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धार्मिक कौन है

धार्मिक कौन है

किसी भी व्यक्ति के लिए धार्मिक बातें करना और धर्म संबंधित बातें लिखना अधिक मुश्किल नहीं हो सकता है। सामान्य प्रयास से वह समस्त चीजें वह कर सकता है जिससे वह खुद को एक धार्मिक व्यक्ति साबित कर पाए। अपने परिधान भी उसमें बहुत अधिक सहायक होते हैं। कभी-कभी तो अपने आचरण को भी कुछ इस तरह बना बैठते है कि दुसरों के सामने एक आदर्श मनुष्य साबित कर पाते हैं। जो व्यक्ति समय, सुविधा और परिस्थितिओं को देखकर अपना आचरण बदलता रहता है, तब  हम पूरी तरह से उस पर भरोसा नहीं कर पाते हैं, और धर्म से आधरित कोई भी कार्य में लिप्त रहने पर भी वह धार्मिक नहीं कहला सकता है। देखा जाए तो हममे से अधिकतर व्यक्ति केवल दुसरों के सामने अपने को धार्मिक होने का दिखावा करते हैं। धार्मिक बनना और धर्म को जानना दो अलग-अलग बात हैं। कभी-कभी तो साधु-संत और ऋषि-मुनिओं में भी धर्म को समझने की कमी पायाी जाती है। ज्ञान अर्जित करना और धर्म को समझना एक व्यक्ति को धार्मिक बना सकता है, लेकिन यह इतना आसान नहीं हैं। संसार में रहकर सब परिस्थितियों का सामना करके खुद को समस्त प्रतिक्रियाओं से दूर रखना नामुमकिन है। कभी-कभी हमारे लिए प्रतिक्रिया को काबू करना हमारे बस में नहीं होता है। केवल असली धर्मिक व्यक्ति उन समस्त हालात में खुद को भिन्न रख पाते हैं।  इस स्थिति में आने के लिए हमें अभ्यास की बहुत अधिक आवश्यकता होती है। एक सच्चे धार्मिक व्यक्ति का यही पहचान होती है।

हममें से बहुत व्यक्ति धर्म-ग्रंथों के अध्यन में पूरा जीवन बिता देते हैं। केवल ग्रंथों के अध्यन से हम कुछ ज्ञान को हमारे अन्दर ला सकते हैं, लेकिन जब तक जीवन में प्रयोग ना कर पाए तब तक उसका कोई मोल नहीं होता है। एक सच्चा व्यक्ति बड़े ज्ञान को  अर्जित ना करके भी इतना अधिक चिंतनशील होकर परिस्थितियों का सामना कर पाता है। एक सरल रास्ते पर चलते हुए सरल जीवन जीते हुए हम आदमी की पहचान नहीं कर पाएंगे। सुख में और आसान परिस्थितियों में सुचार रूप से रहना मुश्किल नहीं होता है। लेकिन जो व्यक्ति मुश्किल और कठिन समय में भी खुद की प्रतिक्रियाओं पर संयम करके रह पाता है, वह असली धार्मिक कहलाया जाता है। जिस व्यक्ति के अंदर परिपक्ता आ जाती है वह आसानी से हालात को समझ पाता है। एक परिपक्व मानव जीवन की उंचाई को आसानी से छू सकता है। अपने आपको कमल के पत्ते जैसे पानी में रहकर भी कभी गिला नहीं होता है उसी प्रकार एक धार्मिक व्यक्ति अपने जीवन को बना लेता है। धर्म को जानने से ही धार्मिक नहीं हो पाएंगे, धर्म को जानकर अपने आचरण में भी उसका असर दिखा पाएं तो हम उन्हें धर्मिक मान सकते हैं। जो व्यक्ति धार्मिक होते हैं, उनका आचरण भी हमेशा वैसा  रहता है और वह सबके प्रशंशनीय हो पाते हैं।

धार्मिक व्यक्ति हर परिस्थिति में शान्त रहते हैं। जीवन को भलीभांति समझ लेते हैं। इसलिए सामनेवाले का व्यवहार आसानी से उन्हें प्रभावित नहीं कर पाता है। देखा जाए तो इस जमाने में असली धार्मिक व्यक्ति की पहचान करना मुश्किल है। धार्मिक व्यक्ति खुद को जितना अधिक धार्मिक कार्य में लगाते हैं उससे कहीं अधिक अपनी सोच को सतचिन्ता में लगाते हैं। उनकी उस सोच से उनमें जो आभा प्रकट होती है, उससे उनके संपर्क में आनेवाला प्रत्येक मनुष्य आनंदीत हो जाता है।

उपाली अपराजिता रथ

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