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प्रधानमंत्री ने लाल किले से किया ‘जल जीवन मिशन’ का एलान

प्रधानमंत्री ने लाल किले से किया ‘जल जीवन मिशन’ का एलान

बीते कुछ सालों में देश के कई हिस्सों में पानी का ग्राउंड लेवल काफी नीचे गया है, जिसने हर किसी की चिंता को बढ़ाया है. देश में 254 ऐसे ज़िले हैं, जहां भूमिगत जल का स्तर चिंताजनक स्तर तक पहुंच गया है. देश के 73वें स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जब लाल किले से देश को संबोधित किया, तो उनकी नज़र भविष्य के उस संकट पर भी थी जिसने अभी से अपना असर दिखाना शुरू कर दिया है. आज आज देश में आधे से अधिक घर ऐसे हैं जिनमें पीने का स्वच्छ पानी उपलब्ध नहीं है.

लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री ने घोषणा की कि आने वाले दिनों में जल जीवन मिशन को लेकर आगे बढ़ेंगे. जिसके लिए सरकार साढ़े तीन लाख करोड़ से भी ज़्यादा खर्च करेगी. जल जीवन मिशन के इस अभियान में वर्षा के पानी को रोकने, माइक्रो इरिगेशन को बढ़ावा देने, जल संरक्षण, आम लोगों को जागरुक करने जैसे क़दम शामिल हैं. देश भर में उभरे जल संकट का सामना करने के लिए केंद्र सरकार ने पहले ही क़मर कस ली है. ‘जल शक्ति’ मंत्रालय का गठन, रेनवॉटर हार्वेस्टिंग, और वाटर मैनेजमेंट जैसे क्षेत्रों के लिए पहले ही कई क़दम उठाए जा चुके हैं.

पर्यावरण की चिंताओं पर निगाह रखते हुए, पीएम ने देश से अपील की कि वो आज से ही एक बार ही इस्तेमाल होने वाले प्लास्टिक और पॉलीथीन के इस्तेमाल बंद करें और अगले दो अक्टूबर, यानी बापू के जन्म जयंती तक प्लास्टिक के कचरे को अपने आस-पास से साफ करना सुनिश्चित करें. लाल किला इस बार गवाह बना भविष्य में खड़े होने वाले संकटों से जूझने की तैयारी के जज्बे का, ख़ासकर वो मुद्दे जो जुड़ते हैं सीधे आम लोगों से.

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