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मानसिक तनाव से बचें

मानसिक तनाव से बचें

आज के दौर में भागदौड़ वाली जिंदगी के बीच मानसिक तनाव एक चिंता का विषय बन चुका है। बच्चे से लेकर बड़े बूढ़े सभी इस तनाव से ग्रस्त होते जा रहे हैं। आज की दिनचर्या भी इसका एक प्रमुख कारण है। छोटी-छोटी उम्र में ही बच्चों को तनावग्रस्त बना दिया जाता है। हमारे देश में जो साक्षरता के नाम पर परोसा जाता है। वो बच्चों को तनावरहित होने की बजाय तनावग्रस्त बनाता है। उन्हें मानसिक अवसादो के चलते कई बीमारियों का सामना करना पड़ता है। ”कहते है चिन्ता चिता बनाती है’’ पर आज ये चिंता हमारे जीवन का एक मूलभूत हिस्सा बन चुकी है। और हम चाहकर भी इससे पीछा नहीं छुड़ा सकते। अगर हम तनावरहित जीवन जीना भी चाहें तो समाज के कुछ नियम व हमारी अपनी कुछ जरूरतें हमें तनाव से मुक्त नहीं होने देती। किसी को पढ़ाई की चिंता तो किसी को धन दौलत की किसी को शादी की चिंता तो किसी को बीमारी की। हर इंसान किसी ना किसी चिंता से ग्रस्त है। और इससे हमारी जीवनशैली पर बहुत ही बुरा प्रभाव पड़ता है। हम अपने साथ-साथ अपने परिवार की जरूरते भी पूरी नहीं कर पाते। इस मानसिक तनाव के चलते हम आर्थिक तंगी में भी आ जाते है। इससे दिन प्रतिदिन हमारा मानसिक तनाव बढ़ जाता है। व हम कई बीमारियों से ग्रसित हो जाते हैं। पूरा परिवार बिखर कर मानसिक अवसादो में घिर जाता है। इंसान का दिमाग बड़ा ही संवेदनशील होता है। इस दिमाग के चलते वो समाज में एक नई क्रांति ला सकता है। आज बहुत सारे वैज्ञानिक कई ग्रहो पर जा चुके है। जिससे हमे नई-नई तकनीक मिलती है।

आज की आधुनिक चिकित्सा भी लोगों का जीवन बचा रही है। आर्युवेद के द्वारा भी लोगों के जीवन में बदलाव आ रहा है। कई तरह के योग व आसन भी लोगों की बीमारियों व मानसिक तनाव को कम करता है। इसलिये मानसिक अवसादों पर लगाम लगाना जरूरी है। इस भगदौड़ वाली जिंदगी में हम अपने जीवन में कुछ बदलाव लाकर इस तनावग्रस्त जीवन को सुखमय बना सकते हैं। हमें चाहिए कि हम अपने व्यस्त दिनचर्या में थोड़ा सा समय अपने लिए निकाले ताकि हमारे मानसिक तनाव में कमी आ सके। इसके लिये हमे थोड़ा व्यायाम, योग इत्यादि चीजे करनी चाहिए। जिससे हमारे तन और मन में स्फूर्ति बनी रहे। हमे खाने-पीने में भी संतुलित आहार लेना चाहिए। और पानी का सेवन ज्यादा से ज्यादा करना चाहिए। धूम्रपान व शराब के सेवन से भी बचना चाहिए। ये सब हमारे दिमाग पर प्रतिकूल असर डालते है।

परिवार व समाज में सब लोगों को एक-दूसरे का सहयोग करना चाहिए। ताकि परिवार व समाज में लोग एक दूसरे से मिलजुल कर खुशियों का आनंद ले सके। अगर समाज में खुशियों का माहौल होगा तो हमारे दिमाग में कोई मानसिक अवसाद नहीं होगा। जिसके फलस्वरूप हम अपना व अपने परिवार का भरण-पोषण सही प्रकार से कर सकेंगे। कई प्रकार की गंभीर बीमारियों से भी बचा जा सकेगा। हमारा परिवार व समाज उन्नति की ओर बढ़ेगा। जिससे हमारे देश की अर्थव्यवस्था भी बढ़ जाएगी। और सब तरफ खुशहाली ही खुशहाली होगी। इन सब उपायो से हम अपने मानसिक अवसादो को नियंत्रित कर सकते है। स्वास्थ्य ही सबसे बड़ा धन होता है। इसलिये इस धन को संभाल कर रखें। हमेशा खुश रहें।

 

नितिन गोयल

 

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