ब्रेकिंग न्यूज़

पालिटिक्स को सच-झूठ से कुछ लेना-देना नहीं

पालिटिक्स को सच-झूठ से कुछ लेना-देना नहीं

बेटा : पिताजी।

पिता : हां बेटा।

बेटा : पिताजी, आपको पता है कि कांग्रेस महासचिव श्रीमति प्रियंका वाड्रा ने भगवा रंग की बड़ी तारीफ की है। उन्होंने इसे भारतीय संस्कृति का अभिन्न अंग माना है। उन्होंने इसे राष्ट्रीय गौरव का चिन्ह बताया है।

पिता : हां बेटा मैंने भी एक टीवी चैनल में देखा है। उसमें बुरी बात क्या है? कांग्रेस का जो पार्टी ध्वज है भगवा रंग उसका भी अभिन्न रंग है।

बेटा : कांग्रेस के पार्टी ध्वज और हमारे राष्ट्रीय ध्वज में बहुत समानता है।

पिता : फर्क भी तो केवल यह है कि राष्ट्रीय ध्वज के मध्य भाग पर अशोक चक्र है और कांग्रेस के ध्वज में उसी स्थान पर उसका चुनाव चिन्ह हाथ है।

बेटा : पर पिताजी कांग्रेस और हमारे राष्ट्र ध्वज में इतनी ज्यादा समानता क्यों है?

पिता : वैसे तो बेटा यह होना तो नहीं चाहिए पर जब इस चक्र को अपनाया गया तो यह समानता भी थी कि सरकार और कांग्रेस को भी एक ही नजर से देखा जाता था।

बेटा : तो कभी इस कारण आम जनता को पहचानने में कभी गलती नहीं हो जाती है?

पिता : यह तो कई बार हो गया। पर इस में कोई विशेष ऐतराज भी नहीं हुआ। जब 1977 में पहली बार जनता सरकार बनी और मंत्रियों की कार के अगले भाग में राष्ट्र ध्वज लहराए तो कई कहते थे कि अभी भी कांग्रेस ध्वज ही क्यों लहरा रही ही। तन मंत्रियों को जनता को समझाना पड़ता था।

बेटा : होने को तो इस बारे में एक प्रस्ताव भी रखा था कि कांग्रेस को अपना नया पार्टी ध्वज चुनने के लिए कहा जाये।

पिता : हुआ तो था पर बात शिखर तक नहीं पहुंच सकी थी।

बेटा : है तो बात सच्च। मांग तो तर्कपूर्ण थी।

पिता : बेटा, यहां वाणी और विचार में कई बदलाव आते हैं। बात समझ आनी मुश्किल है।

बेटा : क्यों?

पिता : यही बात अगर भाजपा या कोई अन्य गैर-‘सेकुलर’ दल कह देता तो राजनीति में तूफान मच जाता। सब चीख-चीख गला फाड़-फाड़ कर बोलते कि राजनीति का भगवाकरण किया जा रहा है जिसे हम किसी भी हालात में होने नहीं देंगे।

बेटा : राष्ट्रध्वज तो इन्होंने ही बनाया और स्वीकार किया था। तब इन्होंने इसके एक भाग का भगवाकरण करने का इन पर आरोप नहीं लगा?

पिता : नहीं। तब किसी ने ऐसा नहीं कहा। उस समय कोई ऐसा विचार उठता ही नहीं था जैसे आजकल उठ रहा है।

बेटा : पर पिताजी, मैं तो जब से बड़ा हुआ हूं तब से ही ‘भगवाकरण-भगवाकरण’ की आवाज सुनता आ रहा हूं।

पिता : हां, यह तो है। जब स्कूल की पुस्तकों में कुछ सुधार करने की बात आती है। औरंगजेब को बताया जाता है कि उसने हिन्दू समाज पर बड़े जुल्म किये तो कहा जाता है कि स्कूल शिक्षा व इतिहास का भगवाकरण किया जा रहा है।

बेटा : तो क्या सच बोलना या लिखना भगवाकरण है?

पिता : यह तो बेटा वह ही जानें। इन सक्युरवादियों के चोंचले हमारी समझ से बाहर हैं।

बेटा : पिछले चुनावों में भी भगवाकरण का बड़ा शोर था।

पिता : चुनावों में तो ऐसी भाषणबाजी का तो शोर रहता ही है। इन्होंने इस बहकावे से ही तो अल्पसंख्यकों के वोट लेने होते हैं। तू तो शायद तब छोटा ही था जब राहुलजी और प्रियंकाजी के पिता प्रधानमंत्री थे और दूरदर्शन पर ‘चाणक्य’ नाम का धारावाहिक प्रसारित हो रहा था। स्वाभाविक ही था कि उस समय उनके वस्त्र व परिधान भगवा ही होंगे। उधर चुनाव समीप थे। तो सरकार ने इस धारावाहिक के निर्माता को आदेश दिए थे कि इन भगवे परिधानों का रंग जितना भी संभव हो कम कर दें। तब उनको इस भगवे से साम्प्रदायिकता की बू आ रही थी।

बेटा : पर अब क्या हो गया?

पिता : ये लोग समय-समय पर अपने रंग बदलते रहते हैं।

बेटा : इन्होंने तो चित्तौड़ की रानी पद्मावती द्वारा अपनी अन्य महिलाओं के साथ जौहर की घटना  के तथ्य को अपने इतिहास से निकाल दिया था। रानी और उनकी अन्य रिश्तेदार नहीं चाहती थीं कि वह मुस्लिम आक्रमणकारियों के हाथ आयें।

पिता : यही नहीं बेटा, इतिहास में औरंगजेब को हिन्दुओं पर अत्याचारी बताये जाने का ये लोग विरोध करते थे। उनका तर्क था कि इससे आज के मुस्लिम भाइयों की भावनाएं आहत होंगी।

बेटा : तो क्या हिन्दुओं की भावनाओं को इस घटना से सकून मिला है?

पिता : यही तो विडंबना है।

बेटा : पिताजी, मुझे तो राहुलजी और प्रियंकाजी की बातों से कुछ समझ नहीं आता।

पिता : तुझे ही क्या, तुझ और मुझ जैसे अनेक भारतीयों की समझ फेल हो जाती है। सोनियाजी, राहुलजी और प्रियंकाजी की समय-समय पर बदलती भाषा से भी कईयों की बुद्धी फेल हो गई है।

बेटा : बात तो आपकी ठीक है। पीछे जब किसी ने सोनियाजी के धर्म की सूचना जाननी चाही तो उन्होंने यह बताने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि यह उनका निजी मामला है।

पिता : पर राहुलजी ने तो पिछले चुनाव में  स्वयं ही घोषणा कर दी थी कि वह जनेऊधारी ब्राह्मण हैं। उन्होंने तो अपना गोत्र भी बता दिया था।

बेटा : उन्होंने तो यह भी कहा था कि वह शिवभक्त हैं। चुनाव के दौरान तो उन्होंने कई मंदिरों के दर्शन किये, पूजा-अर्चना भी की।

पिता : और उन्होंने मंदिर की परम्परा के अनुसार धोती व अन्य अंगवस्त्र भी पहने।

बेटा : तब उन्होंने अपनी मर्जी के वस्त्र क्यों नहीं पहने? वह तो उन लोगों का समर्थन करते हैं जो मंदिर की विशेष वस्त्र धारण की परंपरा के विरुद्ध हैं और कहते हैं कि वह वही वस्त्र पहन कर मंदिर जायेंगे जो उनका मन करे।

पिता : पर उन्हें मंदिर जाने के लिए कौन वाध्य कर रहा है? यदि वह मंदिर की परम्परा का निर्वाहन नहीं करना चाहें तो वह मंदिर ही न जाएं।

बेटा : फिर पिताजी, प्रश्न तो यह भी उठता है कि यदि राहुलजी ब्राह्मण हैं तो उनके पिताजी और दादाजी भी ब्राह्मण ही होने चाहियें।

पिता : पर बेटा राजीवजी ने तो कभी नहीं कहा कि वह ब्राह्मण हैं। फिर राजीवजी के पिता तो फिरोज गांधी थे और सर्वविदित है कि वह न तो हिन्दू थे और न ब्राह्मण।

बेटा : और प्रियंकाजी की शादी तो वाड्रा परिवार में हुई है जो ईसाई हैं।

पिता : यह तो सब एक अनबूझ पहेली बनती जा रही है।

बेटा : उधर लोकसभा चुनाव से पूर्व तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष राहुलजी ने एक मुस्लिम सम्मलेन में यह भी कह दिया था कि कांग्रेस मुस्लिमों के  लिए है और उनके हितों की रक्षा करेगी।

पिता : बेटा, इसे कहते हैं पॉलिटिक्स। पॉलिटिक्स को  साइंस चाहे कहते हैं पर इसमें सदैव 2+2 चार नहीं होते। कई बार यह पांच या तीन भी हो जाते हैं और मान्य हो जाते हैं।

बेटा : पर पिताजी आजकल की कांग्रेस अध्यक्ष सोनियाजी और पूर्व अध्यक्ष राहुलजी ने तो प्रियंकाजी के भगवा पर टिप्पणी पर अभी कुछ नहीं बोला है।

पिता : हां, यह तो मैंने भी अभी तक कहीं नहीं पढ़ा है। तो क्या इसे कांग्रेस का एक नीतिगत निर्णय मान लिया जाये?

बेटा : इस पर तो अभी क्या कहा जा सकता है। बात यह भी तो है कि प्रियंकाजी कोई आम कार्यकर्ता नहीं, कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव हैं।

पिता : कई बार ऐसा भी होता है कि पार्टी यह कह देती है कि यह उस नेता के निजी विचार हैं और उससे पार्टी को कुछ लेना-देना नहीं है।

बेटा : पर यह क्या बात हुई? हर वरिष्ठ पदाधिकारी को तो अपनी वाणी पर नियंत्रण रखना चाहिए। यह तो नहीं कि एक पदाधिकारी कुछ कहे और दूसरा उसके बिल्कुल उलट। तब तो पार्टी की कोई निति न होकर खिचडी ही बन जाएगी।

पिता : बात तो तेरी ठीक है, पर आजकल पार्टियां कुछ ऐसा ही व्यवहार करती हैं।

बेटा : प्रियांकजी के भगवा रंग को राष्ट्रीयता  का एक अभिन्न अंग मान लेने के बाद तो अब प्रश्न यह भी उठता है कि क्या अब प्रियांकजी साडी भी भगवा रंग की पहनना शुरू कर देंगी?

पिता : यह तो वह ही जानें, वह ही बतायेंगी।

बेटा : एक बात और है। राहुलजी ने तो दावा कर दिया था कि वह ब्राह्मण हैं पर सोनियाजी और प्रियंकाजी ने इस बारे कुछ नहीं कहा है।

पिता : यह तो उनकी मर्जी है।

बेटा : अगर उन्होंने इस बारे अभी कुछ नहीं कहा तो इसका मतलब यह तो नहीं हो सकता कि इन दोनों की जाति और और राहुलजी की  जाति और धर्म अलग।

पिता : बेटा, पॉलिटिक्स में सब संभव है।

बेटा : बात तो आपकी ठीक है। यहां तो सब बातों में पालिटिक्स ही होती है। प्रियांकाजी उत्तर प्रदेश में उन परिवारों से मिलने चली गयीं जिनके दो व्यक्ति हाल ही के नागरिक संशोधन कानून के विरूद्ध हिंसक प्रदर्शन में शामिल थे।

पिता : इस पर क्या राजनीति?

बेटा : कांग्रेस शासित प्रदेश राजस्थान में कोटा के सरकारी अस्पताल में 102 से अधिक बच्चों की मृत्यु हो चुकी है। उस पर बहुजन समाज पार्टी प्रमुख मायावतीजी ने प्रियांकजी से पूछ मारा है कि वह राजस्थान में मृत बच्चों के माता-पिता से मिलने क्यों नहीं गयीं। भारतीय जनता पार्टी के एक नेता ने तो चुटकी ली है कि मुख्यमंत्री गहलोत कोटा जाने से भी डर रहे हैं।

पिता : यही तो बेटा पॉलिटिक्स है। किसी के मरने या जीने से उनको कोई फर्क नहीं पड़ता।

 

Leave a Reply

Your email address will not be published.