का विरोध कर रहे हैं?

मेरी समझ में यह एक काल्पनिक प्रश्न है। बीजेपी के पास किसी समय किसी भी बिंदु पर किसी भी आयाम की चुनौतियों का सामना करने के लिए सबसे अधिक क्षमता है।  यदि कुछ भी घटना घटित होती है तो राज्य के साथ-साथ केंद्र तक हमारा नेतृत्व सुचारु परिवर्तन सुनिश्चित करने के लिए उचित समय पर उचित कदम उठाएगा। हम निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है।

आपकी तत्कालिक प्राथमिकता क्या होगी?

राज्य की शासन व्यवस्था, आर्थिक व्यवस्था, विकास कार्यों में क्रांतिकारी बदलाव लाना, समाजिक सुरक्षा एवं कार्यो को जमीन पर लागू करना ही हमारी प्राथमिकता होगी। संगठनात्मक मामलों को पार्टी के संगठनात्मक नेतृत्व द्वारा देखा जाएगा। मैं शासन पर ध्यान केंद्रित करूंगा

मैं भाग्यशाली हूं कि मेरे पास कैडर की एक बहुत अच्छी सेना है जो मेरे सामने आने वाली कठिनाइयों और चुनौतियों को समझती है। इसके साथ ही एक बहुत ही परिपक्व नेतृत्व है जो अच्छे प्रशासन के प्रदान करने के मेरे प्रयासों में सहयोग करेगा।

 

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