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कलेजे के टुकड़े को गिरवी रखने की मजबूरी

कलेजे के टुकड़े को गिरवी रखने की मजबूरी

कभी एक हृदय स्पर्शी प्रसंग बहुचर्चित था-एक युवक एक युवती से बेहद प्यार करता था। विवाह के लिए युवती ने अजीब शर्त रखी-यदि तुम अपनी मां का कलेजा (हृदय) लाकर दोगे तभी मैं शादी करूंगी। अजीब सी उलझन में युवक घर पहुंचा और मां को अपनी व्यथा बताई। कशमकश में युवक ने छुरे से मां का शरीर चीरकर उसका कलेजा निकाला और तेजी से चल पड़ा। घबराहट में उसे ठोकर लगी तो हाथ से मां का कलेजा छिटक कर नीचे जा गिरा। तभी आवाज आयी-बेटा तुम्हें कहीं चोट तो नहीं लगी। बेटे ने कलेजा उठाया और डगमगाते कदमों से युवती के पास पहुंचा। हाथ में कलेजा देखकर युवती एक बारगी दंग रह गई। वह थोड़ा सम्भली और युवक को धिक्कारते हुए कहा कि जब तुम जन्म देने वाली अपनी मां के नहीं हुए तो मेरे कैसे होंगे और युवती मुंह मोड़कर वहां से चली गई।

यह प्रसंग दर्शाता है कि बेटे की खुशी के लिए मां अपने प्राण तक न्यौछावर करने को तत्पर रहती है। लेकिन इसके उलट परिवार की पेट भराई के लिए मां-बाप अपने कलेजे के टुकड़े रूपी संतान को गिरवी रखने को मजबूर है। भारत में साहूकारों द्वारा सोना चांदी गिरवी रखकर इसकी ऐवज में जरूरतमंदों को धन देने की परंपरा तो रही है लेकिन स्वतंत्रता प्राप्ति के सात दशक बीतने के बावजूद राजस्थान के जनजाति बहुल इलाकों में परिवार के भरण पोषण की मजबूरी में नाबालिग बच्चों को गिरवी रखने की कुप्रथा बरकरार है।

इस तरह की किस्सागोई का खुलासा भी मध्य प्रदेश के एक घटनाक्रम से हुआ। दरअसल लगभग आठ वर्षीय कल्पेश थोरी गत 25 मई 2019 को धार जिले के गुणावता में अजंता होटल पर अकेला रोता हुआ पाया गया। ग्रामीणों की सूचना पर चाईल्ड लाईन धार की एक टीम ने इस बालक को जिला बाल कल्याण समिति धार के समक्ष प्रस्तुत किया। समिति के आदेश प्रकरण 27/19 के माध्यम से अस्थाई देखरेख एवं संरक्षण में उसे दिव्यांशी बालगृह स्व. छितु किराड़े आदिवासी बहुउद्देशीय सेवा संस्थान भिजवाया गया। पूछताछ में बांसवाड़ा जिले का निवासी होने के कारण कल्पेश को 5 जून को पुलिस सुरक्षा में धार चाईल्ड लाईन के माध्यम से बांसवाड़ा जिला बाल कल्याण समिति के समक्ष पेश किया गया। इस पर समिति के आदेश पर बालक को अस्थाई रूप से देख रेख एवं संरक्षण में राजकीय किशोर गृह में रखा गया।

कल्पेश के बांसवाड़ा पहुंचने के बाद इस कहानी से जुड़े कई नये रहस्यों से पर्दा उठा। पूछताछ में उसने अपने परिवार के बारे में जानकारी दी जिसमें यह गफलत हो गई कि कल्पेश के पिता विमल की मृत्यु हो गई है। इधर पुलिस भी हरकत में आयी।

बांसवाड़ा जिला बाल कल्याण समिति के निर्देशानुसार इस प्रकरण में तेरह जून को थाना आबापुरा में जे.जे.एक्ट की धारा 79 व 81 के अन्तर्गत रिपोर्ट संख्या 141/19 दर्ज की गई। रिपोर्ट में बालक के हवाले से बताया गया है कि बारतलाब कुण्डला निवासी उसके काका हुरपत उर्फ हुरपाल द्वारा 40 हजार रूपये वार्षिक बाल श्रम अनुबंध पर पाली जिले के निवासी गडरिया पोशिया के साथ भेड़ चराने भेज दिया था। ऐसा बाल श्रम अनुबंध दो बार हुआ बताया।

आबपुरा थानाधिकारी किलेन्द्र सिंह ने उदय इंडिया को बताया कि बालक के अभिव्यक्ति कथन में पिता की मृत्यु की सूचना गलत पायी गयी। अनुसंधान के दौरान बाल श्रम कराये जाने के मामले में कल्पेश के पिता विमल थोरी तथा काका हुरपत उर्फ हुरपाल निवासी-बारतलाब कुण्डला को 18 जून को गिरफ्तार कर गत दो जुलाई को न्यायिक अभिरक्षा में भेजा गया। बाद में दोनों की जमानत हो गई। थानाधिकारी के अनुसार विमल के पिता की मृत्यु हो चुकी है और वह अपने अन्य चार भाईयों के साथ खानाबदोश की तरह रहते हैं। यह लोग भीख आदि मांग कर जीवन यापन करते हैं। वार्षिक अनुबंध पर बाल श्रम के लिए भेड़ चराने ले जाने वाले गडरिया पाली जिले के निवासी कोशिया की गिरफ्तारी के प्रयास किये जा रहे हैं। थानाधिकारी ने बताया कि राजस्थान से लगते मध्य प्रदेश-गुजरात के इलाके में भेड़ बकरी के रेवड़ चराई के लिए ले जाये जाते हैं। इस कार्य के लिए अल्पव्यस्क बालकों के अभिभावकों से सम्पर्क कर मामला तय किया जाता है। उधर भेड़ों के मलमूत्र की खाद खेती के लिए उपयोगी होने के कारण किसान भी इनके रेवड़ को अपने खेतो में बैठने को तत्पर रहते हैं।

कल्पेश की तरह बाल श्रम अनुबंध का दूसरा प्रकरण भी मध्य प्रदेश से उजागर हुआ। जिला बाल कल्याण समिति उज्जैन के माध्यम से 12 वर्षीय राजू चारेल को 14 जून को बांसवाड़ा जिला बाल कल्याण समिति के सुपुर्द किया गया। समिति के आदेश पर इसे भी राजकीय किशोर गृह बांसवाड़ा में रखा गया। राजू पुत्र मोहन चारेल निवासी-सुण्डाई पंचायत डूूंगर थाना खमेरा जिला बांसवाड़ा को पाली निवासी-तुलसीराम पुत्र श्री गणेश राम को वार्षिक बाल श्रम अनुबंध के तहत भेजा गया था। राजू को पहले साल दो हजार प्रतिमाह दूसरे वर्ष ढाई हजार तथा लगातार तीसरे साल तीन हजार रूपये प्रतिमाह की ऐवज में रखा गया था। बालक के अनुसार उसके पिता शराब पीते हंै तथा घर की आर्थिक स्थिति भी ठीक नहीं है। इसलिए राशि तय करके उसे गड़रिये के साथ भेड़ चराई के लिए भेजा गया। खमेरा पुलिस थाने में जे.जे.एक्ट की धारा 79 व 81 तथा 87 में सुण्डई निवासी-बालक राजू के पिता मोहन चारेल दलाल चौखला तथा गड़रिये तुलसीराम देवासी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर तीनों को गिरफ्तार कर आगे की कार्यवाही की जा रही है।

वर्तमान में दोनों बालक कल्पेश थोरी एवं राजू चारेल राजकीय किशोर गृह में बांसवाड़ा में देखरेख एवं संरक्षण में पुनर्वासित किये गये हैं। दोनों अपने परिवार के पास जाने के इच्छुक नहीं है और अपना भविष्य बनाने के लिए पढ़ाई करना चाहते हैं।

बाल श्रम अनुबंध के रूप में कलेजे के टुकड़ों को परिवार से दूर किए जाने का खुलासा मीडिया में होने पर संसद में भी इसकी गूंज हुई। राजस्थान विधानसभा में भी यह मुद्दा नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया तथा विधायक राजकुमार रोत ने स्थगन प्रस्ताव के माध्यम से उठाया। कटारिया ने इस मानवीय समस्या के समाधान के प्रति सरकार से संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाने का अनुरोध किया। उनका कहना था कि परिवार किस मजबूरी में यह कदम उठाते हैं। इसकी गहन जांच पड़ताल की जानी चाहिए। ऐसे मामलों में कानून भी सख्त हो और गिरवी रखने वालों को भी दंडित किया जाये। कटारिया का कहना था कि प्रदेश के जनजाति बहुल इलाकों से काफी संख्या में बालकों को गुजरात में होटलों तथा ईंट भट्टों आदि पर लगाया जाता है।

बाल शोषण एवं बाल श्रम उन्मूलन के लिए कटारिया ने सरकार, समाज एवं परिजनों के समक्ष कुछ उपयोगी सुझाव प्रस्तुत किए है। इनमें खुद माता पिता को शिक्षा के प्रति जागरूक कर अपने बच्चो को स्कूल भेजने पर बल दिया गया है। अतिनिर्धन परिवारों के जीविकोपार्जन तथा उनके बच्चों की शिक्षा व्यवस्था सरकार अपने स्तर पर करे ताकि उन्हें मजबूरी में बाल शोषण से मुक्ति दिलायी जा सके। ऐसे परिवारों की आय में अभिवृद्धि के साथ पीडि़त बच्चों के लिए सार्थक एवं स्थायी पुर्नवास की उचित व्यवस्था की जाये।

प्रत्येक ग्राम पंचायत ग्राम स्तर पर बच्चों को शोषण से मुक्ति और बाल संरक्षण हेतु सक्रिय एवं गतिशील समिति गठित कर सतत निगरानी रखी जाये। बाल अधिकारों का हनन करने पर किशोर न्याय अधिनियम के तहत सजा कानून को प्रभावी ढंग से लागू किया जाना चाहिए। ऐसे प्रकरणों में बिचौलियो के खिलाफ कड़ी कार्यवाही की जावे।

प्रतिपक्ष के नेता ने यह भी सुझाव दिया है कि राजस्थान, मध्य प्रदेश एवं गुजरात सरकारें अपने जिला कलेक्टरों के माध्यम से भेड़ एवं ऊंट चराने वाले लोगों के बारे में आधार कार्ड सहित विस्तृत जानकारी एकत्रित करवाये ताकि बाल श्रम की संभावना को खत्म करने में सहायता मिले। इन राज्यों की सीमाओं पर भेड़ ऊंट रेवड़ के आवागमन तथा परिवारों के पलायन की स्थिति में जांच पड़ताल हेतु चैक पोस्टों की स्थापना की जा जानी चाहिए।

राज्य विधानसभा में प्रदेश से भेड़ों के निष्क्रमण का मामला भी उठाया गया। प्रश्न काल में कांग्रेस के भरत सिंह कुंदनपुर के सवाल के जवाब में पशुपालन मंत्री लालचंद कटारिया ने बताया कि राज्य में की गई गणना में 90 लाख से अधिक भेड़े है जिनमें हर साल औसतन 12 लाख भेड़े पड़ौसी राज्यों में चारे पानी के लिए ले जायी जाती है।

उधर पुलिस ने ऐसे गैंग को पकड़ा है जो मध्य प्रदेश से बच्चों को किराये पर लाकर शादी विवाहों के मौके चोरी की वारदातों को अंजाम देता था। इस गिरोह के लोग राजगढ़ इलाके में स्थित तीन गांवों में परिजनों से समझौता कर बच्चों को किराये पर लाये थे। जयपुर सहित राज्य के विभिन्न इलाको में की गई वारदातों के बारे में जांच पड़ताल की जा रही है।

 

जयपुर से गुलाब बत्रा

 

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