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गुरू का हमारे जीवन में महत्व

गुरू का हमारे जीवन में महत्व

स्वरों के आघात के पूर्व स्वरों का आभास होना चाहिये। स्वरों की सूक्ष्मतम परतें उनके प्रस्फुटन के पूर्व ही मस्तिष्क में तरंगित हो जाती हैं। ध्यान के केंद्र में स्थिर स्वरों की ये अंतर्ध्वनियां परत दर परत पिघलने लगती हैं जिसे ‘सुनता हैं गुरु ज्ञानी’ और वे श्रुत होकर गुरुमुख से श्रूतियों के रूप में झरने लगती हैं। उस्ताद अमजद अली खां कहते है कि गुरू की उम्मीदों पर बहुत कम शिष्य खरे उतरते है। ऐसा मेरे साथ भी हुआ है और दूसरे लोगों के साथ भी हुआ होगा। लेकिन मैंने देखा है कि लोग मेरे नाम से ज्यादा आते है बजाय मेरे काम के। शिष्य गुरू के नाम के जरिये अपना नाम कमाना चाहता है।

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पंडित हरिप्रसाद चौरसिया कहते है कि गुरू की जरूरत हर चीज में होती है, भगवान ने आपको शरीर दिया है, स्वर व लय भी इसके बाद भी गुरू की आवश्यकता होती है। इस पुस्तक का शीर्षक ‘सुनता है गुरु ज्ञानी’ रखने के पीछे भी यही ध्येय है कि हम उस ज्ञानी गुरु के प्रवाह को आप तक पहुंचाने का प्रयास कर सकें। यह पुस्तक सबके लिए एक प्रेरणास्त्रोत हैं।

 

उदय इंडिया ब्यूरो

 

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