भाई हो तो भरत जैसा

भाई हो तो भरत जैसा

चित्रकूट में राम-भरत मिलाप नामक पुस्तक डॉ प्रमोद कुमार अग्रवाल द्वारा लिखी गई है। इस पुस्तक में रामकथा के महत्वपूर्ण प्रसंग का नाट्यरूप में प्रणयन है। यह घटना जहां भ्रातृप्रेम और त्याग का अद्वितीय आदर्श है; वहीं उससे राजधर्म के महान् सिद्धांत प्रस्फुटित हुए हैं। राम-भरत मिलाप के कथानक के माध्यम से राजधर्म का आदर्श सामान्य जन तक पहुंचाने का प्रयास किया गया है, जो कि चित्रकुट की पावन धरती से उपजा, जहां श्रीराम ने सीता एवं लक्ष्मण सहित अपने वनवास के बहुमूल्य प्राय: साढ़े बारह वर्ष व्यतीत किये।

चित्रकूट में राम-भरत मिलाप

लेखक             : डॉ. प्रमोद कुमार अग्रवाल

प्रकाशक            : विद्या विकास एकेडेमी

मूल्य                : ३०० रु.

पृष्ठ                 : १५९

इस नाट्य कृति का आकार छोटा रखा गया है, ताकि हमारे राजनेता भी अपने अत्यंत व्यस्त समय में से कुछ क्षण निकालकर इस कृति पर दृष्टिपात करें तथा आत्ममंथन करें एवं अपने राजधर्म का पालन करते हुए भारत को संसार के अग्रणी राष्ट्र की श्रेणी में ला खड़ा करें। यही तो राजा का राजधर्म होता है। वर्तमान परिवेश में लेखक ने रामायण की इस घटना को सामान्य जन तक पहुंचाने का प्रयास किया है। एक ओर इस कृति का स्वागत जहां भारतीय जनमानस द्वारा किया जाएगा, वहीं दूसरी ओर राजशासकों द्वारा भी। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह पुस्तक आज के स्वार्थी समाज को निस्वार्थ रूप से लोगों का भला करने के लिए प्रेरित करती है, जो काफी महत्वपूर्ण है। आशा है कि इस कृति का व्यापक रूप से पठन-पाठन तथा मंचन होगा। और यह कहना गलत नहीं होगा कि लोग इसे पढऩे में अपनी रूचि दिखायेंगे।

उदय इंडिया ब्यूरो

 

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