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जिंदगी के कई मोड़

जिंदगी के कई मोड़

जगूड़ी की कविता में आप पहाड़ या हिमालय ढूंढ़ेंगे तो नहीं मिलेगा क्योंकि वो प्रकृति के कवि नहीं मनुष्य के कवि हैं। उनमें उत्तराखंड नहीं, उनके पहाड़ नहीं, जैसे कि कई कवि वहां के चित्रण से नहीं उभर सके, ऐसी बात जगूड़ी के कविता संसार में नहीं है। वो विशुद्ध मनुष्य कवि हैं। जगूड़ी की कविता के केन्द्र में जो संसार बनता है, उसमें वह सबसे अलग कवि हो जाते हैं। वह अवाम के कवि कहलाए जा सकते हैं। जगूड़ी की लोकप्रियता का एक कारण उनकी कविताओं में के इस गुण का होना भी है।

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जगूड़ी संस्कृत के प्रचंड विद्वान हैं लेकिन उन्होंने आम लोगों की भाषा में कविताएं लिखी हैं। ये अलग बात है कि क्षेत्रीयता की पहचान लेखकीय स्तर पर काफी अहमियत रखती है। एक संस्कृत पढ़ा लिखा व्यक्ति और उसकी भाषा में परछाई दूर-दूर तक नहीं है। वह बोलचाल और आमफहम की भाषा में लिखते है। उनके दूर-दूर तक भाषा के स्तर पर संस्कृतनिष्ठता नहीं है। जगूड़ी द्वारा लिखी गई कविताएं दिमाग को खोल देने वाली होती है। उनके लेखन को पढऩे वाला व्यक्ति कभी भी निराषा की ओर नही जा सकता। इसका कारण है कि लेखक हमेशा ही समाज के अंदर की बातों को अपने लेखल में सम्मलित करते है। इससे समझ आता है वो क्षेत्रीयता के दायरों से उठे हैं और भाषाई स्तर पर इस दौर के सबसे अलग कवि भी है।  अ: उनके द्वारा संकलित यह पूस्तक लोगों को खूब भायेगी ।

उदय इंडिया ब्यूरो

 

 

 

 

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