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तब तो राहुलजी को एक राष्ट्रीय पुरस्कार दिया जाना चाहिए

तब तो राहुलजी को एक राष्ट्रीय पुरस्कार दिया जाना चाहिए

बेटा : पिताजी।

पिता : हां बेटा।

बेटा : समाचार है कि प्रियंका गांधी के पति रोबर्ट वाड्रा भी लोकसभा चुनाव लड़ सकते हैं। उन्होंने ऐसी संभावना भी जताई है।

पिता : इस में बेटा नयी बात क्या है? आज कल के राजनितिक परिदृश्य के अनुसार उनमें सब गुण हैं जो एक सफल राजनेता में होने चाहियें।

बेटा : वैसे मुझे मेरा एक दोस्त बता रहा था कि वाड्रा ने किसी पत्रिका को एक साक्षात्कार दिया था 4-5 वर्ष पहले और दावा किया था कि वह कहीं से भी चुनाव लड़ सकते हैं और जीत सकते हैं।

पिता : बेटा, इसमें भी हैरानी की कोई बात नहीं है। नेहरु-गांधी परिवार तो स्वतंत्र भारत में शासन करने के लिए ही तो आया है। इस परिवार का कोई आदमी आजतक चुनाव तो हारा नहीं है।

बेटा : एक बार पिताजी कहते हैं कि आपातकाल के बाद जब 1977 में चुनाव हुये थे तो श्रीमती इंदिरा गांधी समेत सारा नेहरु-गांधी परिवार हार गया था।

पिता : वह बेटा एक असाधारण चुनाव था। उसके बाद जितने भी चुनाव हुए यह परिवार कोई चुनाव नहीं हारा है।

बेटा : वाड्रा को चुनाव के लिए टिकट मिल जायेगा?

पिता : क्यों नहीं? उनके लिए चुनाव में टिकट लेना तो घर की खेती है। जब मर्जी काट लो।

बेटा : उधर यह भी खबर चल रही है कि राहुल जी की बहन भी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के खिलाफ चुनाव लड़ सकती हैं।

पिता : प्रियंका जी ने इस पर निर्णय राहुल जी पर छोड़ दिया है। उन्होंने कहा है कि यदि पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष (राहुल जी) कहेंगे तो वह अवश्य लड़ेंगी।

बेटा : हां, पिताजी। मोदीजी के खिलाफ चुनाव लडऩा तो अपने आप में ही एक बड़े गौरव की बात है। कोई जीते या हारे, उसके नाम का डंका तो देश-विदेश में फैल बज ही जायेगा। देशी-विदेशी पत्रकार उनसे साक्षात्कार के लिए भी तरसेंगे।

पिता : बेटा, पॉलिटिक्स में ऐसी गलतफहमी बड़े-बड़ों को हो जाती है।

बेटा : जैसे पिछली बार अरविन्द केजरीवाल जी को हो गयी थी?

पिता : हां, बिलकुल उनके जैसी। तब केजरीवाल जी भी तो यही कहते थे। पर हुआ क्या? अपनी जमानत भी न बचा पाए थे।

बेटा : अच्छा, इसी कारण अब केजरीवाल जी मोदीजी के विरुद्ध चुनाव लडऩे की बात तक नहीं कर रहे।

पिता : बेटा, अब केजरीवाल जी को कोई नकारात्मक रिकार्ड तो बनाना नहीं है।

बेटा : चलो, यह तो राहुल जी की चुनावी रणनीति हो सकती है, पर मेरे विचार में तो राहुल जी को स्वयं मोदीजी के विरुद्ध चुनाव लडऩा चाहिए था। वह हर बात में मोदीजी को चुनौती देते फिरते है, यहां भी आमने-सामने हो जाते।

पिता : बात तो तेरी ठीक है। वैसे अमेठी से भी वह चुनाव तो लड़ ही रहे हैं।

बेटा : वह केरल से भी तो चुनाव लड़ रहे हैं।

पिता : पर बेटा प्रियंका गांधी मोदीजी के खिलाफ चुनाव लड़ती हैं तो यह उनके लिए एक बड़ी चुनौती होगी। उनके लिए अपने राजनीतिक जीवन की सबसे बड़ी और पहली जोखिम होगी।

बेटा : अपने राजनीतिक जीवन में यह सब से बड़ा जोखिम भरा कदम होगा। कहीं वह कहावत ही न बन जाये कि सिर मुंडाते ही ओले पड़े।

पिता : पर बेटा राजनीति में किसी उभरते सितारे को अपना जीवन हार से शुरू करना भी शुभ नहीं होता।

बेटा : पिताजी, अब तो मेरा मन भी कर रहा है कि क्यों न मैं भी मोदी जी के विरुद्ध चुनाव लड़ लूं?

पिता : अभी मैं यही बात कर रहा था कि अपने राजनीतिक जीवन का श्रीगणेश हार से नहीं करना चाहिए और तू यही करने की सोच रहा है।

बेटा : पिताजी, मैं कौन सा राजनीति को अपना रहा हूं? मुझे तो राहुल जी और प्रियंका जी से ही प्रेरणा मिली कि इस मौके से अपना नाम चमका ले। मैं अपने रिश्तेदारों व दोस्तों को यह तो बता सकूंगा कि मैंने मोदीजी के खिलाफ चुनाव लड़ा था।

पिता : और जमानत जब्त हो गयी थी।

बेटा : मेरे जैसे कई और भी होंगे जो इसी हार पर इतराते फिरेंगे कि हम हारे हैं किसी ऐरे-गैरे नत्थू-खैरे से नहीं, नरेन्द्र मोदी जी से हारे हैं। यह तो अपने आप में ही गौरब की बात है।

पिता : यह तो तेरी बात ठीक है। छोटे-बड़े सब नेता यही कह सकेंगे।

बेटा : पर पिताजी, राहुलजी तो बहुत बड़े नेता हैं।

पिता : मैंने कब कहा कि वह बड़े नेता नहीं हैं। बड़े नेता हैं तभी तो वह कांग्रेस अध्यक्ष बने हैं।

बेटा : पिताजी, आपका राहुलजी के बारे ज्ञान बहुत सतही है, गहरा नहीं। इसका विवेचन तो उनकी बहन प्रियंकाजी ने एक दिन पहले ही किया है।

पिता : क्या बताया?

बेटा : मुझे तो आज ही पता चला कि राहुल जी केवल राजनीति के ही धुरन्धर नहीं हैं। वह कई और विधाओं के भी माहिर हैं जिनके बारे अभी किसी ने सोचा तक भी न था।

पिता : तेरे को कहां से पता चला?

बेटा : मैंने पिताजी अखबार में पढ़ा जिसमें उनकी बहन प्रियंका जी ने इन बातों का रहस्योद्घाटन किया।

पिता : इस प्रकार तो वह एक अच्छी बहन बन कर निकलीं हैं जिन्होंने अपने भाई की उपलब्धियों को सब तक पहुंचाया है। वह तो एक आदर्श बहन साबित हो रही हैं।

बेटा : वैसे पिताजी, राहुलजी अपनी निजी पब्लिसिटी के खिलाफ हैं। फिर भी प्रियंका जी ने तो उनकी अनेक अब तक छुपी प्रतिभाओं को उजागर कर केरल में जनता को अवगत कराया जहां के एक चुनावक्षेत्र से भी राहुलजी चुनाव लड़ रहे हैं।

पिता : पिताजी, राहुलजी ने दो लोकसभा चुनावक्षेत्रों से चुनाव लड़कर वह यह संदेश देना चाहते हैं कि वह देश के दक्षिण भाग में भी उतने ही लोकप्रिय हैं जितना कि वह देश के उत्तर में हैं।

बेटा : तब तो पिताजी, राहुलजी को एक सीट पश्चिम से और एक सीट पूर्व से भी चुनाव लड़ लेना चाहिए था जिस से वह दावा कर सकते थे कि वह देश के हर कोने में लोकप्रिय हैं।

पिता : बेटा,  प्रियांकाजी ने तो हम सबको बताया है कि राहुलजी केवल जनेऊ धारक ब्राह्मण ही नहीं हैं बल्कि वह उतने ही बड़े ज्ञानी भी हैं। आजकल तो बहुत से केवल नाम के ही ब्राह्मण होते हैं जबकि उन्होंने अपने महान ग्रन्थों का अध्ययन भी नहीं किया होता है।

बेटा : पिताजी, राहुलजी ने केवल वेदों व उपनिषदों का ही गहन अध्ययन नहीं किया है बल्कि वह कुरान शरीफ और बाइबल के भी उतने ही बड़े ज्ञाता हैं। प्रियंकाजी ने तो कहा कि उनको तो शक है कि जो बहुत सारे अपने आप को धार्मिक ग्रन्थों के ज्ञानी बताते फिरते हैं उन्होंने इन महान ग्रन्थों को पढ़ा भी है या नहीं।

पिता : यह बात तो प्रियंकाजी की ठीक लगती है। बहुत सारे तो यूंही इन ग्रन्थों के गहन अध्ययन का ढोंग रचते हैं जबकि उन्होंने तो इन महान ग्रन्थों के दर्शन तक न किए होते हैं। खास कर ऐसे लोग राजनीति में कहां कूदते हैं?

बेटा : पिताजी, यही नहीं। राहुलजी ने तो एक ब्रिटिश विश्वविद्यालय (उसका नाम नहीं बताया और न यह ही बताया कि उन्होंने कौनसी डिग्री प्राप्त की है) में अध्ययन भी किया है और कुछ समय के लिए उन्होंने बरतनिया में काम भी किया है।

पिता : बहुत अच्छा। ऐसे ही लोगों की आज के जमाने में भारत की राजनीति में आवश्यकता है।

बेटा : पर मुझे डर लग रहा है कि वह कहीं हमारे शंकराचार्यों को उनके साथ शास्त्रार्थ की चुनौती न दे बैठें।

पिता : और अगर उन्होंने राहुलजी की चुनौती स्वीकार न की तो इसका अर्थ स्पष्ट है।

बेटा : यही नहीं। वह तो कराटे के ब्लैक बेल्ट भी प्राप्त कर चुके हैं।

पिता : तभी मैं समझा कि वह हर एक को चुनौती क्यों देते फिरते हैं।

बेटा : पिताजी, आप इसका गलत अर्थ मत निकालिए। राहुलजी तो अपने राजनीतिक प्रतिद्वंदीयों को चुनौती राजनीतिक देते हैं, और नहीं।

पिता : तेरी बात तो ठीक है। इन सारी विभिन्न विधाओं के ज्ञाता होने के कारण ही राहुलजी में इतना आत्मविश्वास जागृत हो गया है।

बेटा : पिताजी, मैं तो आपको एक और चौंका देने वाली घटना सुनाता हूं जो प्रियंका जी ने बताई।

पिता : क्या?

बेटा : पिताजी, प्रियंकाजी ने बताया कि उनके भाई एक बार कुछ समय पहले कर्नाटक जा रहे थे हवाई जहाज से जब जहाज में कुछ खराबी पैदा हो गई। सारे यात्री परेशान हो उठे। प्रियंकाजी भी चिंतित हो उठीं।

पिता : बहन को चिंता होना तो स्वाभाविक ही था। फिर क्या हुआ?

बेटा : प्रियंकाजी ने परेशानी में राहुलजी से संपर्क बनाने की कोशिश की पर वह सफल न हो सकीं। उन्होंने राहुलजी के निजी सचिव से संपर्क साधने का प्रयास किया। उन्हें बताया गया कि उस समय जब सब सवारियां  घबराइ हुई थीं, राहुलजी बिलकुल शांत थे और वह तुरंत जहाज के काकपिट में गए और उस कठिन समस्या को सुलझा दिया।

पिता : यह तो उन्होंने बड़ा कमाल कर दिखाया। पर बेटा, प्रियंकाजी को इस बात का कैसे पता चल गया जबकि जहाज अभी हवा में ही था?

बेटा : यह तो प्रियंकाजी ने स्पष्ट नहीं किया।

पिता : बेटा, जहाज के काकपिट में तो कोई सवारी प्रवेश नहीं कर सकती। इसकी इजाजत किसने दी?

बेटा : पिताजी, राहुलजी ‘कोई’ नहीं हैं। वह एक वीआईपी हैं।

पिता : हां, यह बात तो ठीक है। पर बेटा, इतना बड़ा हादसा हुआ और सैंकड़ों जानें बच गईं, पर इसकी खबर किसी अखबार में नहीं छपी। हमारे खोजी पत्रकार भी कैसे इस इतनी बड़ी खबर को उठाने में असफल रहे?

बेटा : मेरे को लगता है कि राहुलजी ऐसी छोटीसी घटनाओं के कारण अपनी निजी पब्लिसिटी से बचते हैं।

पिता : इस से तो लगता है कि उन्हें हवाई जहाज के बारे में भी पूरी जानकारी है। वैसे उनके पिता राहुल के पिता राजीव गांधी राजनीति में आने से पूर्व एक पायलट ही थे।

बेटा : पर पिताजी उस जहाज का जो पायलट था उसे जहाज में पैदा हुई खराबी का कुछ ज्ञान नहीं था?

पिता : ऐसी बात तो नहीं लगती, पर ऐसा लगता है कि वह घबराहट में परेशान हो गया होगा और उसे सूझ नहीं रहा होगा कि क्या करे और क्या न करे। पर राहुलजी ने कर दिखाया।

बेटा : मैं तो समझता हूं कि राहुलजी को तो सैंकड़ों जानें बचने के लिए कोई बड़ा राष्ट्रीय पुरस्कार दिया जाना चाहिए था।

पिता : बेटा, इस बात का तो रहस्योद्घाटन ही अब हुआ, तो इस विचार भी अब ही होगा न।

बेटा : आजकल तो सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ही चुनाव में व्यस्त हैं। इस समय तो किसी के पास समय नहीं है। इस पर तो अब सब चुनाव के बाद ही देखा जा सकता है।

पिता : अब तो 23 मई के बाद ही देखा जा सकता है। तब देखो किसका राज होगा और किसकी प्रजा।

 

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