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घर की बातें

घर की बातें

एक पिता अपने बेटे की शराब पीने की लत से बड़ा परेशान था। उसने अपने बेटे को कई बार समझाया कि वह इस बुरी आदत को छोड़ दे, पर वह मानता ही न था। एक दिन जब पिता ने उससे फिर यही इसरार किया तो बेटे ने कहा, ‘बापू, मैं शराब छोडऩे को तैयार हूं। बस आप अंतिम बार मेरे साथ बैठ कर शराब पी लो’। पिता ने सोचा यह तो बड़ा आसान है। यदि मेरा  बेटा मेरी इतनी सी कुर्बानी पर शराब छोड़ देता है तो मुझे उसकी इतनी सी बात तो मान ही लेनी चाहिये। पिता ने हां कर दी।

दोनों पिता-पुत्र ने इकट्ठे शराब का मजा उड़ाया। जब शराब काफी चढ़ गई तो पिता बोला, ‘बेटा, अब तू शराब छोड़ या न छोड़ पर आजसे मैंने शुरू कर दी’। अब क्या होगा?

सुबह-सुबह नहीं

एक लड़का स्कूल के हॉस्टल में रहता था। हॉस्टल के वार्डन को शिकायत मिली कि वह शराब पीने लगा है। एक दिन सुबह-सुबह ही वह लड़का संयोगवश वार्डन को बाहर ही मिल गया। वार्डन ने उससे पूछा, ‘क्या क्या तुम शराब पीते हो?

लड़के ने उत्तर दिया, ‘थैंक्स, पर सर, इतनी सुबह-सुबह नहीं’।

विद्यार्थी की उलझन

कक्षा में अध्यापक ने एक बच्चे से पूछा, ‘बताओ, 10 मिनट में कितने सेकेंड होते हैं’?

उस बच्चे ने जवाब देने की बजाय अध्यापक को ही पूछ लिया, ‘अध्यापकजी, कौनसे दस मिनट — वह जब पिताजी कहते हैं कि मैं दस मिनट में आया या वह जब माताजी कहती हैं कि दस मिनट खेल आओ’?

दो घंटे में दस मिनट 

पर कई बार तो यह घंटे-मिनटों का हिसाब भी अजीब हो जाता है। एक पति-पत्नी को किसी शादी में जाना था। दोनों तैयार होने लगे। पति महोदय तो जल्दी तैयार हो गए पर पत्नी बहुत देर लगा रही थी। पति पूछने लगा कि कितनी देर और लगेगी। पत्नी ने कहा, ‘बस दस मिनट’।

प्रतीक्षा करते-करते कई दस मिनट गुजर गए। श्रीमतीजी हर-बार यही कहतीं, ‘बस दस मिनट’।

प्रतीक्षा करते-करते पति थक गया। आखिर उसने फिर पूछ ही डाला, ‘कितना समय और लगेगा’?

बार-बार पूछने पर पत्नी भी खीझ उठी। बोली, ‘दो घंटे से आपको कह रही हूं कि दस मिनट। आपको समझ नहीं आता’?

बड़े तो पिताजी आप हैं

एक बेटा अपने पिताजी की बड़ी इज्जत करता था। एक दिन पिताजी को किसी बात पर घुस्सा आ गया। बोले, ‘तुम बहुत बड़े नालायक हो’।

बड़े आदर से बेटे ने कहा, ‘पिताजी, बड़े तो आप हैं। में आप से बछड़ा कैसे हो सकता हूं’?

बेटे को शिक्षा

एक पिता अपने बेटे को शिक्षा दे रहे थे। बेटा, ‘मेहनत करो। जब अब्राहिम लिंकन तुम्हारी उम्र के थे तो वह बड़े आदमी बन चुके थे’।

‘आपकी बात ठीक है, पिताजी’। बेटे ने बड़ी शालीनता से कहा, ‘और जब वह आपकी उम्र के थे तो वह अमरीका के राष्ट्रपति थे’।

उल्लू का पट्ठा

एक दिन किसी बात पर पिता को अपने बेटे पर घुस्सा आ गया। बेटे को बोले, ‘नालायक, उल्लू का पट्ठा’।

बेटे ने बड़े आदर से कहा, ‘बाकी तो सब ठीक है पर आप अपने आपको गाली मत दो, पिताजी। में तो बस आपका ही पट्ठा (पुत्र) हूं’।

किसकी बेटी 

पिछले (2014) के लोकसभा के आम चुनाव के अभियान के समय किसी बात पर श्री नरेन्द्र मोदीजी ने प्रियंकाजी को कह दिया कि वह तो मेरी बेटी हैं। इस पर प्रियंकाजी को घुस्सा आ गया। मीडिया को बोलीं, ‘मैं नरेन्द्र मोदी की नहीं, राहुल गांधी जी की बेटी हूं’।

शादी बच्चों की या औलाद की?

कई बार बेटे या बेटी द्वारा अपना जीवन साथी स्वयं चुन लेने पर माता-पिता और बच्चों में बहस हो जाती है। अंत में बच्चे चिढ कर यही कह देते हैं कि शादी मैंने करनी है या मेरे माता-पिता ने?

घर में राज किसका?

पति-पत्नी में सहमति रहे तो वह स्वयं और परिवार सदा सुखी और खुश रहता है। ऐसे ही एक पति-पत्नी ने एक समझौता कर लिया। इस समझौते के अनुसार यह फैसला हुआ कि जब उनके घर पत्नी के रिश्तेदार आयें तो पत्नी-पति पर रौब जमाएगी ताकि यह संकेत जाये कि इस घर में राज तो पत्नी ही का है। बीवी पति पर हावी रहती है।

और जब मेहमान आयें पति के तो पत्नी पर पति ऐसे रॉब जमाएगा कि उसके रिश्तेदार यह मानने लगें कि पत्नी इतनी सुशील व आज्ञाकारी है कि वह तो चुपचाप अपने पति की हर बात मानती है जैसे कि एक सुशील व आदर्श पत्नी को करना चाहिए।

मैंने नहीं तोड़ा

कक्षा में पढाई चल रही थी। अध्यापक ने रामायण पर आधारित प्रश्न पूछने शुरू कर दिए। एक लड़के को उसने पूछा, ‘बता, शिवजी का धनुष किसने तोड़ा’?

उस लड़के ने रोना शुरू कर दिया, ‘मास्टरजी, मैंने नहीं तोड़ा।’

वर नहीं, कन्या

कई बार शब्दों की उलझन में परेशानी हो जाती है। बड़े परिश्रम के बाद भी एक लड़के की शादी नहीं हो पा रही थी। किसी शुभचिंतक ने सलाह दी कि तू भगवान् शिवजी की तपस्या कर। भोले नाथ जल्दी ही प्रसन्न हो जाते हैं। उसने वैसा ही किया। भगवान् शिवजी प्रसन्न हुए और उसके सामने प्रकट हुए। बोले, ‘बेटा, वर मांग’। उनके कहने से वह और भी परेशान हो गया। बोला, ‘परम पिता, मुझे वर नहीं, कन्या चाहिए’।

गप्प कहां है?

एक बच्चा अपने पिता के साथ कहीं जा रहा था कि पिता को कुछ दोस्त मिल गए। वह उनके साथ गप्प-शप करने लगा। बच्चे को उनकी बातों में बेचैनी हो रही थी। उसने पिता को कहा, ‘पिताजी, घर चलते हैं’। पिता ने जवाब दिया, ‘ठहर, मैं इनके साथ कुछ गप्प मार लूं।

अपनी मासूमियत में बच्चे ने पिता को पुछा, ‘गप्प है कहां’?

 

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