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पूज्या हेमलताजी शास्त्री: श्रीकृष्ण-भक्ति की शीतल महक

पूज्या हेमलताजी शास्त्री: श्रीकृष्ण-भक्ति की शीतल महक

हमारा देश भारत, जिसे आस्था और विश्वास की जननी कहा जाता है, जहां की सभ्यता और संस्कृति विश्व की प्राचीनतम संस्कृति में शुमार है, जिसका अनुसरण संपूर्ण विश्व करता है। तभी तो हम सब भारत को माता कहते हैं, भारत का कण-कण मातृभाव से ओत-प्रोत है। यही नहीं हमारी नदियों में बहने वाले जल को हमने जल नहीं मां माना और गंगा मैया, यमुनामैया कहकर संबोधित किया। यहां तक की पेड़-पौधों को भी मातृभाव से देखा गया और तुलसी के पौधे को तुलसी माता कहा गया। भारत की माटी को भी धरती माता कहा जाता है। गाय को हमने गऊ माता कहा न कि पशु। हमारी सनातन संस्कृति ने हमें यही सिखाया कि भारत का कण-कण हमें कुछ दे रहा है और मातृत्व का दर्शन करा रहा है, इसलिए जो बिना कुछ कहे, बिना कुछ लिए सदैव देती है, सदैव लूटाती है वो मां है, भारत मां है। भारतीय संस्कृति के उज्ज्वल इतिहास के सुवर्ण पृष्ठों पर अनेक शील संपन्न नारियों के नाम अंकित हुए हैं। शील, संयम, भक्ति, आस्था एवं धर्मनिष्ठा के अद्वितीय प्रभाव के कारण ही वे प्रणम्य हैं। ऐसी ही श्रृंखला में एक नाम है पूज्या हेमलता शास्त्री जी का, जो परम विदुषी, सनातन धर्म-शासन प्रभाविका, मातृहृदया एवं प्रबल धर्मनिष्ठा पूज्याप्रवर हैं। वे एक उच्चकोटि की साधिका, प्रभावी उपदेशिका, श्रीमद्भागवत कथा की कथावाचक और प्रखर चिंतक हैं।

मातृत्व का भाव लिए परम पूज्या हेमलता शास्त्रीजी ने सन् 2012 में मथुरा में मातृशक्ति सेवा संस्थान की शुरुआत की। जिसका मूल उद्धेश्य है कि हमारी संतति शिक्षा, संस्कृति और संस्कारों को समझ सके और इसी प्रयास में कदम आगे बढ़ाये। पूज्या शास्त्रीजी के अथक परिश्रम और जनमानस के अपार सहयोग का परिणाम है कि मातृशक्ति सेवा संस्थान से जुड़कर लोग स्वयं को धन्य मानते हैं। वर्तमान में मातृशक्ति बाल संस्कार केंद्र भगवान श्री कृष्ण की जन्मस्थली मथुरा से संचालित हो रहा है, जो कि निरंतर संपूर्ण भारतवर्ष में ज्ञान, सत्संग और अध्यात्म के माध्यम से जनमानस में धार्मिक एकता, भाईचारे एवं आपसी सद्भाव का संचार कर रहा है। आज की आधुनिक और भागदौड़ भरी जन्दगी में हमारी जीवन शैली पर पाश्चात्य संस्कृति की छाप हमें अपने संस्कारों से कहीं ना कही दूर करती जा रही है, जिसका परिणाम है कि हम अपने माता पिता, समाज और राष्ट्र के प्रति सजग नहीं हो पा रहे हैं। दशा ऐसी हो गयी है कि माता-पिता वृद्धाश्रम में अपनों को ढूंढ़ रहे हैं, गौ माता कुड़ा कचरा खा रही हैं और कत्लखानों में जाने को मजबूर हो रही हैं। माता और बहनों के प्रति हमारा नजरिया बदलता जा रहा है। रिश्तों में ही दरार बनती जा रही है। वास्तविकता ये हैं कि इस प्रकार की कुरीतियां और वीभत्स घटनाओं के मूल में शिक्षा, संस्कृति और संस्कारों का अभाव हो रहा है। निश्चित तौर पर इन अभावों को बचपन से दूर करने का जो गौरवमयी प्रयास देवी हेमलताजी कर रही हैं उससे राष्ट्र एवं समाज में सकारात्मक वातावरण की दिशाएं उद्घाटित हो रही है।

देवी हेमलताजी की जिंदगी का एक और एकमात्र उद्देश्य पूरे जीवन में श्रीमद्भागवत कथा की लहर को फैलाना है। अपने गुरु की इच्छा के अनुकरण में, वह पूरी तरह से इस धार्मिक कार्य में तल्लीन हुई हैं। उन्होंने श्रीमद्भागवतजी का ऐसा प्रचार प्रसार किया और एक ऐसी आध्यात्मिक लहर चलायी है जिसने हर इंसान का जीवन ही बदल दिया है। उन्होंने अपने गहन प्रेम और भक्ति के सहारे न केवल अपने बिहारीजी को स्वयं में आत्मसात किया बल्कि अपने भक्तों के दिलों में उनके प्रति अनूठी भक्ति एवं आस्था का संचार कर रही है। वे श्रीमद्भागवतजी के ज्ञान से सभी भक्त प्रेमियों को सच्चे सुख और शांति का अनुभव करा रही है। वे श्रीकृष्ण भक्ति की संवाहिका, शांति और सद्भावना की प्रखर प्रवक्ता, मानवीय मूल्यों के पुनरुत्थान की सजग प्रहरी, अध्यात्म दर्शन और संस्कृति को जीवंतता देने वाली परमपूज्या, सनातन धर्म के गौरव की अभिवृद्धि एवं भक्ति-चेतना के जागरण हेतु कटिबद्ध हैं। उनके व्यक्तित्व के एक-एक आयाम अपने आप में विराटता लिए हुए हैं। ऐसी बहुआयामी व्यक्तित्व की धनी सरल हृदया हेमलताजी ने स्वल्प आयु में अनेक कीर्तिमान स्थापित किये हैं।

देवी हेमलताजी की मेघा के दर्पण से भगवान् श्रीकृष्ण एव राधाजी के जीवन के बहुआयामी पावन एवं उज्ज्वल बिम्ब उभरते रहे हैं। उनमें श्रीकृष्ण के प्रति अत्यंत गहरी श्रद्धा है। वे ज्ञान एवं क्रिया के समन्वय से जतनपूर्वक धर्म आराधना करती हैं। भक्ति ज्ञान की गहरी रुचि, प्रभावशाली वक्तृत्व, धर्ममय व्यक्तित्व धारक साधिका एवं उत्तम उपासिका हैं। प्रत्येक श्रद्धालुजन को उनसे माता की ममता, वात्सल्य एवं सेवा प्राप्त होती है। आपकी सहजता, सरलता, सादगी, गुणग्राह्यता विलक्षण एवं अनुकरणीय हैं। अतुलनीय संपदाओं की धनी देवी हेमलताजी विशेषत: नारी उन्नयन एवं उत्थान की प्रेरक है। स्थान-स्थान पर अपने कथावाचन प्रवास एवं यात्रायित रहते हुए आपने युवती-महिला संस्कार शिविरों के माध्यम से अनेक युवतियों एवं महिलाओं में श्रीकृष्ण-भक्ति, आध्यात्मिक एवं सामाजिक चेतना का जागरण किया है। उनकी गहन आध्यात्मिक प्रेरणाओं से प्रेरित होकर अनेक मातृशक्ति ने अपने भौतिक जीवन को आध्यात्मिकता की ओर मोड़ा है। उन्होंने स्थान-स्थान पर महिला समाज को जागृत किया है।

पूज्या हेमलताजी अपने गुरु के पदचिह्नों पर चलते हुए अपनी स्वतंत्र पहचान कायम किये हुए हैं। उन्होंने अपने विवेक प्रदीप्त मस्तिष्क से, विशाल परिकल्पना से श्रीमद् भागवत कथा के अन्तर्रहस्यों का उद्घाटन किया है। आपने जो अभूतपूर्व एवं अनूठी दिव्य दृष्टि प्रदान की है, जो भक्ति-ज्ञान का विश्लेषण तथा समन्वय, शब्द ब्रह्म के माध्यम से विश्व के सम्मुख रखा है, उस प्रकाश स्तम्भ के दिग्दर्शन में आज सारे इष्ट मार्ग आलोकित हो रहे हैं। आपके अनुपम शास्त्रीय पाण्डित्य द्वारा, न केवल आस्तिकों का ही ज्ञानवर्धन होता है अपितु नयी पीढ़ी के शंकालु युवकों एवं विशेषत: महिलाओं में भी धर्म और कर्म का भाव संचित हो जाता है।

पूज्या हेमलताजी का संपूर्ण जीवन जन-जन के कल्याण के लिए नियोजित है, भगवान श्री कृष्ण की भक्ति में सराबोर है, श्रद्धा, आस्था और समर्पण ही आदर्श संस्कृति का प्रेरक है और यही सब आपके जीवन का हार्द है। तेजस्वी व्यक्तित्व की धनी पूज्या हेमलताजी का प्रगतिशील सफर सीख देता है कि संकल्प जब भी करो, पूरी प्राणवत्ता के साथ करो। कोई विकल्प शेष न रह जाए। हमारा संकल्प सृजनशील संकल्प हो। न उसमें विचारों का आग्रह हो, न परम्पराओं का व्यामोह है, न सिद्धांतों की कट्टरता हो, न क्रिया में जड़ता हो। समय का हर पल पुरुषार्थ का नया इतिहास रचे। सफलता स्वयं उपलब्धि बने।  संकल्प के साथ जुड़ा हो ऊंचा लक्ष्य। आपका भविष्य मानवता के अभ्युदय का उजला भविष्य है। उससे जुड़ी है मानवीय एकता, सर्वधर्म समन्वय, सनातन धर्म के विकास की नई संभावना।

श्री राधाराणी और भगवान श्रीकृष्ण के लिए पूज्या हेमलताजी के सुन्दर भजन दिव्य वातावरण निर्मित करते हैं जिससे भक्त भगवान की साक्षात् उपस्थिति महसूस करना शुरू कर देता है। यह भीतर और आसपास दिव्यता के साथ उपस्थित हर आत्मा को प्रबुद्ध एवं भक्तिमय करता है। कथा चरित्रों को समझाने का उनका तरीका इतना आसान है कि हर एक व्यक्ति जीवन भर के लिए आसानी से याद कर सकता है। उनकी प्यारी आवाज, संगीतमय स्वरलहरियां, सरल शब्दावली हर किसी को अपने दिल में दिव्य भावना को अवतरित करने और कथा को सुनने में सहजता एवं सरलता का अहसास कराती है। अपनी अमृतमयी, धीर, गम्भीर-वाणी-माधुर्य द्वारा भक्ति रसाभिलाषी-भक्तों को, जनसाधारण एवं बुद्धिजीवियों को, भक्ति का दिव्य रसपान कराकर रससिक्त करते हुए, प्रतिपल निज व्यक्तित्व व चरित्र में श्रीमद् भागवत कथा के नायक श्रीकृष्ण एवं श्रीरामचरितमानस के ब्रह्म श्रीराम की कृपामयी विभूति एवं दिव्यलीला का भावात्मक साक्षात्कार कराने वाली पूज्या गुरु मां आधुनिक युग की परम तेजस्वी व्याख्याकार एवं कथावाचक हैं।

 

ललित गर्ग

 

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