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पश्चिम बंगाल संघ के स्कूलों पर तनीं ममता की भौंहे

पश्चिम बंगाल  संघ के स्कूलों पर तनीं ममता की भौंहे

पश्चिम बंगाल के विभिन्न क्षेत्रों में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ द्वारा संचालित स्कूलों पर राज्य सरकार की भृकुटि तन गई है और इस मुद्दे पर कड़ी कार्रवाई के मसौदे तय किये जा रहे हैं। शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी ने इसे साफ कर दिया हैं। शिक्षा मंत्री ने स्पष्ट कहा हैं कि राज्य में संघ द्वारा संचालित स्कूलों को बर्दाश्त नहीं किया जायेगा क्योंकि इन स्कूलों के माध्यम से साम्प्रदायिकता का जहर घोला जा रहा हैं और बच्चों को कट्टरता का पाठ पढ़ाया जा रहा हैं। राज्य सरकार ने साफ कर दिया हैं कि शिक्षा और धर्म को दूर रखना होगा। पार्थ चटर्जी का कहना हैं कि इन स्कूलों में हिंदुत्ववाद की शिक्षा दी जा रही हैं। जरूरत पड़ी तो इन स्कूलों की मान्यता रद्द कर दी जाएगी। राज्य सरकार के इस ऐलान से पूरे सूबे में हडक़ंप मच गया हैं और विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी भी आरएसएस के पक्ष में बयान देने से पीछे नहीं हट रही है यानि संघ द्वारा संचालित स्कूलों के मुद्दे पर गहमागहमी शुरू हो गई है। राज्य सरकार जहां एक ओर हिन्दुत्व की शिक्षा देने वाले स्कूलों पर कार्रवाई के लिए अड़ गई है वहीं हिंदुत्ववादी संगठन राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ प्रदेश में चलने वाले मदरसों पर सवालिया निशान लगा रहा है। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के राज्य प्रमुख डॉक्टर जिश्नू बसु ने बताया कि पूरे राज्य में लगभग दस हजार मदरसे चलाये जा रहे हैं, जिन्हें किसी भी प्रकार का अनुमोदन प्राप्त नहीं है। बिना अनुमोदन के इन मदरसों को चलाया जा रहा है और यहां इस्लाम की शिक्षा दी जा रही है, तो हिंदुत्ववादी संगठन अपने स्कूलों में हिन्दुत्व के संस्कार की शिक्षा क्यों नहीं दे सकता है। जिश्नू बसु ने राज्य सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि शिक्षा मंत्री उन गैरकानूनी मदरसों पर खामोश क्यों हैं। अगर संघ के स्कूल पर पाबन्दी लग सकती है तो मदरसों पर भी रोक लगनी चाहिए। बसु ने साफ  तौर पर कहा कि तृणमूल कांग्रेस सरकार पश्चिम बंगाल को बांग्लादेश बनाना चाहती है मगर ये सम्भव नहीं है।

दूसरी तरफ शिक्षा मंत्री पार्थ मुखर्जी ने कहा कि पश्चिम मेदिनीपुर में एक, मुर्शिदाबाद में दो तथा उत्तर दिनाजपुर में संघ के दो विद्यालयों को एनओसी दिया गया है, जहां धर्म की शिक्षा दी जा रही है। ये पांचों स्कूल शारदा विद्यामंदिर के नाम से चलाये जा रहे हैं। दूसरे क्षेत्रों से भी कई शिकायतें मिली हैं, लिहाजा लगभग एक सौ स्कूलों को धार्मिक असहिष्णुता को बढ़ावा देने के आरोप में कारण बताओ नोटिस भेजे गए हैं। शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी का कहना हैं कि इन स्कूलों पर कार्रवाई की जाएगी और इनके नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट रद्द कर दिए जायेंगे। हालांकि राज्य सरकार ने कई स्कूलों के एनओसी रद्द कर दिए हैं। आगे भी यह प्रक्रिया जारी रहेगी। धार्मिक असहिष्णुता को बढ़ावा देने वाले स्कूलों पर सरकार की गाज गिरेगी। बताया जाता हैं कि राज्य भर के सैंकड़ों निजी स्कूलों को विभिन्न केंद्रीय स्कूल बोर्ड से मान्यता मिली हैं तथा राज्य सरकार की ओर से उन्हें एनओसी दी गई हैं। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) के शाखा संगठनों द्वारा सरस्वती शिशु मंदिर एवं शारदा विद्यामंदिर के नाम से राज्य में स्कूल संचालित होते हैं।

मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी भी संघ के इन स्कूलों के खिलाफ दिख रही हैं। माकपा नेता सुजन चक्रवर्ती का कहना हैं कि आरएसएस द्वारा संचालित स्कूलों के जरिये साम्प्रदायिकता का जहर घोला जा रहा हैं। दरअसल इस मुद्दे को माकपा के विधायक मानस मुखर्जी ने विधानसभा के प्रश्नोत्तर काल में जोर-शोर से उठाया था, जिसे शिक्षा मंत्री ने स्वीकार भी किया और इसके बाद से ही सरकार की भृकुटि तन गई हैं। प्रदेश की मुख्यमंत्री एवं टीएमसी सुप्रीमों ममता बनर्जी भी इस मामले पर तत्पर नजर आ रहीं हैं। मुख्यमंत्री का कहना हैं कि पश्चिम बंगाल में साम्प्रदायिकता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। धार्मिक असहिष्णुता को बढ़ावा देने वाले संघ के स्कूलों पर कड़ी कार्रवाई होगी।

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पश्चिम बंगाल में आरएसएस समर्थित लगभग 330 स्कूल चलाये जा रहे हैं, जहां हिन्दुत्व संस्कारों को प्रमुखता देते हुए बच्चों को शिक्षा दी जाती हैं। इन स्कूलों में प्राइमरी से लेकर उच्च माध्यमिक तक की शिक्षा दी जाती हैं। आरएसएस के एक पदाधिकारी के मुताबिक राष्ट्रीय स्तर  पर विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान बोर्ड के तहत उत्तर बंगाल तथा दक्षिण बंगाल में अलग-अलग बोर्ड हैं। दक्षिण बंगाल में विवेकानंद विद्या विकास परिषद् हैं। इसके अधीन 215 विद्यालय हैं, जिनमें लगभग 42 हजार विद्यार्थी शिक्षा अर्जित करते हैं। दक्षिण बंगाल में विद्या भारती बोर्ड के अधीन लगभग 115 विद्यालय हैं। यहां लगभग पैंतीस हजार विद्यार्थी पढ़ते हैं। इन बोर्डों के माध्यम से ही विभिन्न इलाकों में शारदा शिशु मंदिर, सरस्वती शिक्षा मंदिर और विवेकानंद शिक्षा मंदिर के नाम से स्कूल चलते हैं। इन स्कूलों को सीबीएसई,आइसीएसई तथा पश्चिम बंगाल बोर्ड के तहत मान्यता दी जाती हैं एवं राज्य सरकार की ओर से ही एनओसी मिलता हैं। एनओसी मिलने के बाद ही स्कूल खोले जाते हैं। आरएसएस के प्रदेश कार्यवाह जिश्नू बसु के मुताबिक संघ द्वारा संचालित स्कूलों में अन्य स्कूलों की तरह ही आधुनिक शिक्षा की व्यवस्था हैं तथा अन्य स्कूलों की तरह ही पाठ्यक्रम हैं। इन स्कूलों में अंग्रेजी, हिंदी, बांग्ला, इतिहास, भूगोल, कंप्यूटर, विज्ञान सभी विषयों की पढाई होती है। बसु के मुताबिक पश्चिम बंगाल के अलावा बिहार, झारखण्ड तथा दूसरे राज्यों में भी संघ के बहुत सारे स्कूल हैं जहां बच्चों को आधुनिक शिक्षा दी जाती है। पश्चिम बंगाल में पहले वामपंथियों ने विरोध किया और अब टीएमसी वाले भी विरोध कर रहे हैं, जो बिल्कुल ओचित्यहीन है। इन्हीं विरोधों के चलते राज्य में इन स्कूलों का अधिक विस्तार नहीं हो पाया। आरएसएस कार्यवाह के अनुसार इन स्कूलों में बच्चों को नैतिक शिक्षा दी जाती है। बुजुर्गों का सम्मान करना, ईश्वर के प्रति आस्था रखना, आपसी सौहार्द तथा भारत माता के सम्मान की रक्षा की सीख दी जाती है। इसमें गलत क्या है कि राज्य सरकार इतना सख्त हो रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि सिमुलिया की तरह सैंकड़ों गैरकानूनी मदरसे राज्य में चलाये जा रहे हैं। इसपर सरकार चुप क्यों है? डॉक्टर बसु ने बताया कि असम में आरएसएस समर्थित स्कूलों का बहुत ही विकास हुआ है। पिछले वर्ष उनके ही स्कूल का एक मुस्लिम छात्र बोर्ड की परीक्षा में अव्वल हुआ था। संघ के स्कूल वास्तव में किसी खास धर्म के लिए नहीं हैं। इन स्कूलों में सभी धर्म के विद्यार्थी पढ़ते हैं।

शिक्षा मंत्री का तेवर सख्त नजर आ रहा है और वह संघ के विद्यालयों पर नकेल कसने की तैयारी में लग गए हैं। दूसरी तरफ राज्य के भाजपा अध्यक्ष दिलीप घोष का कहना है कि राज्य के मदरसे व मिशनरी स्कूलों में देशविरोधी गतिविधियां चल रहीं हैं। वहां भारतियों की जीवनी नहीं पढाई जाती। राज्य सरकार को पहले इस मुद्दे पर ध्यान देने की जरूरत है। अगर राज्य सरकार इन पर अंकुश नहीं लगाती है तो यहां पर सिमी, आईएसआईएस, अलकायदा जैसे संगठनों के आतंकी तैयार किये जायेंगे।

फिलहाल यह मुद्दा तूल पकड़ता जा रहा है। राज्य सरकार तथा मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी संघ के स्कूलों को लेकर सख्त नजर आ रही है जबकि आरएसएस एवं भाजपा नेताओं की भी अपनी दलीलें हैं।

पश्चिम बंगाल से संजय सिन्हा

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