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मॉब-लिंचिंग के चक्रव्यूह में राजस्थान

मॉब-लिंचिंग के चक्रव्यूह में राजस्थान

देश भर में मॉब-लिंचिंग से जुड़े हादसों पर गहमागहमी के बीच राजस्थान में कांग्रेस की गहलोत सरकार ने आनन-फानन में मॉब-लिंचिंग के खिलाफ कानून बनाकर पहल लेने का श्रेय ले लिया है। लेकिन दो बर्ष पहले अलवर जिले में पहलू खां मॉब-लिंचिंग के बहुचर्चित प्रकरण में अधीनस्थ अदालत द्वारा छ: आरोपियों को बरी करने तथा राज्य सरकार द्वारा फैसले को चुनौती देने और मामले की जांच के लिए एस आई टी गठित करने एवं इसी जिले में हाल ही मॉब-लिंचिंग की एक अन्य घटना पर सरकार के कथित पक्षपातपूर्ण रवैये को लेकर विपक्ष के विरोध ने महाभारत की ”चक्रव्यूह रचना’’ के हालात उत्पन्न कर दिए है।

पूर्ववर्ती भाजपा सरकार के कार्यकाल में इस प्रकरण की शुरूआत 1 अप्रैल, 2017 को हुई थी। जयपुर-दिल्ली राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या आठ पर अलवर जिले में बहरोड़ पुलिया के निकट कथित गौरक्षकों की भीड़ ने आधा दर्जन वाहनों में गोवंश भरकर ले जा रहे पहलू खां उसके दो बेटो इरशाद व आरिफ और उसके साथियों को पकड़ा। गुस्साये लोगों की मारपीट से घायल हुए पहलू खां की चार अप्रैल को अस्पताल में मौत हो गई। मीडिया पर सुर्खियां बटोरने के साथ इस हादसे पर राजनीति भी गरमा गई और अदालती फैसले के बाद तो इसका विस्तार राष्ट्रीय स्तर पर हो गया है।

रक्षा बंधन एवं 73वें स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर बुधवार 14 अगस्त 2019 को इस प्रकरण पर फैसला घोषित करने की तिथि निश्चित की गई थी। अलवर के अपर जिला सत्र न्यायालय (संख्या-1) में मीडिया की नजर जमी हुई थी। शाम होते-होते न्यायाधीश डॉ. सरिता स्वामी ने बालिग आरोपी विपिन यादव, कालूराम, रवीन्द्र यादव, दयानंद, योगेश एवं भीम भाटी को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया। तीन नाबालिग आरोपियों की सुनवाई किशोर न्यायालय में विचाराधीन है। एडीजे कोर्ट ने 92 पृष्ठों के फैसले में पुलिस की कार्यप्रणाली सहित बहरोड़ के तत्कालीन थानाधिकारी रमेश सिनसिनवार की भूमिका पर सवाल उठाते हुए गंभीर टिप्पणी की है।

फैसले पर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने तत्काल-ट्वीट से प्रतिक्रिया दी और कहा कि हम पहलू खां के परिवार को न्याय दिलाने के लिए प्रतिबद्व है। राज्य सरकार एडीजे के आदेश के खिलाफ अपील दायर करेगी। गहलोत ने शुक्रवार को गृह एवं विधि विभाग के अधिकारियों को तलब कर इस प्रकरण की पुलिस जांच में रही खामियों तथा लापरवाही बरतने के बिन्दुओं की जांच के लिए एस आई टी गठित कर पन्द्रह दिन में रिपोर्ट देने तथा अदालती फैसले के खिलाफ उच्च न्यायालय में अपील करने के निर्देश दिए।

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पहलू खां प्रकरण के फैसले पर राजनीतिक दांवपेच भी आरम्भ हो गए है। अलवर के चौपानकी थाने के गांव झिवाणा निवासी 28 वर्षीय हरीश जाटव की मौत के बाद मृतक के पिता 60 वर्षीय रतिराम द्वारा जान देने के मामले ने आग में घी का काम किया है। गत 16 जुलाई को फलसा गांव में हरीश की बाइक से टक्कर लगने पर उमरशेद व अन्य लोगों द्वारा मारपीट से वह गंभीर रूप से घायल हो गया जिसकी 18 जुलाई को दिल्ली के सफदरगंज अस्पताल में मृत्यु हो गई। पिता रतिराम ने थाने में नामजद रिपोर्ट दी तथा आरोपियों को गिरफ्तारी के लिए दर-दर जाकर गुहार की। परिजनों का आरोप है कि आरोपी पक्ष मुकदमा वापिस लेने के लिए लगातार दबाव बना रहा है वही पुलिस प्रशासन भी आरोपियों को बचाने में जुटा है। कही से न्याय नहीं मिलने से तनाव में आए रतिराम ने पन्द्रह अगस्त को जहरीला पदार्थ खाकर जान दे दी।

राज्य विधानसभा के बजट सत्र के दौरान गत 5 अगस्त को मॉब लीचिंग तथा ऑनर किलिंग विधेयक को मंजूरी दी गई थी। निर्धारित प्रक्रिया के तहत राज्यपाल कल्याण सिंह द्वारा इन्हे राष्ट्रपति की स्वीकृति के लिए भिजवाया जाएगा। कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी पहलू खां मामले में अदालती फैसले को चौंकाने वाला बताया है। उनका कहना है कि राजस्थान सरकार ने भीड़ द्वारा हत्या के खिलाफ कानून बनाकर सराहनीय काम किया है। पहलू खां के मामले मे न्याय दिलाकर इसका अच्छा उदाहरण प्रस्तुत किया जायेगा।

गहलोत सरकार को बाहर से समर्थन दे रही बहुजन समाज पार्टी की सुप्रीमो मायावती ने पहलू खां प्रकरण में ट्वीट करते हुए कहा कि सरकार की घोर लापरवाही तथा निष्क्रियता के कारण सभी छ: आरोपियो का बरी होना अति दुर्भाग्यपूर्ण है। मायावती के ट्वीट के अगले दिन बसपा के छ: विधायकगणों ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से भेंट की। इन विधायकों ने मामले की जांच हेतु एटीएस के गठन तथा अदालती फैसले को चुनौती देने के राज्य सरकार के निर्णय का समर्थन किया। बसपा विधायक राजेन्द्र सिंह गुढ़ा की टिप्पणी यह रही कि मायावती को मामले की पूरी जानकारी नही है। वह उत्तर प्रदेश में बैठी है तथा आधी अधूरी जानकारी लेकर टवीट कर रही है। गौरतलब है कि गुढ़ा ने विधानसभा के बजट सत्र में यह आरोप लगाया था कि उनकी पार्टी में धन लेकर पार्टी टिकट दिए जाते है। अधिक दाम देने पर टिकट बदला भी जाता है। अन्य बसपा विधायकों ने दलित हरीश जाटव तथा उसके पिता की मौत पर सच्चाई उजागर किए जाने की बात कही है।

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प्रमुख प्रतिपक्ष भारतीय जनता पार्टी ने पहलू खां प्रकरण को लेकर राज्य सरकार की अति सक्रियता पर सवाल उठाते हुए कांग्रेस पर तुष्टिकरण की राजनीति का आरोप लगाया है। भाजपा का कहना है कि कांग्रेस सिर्फ वर्ग विशेष का संरक्षण करती है उसे बहुसंख्यक समाज के हितों की परवाह नही है। भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता विधायक सतीश पूनिया के अनुसार दलित हरीश जाटव की मौत तथा उसके पिता रतिराम की आत्महत्या सम्बन्धी प्रकरण की जांच के लिए भाजपा ने पूर्व मंत्री विधायक कालीचरण सराफ विधायक संजय शर्मा तथा राज्यसभा सांसद रामकुमार वर्मा की तीन सदस्यीय समिति गठित की है। पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने राज्य सरकार के दोहरे चरित्र पर कटाक्ष किया है। वसुंधरा राजे का कहना है कि सरकार एक तरफ मॉब-लिंचिंग कानून ला रही है। वही हरीश जाटव के मॉब-लिंचिंग मामले में सरकार कोई एक्शन नहीं ले रही है। इससे परेशान हरीश के पिता रतिराम ने खुदकुशी कर ली है। विधानसभा में मुख्य सचेतक महेश जोशी ने भाजपा पर मामले को बेवजह तूल देकर माहौल खराब करने का आरोप लगाया है। जोशी का कहना है कि अदालत ने भी माना है कि पहलू खां प्रकरण में जांच ठीक तरीके से नहीं हुई है। इस दिशा में सरकार द्वारा कदम उठाने में कोई बुराई नहीं है।

नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया की प्रतिक्रिया इस रूप में सामने आयी–कांग्रेस के नेताओं और सरकार के दिलों-दिमाग से वोटों एवं जातियां निकलती ही नही हैं। हरीश जाटव एवं रतिराम मामले में सामने वाले लोग मेवात के थे इसलिए वह मॉब-लिंचिंग नही है लेकिन पहलू खां मामले में सामने वाला हिन्दू है। इसलिए मॉब-लिंचिंग हो गई। कांग्रेस की दुर्गति मुस्लिम तुष्टिकरण की वजह से हुई है, फिर भी वे लोग सुधर नहीं रहे। उपनेता राजेन्द्र राठौड़ ने भी अपराध नियंत्रण में सरकार पर वोट राजनीति का आरोप लगाते हुए कहा है कि कोर्ट के फैसले पर पहली बार एस आई टी बनाई गई है।

जयपुर से गुलाब बत्रा

 

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