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भारतीय राजनीति का दयनीय ह्रास

भारतीय राजनीति का दयनीय ह्रास

लोकसभा चुनाव 2019 में कई नेताओं को काफी अभद्र भाषा का प्रयोग करते हुए देखा जा सकता हैं। अभी हाल ही में समाजवादी पार्टी के नेता आजम खान ने रामपुर से उनके खिलाफ लोकसभा का चुनाव लड़ रही भाजपा प्रत्याशी जया प्रदा के खिलाफ काफी अभद्र टिप्पणी की। इसके अलावा प्रियंका गांधी को ‘पप्पु की पप्पी’ तथा हेमा मालिनी को ‘नर्तकी’ और दूसरे नेताओं द्वारा कहा गया। और तो और, कर्नाटक सरकार में मंत्री बी जैड जमीर अहमद खान ने यह बयान दिया कि प्रधानमंत्री मोदी को उनकी पत्नी ने इसलिए छोड़ दिया, क्योंकि उनका चेहरा अच्छा नहीं था। फिर भी मैं आजम खान द्वारा दिये गये बचकाने बयान पर ही चर्चा करना चाहूंगा जो उनकी और उनके प्रशंशकों की बिमारू मानसिकता को दर्शाता हैं, जिन्हें इस बयान से काफी आनंद मिला। भले ही ये लोग जया प्रदा का समर्थन न करें, लेकिन उन्हें आजम खान के बयान की आलोचना तो करनी चाहिये। कोई भी व्यक्ति आखिर क्यों किसी के पहनावे पर टिप्पणी करेगा? हालांकि बाद में आजम खान ने कहा कि उन्होनें जया प्रदा का नाम नहीं लिया ना ही उनके बारे में कुछ कहा। लेकिन मेरा उनसे यह प्रश्न है कि आप किसी के लिए भी ऐसी भाषा का प्रयोग कैसे कर सकते हैं? चाहे कुछ भी हो लेकिन उनके द्वारा दिया गया यह बयान जया प्रदा के संदर्भ में ही था, जो रामपुर से उनके विरूद्ध चुनाव लड़ रही हैं। यह शर्मनाक बात है कि चुनाव जीतने के लिए वह इतना नीचे गिर सकते है। महिलाओं को अभद्र बोलने वाले कभी नेता  नहीं हो सकते। यह दुख की बात है कि समाजवादी पार्टी ने अल्पसंख्यक मतों के खोने के डर से इस बयान की निंदा तक नहीं की। अभी कुछ समय पहले तक एक छोटी सी भी अभद्र भाषा की भी आलोचना की जाती थी। लेकिन आज फेक न्यूज के जमाने में हर प्रकार की बातों को स्वीकार कर लिया जाता है और उस पर कोई चिल्लाता तक नहीं है। इस चुनाव में सार्वाधिक अभद्र भाषा का प्रयोग किया गया है और सोशल मीडिया ने इसे और भी बढ़ा दिया है।

वर्तमान समय में राजनेता लोगों को अपनी तरफ आकर्षित करने के लिए सार्वाधिक अभद्र भाषाओं का प्रयोग कर रहे हैं और इसमें भाजपा के भी कुछ नेता प्रियंका गांधी के संदर्भ में टिप्पणी करने में पीछे नहीं रहे हैं। आदर्शवादी नेता कभी भी अपने इच्छा को पूर्ण करने के लिए नैतिकता को ताख पर नहीं रखते। सच्चे नेतृत्व का उद्देश्य हमेशा निस्वार्थ सेवा रहा है, स्वार्थी सेवा नहीं। लेकिन आज राजनीति एक पेशा बन गया है और राजनेताओं की रूची अच्छे कार्यों में कम होती जा रही है। नेताओं को शांतिपूर्ण मन से, अध्यात्म के मार्ग पर चलना चाहिए। जब नरेंद्र मोदी सरकार ने केंद्र में सत्ता संभाली, तो राजनीतिक व्यवस्था, शासन और नेताओं का चरित्र सब अस्त-व्यस्त था। जब कोई रहने के लिए एक घर से दूसरे घर में जाता है, तो वह तुरंत वहां रहना शुरू नहीं करता है। एक व्यक्ति अपनी पसंद के अनुसार घर के अंदर की व्यवस्था बदलता है और उसी के अनुसार चीजें चलती हैं। उसी प्रकार जब नरेंद्र मोदी सरकार में आये, तो उन्होंने राजनीतिक प्रणाली को साफ करना शुरू कर दिया, शासन की कार्यशैली में सुधार किया। आज मोदी लाखों लोगों के लिए प्रेरणा के एक स्त्रोत बन गये हैं। वास्तव में, उनके  द्वारा किये जा रहे कार्य अब पूरी दुनिया में विकास का प्रतिबिंब बन गये हैं। नरेन्द्र मोदी सरकारी तंत्र में एक स्वस्थ मानसिकता लाये। ये संस्कार कुछ मूल सिद्धान्तों पर आधारीत है। इस पृष्ठभूमि में नरेन्द्र मोदी लोकसभा चुनाव 2019 में एकबार फिर अग्निपरिक्षा दे रहे हैं। ऐसा माना जा रहा है कि वह एक बार फिर 2014 में मिली जीत को दुहराने में सफल हो जायेंगे।

Deepak Kumar Rath

  दीपक कुमार रथ

(editor@udayindia.in)

 

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