नाबालिग हूं, मौका है कुछ अपराध तो कर ही दिखाऊं

नाबालिग हूं, मौका है कुछ अपराध तो कर ही दिखाऊं

बेटा : पिताजी।

पिता : हां बेटा।

बेटा : पिताजी मेरा अगला जन्मदिन कब  होगा?

पिता : अभी तो लगभग छ: मास पड़े हैं।

बेटा : तब मैं 18 साल का हो जाऊंगा न।

पिता : हां। पर तू यह क्यों पूछ रहा है?

बेटा : इसका मतलब है कि मेरे पास छ: मास का समय है कुछ कर बैठने का।

पिता : तू अब क्या करने की सोच रहा है?

बेटा : पिताजी, जब गोलू राम ने बिना बात के आपसे झगडा मोल लिया तब उसने आपको बड़ी गन्दी गालियां दीं और आपका अपमान किया मेरे सामने। मैं तो अंदर ही अंतर जलता रहा। मैं उस समय छोटा भी था और कानून की जानकारी भी न थी।

पिता : अब छोड़ बेटा, अब बात भूली बिसरी हो गई। अब उसे दुबारा मत कुरेद।

बेटा : आप चाहे भूल बैठे हों। मैं उस बात को नहीं भूलता।

पिता : अब गड़े मुर्दे उखेडऩा का क्या फायदा?

बेटा : मैं तो बदला लेकर कर ही रहूंगा।

पिता : अब तू क्या करेगा?

बेटा : मैं तो अब उसे रास्ते में कहीं भी मिल गया तो उसे घसीट कर आपके चरणों में डालूंगा।

पिता : फिर क्या हो जायेगा?

बेटा : मैं उसे कहूंगा कि वह आपके पांव पड़ कर माफी मांगे।

पिता : अगर वह न पड़ा तो?

बेटा : तो मैं उसे पीट-पीट कर यह करने पर मजबूर कर दूंगा।

पिता : अगर फिर न माना तो?

बेटा : तो उसे अपनी जान से हाथ धोना पड़ेगा।

पिता : ऐसी फिजूल की बातें मत कर। कानून को अपने हाथ मत ले। तुझे पता है न कि ऐसा करने पर तुझे फांसी की सजा हो सकती है।

बेटा : मैं बड़ी अच्छी तरह जानता हूं।

पिता : बेटा, छोड़ अपना गुस्सा। इसे बहार थूक दे। मुझे नहीं लेना उससे बदला इस प्रकार।

बेटा : आप थूक दो गुस्सा, पर मैं ऐसा नहीं करूंगा। मुझे तो आपके साथ की गयी बदसलूकी का बदला लेना है चाहे कुछ भी हो जाय।

पिता : तेरे को पता है कि इस अपराध की सजा क्या है?

बेटा : हां, पता है फांसी या उम्र कैद।

पिता : बेटा, मैं बार-बार कह रहा हूं कि यह मत कर। मुझे तुझे खोकर यह बदला नहीं लेना है।

बेटा : पिताजी, आप इतना मत घबराइये। आपको पता है कि मैं अभी छ: मास तक व्यस्क नहीं होऊंगा और तब तक मुझे उम्र कैद या फांसी हो ही नहीं सकती।

पिता : तुझे ऐसी गलत बातें कौन समझा

रहा है? मुझे तो लगता है कि तू कुसंगति में पड़ गया है।

बेटा : मुझे कोई बहका नहीं रहा है और न मैं किसी कुसंगति में हीं हूं।

पिता : तू फिर एक छोटी सी बात पर अपना जीवन क्यो दांव पर लगा है?

बेटा : आपकी खातिर। मैं आपके साथ हुई बदसलूकी और गाली-गलौच पर समझौता नहीं करूंगा, किसी सूरत में भी नहीं।

पिता : बेटा, मैं तुझे हाथ जोड़ कर कहता हूं कि तू ऐसा मत कर।

बेटा : मुझे पता नहीं कि आपको पता है कि नहीं कि मैं अभी व्यस्क नहीं हुआ हूं और 18 वर्ष की आयु पूर्ण होने में अभी लगभग छ: मास पड़े है। 18 वर्ष की आयु पूरी होने तक बहुत समय है।

पिता : तो इस अवधि में कोई अपराध करने पर तू बच जायेगा?

बेटा : बचूंगा तो नहीं पर सजा मुझे तीन साल से ज्यादा की नहीं होगी।

पिता : तू कब से जज और वकील बन गया?

बेटा : पिताजी, लगता है आपने निर्भया केस को पूरी तरह नहीं पढ़ा। उस मामले में अभियुक्तों में एक नाबालिक भी था। अदालत ने उसे दोषी तो पाया लेकिन क्योंकि वह अभी व्यस्क नहीं था इसलिए उसे केवल तीन वर्ष की सजा मिली। अपनी तीन साल की सजा भुगत कर वह अब स्वतंत्र है और मौज-मस्ती कर रहा है।

पिता : पर बाकी चार तो अब फांसी के फंदे पर लटकाए जाने की कगार पर खड़े हैं।

बेटा :  पिताजी, जो फांसी की सजा पाए जाने वाले हैं, उस में से भी एक ने अपील की थी कि वह नाबालिक है, पर अदालत ने उसे नाबालिक नहीं माना।

पिता : कुछ भी हो बेटा, चाहे एक की जान बच्च गई पर उसके मुंह पर का काला धब्बा तो उम्रभर साफ नहीं हो पायेगा।

बेटा : इसीलिये तो मैं कह रहा हूं कि मैं आपके साथ बदसलूकी का बदला जरूर लूंगा। अगर इस चक्कर में उसकी हत्या भी हो जाती है तो भी ज्यादा से ज्यादा मुझे तीन साल की ही कैद मिलेगी। सजा काट कर फिर में आपके साथ आपकी सेवा में हाजिर हो जाऊंगा।

पिता : बेटा, तू इस गलतफहमी में मत रहना। तुझे सजा अधिक भी मिल सकती है।

बेटा : चलो, यह तो देखा जायेगा पर मैं तो अपनी प्रतिज्ञा पर अडिग हूं। मैं आपको एक और कहानी सुनाऊं?

पिता : क्या?

बेटा : एक चोर बड़ा पढ़ा लिखा था। उसे पता था कि उसे इसके अपराध पर दो साल से अधिक सजा का कानून में प्रावधान ही नहीं है।

पिता : फिर क्या हुआ?

बेटा : जज ने उस पर कोई दया नहीं दिखाई और उसे दो साल की सजा सुना दी।

पिता : यह तो फिर होना ही था।

बेटा : चोर बड़ा शरारती था। उसने जज को ही ललकारा दिया। बस आपकी इतनी ही ताकत है। इससे ज्यादा सजा नहीं दे सकते थे? बेचारा जज अब क्या कहता? जज ने उसकी बात सुनी-अनसुनी कर दी।

पिता : ऐसे बदतमीजों से कौन इज्जतदार मुंह लगाएगा।

बेटा : अब तो पिताजी मेरे पास समय बहुत कम है। मैं तो औरों से भी अब बदला लेने की सोच रहा हूं। कई सहपाठी भी मेरा बड़ा मजाक उड़ाते फिरते थे। मैं इतना होशियार नहीं था जितने कि मेरे अन्य सहपाठी। मैं उन्हें भी अब नहीं छोडूंगा।

पिता : उन्होंने क्या बुरा किया तेरे साथ?

बेटा : बहुत कुछ। जब स्कूल की परीक्षा में मेरे नंबर कम आते थे। तो भी वह मेरे पर बड़े व्यंग बाण छोड़ते थे। हर समय वह क्लास में और बाहर बड़ी चुटकियां लेते थे।

पिता : बेटा, जब स्कूल में पढऩा है तो बच्चों को भी स्कूल के कमरों में ऐसी हरकतें देखने को मिलती ही हैं। उस समय को तू क्यों याद करता रहता है? बहुत सी शरारतें तुमने भी की होंगी। अब छोड़ उन बातों को। तुमने भेरे तो अपने सहपाठियों के साथ कई शरारतें की होंगी।

बेटा : मैंने ऐसी कोई शरारत नहीं की जो उन्हें आज तक चुभती रही होगी।

पिता : छोड़ बेटा, पुरानी रंजिशों को भूलना ही अच्छा होता है। बात खत्म हो जाये वही अच्छी रहती है। बढाने का कोई फायदा नहीं।

बेटा : मैं नहीं मानता। पिताजी, इन लोगों ने मेरे साथ बड़ा दुर्यव्यवहार किया है।

पिता : तू कर क्या लेगा?

बेटा : मैं इनसे जो भी, जैसा भी हो, बदला लेना चाहता हूं और वह भी दो-चार मास के अंदर।

पिता : अब तेरे को क्या जल्दी पड़ गई कि अब दो-चार महीनों में ही कानून के खिलाफ काम करना चाहता है।

बेटा : मैं आपके साथ और मेरे साथ किये गए एक-एक दुर्यव्यवहार का इसी अवधि में बदला लेना चाहता हूं।

पिता : तू कोई 10-15 अपराध करना चाहता है?

बेटा : बिल्कुल। मैं लम्बी से लम्बी सजा भुगतने के लिए तैयार हूं।

पिता : बेटा, तू इस उम्र में क्यों मेरी परेशानियां बढ़ाना चाहता है?

बेटा : कोई परेशानी नहीं।

पिता : कैसे?

बेटा : आपको पता है कि नाबालिग अगर कोई घृणित से भी घृणित अपराध कर दे, किसी की निर्मम हत्या भी कर दे तो उसे  तीन साल से अधिक कारागार की सजा नहीं हो सकती।

पिता : तीन साल की सजा तो मिलेगी न।

बेटा : फिर पिताजी मैंने अपराध भी तो बहुत किये होंगे न।

पिता : एक बात सुन ले। न तो मुझे किसी से बदला लेना है और न ही मैंने तुझे कोई अपराध करने देना है। तू यह चाहता है कि जब भी मैं सड़क पर, बाजार में निकलूं तो लोग मुझ पर ऊंगलियां उठायें कि यह वह बाप है जिसके बेटे ने इतने घृणित अपराध किये हैं जिस कारण वह जेल में सजा काट रहा है। फिर कौन परिवार या लड़की होगी जो तुझ से शादी करने को  तैयार हो जायेगी?

बेटा : यह भी पिताजी, आपको गलतफहमी है। कई उदाहरण मैंने समाचारपत्रों में पढ़े हैं जहां लड़कियां जेल काट रहे लड़कों से शादी रचा  लेती हैं। आपको पता है कि राजीव गांधी हत्याकांड में नलिनी को फांसी की सजा हो गयी थी। बाद में उसे उम्रकैद में बदल दिया गया था। उसकी तो एक लड़की भी जेल में ही पैदा हुई थी। अब उसकी शादी भी होने जा रही है।

पिता : मुझे कोई उदहारण मत सुना। तू मेरी एक  बात  सुन ले। हमें इज्जत से रहना है। हमें न किसी की नकल करनी है और न ही किसी से सबक लेना है। तू मेरी यह बात गांठ बांध ले। इस से आगे मैं कुछ नहीं सुनना चाहता।

बेटा : पिताजी, मैं भी तो मजाक ही कर रहा था। मैं तो यह सब बातें कर मजा ही ले रहा था। आप निश्ंिचत रहो कि मैं कोई ऐसा काम करूंगा जिससे कि आपको दु:ख हो या आपकी इज्जत पर कोई छोटा सा भी धब्बा लगे।

पिता : शाबास! मुझे भी तुम से यही उम्मीद है।

 

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