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पत्रकारिता में अध्यात्मिकता से आएगा समाज का हित और उत्थान : डॉ. मनमोहन वैद्य

पत्रकारिता में अध्यात्मिकता से आएगा समाज का हित और उत्थान : डॉ. मनमोहन वैद्य

पत्रकारिता के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए नई दिल्ली के इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में 29 जून को पत्रकारों को देवऋषि नारद पत्रकार सम्मान पुरस्कार प्रदान किया गया। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह-सरकार्यवाह डॉ. मनमोहन वैद्य एवं महिला एवं बाल विकास तथा वस्त्र मंत्री स्मृति ईरानी के हाथों वरिष्ठ पत्रकार रामबहादुर राय को आजीवन सेवा नारद पुरस्कार तथा  बिजनेस टीवी इंडिया के संपादक सिद्धार्थ जराबी को समग्र उत्कृष्ट नारद सम्मान से अलंकृत किया। इसी कड़ी में इंडिया टुडे मैगजीन के उप-संपादक उदय माहूरकर को प्रिंट पत्रकार नारद सम्मान, स्वतंत्र पत्रकार नलिन चौहान को उत्कृष्ट स्तम्भकार नारद सम्मान, फर्स्ट पोस्ट के मुख्य संवाददाता देवव्रत घोष को डिजिटल पत्रकारिता नारद सम्मान, इंडिया टीवी के उप संपादक व वरिष्ठ एंकर सुशांत सिन्हा टी.वी पत्रकारिता नारद सम्मान, पांचजन्य के संवाददाता अरुण कुमार सिंह को ग्रामीण पत्रकारिता नारद सम्मान, ऋचा अनिरुद्ध को स्त्री सरोकार-महिला संवेदना पत्रकारिता नारद सम्मान तथा  दंतेवाड़ा में नक्सली हमले में शहीद हुए दूरदर्शन के छाया चित्रकार अच्युतानंद साहू को मरणोपरांत उत्कृष्ट छायाचित्रकार नारद सम्मान से सम्मानित किया गया।

डॉ. मनमोहन वैद्य ने इस अवसर पर कहा कि पत्रकारिता में जो बिकेगा वही चलेगा ऐसी भावना आदर्श पत्रकारिता में नहीं होनी चाहिए। पत्रकार भी समाज का अंग है, समाज मेरा है यह यदि पत्रकार सोचकर चलता है तो समाज का हित और उत्थान स्वत: ही उसकी पत्रकारिता से जुड़ जाता है। उन्होंने बताया कि हमारी संस्कृति विविधता को स्वीकार करती है, हमारे जीवन का आधार अध्यत्मिकता है इसलिए हम विविध होते हुए भी एक हैं। उन्होंने चिंता प्रकट करते हुए कहा कि साम्राज्यवाद के कारण अपनी मातृभाषा के बहुत से शब्द हम भूलते चले गए जिनका अंग्रेजी उच्चारण तो आज हमे पता है लेकिन हिन्दी उच्चारण नहीं। अपनी शब्दावली के अर्थ की गंभीरता पश्चिमी अनुवाद से अधिक व्यापक है। मातृभाषा की अस्मिता के लिए अपनी शब्दावली को संजोकर रखना अत्यंत आवश्यक है तभी हम भाषा के साम्राज्यवाद से मुकाबला कर सकते हैं। भारत की विशेषता अध्यात्मिकता है, यह अध्यात्मिकता कोई एक रिलीजन नहीं है, सभी रिलीजन को एक मानना ही भारत की अध्यात्मिकता है। इसलिए यदि स्कूली शिक्षा में यह हम सिखाते हैं तो समाज के साथ व्यक्ति का आपसी सम्बन्ध प्रगाड़ होगा, उसके व्यवहार में, राष्ट्र के प्रति, स्त्री के प्रति देखने की दृष्टि में व्यापक परिवर्तन आएगा और वह समाज के लिए सोचेगा। जो वास्तव में भारत की मूल परम्परा रही है। व्यवस्था में शायद यह बाद में आए लेकिन पत्रकारों के हाथ में भी पत्रकारिता के माध्यम से यह परिवर्तन लाने की क्षमता है।

स्मृति ईरानी ने वर्ष 2018 में दंतेवाड़ा में चुनाव की कवरेज के दौरान नक्सली हमले में शहीद हुए दूरदर्शन के छायाचित्रकार अच्युतानंद साहू को मरणोपरांत नारद सम्मान देने के लिए इन्द्रप्रस्थ विश्व संवाद केंद्र की ज्यूरी की प्रशंसा करते हुए कहा कि आज के टीवी पत्रकारिता के युग में तकनीकी दृष्टि से जो लोग कार्य करते हैं उनके साथ हुई घटना पर किसी का ध्यान नहीं जाता। कैमरामैन, फोटोग्राफर भी पत्रकारिता के इस बदलते युग का अभिन्न अंग हैं। वैज्ञानिक और सांस्कृतिक पत्रकारिता आज लुप्त सी हो गई है जिसे सामने लाने की आवश्यकता है।

कार्यक्रम में मंच संचालन विकास कौशिक ने किया, अध्यक्षता समाजसेवी वह उद्यमी राकेश बंधु ने की। अंत में इन्द्रप्रस्थ विश्व संवाद केंद्र के अध्यक्ष अशोक सचदेवा ने पत्रकार सम्मान समारोह में आए सभी पत्रकारों व अतिथियों का स्वागत किया। कार्यक्रम में इन्द्रप्रस्थ विश्व संवाद केंद्र के सचिव वागीश ईसर, दिल्ली प्रांत प्रचार सह प्रमुख सुमित मालूजा बड़ी संख्या में आए पत्रकारों के साथ उपस्थित थे।

(उदय इंडिया ब्यूरो)

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