ब्रेकिंग न्यूज़

फैनी का कहर

फैनी का कहर

अभी हाल में ओडिशा में आये भयानक तूफान फैनी  के कारण 34 लोगों की मृत्यु हो गयी।  फैनी  से प्रभावित लोग अपने जीवन को एक बार फिर पटरी पर लाने के लिए अपना पूरा प्रयास कर रहे हैं। इस विपदा की घड़ी में समाज के विभिन्न क्षेत्रों से आने वाले लोग ओडिशा के पुनर्निमाण में अपना सहयोग दे रहे हैं। यहां यह बताना आवश्यक है कि भारतीय मौसम विभाग ने  पहले ही इस चक्रवाती तूफान की चेतावनी लोगों को दे दी थी, जिससे लोगों में भय का माहौल उत्पन्न हो गया था। लेकिन प्रमुख बात यह कि  केंद्र और राज्य सरकार की उनके द्वारा फैनी तूफान से निपटने के लिए पहले से की गई तैयारियों के लिए  प्रशंसा की जानी चाहिए। क्योकि दोनों सरकारों के इस प्रशंसनीय प्रयास से कम से कम जान-माल का नुकसान हुआ। यह एक बड़ी प्राकृतिक आपदा थी इसलिए राजनीति को अलग रखते हुए पूरे  देश से लोगों ने में पूरा सहयोग दे कर मानवता की मिसाल पेश की। केंद्र ने ओडिशा की सरकार को 1341 करोड़ रुपये का सहयोग दिया। महाराष्ट्र, गुजरात, छत्तीसगढ़ उत्तरप्रदेश, तमिलनाडु और केरल की सरकारों ने मुख्यमंत्री नवीन  पटनायक को राहत और बचाव कार्यो में पूरा सहयोग देने  का आशवासन दिया है। यहां यह कहना महत्वपूर्ण है कि शहरी विकास मंत्रालय द्वारा निर्धारित मॉडल बिल्डिंग बाईलॉज के अनुसार देश के तटीय राज्यों के बड़े शहरो में होने वाले निर्माण कार्य नहीं किया गया है और इसका परिणाम हमें पुरी और भुवनेश्वर में देखने को मिला।  इसका मुख्य कारण नियामक और अनुपालन तंत्र  का न  होना है। जैसा की मानसून अब निकट है, अत: ओडिशा की सरकार को जल्द से जल्द चक्रवाती तूफान फैनी से प्रभावित लोगों के रहने के लिए बर्बाद हो चुके घरों का पुनर्निर्माण करना होगा। और इन घरों के निर्माण की गुणवत्ता ऐसी हो जो फैनी जैसे  तूफान को झेल सके। इसके कार्यान्वयन के लिए  सरकार को आपदा प्रबंधन के  सन्दर्भ में एक समग्र और एकीकृत दृष्टिकोण अपनाना होगा नियंत्रण और संतुलन के साथ।

इस पृष्टभूमि में नेशनल पॉलिसी डिजास्टर मैनेजमेंट के अनुसार भारत प्राकृतिक आपदाओं के साथ-साथ मानव निर्मित आपदाओं के प्रति संवेदनशील जगह है। भारत की  58.6 प्रतिशत भूमि पर तीव्र भूकंप की आशंका बनी रहती  है। भारत की 40 मिलियन हेक्टेयर भूमि  बाढ़ और कटाव से प्रभावित है। साढ़े सात हजार किलोमीटर लम्बे समुंद्र तट में से 5700 किलोमीटर तट पर सुनामी और चक्रवात का खतरा बना रहता है। 68 प्रतिशत भूमि पर सूखे का खतरा है। पहाड़ी क्षेत्रो में भूस्खलन तथा हिमस्खलन का खतरा बना रहता है। इस आपदा की स्थिति में आर्थिक और सामाजिक रूप से कमजोर लोगों को काफी संघर्ष करना पड़ता है। इन सभी को ध्यान में रखते हुए 23 दिसंबर 2005 को भारत सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट 2005 को पारित किया जिसके तहत प्रधानमंत्री के अंतर्गत आने वाली नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी, मुख्यमंत्री के अंतर्गत आने वाली स्टेट डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी तथा डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर के अंतर्गत आने वाली डिस्ट्रिक्ट डिजास्टर मैनेजमेंट का निर्माण किया। तब सरकार ने यह दावा किया कि इसके बाद आपदा में होने बाला जान-माल का नुक्सान काम हो जाएगा। लेकिन फैनी  से पहले कुछ वर्षों में आई प्राकृतिक आपदाओं को देखें तो उस समय की  सरकारें प्राकृतिक आपदाओं से लोगों को बचाने में विफल रहीं। जबकि इस बार आईएमडी द्वारा दी गई चेतावनी को समझदारी पूर्वक लेते हुए दोनों राज्य और केंद्र की सरकारों ने उचित कदम उठाये जिससे हजारो लोगो की जान बचाई जा सकी। इसलिए, यह उल्लेखनीय है कि सरकार द्वारा लिए गए शीघ्र और प्रभावी प्रतिक्रिया से जीवन और संपत्ति के नुकसान को कम किया जा सका, जो की काफी महत्वपूर्ण था। यहां इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि  वर्तमान संस्थाओं के बीच इस प्रकार की त्रासदी से निपटने के लिए आापसी तालमेल की काफी आवश्यकता है। और यह समकालीन पूर्वानुमान और प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों और विशेष प्रतिक्रिया बलों की अग्रिम तैनाती के माध्यम से संभव है। अत: जानकारी से परिपूर्ण समुदाय फैनी जैसे चक्रवाती तूफान और दूसरी प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले प्रभाव को कम करने में सफल हो सकते है।

Deepak Kumar Rath

 दीपक कुमार रथ

(editor@udayindia.in)

 

Leave a Reply

Your email address will not be published.