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‘मजबूत सरकार’ बनाम ‘मजबूर सरकार’ के बीच का चुनाव -अमित शाह

‘मजबूत सरकार’ बनाम ‘मजबूर सरकार’ के बीच का चुनाव -अमित शाह

भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अमित शाह ने हाल ही में बिहार में तूफानी दौरा किया और मुंगेर, बेगूसराय एवं समस्तीपुर में विशाल जन-सभाओं को संबोधित किया। उन्होंने मुंगेर से जद (यू), बेगूसराय से भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं केन्द्रीय मंत्री श्री गिरिराज सिंह और सरायरंजन से भाजपा प्रत्याशी एवं बिहार प्रदेश भाजपा अध्यक्ष श्री नित्यानंद राय के पक्ष में धुआंधार प्रचार किया।

श्री शाह ने कहा कि 2019 का लोकसभा चुनाव प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में देश की शांति, समृद्धि और सुरक्षा के लिए कटिबद्ध भाजपा और देश को टुकड़े-दुकड़े करने का ख्वाब पाले बैठे देशद्रोहियों और उसे समर्थन दे रही कांग्रेस एंड कंपनी के बीच चुनाव है। यह चुनाव महामिलावटी लोगों द्वारा समाज में फैलाए जा रहे जातिवाद का जहर और मोदी सरकार के राष्ट्रवाद के अमृत का चुनाव है। यह चुनाव श्री मोदी जी के नेतृत्व में ‘मजबूत सरकार’ बनाम महामिलाविटी विपक्ष के ‘मजबूर सरकार’ के बीच का चुनाव है।

श्री शाह ने कहा कि कश्मीर से कन्याकुमारी तक और द्वारकाधीश से जगन्नाथपुरी और पूरे नॉर्थ-ईस्ट तक, हर जगह केवल और केवल मोदी लहर है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के प्रति यह प्यार और समर्थन देश के विकास के प्रति उनके कमिटमेंट को लेकर है। इस बार के लोकसभा चुनाव में 2014 से भी अधिक बहुमत के साथ मोदी सरकार बनने जा रही है। उन्होंने कहा कि आजादी के 55 सालों में कांग्रेस की चार-चार पीढिय़ों की सरकारों ने देश के विकास के लिए जितना काम नहीं किया, उससे कहीं अधिक काम श्री मोदी जी ने केवल पांच वर्षों में कर के दिखा दिया है।

राष्ट्रीय अध्यक्ष ने महामिलावटी ठगबंधन पर हमला करते हुए कहा कि मैं इस मंच से उनके नेताओं से पूछना चाहता हूं कि कांग्रेस की चार-चार पीढिय़ों ने देश में शासन किया, बिहार में लालू-राबड़ी ने 15 सालों तक शासन किया, जरा हिसाब दीजिये कि गरीबों के लिए इन्होंने 55 सालों में क्या किया? आज भी बिहार की जनता जब लालू-राबड़ी शासन को याद करती है तो दहल जाती है। गुंडागर्दी, भ्रष्टाचार, जातिवाद और तुष्टिकरण और विकास विमुक्त सरकार ही लालू शासन की पहचान है। भाजपा और जदयू की एनडीए सरकार ने बिहार के जंगलराज का उन्मूलन कर सुशासन की शुरूआत की। बिहार में सड़कों का निर्माण, यहां के गांवों और गरीबों के घरों में बिजली की आपूर्ति एनडीए सरकार  के बिना संभव नहीं थी। बिहार में सुशासन लाने और कानून-व्यवस्था दरूस्त करने का काम भारतीय जनता पार्टी और जदयू की सरकार ने किया है। लालू यादव के शासन काल में बिहार का विकास दर 3 प्रतिशत से भी नीचे चला गया था जबकि एनडीए के शासन काल में बिहार का औसत विकास दर 11.33 प्रतिशत तक पहुंचाने का काम नीतीश जी की भाजपा-जद (यू) सरकार में हुआ है। बिहार में प्रति व्यक्ति आय जहां -0.12 प्रतिशत थी वहीं एनडीए सरकार में यह 31 प्रतिशत तक पहुंच गयी। प्रधानमंत्री जी ने लगभग 1.25 लाख करोड़ रुपये बिहार को देने का वादा किया था, जिसमें 1 लाख 10 हजार करोड़ रुपये के विकास कार्य शुरू भी हो चुके हैं।

राहुल गांधी पर हमला करते हुए श्री शाह ने कहा कि राहुल गांधी जोर-जोर से पूछते हैं कि मोदी जी आपने बिहार के लिए क्या किया? राहुल बाबा, अभी तो शासन में हमें आये 5 साल ही हुए हैं और राहुल बाबा हमसे हिसाब मांग रहे हैं लेकिन बिहार की जनता कांग्रेस पार्टी के एक ही परिवार की पांच पीढिय़ों का हिसाब मांग रही है। कांग्रेस ने आजादी के बाद 55 वर्षों तक देश में शासन किया लेकिन बिहार विकास में पिछड़ता क्यों चला गया? उन्होंने कहा कि 10 साल तक केंद्र में लालू यादव के समर्थन से सोनिया-मनमोहन की कांग्रेस सरकार चल रही थी लेकिन उन्होंने बिहार को विकास के लिए अंतिम पांच वर्षों में केवल 1,93,818 करोड़ रुपये ही दिए जबकि मोदी सरकार ने बिहार के लिए तीन गुना अधिक लगभग 6,06,786 करोड़ रुपये की राशि आवंटित की। लगभग 1 लाख करोड़ रूपये तो केवल रेलवे के विकास में ही दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी पिछले 5 सालों में युवाओं, गरीबों, आदिवासियों, महिलाओं, किसानों, गांवों और शहरों के लिए 133 योजनायें लेकर आये हैं। उन्होंने कहा कि नरेन्द्र मोदी-सुशील मोदी-नीतीश कुमार की जोड़ी बिहार को अगले 5 सालों में बिहार को पूर्ण विकसित राज्य बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि श्री मोदी ने बरौनी में बंद पड़े कारखाने को लगभग 7 हजार करोड़ रुपये की लागत से पुनर्जीवित करने का काम किया। बरौनी रिफाइनरी की क्षमता को भी लगभग डेढ़ गुना बढ़ाया गया। इसके अतिरिक्त और कई काम किये गए।

राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा कि विभिन्न जन-कल्याणकारी कार्यों के अतिरिक्त नरेन्द्र मोदी ने जो सबसे महत्वपूर्ण काम किया है, वह है देश को सुरक्षित रखने के लिए किये गए कार्य। उन्होंने देश के सुरक्षा के प्रति असंवेदनशील पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकारों पर हमला करते हुए कहा कि 10 सालों तक देश में यूपीए की सरकार थी, अपने वोट बैंक के लिए इन्होंने देश की सुरक्षा को भी ताक पर रख दिया था। देश में आतंकी आकर जवानों का सर काटकर ले जाते थे, लेकिन तब की सरकार कुछ नहीं करती थी। मोदी सरकार बनने के बाद जब उरी हमला हुआ तो हमने सर्जिकल स्ट्राइक करके पाकिस्तान को ठिकाने लगाने का काम किया। इसके बाद भी पाकिस्तान सुधरा नहीं और पुलवामा हमला किया तो हमारे जवानों ने पाकिस्तान के बालाकोट में घुसकर एयर स्ट्राइक करके आतंकियों को मौत की नींद सुला कर बदला लेने का काम किया। एयर स्ट्राइक के बाद देश का सम्मान पूरे विश्व में बढ़ा। एयर स्ट्राइक के बाद एक ओर देश में उत्साह का माहौल था तो दूसरी ओर पाकिस्तान सहित राहुल गांधी एंड कंपनी के कार्यालय में मातम छाया हुआ था। मैं राहुल गांधी एंड कंपनी से पूछना चाहता हूं कि पाकिस्तान के आतंकवादी मरे तो आपके चेहरे का नूर क्यों गायब हो गया? राहुल गाँधी के गुरु सैम पित्रोदा ने कहा कि पाकिस्तानी से बात करो, आतंकियों पर बम मत गिराओ लेकिन मैं आप लोगों से पूछना चाहता हूँ कि जो देश हमारे 40 जवानों की जान ले ले, उनसे बात करनी चाहिए या बम गिराना चाहिए? कांग्रेस की आतंकवाद पर जो भी नीति रहे लेकिन मोदी सरकार की आतंकवाद के प्रति जीरो टोलरेंस की नीति है। यदि पाकिस्तान से गोली आएगी तो यहां से गोला जाएगा, ईंट का जवाब पत्थर से दिया जाएगा। देश की सुरक्षा से हम समझौता नहीं कर सकते।

कांग्रेस पार्टी पर हमला जारी रखते हुए श्री शाह ने कहा कि कांग्रेस कहती है कि देशद्रोह का कानून खत्म हो। आखिर किसके लिए? जेएनयू में देशद्रोही तत्वों द्वारा भारत तेरे टुकड़े होंगे के नारे लगाए गए और राहुल गांधी उन नारों के साथ खड़े होकर कहने लगे यह तो अभिव्यक्ति की आजादी है। क्या भारत माता के टुकड़े करना अभिव्यक्ति की आजादी है या देशद्रोह? कांग्रेस पार्टी देशद्रोह के कानून को इसलिए खत्म करना चाहती है ताकि ‘भारत तेरे टुकड़े होंगे’ का नारा लगाने वाले राष्ट्रद्रोहियों को बचाया जा सके। राहुल गांधी चाहे कितना भी जोर लगा लें, चाहे लालू यादव को भी इसमें जोड़ लें लेकिन जब तक केंद्र में भारतीय जनता पार्टी की मोदी सरकार है, भारत माता के टुकड़े करने का ख्वाब पाले बैठे देशद्रोहियों की जगह जेल की सलाखों के पीछे ही होगी। इसी तरह कांग्रेस विषम परिस्थितियों में देश की सुरक्षा में लगे जवानों को मिले हुए विशेषाधिकार अफास्पा (्रस्नस्क्क्र) को भी हटाना चाहती है ताकि हमारी सेना को कमजोर किया जा सके। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर में कांग्रेस पार्टी नेशनल कांफ्रेंस के साथ मिलकर चुनाव लड़ रही है और राहुल गांधी के साथी उमर अब्दुल्ला मांग करते हैं कि जम्मू-कश्मीर में भी अलग से प्रधानमंत्री होना चाहिए लेकिन राहुल गांधी चुप रहते हैं, लालू यादव चुप रहते हैं और कांग्रेस के तमाम सहयोगी इस पर चुप्पी साध लेते हैं। मैं स्पष्ट कर देना चाहता हूं कि जब तक भारतीय जतना पार्टी के एक भी कार्यकर्ता के शरीर में प्राण है, जम्मू-कश्मीर को भारत से कोई अलग नहीं कर सकता, जम्मू-कश्मीर भारत माता का मुकुट है।

श्री शाह ने कहा कि एक ओर भारतीय जनता पार्टी और एनडीए के सभी दल प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में एकजुट हैं तो वहीं दूसरी ओर महामिलावट वाली राहुल गांधी एंड कंपनी है। जब महागठबंधन के नेताओं से पूछा जाता है कि आपके प्रधानमंत्री के प्रत्याशी कौन हैं तो कोई जवाब नहीं मिलता है। गलती से भी यदि महामिलावटी ठगबंधन की सरकार बनी (जो बननी नहीं है) तो सोमवार को मायावती प्रधानमंत्री बनेंगी, मंगलवार को अखिलेश यादव बनेंगे, बुधवार को देवगौड़ा जी बनेंगे, गुरुवार को चंद्रबाबू नायडू बन जायेंगे, शुक्रवार को शरद पवार बन जायेंगे, शनिवार को बहन ममता बनर्जी प्रधानमंत्री बनेंगीं और रविवार को देश छुट्टी पर चला जाएगा। क्या इस तरह देश कभी चलता है? क्या ये लोग देश को सुरक्षित रख सकते हैं?

            (उदय इंडिया ब्यूरो)

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