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भारत में नहीं टिकेगी मानवता-विरोधी सोच

भारत में नहीं टिकेगी मानवता-विरोधी सोच

देश की राष्ट्रीय आतंकरोधी एजेंसी एनआइए ने दिल्ली और उत्तर प्रदेश में इस्लामिक टेरर मॉडयूल का पर्दाफाश कर सही मायने में एक बड़ा काम किया है। ऐसा कहकर यहां यह कहना उचित होगा कि आज उच्च तकनीक प्रणाली के जरिये हाइटेक तकनीक के साथ मुस्लिम चरमपंथी देश में षडयंत्र रचने व  आंतक का घिनौना खेल रहे हैं। इससे ऐसा प्रतीत होता है कि इस्लामी धर्मांधों ने उन लोगों के पुराने घावों को फिर से खोल दिया है जिन्होंने देश में इस्लामी आतंकवाद के जुल्मों को झेला है। लेकिन भारत ने इस्लामिक आतंकियों के साथ शांति बहाल करने के लिए विभिन्न स्तरों पर उनसे बातचीत का रास्ता खुला रखा है। हालांकि इस्लामिक चरमपंथी लगातार भारत में आतंकवाद को बढावा देने के अपने एजेंडे पर लगातार काम कर हमारे देश की मजबूती पर लगातार सितम ढा रहे हैं। इसीलिए हमारे देश की सुरक्षा एजेंसियों के लिए यह आवश्यक हो जाता है कि ऐसे जिहादी तत्वों को करारा तमाचा लगाया जाए जो हमारे देश मे समय-समय पर बर्बर खूनी खेलते रहे हैं। बगदाद से लेकर ढाका, तो वहीं न्यूयार्क से लेकर मुंबई व ब्रुसेल्स से लेकर जकार्ता तक  इस्लामिक आतंकी बंदूक व कुल्हाणी से निर्दोष लोगों का खून बहा रहे हैं। यहां यह बात उल्लेख करने योग्य  है कि हमारे देश की सरकार के समक्ष इन ताकतों द्वारा फैलाई जा रही घृणा व चरमपंथ  को रोकने की दीर्घकालीन चुनौती हैँ। अरब देशों से अनलिमिटेड पेट्रो डॉलर हमारे देश में उन तत्वों द्वारा भेजे जाते हैं जिनका मकसद हमारे देश में घृणा से भरी विचारधारा फैलाना है और साथ ही वे अन्य एशियाई देशों में  प्रचलित इस्लाम की कहीं अधिक नरम विचारधाराओं की जगह अपनी कट्टर विचारधारा का प्रचार-प्रसार करना चाहते हैं।  यहां इस बात को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता कि हमारे देश में कुछ मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के साथ-साथ वामपंथी विचारधारा के लोग संदेह का लाभ देकर बर्बर धर्मांधता को मान्यता देते हैं या फिर उन्हें बढावा दे रहे हैं। उनका मानना है कि इस्लामिक आतंकवाद के बीज पश्चिमी दादागीरी में पड़े थे, लेकिन इस्लामिक आतंकवाद का एक अकेला यही कारण नहीं था। विभिन्न इस्लामिक सम्राज्यों जैसे सउदी अरब या इस्लामिक आतंकवादी संगठनों जैसे मुस्लिम ब्रदरहुड या तालिबान या आईएसआईएस ने पश्चिमी ताकतों खासकर अमेरिका का जानबूझकर साथ दिया, जिन्हे उन्होंने अपनी सुविधानुसार कभी दोस्त तो कभी शैतान कहा।

इस बात पर कोई सवाल नहीं उठा सकता कि आइएसआइएस एक काफी बर्बर आतंकी समूह है। उसने पश्चिम व उत्तरी इराक के बड़े हिस्सों पर कब्जा जमाकर पूरे विश्व का ध्यान आकर्षित किया। इसके अलावा वह विश्व भर में बड़े पैमाने पर नरसंहार को जारी रखने के लिए अपने संसाधनों को भी बढ़ा रहा है। इस संगठन के आतंकियों द्वारा जारी हत्याओं की घटनाओं के कारण समस्या और विकराल हो गई। उक्त आतंकी गुट द्वारा महिलाओं के  बलात्कार के साथ-साथ उनकी व बच्चों की हत्या संगठन द्वारा अपनाई जाने वाली नीति का हिस्सा है। आजकल इंटरनेट पर महिलाओं के साथ उनके द्वारा रेप की रोंगटे खड़े कर देने वाले किस्से रोज की आमद बन गए हैं । मानवाधिकार संगठनों द्वारा उनके ऐसे कृत्यों की चिंताजनक डाटा भी समय-समय पर जारी किया जाता है। यह बात गौर करने योग्य है कि उनके लिए एक औरत या बच्चे के जिस्म की कीमत कुछ डॉलरों से ज्यादा नहीं होती।  वहीं भारत जैसे देश में इस्लामिक आतंकियों खासकर आइएसआइएस के बढ़ते खतरे के बावजूद हमारी सुरक्षा एजेंसियों की आंखें अब तक पूरी तरह खुली नहीं लगती हैं। वे इन घटनाओं से निबटने के लिए बिल्कुल तैयार नहीं दिखते। भारत जैसे देश जहां कई धर्मों के लोग एक साथ धर्म निरपेक्षता की भावना के साथ एक साथ रहते है, ये आतंकवादी तत्व देश के ताने-बाने के लिए एक विकराल खतरा हैं। यही नहीं, वे विश्व भर के लिए भी यह एक बड़ा खतरा है जिसकी जड़े न केवल पश्चिमी देशों तक फैली हुई रही हैं बल्कि एशिया के बाहर तक इसकी पहुंच है।

इसीलिए भारत को इस बात को समझना होगा और अपनी आतंकवाद विरोधी कार्रवाइयों को उस तरह से अंजाम देना होगा कि इस समस्या पर काबू पाया जाए। इसके लिए हमें मलाला जैसी वीर महिलाओं से यह सीखना होगा कि किस प्रकार उन्होंने गन का जबाब गन से नहीं देकर पूरे विश्व को बताया कि  बंदूक का जबाब बंदूक से नहीं देकर भी आतताइयों को समझाया जा सकता है।

Deepak Kumar Rath

 

  दीपक कुमार रथ

(editor@udayindia.in)

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