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कैंसर रोगियों का उपचार कर रहा यह आयुर्वेदिक अस्पताल

कैंसर रोगियों का उपचार कर रहा यह आयुर्वेदिक अस्पताल

कैंसर को लाइलाज बीमारी माना जाता है। इस भयानक बीमारी का पता जब मरीज को चलता है तब बहुत देर हो चुकी होती है। ज्यादातर कैंसर रोगियों का इलाज महंगा और बहुत कष्टदायक होता है। भारत में कैंसर के रोगियों को राहत देने और सस्ते इलाज के लिए लगातार नए-नए शोध हो रहे है और देशभर में कैंसर के इलाज के अस्पताल खुल रहे हंै। लेकिन भारत की प्राचीन इलाज पद्धति पंचगव्य और आयुर्वेदिक दवाओं से भी कैंसर रोगियों का सफल इलाज किया जा सकता है। सच्चाई तो यह है कि इस बात की जानकारी बहुत कम लोगों को है। देश में कई पंचगव्य संस्थानों द्वारा कैंसर रोगियों पर शोध किया जा रहा है और इलाज के लिए नई-नई दवाओं की खोज भी की जा रही है। दरअसल प्राचीन भारतीय इलाज पद्धति आयुर्वेद में पंचगव्य पद्धति को बहुत महत्व दिया गया है। पंचगव्य में आयुर्वेद की अन्य औषधियों को शामिल कर कैंसर रोगियों को दिया जाता है। पंचगव्य के मिश्रण से बने अर्क और लेप से मरीजों को फायदा हो रहा है, जो रेडिएशन का काम करता है। इस पर शोध करने वाले वैद्य भरत देव मुरारी बताते हैं कि कैंसर की शुरूआती दशा में अगर मरीज उनके पास आ जाते हैं, तो कई मामलों में निश्चित तौर पर कैंसर को जड़ से समाप्त किया जा सकता है।

दिल्ली के पंजाबी बाग (शिवाजी पॉर्क) इलाके में चल रहे आयुर्वेदिक कैंसर अस्पताल में पंचगव्य पद्धति से कैंसर के हजारों मरीजों का इलाज किया जा चुका है। आयुर्वेदिक कैंसर अस्पताल की खास बात यह है कि स्वयं की गऊशाला में पंचगव्य तैयार किया जाता है। इस चिकित्सालय में देश के दूर-दराज के इलाकों से लेकर विदेश तक से मरीज इलाज कराने आ रहे हैं। आयुर्वेदिक कैंसर अस्पताल ट्रस्ट द्वारा संचालित इस चिकित्सालय की सराहना आईआईटी के वैज्ञानिक और अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान चिकित्सा संस्थान (एम्स) के डॉक्टर भी कर चुके हैं। चिकित्सालय में इलाज के लिए आने वाले मरीजों को एक अनुशासित परिवेश में रखा जाता है। जहां पूरी दिनचर्या पंचगव्य चिकित्सा प्रणाली के अनुसार चलती है। मरीजों और उनके सहायकों को खाना-नाश्ता इत्यादि भी चिकित्सालय में ही दिया जाता है। जिसे वैद्य जी की देखरेख में तैयार किया जाता है। मरीजों के खानपान को लेकर यहां विशेष सतर्कता बरती जाती है।

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अस्पताल के प्रधान अतुल सिंघल बताते हैं कि तीन साल पहले हरियाणा के हिसार जिले से एक महिला कैंसर का इलाज कराने यहां आई थी। दरअसल वह महिला अनुवांशिक कैंसर की बीमारी से पीडि़त थी। महिला की मां और नानी को भी कैंसर था। शादी के बाद जब महिला गर्भवती नहीं हो पाई तो उसकी उच्चस्तरीय जांच से कैंसर के शुरूआती लक्षणों का पता चला। प्रचलित अंग्रेजी चिकित्सा प्रणाली में उक्त महिला का इलाज बेहद खर्चीला था। लेकिन इलाज के लिए जब वह महिला आयुर्वेदिक कैंसर अस्पताल पहुंची तो यहां महिला का सफल इलाज किया गया। वह मां बनी और कैंसर को पंचगव्य ने जड़ से खत्म कर दिया। अस्पताल के प्रमुख वैद्य भरत मुरारी कहते हैं कि देशभर में अब पंचगव्य पर लोगों का भरोसा बन रहा है। वे कहते हैं कि अनुवांशिक तौर पर कैंसर को खत्म करने के लिए भी पंचगव्य सटीक साबित हो रहा है।

अस्पताल के चिकित्सा अध्यक्ष वैद्य और पंचगव्य विशेषज्ञ मुकुंद वाणी का कहना हैं कि देशी गाय के गोबर का लेप कैंसर रोगियों के लिए बहुत अच्छा रेडिएशन साबित होता है। जबकि गौमूत्र, कीमोथेरेपी का हानिरहित विकल्प है। वहीं कीमोथेरेपी कैंसर रोगियों के लिए बेहद कष्टदायक होती है। ऐसे में देशी गाय के उत्पाद से बना पंचगव्य कैंसर रोगियों के लिए नया जीवन लेकर आ रहा है। भारत सरकार के आयुष मंत्रालय द्वारा भी पंचगव्य के इलाज को मान्यता दी गई है। देशभर में अब इस इलाज पद्धति पर नए-नए शोध हो रहे हैं, ताकि कैंसर जैसी लाइलाज बीमारी से भारत को मुक्त किया जा सके। प्राचीन भारतीय आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति में देशी गाय को बेहद अनमोल बताया गया है। देशी गाय के दूध, दही, घी, मक्खन, गोबर और गोमूत्र को आयुर्वेद में अमृत की संज्ञा दी गई है। पंचगव्य का अर्क बनाने के लिए इसमें तुलसी, आवंला, गिलोय, हल्दी, हरसिंगार, सहजन, बथुआ और चौलाई जैसी जड़ी-बूटियों का मिश्रण पंचगव्य के अर्क में मिलाया जाता है। देश में पंचगव्य पर निरंतर शोध हो रहे हैं। नागपुर स्थित गौ-विज्ञान अनुसंधान केंद्र के वैज्ञानिकों ने इस अस्पताल में किये जा रहे ईलाज और अनुसंधान के बारे में विस्तृत जानकारी इकठ्ठी की है। प्रधान अतुल सिंघल कहते हैं कि इस दिशा में अभी काफी काम किये जाने की आवश्यकता है।

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दरअसल देश में ज्यादातर लोगों की जीवनशैली बेहद खराब होती जा रही है। खानपान, रहन-सहन, तनाव, प्रदूषण, हानिकारक कीटनाश्क, मिलावटी खाद्य-पदार्थ और दैनिक प्रयोग में इस्तेमाल की जाने वाली सामग्री से कैंसर जैसा भयानक रोग भारत में पैर पसार रहा है। हालांकि स्वास्थ्य मंत्रालय कैंसर के प्रति देशभर में जागरुकता अभियान चला रहा है मगर यह कैंसर जैसे रोग से लडऩे के लिए पर्याप्त कदम नहीं है। दूसरी तरफ कैंसर जैसी बीमारी के इलाज के लिए निजी और सरकारी अस्पताल भी काम कर रहे हंै। मगर कैंसर का एलोपैथिक इलाज काफी लंबा, खर्चीला और कष्टदायक है। ऐसे में पंचगव्य कैंसर रोगियों के लिए एक वरदान की तरह सामने आ रहा है। अच्छी बात यह है कि पंचगव्य से इलाज को लेकर देशभर में लोगों की धारणा बदल रही है। पंचगव्य की सटीक दवाईयों के प्रति लोगों का भरोसा कायम हो रहा है जो इस बात का परिचायक हैं कि देश प्राचीन आयुर्वेदिक पद्धति की तरफ लौट रहा है। कैंसर ही नहीं बल्कि दूसरी तमाम असाध्य बीमारियों के इलाज के लिए भी पंचगव्य की औषधियां अमृत साबित हो रही हैं। पंचगव्य से बनी दवाईयों को एलौपेथिक वैज्ञानिकों ने जब अपनी कसौटी पर कसा तो काफी कारगर पाया। पंचगव्य को लोकप्रिय बनाने के लिए सरकार भी आगे आ रही है। लेकिन इस दिशा में अभी काफी काम किया जाना बाकी है। केंद्रीय मंत्री डॉ. हर्षवर्धन, और श्री अश्विनी चौबे से लेकर कई प्रमुख हस्तियां अस्पताल का दौरा करके मुक्तकंठ से इसकी प्रशंसा कर चुकी हैं।

(उदय इंडिया ब्यूरो)

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