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बॉलीवुड की सांस : श्रीदेवी

बॉलीवुड की सांस : श्रीदेवी

पायल की छमा-छम अब शांत है। अदाकारी में डूब जाने वाली वह नायिका मौन हो गई। पूरा देश सन्न रह गया कि बॉलीवुड की कल की नृत्य रानी अब नहीं रही। हिंदी सिनेमा की वह पहली सुपरस्टार हमेशा ही खिलखिलाती, मुस्कुराती अपनी अदाओं से जादू बिखेरती करोड़ों दिलों पर राज करती रही मगर उतनी ही गंभीर और संजीदा भी थीं। कैमरे के सामने तो वे ऐसे खिल उठती थी, जिसकी बराबरी शायद और कोई नहीं कर सकता। लेकिन असली जिंदगी में, बकौल रामगोपाल बजाज, ”वे मानो किसी पिंजरे में कैद थीं।’’ वे फिल्मोद्योग में लंबे समय तक शीर्ष पर रहीं। आज पूरा मीडिया और सोशल मीडिया उनकी रहस्यमय मौत को लेकर तरह-तरह की अटकलों से अटा पड़ा है। यकीनन बॉलीवुड की नृत्य देवी श्रीदेवी ऐसी प्रतिभा की धनी थीं कि उनसे कई पीढिय़ां प्रेरणा ले सकती हैं। अपने निजी जीवन में ऊंच-नीच के बावजूद उन पर कभी नाउम्मीदी हावी नहीं हुई। श्रीदेवी के लिए तो उनका जीवन ही फिल्मों के लिए था और फिल्में ही उनकी जिंदगी थीं। वे सिनेमा के लिए ही जीयी और मरीं। उनका नाम हमेशा स्वर्ण अक्षरों में लिखा जायेगा। बॉलीवुड में उनका हमेशा शानदार कॅरियर रहा लेकिन कथित तौर पर निजी जिंदगी हलकान सी रही।

श्रीदेवी बेमिशाल अदाकारा थीं, जो अपनी हर अदा से लोगों का ध्यान खींच लेती थीं। उन्होंने अपने कॅरियर की शुरुआत 1969 में बाल कलाकार के तौर पर की थी, लगभग उसी साल अमिताभ बच्चन ने ‘सात हिंदुस्तानी’ में अपनी फिल्मी पारी की शुरुआत की। लेकिन इस बेहद छोटेपन में शुरुआत, श्रीदेवी कॅरियर में कोई बाधा नहीं बनी। अपने पांच दशकों के कॅरियर में उन्होंने 300 से ज्यादा फिल्में कीं। अनेक फिल्मों में काम करने के साथ वे अपनी तरह-तरह की भूमिकाओं के लिए भी याद की जाएंगी। उन्होंने शिवाजी गणेशन से लेकर नवाजुद्दीन सिद्दीकी तक कई पीढिय़ों के हीरो के साथ काम किया। वे शायद एकमात्र अभिनेत्री हैं जिन्होंने असली जिंदगी में पिता-पुत्र धर्मेंद्र और सन्नी देओल दोनों की हीरोइन की भूमिका निभाई।

हालांकि महज छह साल की उम्र से ही फिल्मों में शुरुआत करने से उनका बचपन भी बचपने को तरश गया होगा। उन्होंने पहली व्यस्क सितारे के तौर पर 13 वर्ष की उम्र में कमल हासन और रजनीकांत के साथ के. बालचंदर की फिल्म मूंद्रु मूडिचा में अभिनय किया। बालचंदर के अलावा उन्होंने नामधारी फिल्मकारों भारती राजा और बालू महेंद्र के साथ भी काम किया। वे सोलहवां सावन और सदमा जैसी हिंदी फिल्मों में उतरीं तो बॉलीवुड की नजर उन पर पड़ी। यह माना जाता है कि उनका काम हिंदी सिनेमा के बजाए दक्षिण की फिल्मों में अधिक खुलकर निखरा था। किसी दूसरी हीरोईन का तमिल और हिंदी फिल्मों में एक जैसा असर नहीं रहा। श्रीदेवी इस मामले में विरली थीं कि उन्होंने बचपन से ही अपने परिवार का भरण-पोषण शुरू कर दिया था। बोनी कपूर से उनकी शादी की खुशी उनके चेहरे से भी जाहिर होती रही। हालांकि समय के साथ हर शादी की अपनी कुछ दिक्कतें होती हैं। हम नहीं कह सकते कि उनकी निजी जिंदगी में क्या चलता रहा है। यह बेहद दुखद है कि वे अपनी बेटी की फिल्मी कॅरियर की शुरुआत से पहले ही चल बसीं। अब दोनों बेटियों जान्ह्वी और खुशी को मां के बिना ही जिंदगी में आगे बढऩा होगा।

उनकी असमय मौत से दुनिया भर में उनके फैन और प्रशंसकों को सदमा लगा है। लेकिन अपने पीछे सवाल भी खड़े किए हैं। मसलन, उनके पति बोनी कपूर ने बाथरूम का दरवाजा तोडऩे के पहले होटल में किसी को आवाज क्यों नहीं लगाई या मेडिकल मदद की मांग क्यों नहीं की? अंदाजा यही लगाया जा सकता है कि उस समय श्रीदेवी के साथ कमरे में एकमात्र बोनी कपूर ही थे! क्या होटल के मैनेजर या बोनी कपूर ने एंबुलेंस बुलाई? क्या बेहोश श्रीदेवी को बाथ टब में या होटल के कमरे में फस्र्ट एड मुहैया कराई गई? श्रीदेवी के शरीर को बाथ टब से किसने निकाला? क्या श्रीदेवी ने शॉवर लेने के पहले को मादक पेय या शराब का सेवन किया था? क्यों युएई के स्वास्थ्य मंत्रालय को ब्लड रिपोर्ट नहीं दिखाई गई? क्या बेहोश श्रीदेवी को होटल से अस्पताल ले जाने के पहले या उसके साथ बोनी कपूर या होटल के किसी ने पुलिस को फोन किया? बोनी कपूर का वह कौन दोस्त है जिसे उन्होंने फोन किया? किसने बाथटब को पानी से पूरा भरा? अगर श्रीदेवी ने थोड़ी सी शराब पी थी तो वे बेहोश कैसे हो गईं? क्यों यह दुबई में ही हुआ? क्या इसलिए कि अपराध करने के बाद दोषी का भाग जाना आसान था? यह सब कुछ शादी के बाद ही क्यों हुआ? क्या इसलिए कि ऐसी ही योजना बनाई गई थी? अगर श्रीदेवी नशे में थीं तो उनके पति डिनर के लिए बाहर क्यों ले जाना चाहते थे, आखिर वे हालात जानते थे और उनसे आराम करने को कह सकते थे? यह भी हैरान करता है कि यूएई के स्वास्थ्य मंत्रालय ने डूबने से मौत बताया!

बहरहाल, श्रीदेवी लेागों के दिलों पर राज करने वाली सितारा थीं और राजकीय सम्मान से उन्हें अंतिम विदाई दी गई, इसलिए लोगों को ये सब सवाल पूछने का भी हक है। यह मौत भी दिल्ली के होटल के कमरे में सुनंदा की मौत की तरह हैरान कर गई, जो 2014 में बाथटब में मरी पाई गई थीं। उस वक्त भी रिपोर्ट यही कहती रही कि यह डूबने का हादसा है। सो, धुआं तो उठ रहा है। सुनंदा की तरह ही श्रीदेवी भी बेहद धनी थीं। पहले कार्डियक एरेसट और डूबने से मौत, कहीं तो संदेह उभरता ही है। अब जांच से ही इस राज से पर्दा उठेगा।

दीपक कुमार रथ

दीपक कुमार रथ

 

 

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