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ब्रह्मर्षि श्री कुमार स्वामीजी: आध्यात्मिक शक्ति एवं सिद्धियों से सम्पन्न संत

ब्रह्मर्षि श्री कुमार स्वामीजी: आध्यात्मिक शक्ति एवं सिद्धियों से सम्पन्न संत

आधुनिक भारत के आध्यात्मिक क्षितिज पर ऐसे अनेक संतों, धर्मगुरुओं एवं मनीषियों का वर्चस्व देखने को मिल रहा है, जिन्हें उनके श्रद्धालु एवं अनुयायी चमत्कारी एवं सिद्ध मानते हैं। आश्चर्यजनक आध्यात्मिक शक्ति एवं सिद्धियों से सम्पन्न ऐसे संतों की श्रृंखला में एक नाम है परम पूज्य ब्रह्मर्षि श्री कुमार स्वामी का। वे इस कलियुग में कुछ दुर्लभ महान पुरुषों में से हैं, जो आध्यात्मिक साधना के साथ-साथ सार्वजनिक कल्याण के लिए काम करने के लिए जाने जाते हंै। इस तरह की दुर्लभ शक्तियों को प्राप्त करने के लिए उन्होंने हिमालय की गुफाओं में गहन ध्यान साधना का अभ्यास किया है और वर्तमान में भी वे ऐसी साधना के लिये उन जगहों पर जाते हैं। उन्होंने गहन साधना से ऐसे बीज मंत्रों को निर्मित किया है, जिससे वे गहन एवं गंभीर बीमारियों एवं कष्टों का निवारण करते हैं।

पूज्य ब्रह्मर्षि श्री कुमार स्वामी का जन्म एक ग्रामीण किसान परिवार में 22 जनवरी 1954 हुआ था। उनका वास्तविक नाम के. के. नागपाल था। बारह वर्ष की आयु में, उन्होंने अपनी आध्यात्मिक यात्रा शुरू की और उसी समय से आज तक वे कई प्रमुख भारतीय संतों जैसे विश्वनाथ बाबा, निरंकारी बाबा, माता आनंदमयी, योगी स्वामी रामदेव, ओशो, जे. कृष्णमूर्ति, देवरिया बाबा, पथिकजी महाराज, कुंज बाबा, हरिहर बाबा, इत्यादि लोगों से मिलते रहे हैं। उनको ऋग्वेद और अथर्ववेद ग्रंथों का गहन ज्ञान है। उनके अनुसार इन ग्रंथों के मंत्रों के माध्यम से वे लोगों को कष्टों से मुक्ति दिलाते हैं। ऐसा कहा जाता है कि अपनी तथाकथित शक्तियों के माध्यम से उन्होंने प्राचीन विज्ञान के रहस्यों को उजागर किया है। जिसका लाभ उनके असंख्य अनुयायियों को मिल रहा है। कुछ लोगों को उनकी इन आध्यात्मिक शक्तियों पर संदेह है, कुछ विवाद की स्थितियों भी समय-समय पर खड़ी होती रही है, लेकिन श्री कुमार स्वामी अपने मिशन एवं उपक्रमों में अनवरत सक्रिय हैं।

पूज्य ब्रह्मर्षि श्री कुमार स्वामी देश एवं दुनिया में अपने समागम आयोजित करते हैं, जिनमें अपने शिष्यों एवं भक्तों को दुनिया के सभी धर्मों के गूरू  ज्ञान के आधार पर शारीरिक, मानसिक, वित्तीय, पारिवारिक और मनोवैज्ञानिक समस्याओं के समाधान देकर कृपा बरसाते हैं। यह दैवीय वैश्विक कृपा दुनिया के विभिन्न धर्मों की पवित्र पुस्तकों से दिव्य पाथ पर आधारित है। उनके मुताबिक, ये रहस्य और दिव्य मंत्र सभी धर्मों की पवित्र पुस्तकों में छिपे हुए हैं। ये अन्य धर्मों में भी मौजूद हैं लेकिन इन गुप्त मंत्रों के बारे में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि वे पवित्र पुस्तकों में कई टुकड़ों में छिपे हुए हैं और उन्हें सामान्य आंखों के माध्यम से ढूंढना असंभव है।

पूज्य ब्रह्मर्षि श्री कुमार स्वामी ने भगवान श्री लक्ष्मीनारायण धाम के रूप में एक धर्मार्थ संगठन स्थापित किया है, जिसकी भारत, यूएसए, कनाडा और ब्रिटेन में शाखाएं हैं और इन देशों में भव्य सेंटर संचालित हो रहे हैं। भारत में दिल्ली, पंजाब, महाराष्ट्र, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, उत्तरांचल, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश, गुजरात आदि जैसे विभिन्न राज्यों में केंद्र हैं। भगवान श्री लक्ष्मीनारायण धाम एक मिशन है, एक आध्यात्मिक एवं रचनात्मक आन्दोलन है, जिसका मुख्य ध्येय मानव जाति को बेहतर रहने में मदद करना है और भगवान के साथ उन्हें जोड़कर तनाव मुक्त जीवन प्रदत्त करना है। यह संगठन लोगों से सीधे जुड़कर उनकी हर तरह की समस्याओं के समाधान का मार्ग प्रस्तुत करता है। इस अनूठे एवं विलक्षण संगठन ने दुनियाभर के लाखों लोगों के दिल में पहले से ही बहुत प्रसिद्धि और सम्मान प्राप्त कर लिया है। यह धाम दुनिया का असाधारण आध्यात्मिक संस्थान है। यह इस तथ्य पर आधारित है कि इस संस्थान द्वारा व्यवस्थित सभी गतिविधियों में एक दिव्य विज्ञान प्रकट होता है जिसके माध्यम से सार्वजनिक कल्याण का वास्तविक चरित्र प्रकट होता है। यह अध्यात्म एवं विज्ञान केे समन्वय का एक बेजोड़ उदाहरण है।

पूज्य ब्रह्मर्षि श्री कुमार स्वामी को उनकी उल्लेखनीय मानव कल्याणकारी सेवाओं एवं उपक्रमों के लिये विभिन्न देशों द्वारा कई पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है। जिसके चलते उन्होंने भारत सरकार में स्वास्थ्य, श्रम और उद्योग मंत्रालयों के सलाहकार के रूप में भी कार्य किया। भारत सरकार द्वारा भगवान श्री धनवंतरी पुरस्कार, डॉ. राजेंद्र प्रसाद पुरस्कार, अरुणा आसफ अली पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया है। भारत के वर्तमान राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद भी आपके शिष्य हैं। कोविंदजी सहित देश-दुनिया की अनेक राजनीतिक, आर्थिक, वैज्ञानिक हस्तियां समय-समय पर उनके विभिन्न सम्मेलनों में शामिल होते रहे हैं। जुलाई 2010 में, न्यूजर्सी राज्य (संयुक्त राज्य) के सीनेट और महासभा ने उन्हें एक उच्च आध्यात्मिक ऋषि के रूप में भी सम्मानित किया गया है। 2 मई, 2011 को न्यूयॉर्क राज्य के सीनेट ने उनके सम्मान में एक प्रस्ताव पारित कर सम्मानित किया। जिसके अंत में उन्होंने सीनेट को संबोधित भी किया। उन्हें यूनाइटेड किंगडम संसद द्वारा भी सम्मानित किया गया है।

पूज्य ब्रह्मर्षि श्री कुमार स्वामी को गहन आयुर्वेद का ज्ञान होने के कारण वे आयुर्वेद के चिकित्सक के रूप में भी प्रसिद्ध हैं। जिसके चलते उन्होंने एक चिकित्सक के रूप में भारत सहित विभिन्न देशों के  असंख्य लोगों की सेवा की। आधुनिक विज्ञान ने भी उनके प्रयोगों को स्वीकार्य किया है। बैंगलोर स्थित विज्ञान और प्रौद्योगिकी संस्थान की क्लीनिकल लैब में उनके विभिन्न प्रयोगों का परीक्षण किया गया। इन परीक्षणों में विशेषज्ञों एवं चिकित्सकों ने आश्चर्यजनक परिणाम पाये। जब पहली बार उनके प्रयोगों का परीक्षण उन्हीं पर किया गया तो वे गहरी ध्यान मुद्रा में लीन हो गए थे। उनकी किसी भी नाड़ी का पता नहीं चल रहा था परन्तु फिर भी उनकी धड़कन और मस्तिष्क की गतिविधियां सक्रिय थी। जिसके चलते चिकित्सकों द्वारा उनके शरीर को परिभाषित करना असम्भव हो गया था। उनके दूसरे परीक्षण के दौरान जब एक रोगी को स्वामीजी के समक्ष लाया गया तो उन्होंने रोगी के चिकित्सा के इतिहास को जाने के बिना ही चिकित्सा संबंधी समस्याओं का निदान कर दिया था। उनके अनुयायियों के अनुसार ”स्वामीजी के पास इतनी क्षमता है कि मात्र फोन पर बात करने से ही बीमारियों का निदान कर सकते हैं।’’ इसके चलते विभिन्न चैनल पर उनके लाइव टीवी कार्यक्रम के माध्यम से लाखों लोगों ने उनकी अद्भुत शक्ति को देखा।

पूज्य ब्रह्मर्षि श्री कुमार स्वामी ने वैज्ञानिक रूप से प्राचीन पारंपरिक विज्ञान के रहस्यों के परिणामों की जांच के लिए और असाध्य रोगों का इलाज करने के लिए प्रमुख चिकित्सकों और चिकित्सा वैज्ञानिकों की एक शोध टीम के साथ एक मेडिकल ब्यूरो की स्थापना की। इस मेडिकल ब्यूरो की गतिविधियों को विस्तृत करने एवं उनके नियोजित संचालन के लिये पंजाब में एक केन्द्र स्थापित किया जा रहा है, जिसमें वहां की सरकार भी सहयोग कर रही है।

श्री कुमार स्वामी प्राचीन पारंपरिक विज्ञान एवं धार्मिक रहस्यों के सिद्धांतों के आधार पर सभी के अच्छे स्वास्थ्य, धन और खुशी के लिए दुनियाभर में लगभग 500 और भारत के विभिन्न राज्यों में प्राचीन पारंपरिक विज्ञान सम्मेलनों का आयोजन किया है। जिसमें विभिन्न देशों के राष्ट्रपतियों, मुख्यमंत्रियों, राज्यपालों, कैबिनेट मंत्रियों, उद्यमियों, नौकरशाहों और कई प्रसिद्ध हस्तियों ने भाग लिया है। उनके द्वारा विभिन्न जन कल्याणकारी गतिविधियां जैसे कि धर्मार्थ दवाखाने, रक्तदान शिविर, चिकित्सा जांच शिविर, दवाइयों का नि:शुल्क वितरण, इत्यादि भी की जाती हैं।

पूज्य ब्रह्मर्षि श्री कुमार स्वामी महान् विचारक एवं समाज सुधारक भी हैं। उनके उपदेश एवं प्रवचन प्रयोग पर आधारित हैं। उनका मानना है कि किसी भी व्यक्ति ने जो कुछ हासिल किया है, जो कुछ बनाया है, प्राप्त किया है, वह प्रभु कृपा का महाप्रसाद है। श्री कुमार स्वामीजी का मानना है कि कोरी धार्मिक वार्ताओं से लोगों का जीवन शांतिपूर्ण नहीं होगा। वर्तमान में, विज्ञान सत्य और सबूत पर आधारित है। आधुनिक संत केवल विश्वास, भक्ति, चमत्कार के बारे में प्रचार करते हैं। जब तक वे सबूत आधारित समाधान प्रदान नहीं करते हैं, तब तक लोगों का कल्याण नहीं होगा और लोगों की आस्था भी नहीं जगेगी। अर्जुन भगवान श्रीकृष्ण के शब्दों को तब तक समझ नहीं पाया जब तक कि उन्होंने केवल उन्हें उपदेश दिया। लेकिन जब भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें अपना विशाल वास्तविक स्वरूप दिखाया तो वह उन्हें समझ सका था। श्री कुमार स्वामीजी की साक्ष्य आधारित मान्यता यह है कि भगवान के लिए प्रेम और भक्ति नहीं होगी जब तक कि कोई भी शारीरिक, मानसिक और वित्तीय समस्याओं से मुक्त न हो। वे कहते हैं, यदि कोई व्यक्ति बीमारियों से पीडि़त है या कोई मानसिक समस्या या ऋण है तो उसके जीवन में भक्ति की जोत कैसे जगेगी? श्री कुमार स्वामीजी ऐसे ही दिव्य रहस्यों को उजागर कर रहे हैं, उन्होंने अपने गहन प्रेम और भक्ति के सहारे न केवल परम सत्ता से स्वयं साक्षात्कार किया बल्कि अपने भक्तों को भी उनसे मिलवाया और उनके जीवन को बदल दिया है। धन की कमी, व्यापार में हानि, अध्ययन में कठिनाई, दर्द, बीमारियों, समस्याओं और खगोलीय दोषों से पीडि़त कई लोगों को इन रहस्यों को प्राप्त करने के बाद नया जीवन मिला है।

 

ललित गर्ग

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