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जेएनयू हिंसा मामले में पुलिस ने की 9 छात्रों की पहचान

जेएनयू हिंसा मामले में पुलिस ने की 9 छात्रों की पहचान

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में रविवार को हुई हिंसा के बाद दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा मामले की जांच कर रही है. जांच के लिए एक एसआईटी का गठन किया गया है. पुलिस ने अब तक की जांच के आधार पर मिले तथ्यों के आधार पर शुक्रवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की और तीन तारीख से लेकर पांच तारीख के बीच हुई हिंसा के घटनाक्रम को विस्तार से रखा. पुलिस ने कहा कि उसे मिले वीडियो, फोटोग्राफ और प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों के आधार पर उसने हिंसा के मामले में नौ छात्रों की पहचान की है और उन्हें नोटिस जारी किया जाएगा.

इन छात्रों में जेएनयू के पूर्व छात्र चुनचुन कुमार,  स्कूल ऑफ सोशल साइंसेज के पंकज मिश्रा, छात्रसंघ अध्यक्ष आइशी घोष,  एसएफआई की सुचेता ताल्लुकदार, वास्कर विजय, स्कूल ऑफ लैंग्वेज की प्रिया रंजन,  संस्कृत से पीएचडी कर रहे योगेंद्र भारद्वाज, विकास पटेल,  स्कूल ऑफ सोशल साइंस की डोलन सामंता शामिल हैं. ये सभी तीन, चार और पांच तारीख की झड़प में शामिल थे.

पुलिस का कहना है कि इस पूरी हिंसा की शुरुआत तीन तारीख को हुई जब छात्र संघ से जुड़े चार संगठनों एसएफआई, आइसा, डीएसएफ, एआईएसएफ ने छात्रों को विंटर रजिस्ट्रेशन से रोका और सर्वर रूम में तोड़फोड़ की. चार तारीख को दोबारा सर्वर को पूरी तरह डैमेज कर दिया गया जिससे रजिस्ट्रेशन रुक गया. पांच तारीख को दिन में साढ़े ग्यारह बजे कुछ परेशान छात्रों के साथ मारपीट की गई. चेहरे को ढंके कुछ लोगों ने पांच तारीख को पेरियार हॉस्टल में तोड़फोड की. बाद में छात्रों और शिक्षकों के बीच शांति वार्ता चल रही थी, जिसमें नकाबपोश लोग पहुंचे और मारपीट की. बाद में इन लोगों ने साबरमती हॉस्टल पर हमला किया.

इससे पहले दिन में मानव संसाधन विकास सचिव ने विश्वविद्यालय प्रशासन की पांच सदस्यीय टीम के साथ ही जेएनयू छात्र संघ के पदाधिकारियों और शिक्षक संघ के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की. प्रशासन ने मंत्रालय को पूरी स्थिति की जानकारी दी. जेएनयू वीसी ने कहा है कि छात्रों की मांगे मान ली गई हैं और उन्हें हड़ताल वापस लेनी चाहिए, वहीं छात्र संघ अध्यक्ष आइशी घोष ने कहा कि मंत्रालय ने मामले में सकारात्मक रूप से दखल देने का आश्वासन दिया है.

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