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दो घोषणा पत्रों का आकलन

दो घोषणा पत्रों का आकलन

भाजपा का चुनाव घोषणा पत्र पार्टी की भारत के प्रति समझ और दृष्टि की एक झलक प्रदान करता है। भाजपा ने अपने घोषणा पत्र, जोकि नई दिल्ली में जारी किया गया, में अपनी योजनाओं की रुपरेखा को प्रस्तुत किया है, राष्ट्रीय योजनाओं और विकास की यात्रा में संतुलन बिठाते हुए। भाजपा ने अपने घोषणा पत्र में कहा है की वह सभी छोटे और मझोले किसानों के लिए पेंशन स्कीम लाएगी जो उन्हें साठ साल की उम्र के बाद दी जाएगी जिससे उन्हें सामाजिक सुरक्षा प्रदान की जा सके। इसके आलावा पार्टी ने फार्म सेक्टर में उत्पादकता बढ़ाने के लिए पच्चीस लाख करोड़ रूपये निवेश करने की बात कही है। भाजपा का घोषणा पत्र आगे कहता है की एक लाख रूपये तक के लघु अवधि के कृषि ऋण जीरो प्रतिशत ब्याज दर एक से पांच साल तक की अवधि के लिए इस शर्त पर दिए जाएंगे की मूलधन का भुगतान जल्दी से जल्दी किया जाएगा। भाजपा का चुनाव घोषणा पत्र इस बात पर भी जोर  देता  है की जम्मू-कश्मीर राज्य के लोगों को विशेष दर्जा देने वाले अधिकारों को वह खत्म करेगी। यहां यह कहना आवश्यक है की भाजपा का घोषणा पत्र बहुस्तरीय और बहुआयामी है, वह इसलिए की हमारा देश विविधता में एकता की मिसाल प्रस्तुत करता है और इसलिए एक राजनीतिक पार्टी के लिए सभी के लिए एक जैसी योजनाएं लाना संभव नहीं है। वास्तव में यह घोषणा पत्र असली घोषणा पत्र है जोकि बुनियादी जरूरतों पर बल देता है। हमें न केवल राफेल, हथियार, गोला और बारूद चाहिए, हमें बुनियादी मुद्दों, जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और रोजगार, को हल करने वाली नीतियां भी चाहिए। में जानता हूं की यह घोषणा पत्र इन बुनियादी मुद्दों को हल करने की दिशा में एक सार्थक प्रयास है जिसे पार्टी जरूर पूरा करेगी जैसाकि पिछले पांच साल में इसने करके भी दिखाया है। मुझे पूरा विश्वास है की धारा  370 और 35 ए के हटने से संविधान और देश की अखंडता की रक्षा हो सकेगी।

दूसरी और, भाजपा के घोषणा पत्र प्रस्तुत करने से करीब एक हफ्ता पहले, कांग्रेस ने अपना घोषणा पत्र जारी किया जोकि सामाजिक कल्याण की योजनाओं के बड़े- बड़े वादों का एक पिटारा है, जोकि लोकप्रिय वोट को पाने के लिए तैयार किया गया लगता है। ऐसा लगता है की कांग्रेस ने जल्दबाजी में, बगैर किसी मजबूत सिद्धांत के, इस घोषणा पत्र को तैयार किया है। नहीं तो कांग्रेस इन योजनाओं को पूरा करने के लिए कहां से फंडिंग लाएगी? इसके अलावा कांग्रेस पार्टी के चुनाव घोषणा पत्र ने देश को हिला दिया लगता है जिस प्रकार से इसने अल्ट्रा लेफ्ट पार्टियों के एजेंडा को महत्व दिया है। घोषणा पत्र सीपीआई (एम-एल) की छात्र इकाई, आल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन की पुस्तिका जैसा लगता है, जिनके लिए धारा  370 हटाने की कोई भी बात ईश-निंदा जैसी लगती है। उसी लाइन पर चलते हुए कांग्रेस पार्टी का चुनाव घोषणा पत्र कहता है की धारा 370 को हटाने के लिए कुछ भी नहीं किया जायेगा और ऐसा लगता है इस प्रकार से पार्टी अल्ट्रा लेफ्ट पार्टी के विचारों को अपना समर्थन देती सी लगती है। इसी प्रकार से ये अल्ट्रा लेफ्ट बॉडीज जेएनयू में कश्मीरी पंडितों के हालत पर चुप्पी साध लेते हैं, उसी प्रकार से कांग्रेस घोषणा पत्र में जम्मू-कश्मीर को उचित जगह दी गयी है, लेकिन कश्मीरी पंडितों का कोई जिक्र नहीं है। दूसरी ओर, ‘सेक्युलर ब्रिगेड’, बगैर इस बात का विश्लेषण करे की कांग्रेस घोषणा पत्र में क्या अर्थशास्त्र शामिल है, इसमें योग्ययता ढूंढ रही है। उन्होंने आलोचना का एक शब्द भी नहीं कहा है। क्या यहां इस बात  से इंकार किया जा सकता है की कांग्रेस घोषणा पत्र लोगों को बेवकूफ बना रहा है, नहीं तो कांग्रेस केंद्र सरकार में बीस लाख नौकरियां कहां से  लाएगी? इसके अलावा रूपये 72,000/- प्रति वर्ष गरीबों के लिए का आर्थिक परिणाम क्या होगा? कांग्रेस घोषणा पत्र, श्रम दिवस बढ़ाने के बजाय कर-दाताओं की मेहनत की कमाई को खैरात में बांटने पर बल देता है। सारा देश जानता है की छ: दशकों के कांग्रेस  राज में जनता ने क्या-क्या नहीं सहा। क्योंकि कांग्रेस के सत्ता में आने की संभावना दूर की कौड़ी है, इसलिए कांग्रेस ने आर्थिक सहायता की चाल चली है, जोकि  अव्यवाहरिक एवं गैरजिम्मेदार है।

Deepak Kumar Rath

  दीपक कुमार रथ

(editor@udayindia.in)

 

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