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चुनाव में स्टारवार

चुनाव में स्टारवार

हिन्दुस्तान फिल्मों का दीवाना है। इन फिल्मों को हिट बनाने का काम करते है फिल्म स्टार। नेताओं को लगा जब ये अभिनेता फिल्मों के लिए भीड़ जुटा सकते हैं तो हमारी चुनावी सभाओं के लिए भी भीड़ जुटा सकते हैं। इसलिए चुनाव सभाओं में फिल्म कलाकारों को बुलाया जाने लगा। ग्लैमर से खींचे चले आए लोगों को नेता भाषण पिलाते थे। मगर अभिनेताओं को राजनीति का चस्का ऐसा लगा कि वे खुद भी चुनाव लडऩे के लिए जमीन पर उतर आए। आखिर क्यों न आते फिल्मों की तरह राजनीति में शोहरत भी है और पैसा भी। मगर इससे बढ़कर एक और बात है वह है सत्ता जिसका नशा तो सबसे बढ़कर होता है। इसलिए अभिनेता से नेता बनने वाले कलाकारों की लाइन बढ़ती जा रही है। दूसरी तरफ राजनीतिक दलों को भी चाहिए ग्लैमर पावर। इसलिए हर पार्टी फिल्म स्टारों को टिकट दे रही है। केवल भाजपा और कांग्रेस ही नहीं आम आदमी पार्टी, राजद, सपा, तृणमूल कांग्रेस जैसी पार्टियां भी फिल्म स्टारों को मैदान में उतार रही हंै। इसलिए इस चुनाव में राजनीतिक वॉर ही नहीं स्टार वॉर भी हो रहा है। क्योंकि इन दिनों हर पार्टी अपनी स्टार पॉवर बढ़ाने में लगी हुई है।

सिनेमा और राजनीति, दोनों में बड़ा पुराना नाता है। इस चलन को कांग्रेस ने शुरू किया जिसे बीजेपी और फिर टीएमसी ने आगे बढ़ाया। वैसे इन दिनों फिल्मी सितारे कांग्रेस से ज्यादा भाजपा के साथ हैं।

राजीव गांधी के वक्त में हुए चुनाव में तीन बड़े फिल्मी सितारों ने कांग्रेस का दामन थामा। इसमें अमिताभ बच्चन (इलाहाबाद), सुनील दत्त (नॉर्थ वेस्ट बॉम्बे), वैजयंती माला (मद्रास साउथ) जीतकर आए। तीनों ने इस चुनाव में जीतकर नए रेकॉर्ड स्थापित किए थे। 1998 के चुनाव में बीजेपी की सरकार बनी थी। वहीं चुनाव से पहले कृष्णम राजू और विनोद खन्ना ने बीजेपी का दामन थामा था। राजू आंध्र के काकीनंदा और विनोद गुरदासपुर सीट से जीते।

फिल्मी हस्तियों के राजनीति में आने के बाद, देश के राजनीतिक समीकरणों में एक बड़ा बदलाव आया। 17वीं लोकसभा के लिए चुनाव चल रहे हैं और ऐसे में देश की सभी पार्टियां जोर शोर के साथ फिल्मी सितारों को चुनाव लडऩे के लिए टिकट दिये हैं।

पिछले पांच वर्षों में फिल्म उद्योग राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहा। मोदी सरकार की कई योजनाओं पर फिल्में बनी। जिनमें प्रमुख थी टायलेट-एक प्रेमकथा। इसके अलावा सर्जिकल स्ट्राइक पर उरी-सर्जिकल स्ट्राइक फिल्म बनी जो सुपर हिट रही। इस साल चुनाव को ध्यान में रखकर कई बायोपिक बने।

इसके अलावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से फिल्मी सितारों का मिलने का सिलसिला चलता रहा। मोदी भी अभिनेता-अभिनेत्रियों की शादियों में जाते रहे। जनवरी के महीने में कई सारे अभिनेताओं का नरेंद्र मोदी से मिलने जाना चर्चा का विषय रहा। इनमें अधिकतर उस धड़े से माने जाने वाले लोग थे जो मोदी समर्थक नहीं थे। इसके बाद नरेंद्र मोदी ने एक सम्मेलन में बॉलीवुड और टीवी जगत के लोगों को संबोधित किया। स्वरा भास्कर, जावेद अख्तर जैसे लोग अक्सर सरकार के खिलाफ बोलते रहे जबकि अनुपम खेर, विवेक ओबेराय और कंगना राणावत सरकार का पक्ष लेते रहे।

2014 के बाद से बॉलीवुड में खेमेबंदी एक दम साफ नजर आने लगी है। बॉलीवुड पूरी तरह दो धड़ों में बंट गया है। एक धड़ा वर्तमान सरकार का समर्थक है और दूसरा विरोधी है। चुनाव से पहले 800 थिएटर कलाकारों ने देश के नाम चि_ी लिखकर भाजपा को वोट न देने की अपील की। दोनों पार्टियों ने इस बार भी बॉलीवुड से जुड़े लोगों को टिकट दिया है। लेकिन इस बार राजनीति फिल्मों में भी खूब दिखाई दी है।

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सिनेमा और राजनीति का रिश्ता 2019 के लोकसभा चुनावों में एक बार फिर से मजबूत हुआ है जहां बॉलीवुड के कई कलाकार प्रचारकों, एवं उम्मीदवारों के रूप में किसी न किसी रूप से जुड़े हुए हैं। राजनीति में ग्लैमर का तड़का हाल में बॉलीवुड के एक्शन हीरो सनी देओल के भाजपा में शामिल होने से लगा है। देओल पंजाब के गुरदासपुर से लोकसभा चुनाव लड़ेंगे। अपने पिता धर्मेन्द्र के पदचिह्नों पर चलते हुए देओल ने भी इस बार राजनीति में कदम रखा। धर्मेन्द्र 2004 से 2009 के बीच बीकानेर से भाजपा सांसद रहे थे।

देओल ने कहा कि भाजपा में शामिल होना एक और परिवार में शामिल होने जैसा है। देओल ने कहा, ”जिस तरीके से मेरे पिता अटल जी से जुड़े हुए थे, उसी तरह आज मैं मोदी जी से जुडऩे आया हूं। मैं बात नहीं करूंगा, मैं आपको काम करके दिखाऊंगा।’

कांग्रेस ने भी कई फिल्मी सितारों को चुनाव की जमीन पर उतारा है। उनमें प्रमुख हैं -उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमिटि के अध्यक्ष राज बब्बर जिन्होंने साल 1989 में जनता दल के जरिये राजनीति में कदम रखने के बाद समाजवादी पार्टी ज्वाइन की थी। समाजवादी पार्टी में तीन बार लोकसभा सांसद रहने के बाद साल 2006 में इन्होंने समाजवादी पार्टी छोड़ दी और 2008 में कांग्रेस ज्वाइन कर ली। 2009 में हुए लोकसभा इलेक्शन में कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ते हुए मुलायम सिंह यादव की बहु डिंपल यादव को हरा कर फिर से सांसद बने। इस बार लोकसभा चुनाव में राज बब्बर उत्तर प्रदेश के फतेहपुर सीकरी से लोकसभा चुनाव लड़ रहे हैं।

बिहार की पटना साहिब सीट पर 2009 और 2014 में भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़कर सांसद बनने वाले शत्रु बीजेपी सरकार में केन्द्रीय मंत्री भी रह चुके हैं। लंबे समय से पार्टी और उनके विचारों में मतभेद होने के कारण इस बार बीजेपी ने शत्रु का टिकट काट दिया।  शत्रु अब कांग्रेस पार्टी में शामिल हो गए और बिहार की पटना साहिब सीट से ही चुनाव लड़ रहे हैं। उनकी पत्नी पूनम सिन्हा लखनऊ से राजनाथ सिंह के खिलाफ चुनाव लड़ रही है सपा के उम्मीदवार के तौर पर।

साल 1994 में टीडीपी से अपने राजनैतिक सफर की शुरुआत करने के बाद जयाप्रदा ने बाद में समाजवादी पार्टी ज्वाइन की थीं। दो बार लोकसभा सांसद रहने के बाद जया ने साल 2014 में आरएलडी के टिकट पर बिजनौर सीट से लोकसभा का इलेक्शन लड़ा, जिसमें उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। हाल ही में जयाप्रदा ने भारतीय जनता पार्टी का दामन थमा  और वे उत्तर प्रदेश की रामपुर सीट से आजम खान के खिलाफ चुनाव लड़ रही हैं।

भारतीय जनता पार्टी हेमा मालिनी को राजनीति में लेकर आई थी। साल 2014 में बीजेपी की मथुरा सीट से इलेक्शन लडऩे के बाद आरएलडी के जयंत चौधरी को हराया था। फिलहाल मथुरा सीट से ही हेमा एक बार फिर से चुनाव लड़ रही हैं।

बॉलीवुड की ‘रंगीली गर्ल’ उर्मिला मातोंडकर हाल ही में कांग्रेस में शामिल हुई। पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी की उपस्थिति में उर्मिला ने पार्टी का दामन थामा और वह उत्तर मुंबई से कांग्रेस के प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लड़ रही हैं।

चुनाव में फिल्मी सितारों का प्रभाव प्रचार-प्रसार तक रहता है। इस चुनाव में बड़े सितारों से अधिक नये सितारे मैदान में है। भोजपुरी पिल्मों के कई सितारों को भाजपा ने चुनाव मैदान में उतारा है। सपा नेता अखिलेश यादव के खिलापफ भोजपुरी अभिनेता दिनेश लाल यादव ‘निरहुआ’ को आजमगढ़ से चुनाव मैदान से उतारा है। दिनेश लाल यादव पहले समाजवादी पार्टी का प्रचार कर चुके हैं। सपा के कार्यकाल में अखिलेश यादव ने दिनेश लाल को ‘यश भारती’ सम्मान भी दिया था। भाजपा और अखिलेश के द्वंद में दिनेश लाल यादव फंस गये हैं।

राजनीति में फिल्मी सितारों का चुनाव लडऩा नई बात नहीं है। हिंदी फिल्मों के बड़े कलाकार कई बार चुनाव लड़े और बड़े-बड़े नेताओं को हराने में सफलता भी हासिल की है। 2019 के लोकसभा चुनाव में बड़े फिल्मी सितारों के मुकाबले भोजपुरी, साउथ और बंगाला फिल्मों के कलाकार ज्यादा संख्या में चुनाव लड़ रहे हैं। दक्षिण भारत की राजनीति में फिल्मी कलाकारों प्रभाव ज्यादा रहा है। तेलगू फिल्मों के एनटी रामाराव, तमिल फिल्मों के एमजी रामचन्द्रन और जयललिता तो प्रदेश के मुख्यमंत्री तक बने। रजनीकांत, कमल हासन जैसे नाम भी ऐसे ही सफल कलाकारों में रहे हैं। हिंदी फिल्मों के कलाकार यहां तक नहीं सफल नहीं हो पाये। भोजपुरी सिनेमा के गायक और नायक रहे मनोज तिवारी सांसद और भारतीय जनता पार्टी दिल्ली प्रदेश के अध्यक्ष बनने में सफल रहे। अब भोजपुरी के दूसरे कलाकार दिनेश लाल यादव ‘निरहुआ’, रवि किशन, पवन सिंह भी राजनीति में अपना दमखम दिखाने के लिये कमर कस चुके है। मनोज तिवारी ने समाजवादी पार्टी का हाथ पकड़ कर राजनीति में कदम रखा था। 2009 में मनोज तिवारी समाजवादी पार्टी से गोरखपुर में योगी आदित्यनाथ के खिलाफ चुनाव लड़ा और हार गये थे। 2014 के लोकसभा चुनाव में वह भाजपा के टिकट पर दिल्ली से चुनाव लड़े।

दिनेश लाल यादव ‘निरहुआ’ पहले कई बार समाजवादी पार्टी का प्रचार कर चुके हैं। 2012 के विधानसभा और 2014 के लोकसभा चुनाव में वह सपा के लोगों का पूर्वाचल में प्रचार कर चुके हैं। इस बार वह भाजपा के टिकट पर सपा प्रमुख अखिलेश यादव के खिलाफ चुनाव लड़ रहे हैं। अभिनेता रवि किशन 2014 में कांग्रेस के टिकट पर जौनपुर से चुनाव लड़ चुके है। अब वह भी भाजपा से अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। हिदीं फिल्मों के कलाकारों में 2019 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने फिल्म अभिनेत्री उर्मिला मातोंडकर, भाजपा से हेमा मालिनी, स्मृति ईरानी और जयाप्रदा चुनाव लड़ रही है।

पश्चिम बंगाल में अब तक लोकसभा चुनावों में ऐसे फिल्मी सितारों को टिकट देने का चलन नहीं था। लेफ्ट के जमाने में मंझे हुए राजनीतिज्ञ ही चुनाव मैदान में उतरते थे। लेकिन ममता ने एक नई परंपरा शुरू करते हुए वर्ष 2009 के चुनावों में शताब्दी राय और तापस पाल जैसे उस समय के दो सबसे व्यस्त सितारों को मैदान में उतारा और वह दोनों अपने ग्लैमर और तृणमूल की लहर की वजह से आसानी से जीत गए। भाजपा से सिंगर बाबुल सुप्रियो चुनाव जीते।

ममता बनर्जी ने 2014 में उन्होंने पांच सितारों को टिकट दिए। इनमें शताब्दी व पाल भी शामिल थे। वह पांचों जीत गए। अबकी बार भी ममता ने पांच सितारों को ही मैदान में उतारा है। फर्क यह है कि पिछली बार जीती संध्या राय और तापस पाल की जगह अबकी बांग्ला फिल्मों की दो शीर्ष अभिनेत्रियों मिमी चक्रवर्ती और नुसरत जहां को चुनाव मैदान में उतारा गया है।

बंगाली फिल्म अदाकारा नुसरत जहां उत्तर 24 परगना जिले में बसीरहाट सीट से मैदान में उतरेंगी। अभी इस सीट से तृणमूल के इदरिस अली सांसद हैं। बनर्जी ने कहा कि अली विधानसभा उप चुनाव में उम्मीदवार होंगे।  इन दो अदाकाराओं के अलावा वर्तमान सांसद दीपक अधिकारी, शताब्दी रॉय और मुनमुन सेन भी एक बार फिर मैदान में उतरेंगे। दीपक अधिकारी देव के नाम से लोकप्रिय हैं।

देव और रॉय क्रमश: घाटल और बीरभूम सीटों से फिर से चुनाव लड़ेंगे, वहीं सेन को बांकुरा से आसनसोल स्थानांतरित कर दिया गया है। यह सीट भाजपा के गायक-नेता-राजनेता बाबुल सुप्रियो ने जीती थी।

तृणमूल ने जाने-माने कलाकार एवं मौजूदा सांसद तपस पाल और संध्या रॉय को इस बार मौका नहीं दिया है।

पाल को 2016 दिसम्बर में सीबीआई ने रोका वैली चिटफंड घोटाले में गिरफ्तार किया था, जो अभी जमानत पर रिहा हैं। तृणमूल प्रमुख ने मिथुन चक्रवर्ती को राज्यसभा का सांसद भी बनाया था लेकिन खराब सेहत का हवाला देते हुए उन्होंने दिसम्बर 2016 में इस्तीफा दे दिया था।

भाजपा भी फिल्म जगत के सितारों पर दांव लगाने में पीछे नहीं रही। पाश्र्व गायक बाबुल सुप्रियो ने 2014 में चुनाव लड़ा और वह राज्य मंत्री भी बनाए गए। वहीं अदाकारा रूपा गांगुली भाजपा की ओर से राज्यसभा सांसद बनाई गईं।

तमिलनाडु में दो सुपरस्टार-रजनीकंत और कमल हासन अपनी पार्टी बनाकर चुनाव लडऩे वाले है। कमल हासन ने अपनी पार्टी बना ली है तो रजनीकांत पार्टी बनाने वाले हैं। तमिल दर्शक तो रजनीकांत के दीवाने हैं। उनकी फिल्मों में  तालियां और सीटियां ये तो महज ट्रेलर होता है  असली मजा तो तब आता है जब जनता सिनेमाघर की सीट पर खड़े होकर डांस करने लगती है। यह भी चर्चा है रजनीकांत का तालमेल भाजपा के साथ हो सकता है। दूसरी तरफ कमल हासन मोदी और भाजपा की दक्षिणपंथी राजनीति के सख्त खिलाफ हैं। इस तरह तमिलनाडु में ये सुपर स्टार चुनाव में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका अदा करेंगे। अभिनेता प्रकाश राज ने घोषणा की है कि वह 2019 में होने वाला आम चुनाव  बंगलुरू सेंट्रल से निर्दलीय के रूप में लड़ेगे। प्रकाश राज साउथ के सुपरस्टार हैं। ‘सिंघम’, ‘वॉन्टेड’ और ‘हीरोपंती’ जैसी फिल्मों से दर्शकों का दिल जीत चुके हैं। देखना है राजनीति में आकर वे किस तरह से जनता का दिल जीतते हैं। प्रकाश अपने भाजपा विरोधी रुख के लिए जाने जाते हैं। वह रजनीकांत और कमल हासन के बाद तीसरे प्रमुख अभिनेता हैं जो राजनीति में आए हैं। उन्होंने इससे पहले कहा था कि जिस तरह के हिंदुत्व का भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) प्रसारण कर रही है, वह भारत में काम नहीं करेगा।

इस सारे घटनाक्रम से लगता है कि राजनीति को ग्लैमर की सख्त जरूरत है। उसके बगैर राजनीति सूखा रेगिस्तान लगती है। इसलिए हर पार्टी की राजनीति फिल्म स्टारों को अपने साथ लाने की जबरदस्त कोशिश करती है। 2019 का चुनाव भी ग्लैमर के कारण दिलचस्प बनेगा।

सतीश पेडणेकर

 

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