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”पर्यावरण की सुरक्षा हेतू जनभागीदारी की आवश्यकता’’

”पर्यावरण की सुरक्षा हेतू जनभागीदारी की आवश्यकता’’

नौवें नानाजी देशमुख स्मृति व्याख्यान का आयोजन 25 जुलाई को एनडीएमसी के कन्वेंशन सेंटर में रखा गया, जिसके मुख्यवक्ता राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी) के अध्यक्ष न्यायमूर्ति आदर्श कुमार गोयल थे।

सभा को सम्बोधित करते हुए न्यायमूर्ति आदर्श गोयल ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए जन आंदोलन की आवश्यकता है। यह केवल सरकारी प्रयासों से संभव नहीं होगा। इस कार्य को केवल सरकार के भरोसे इसे छोड़ दिया गया है। लेकिन सच्चाई तो यह है की इसके लिए जनभागीदारी की आवश्यकता है।  उन्होंने  सरकार के ‘स्वच्छ भारत अभियान’ और ‘नमामि गंगे’ का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार ने इस दिशा में काफी सकारात्मक कदम उठाए हैं। लेकिन यह भी सच है कि हरीद्वार के बाद गंगासागर तक गंगा काली हो चुकी है और गंगा का पानी पिने लायक भी नहीं है।  फिर भी लोग गंगा को माँ मानते हुए इनके जल का ग्रहण करते हैं। अत: सरकार को गंगा को साफ करने के लिए, कारखानों से आने वाले गंदे पानी को रोकना चाहिए। इसके लिए कारखानों में वाटर ट्रीटमेंट प्लांट भी आवश्यक की जानी चाहिए।

न्यायमूर्ति गोयल ने कहा कि नानाजी ने स्वयं ग्रामोदय विश्वविद्यालय चित्रकूट में दुर्लभ प्रजाति के पौधे लगाए थे जिन्हें आज भी वहां देखा जा सकता है। पार्यावरण के बचाव के ऊपर बोलते हुए उन्होंने कहा की वेद पुराणों में भी पार्यावरण को बचाने की बात की गयी है, अत: हम भारतीय तो आरम्भ से ही पर्यावरण का सम्मान करने वाले लोगों में से है।

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नानाजी के बारे में चर्चा करते हुए न्यायमूर्ति गोयल ने कहा कि बहुत ही काम लोगो को पता होगा कि नानाजी ने जेपी आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने कहा कि जब जेपी पर डंडे से प्रहार किया गया तो नानाजी ने जेपी को ढ़क लिया।  उन्होंने कहा की नानाजी ने सबसे अधिक ग्रामीण क्षेत्रों के विकास के लिए काम किया।

यहां इसकी चर्चा करनी आवश्यक है कि नानाजी का जन्म 1916 में महाराष्ट्र के हिंगोली जिले के कडोली नामक छोटे से कस्बे में ब्राह्मण परिवार में हुआ था। पंडित दीनदयाल उपाध्याय की संकल्पना एकात्म मानववाद को मूर्त रूप देने के लिये नानाजी ने 1972  में दीनदयाल शोध संस्थान की स्थापना की। उपाध्याय जी यह दर्शन समाज के प्रति मानव की समग्र दृष्टि पर आधारित है जो भारत को आत्मनिर्भर बना सकता है।

नानाजी देशमुख ने एकात्म मानववाद के आधार पर ग्रामीण भारत के विकास की रूपरेखा बनायी। शुरुआती प्रयोगों के बाद उत्तर प्रदेश के गोंडा और महाराष्ट्र के बीड जिलों में नानाजी ने गांवों के स्वास्थ्य, सुरक्षा, शिक्षा, कृषि, आय, अर्जन, संसाधनों के संरक्षण व सामाजिक विवेक के विकास के लिये एकात्म कार्यक्रम की शुरुआत की। पूर्ण परिवर्तन कार्यक्रम का आधार लोक सहयोग और सहकार है। नानाजी ने 2010 में अपनी जीवन की अंतिम सांस ली, जिनको वर्ष 2019 में भारत सरकार ने देश के सर्वोच्च ‘भारत रत्न’ से सम्मानित किया।

(रवि मिश्रा)

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