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बाल योगेश्वर प्रेम रावत महाराजी: शांति के राजदूत का विलक्षण कार्य

बाल योगेश्वर प्रेम रावत महाराजी: शांति के राजदूत का विलक्षण कार्य

धर्म एवं अध्यात्म जगत के इतिहास में श्री प्रेम रावत इन शताब्दियों का एक दुर्लभ बहुआयामी व्यक्तित्व हैं। जिन्हें बाल योगेश्वरजी एवं महाराजी के नाम से भी जाना जाता है एवं शांति के राजदूत के रूप में उनकी पहचान है। उनकी जीवनगाथा दुनिया की आध्यात्मिक चेतना का एक अभिनव उन्मेष है। शांति एवं अमन के संदेश को लेकर उन्होंने जो उपक्रम किये हैं, वह एक कालजयी अभिलेख है। उनकी जीवनगाथा आश्चर्यों की वर्णमाला से आच्छादित अभिनव अमिट आलेख है। जो सम्पूर्ण मानवता को नये उच्छवास, नई प्रेरणा और नई प्रकाश शक्ति का अनुभव कराता है।

प्रेम रावतजी का जन्म 10 दिसम्बर 1957 को हरिद्वार, (उत्तर प्रदेश) में हुआ। एक विश्वविख्यात आध्यात्मिक गुरु, लेखक, विचारक, समाज-सुधारक एवं शांतिदूत है। प्रख्यात आध्यात्मिक गुरु हंसजी महाराज इनके पिता एवं राजेश्वरी देवी आपकी मातुश्री हैं। वे उनके सबसे युवा पुत्र हैं, जो दिव्य सन्देश परिषद् के संस्थापक हैं जिसे की बाद में डीवाइन लाइट मिशन या डी.अल.एम.के नाम से जाना गया। इनके पिता के स्वर्गवास के बाद 8 वर्ष की उम्र के रावत सतगुरु (सच्चा गुरु) बन गए। 13 वर्ष की उम्र में रावत ने पश्चिम की यात्रा की और उसके बाद यूनाइटेड स्टेट्स में ही उन्होंने अपना स्थायी निवास बना लिया। अपने पिता और गुरु श्रीहंस जी महाराज के लिए आयोजित कार्यक्रमों में उन्होंने तीन साल की उम्र से ही प्रवचन शुरू कर दिया था। 4 वर्ष की उम्र में दिया गया उनका प्रवचन पहली बार प्रकाशित हुआ, जुलाई 1966 में जब वे 8 वर्ष के थे तो उन्होंने शान्ति के इस संदेश को विश्व में जन-जन तक पहुंचाने की जिम्मेवारी संभाली।

प्रेम रावतजी ने पूरे भारतवर्ष में जगह-जगह आयोजित कार्यक्रमों में लोगों को संबोधित किया। लोग उनसे आकर्षित होने लगे और उन्हें ‘बाल योगेश्वर जी’ के नाम से जानने लगे। 13 वर्ष की उम्र में उन्हें लंदन और लॉस-एंजेलेस में प्रवचन के लिए आमंत्रित किया गया, और तभी से उनकी विदेश यात्राओं का सिलसिला शुरू हो गया। उसके बाद उन्हें लगभग हर देश से प्रवचन के आमंत्रण आने लगे। रावत ने विश्व के 90 से अधिक देशों और 300 से अधिक शहरों में लोगों को संबोधित किया है। पूरी दुनिया के अनेक विश्वविद्यालयों और सामाजिक संगठनों द्वारा उन्हें नियमित रूप से आमंत्रित किया जाता है। उनके संदेश का अनुवाद 70 भाषाओं में किया गया है जिसे 100 से भी ज्यादा देशों में उपलब्ध कराया जाता है। व्यष्टि एवं समष्टि के हित के लिये वे सर्वतोभावेन समर्पित हैं। उन्होंने धरती का भगवान बनकर मानव मन के ताप, संताप और संत्रास का हरण किया है। मानव को सौहार्द एवं शांतिपूर्ण जीवन जीने की कला सिखाई हैं। उनके जीवन की वे उपलब्धियां हैं, जो चिरकाल तक अशांत एवं तनावग्रस्त मनुष्यों के लिये वरदान तुल्य बनी हैं। शांति एवं ज्ञान यात्रा का युगांतकारी अभिक्रम उनकी दूरदर्शिता एवं क्रांतदृष्टि का जीवंत प्रमाण है।

श्री प्रेम रावत महाराजी को उनके महान शांति एवं मानव कल्याणकारी कार्यों के लिए संसार के कई देशों में सम्मानित किया गया है। उनको पिछले तीन दशकों से उनके इन सुन्दर कार्यों के लिए विश्वभर के अनेक देशों में ख्याति मिली है, कई राष्ट्रीय व राजकीय सरकारों ने महाराजी को अधिकारिक सम्मान व प्रशंसा पत्र प्रदान किया है। सम्मानपूर्वक उन्हें विश्व के कई शहरों की चाबियां (Key of the city) भेंट की गयीं हैं।

‘प्रेम रावत फाउंडेशन’ महाराजी द्वारा स्थापित मानवीय संस्था है, जो लोगों के जीवन में प्रतिष्ठा, शान्ति, और समृद्धि लाने के लिए निरंतर प्रयासरत है। यह संस्थान 27 देशों में सक्रिय रूप से लोगों को पौष्टिक भोजन, स्वच्छ पानी, आश्रय और मुफ्त चिकित्सा उपलब्ध कराती है। इस संस्थान का मुख्य लक्ष्य जरूरतमंद लोगों के जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बनाने में मदद करने का है। भारत में भी उसके द्वारा नियमित रूप से मुफ्त चिकित्सा शिविरों का आयोजन किया जाता है। अंधमुक्ति के लिये फाउंडेशन के उपक्रम प्रेरक एवं अनूठे हैं। कई वैश्विक संस्थाएं जैसे संयुक्त राष्ट्र संघ, वल्र्ड फूड प्रोग्राम आदि की साझेदारी में इसने सामाजिक, धर्मार्थ और परोपकारी कार्यक्रमों में लोगों की मदद की है। युद्धग्रस्त इलाकों में यह संस्था शरणार्थियों को प्राथमिक चिकित्सा उपलब्ध कराती है। जिन देशों की व्यवस्था प्राकृतिक आपदाओं से तबाह हो गयी है, वहां फाउंडेशन कुशलतापूर्वक लोगों की आर्थिक रूप से सहायता करती है। फाउंडेशन के अन्य उत्कृष्ट मानवीय संगठनों के साथ मजबूत गठजोड़ हैं। मुख्य रूप से फ्रेंड्स ऑफ द वल्र्ड फूड प्रोग्राम, द रेड क्रॉस, द हौस्टों फूड बैंक, एक्शन अगेंस्ट हंगर और ओक्सफाम आदि हैं। वल्र्ड फूड प्रोग्राम की सहायता करते हुए इसने एक महीने के लिए 9000 इन्डोनेशियाई सुनामी पीडि़तों, नाइजर में 2000 अकाल पीडि़तों, ग्वाटेमाला में 4500 स्कूली बच्चों, पाकिस्तान के 6000 और पेरू के हजारों भूकंप पीडि़तों को भोजन उपलब्ध कराया है। रेड क्रास के माध्यम से, इस फाउंडेशन ने फिलीपींस भू-स्खलन पीडि़तों के लिए खाद्य सहायता प्रदान की और ओक्सफाम के माध्यम से इसने लेबनान और इसराइल में युद्ध पीडि़तों को पीने का पानी उपलब्ध कराने के लिए मदद की। द हौस्तों फूड बैंक के माध्यम से इसने तूफान कैटरीना की 8000 पीडि़तों के लिए प्रतिदिन तीन भोजन, तीन महीने तक प्रदान किया। ‘फूड फॉर पीपुल’ पहल की स्थापना महाराजी ने भारत, नेपाल और कुछ अन्य देशों में की। इसके तहत यहां के लोगों को दिन में दो बार पौष्टिक भोजन दिया जाता है।

सुप्रसिद्ध विद्वान आदम क्ले ने लिखा है कि धर्म एवं अध्यात्म निष्क्रियता नहीं सिखाता। न ही वह जो कुछ हो रहा है, उसे देखते, करते, सहते रहने की प्रेरणा देता है। इसीलिये    महाराजी के शान्ति और आशा के संदेश का प्रसार करने के उत्सुक व्यक्तियों ने ‘राज विद्या केंद्र’ की स्थापना की। यह संस्था महाराजी के शांति-संदेश को भारतीय उपमहाद्वीप के हर एक व्यक्ति को उपलब्ध कराने के लिए समर्पित है। यद्यपि उनका धर्म शांति का प्रतिष्ठान है, शांति का स्रोत है, लेकिन शांति का अर्थ मात्र चुपचाप बैठे रहना नहीं है। कर्तव्य एवं प्रगति से मुंह मोड़ लेने का संबंध धर्म-दर्शन या अध्यात्म से जोडऩा भ्रम है, अज्ञान का परिचायक है। इसलिये इस अज्ञान को दूर करने के लिये हर दिन, केरला से लेकर कश्मीर तक और आसाम से लेकर कर कर्नाटक तक, हजारों स्वयंसेवक भारत के विभिन्न राज्यों के 3700 केन्द्रों में महाराजी के संदेश को विभिन्न माध्यमों से पहुंचाते हैं। महाराजी ने कहा है कि ‘हर जीते जागते मनुष्य के अन्दर कुछ अद्भुत घटित हो रहा है। हर मनुष्य के हृदय में वह परम सुन्दरता, शान्ति व आनंद का अनुभव मौजूद है। मैं लोगों को उससे साक्षात्कार कराने के लिये ही तत्पर हूं। मेरे लिए हर मनुष्य पूर्ण है। सभी के अन्दर वो सूर्य रूपी उजाला चमक रहा है जो गुप्त अंधेरे को बाहर फेंक सकता है। मैं लोगों के सामने ये प्रस्ताव रखता हूं कि तुम्हारे अंदर भी वह जगह है जहां तुम शान्ति का अनुभव कर सकते हो। मुझे लगता है ये एकमात्र ऐसा संदेश है जिसकी इस संसार को, हर एक व्यक्ति को बहुत जरूरत है। मेरा संदेश सिर्फ शब्दों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि मैं आपके भीतर छिपे शांति एवं शक्ति के खजाने से रू-ब-रू कराना चाहता हूं। जहां कुछ लोग केवल उनका संदेश मात्र सुनने से संतुष्टि महसूस करते हैं, वहीं कुछ लोग अपने जीवन में उस शान्ति का अनुभव स्वयं करने की इच्छा जाहिर करते हैं। उन्होंने युगीन अपेक्षा को समझा और इसकी संपूर्ति के लिये ज्ञान की यात्रा का एक सम्पूर्ण कार्यक्रम प्रस्तुत किया, जो वास्तव में स्वयं को खोजने की यात्रा है।

शांति एवं अध्यात्म के महान् प्रवक्ता प्रेमजी रावत मनुष्य को अच्छा मनुष्य बनने की प्रेरणा देते हुए शांति, अहिंसा एवं मैत्री की धाराएं प्रवाहित कर रहे हैं। धार्मिक सहिष्णुता, साम्प्रदायिक सद्भावना एवं शांति-स्थापना का स्वस्थ वातावरण निर्मित कर वे मानवीय एकता की दिशा में विलक्षण कार्य कर रहे हैं।

 

ललित गर्ग

 

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