ब्रेकिंग न्यूज़

मोदी का हाथ अल्पसंख्यकों के साथ

मोदी का हाथ अल्पसंख्यकों के साथ

तारीख 25 मई, जगह संसद भवन का सेंट्रल हॉल। मौका एनडीए संसदीय दल की बैठक। बीजेपी और एनडीए नेताओं से खचाखच भरे हॉल में जैसे ही पूर्ण बहुमत के विजयी रथ पर सवार पीएम नरेंद्र मोदी पहुंचे, सारे नेताओं ने अपनी जगह खड़े होकर उनका स्वागत किया।

बीजेपी के सभी नवनिर्वाचित 303 सांसद, एनडीए की अन्य पार्टियों के सांसद, लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, प्रकाश सिंह बादल, नीतीश कुमार, राजनाथ सिंह, सुषमा स्वराज, रामविलास पासवान जैसे नेताओं से मंच सजा हुआ था। मोदी ने जब आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी के पैर छुए तो सबकी नजरें जैसे वहीं ठहर गईं।

वजह खास इसलिए भी थी क्योंकि जवाहरलाल नेहरू और इंदिरा गांधी के बाद नरेंद्र मोदी तीसरे ऐसे प्रधानमंत्री हैं, जो लगातार दूसरी बार पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने जा रहे थे। लोकसभा 2019 के महारण में कांग्रेस, सपा, बसपा, टीडीपी, तृणमूल कांग्रेस जैसी पार्टियों को धूल चटाने के बाद बीजेपी के हौसले और बुलंद हैं। 52 सीट पाने वाली कांग्रेस की हालत तो ऐसी हो गई है कि लोकसभा में उसे विपक्षी पार्टी का भी दर्जा नहीं मिल पाएगा।

नरेंद्र मोदी ने जब भाषण देना शुरू किया तो उन्होंने कई ऐसी बातें कहीं, जिन्होंने अगले 5 साल की सरकार का खाका कुछ-कुछ साफ कर दिया। एक तरफ मोदी ने जहां नए और पुराने सांसदों को बड़बोले बयान देने, मंत्री पद के नाम पर बहकावे में आने से बचने और वीआईपी कल्चर को छोडऩे की सलाह दी।

22अल्पसंख्यकों पर दिया ये बयान

वहीं उन्होंने गरीबों और अल्पसंख्यकों को लेकर भी अपने इरादे साफ कर दिए, जिनके शोषण के आरोप मोदी-1 में लगते रहे हैं। पीएम मोदी ने भाषण में साफ कहा कि देश में गरीब को राजनीतिक संवाद और विवाद का सब्जेक्ट बना दिया गया है। यह एक फैशन बन गया है। उन्होंने कहा कि पांच साल की सरकार में गरीबों के साथ जो धोखा हो रहा था, छल हो रहा था, उसमें हमने एक छेद किया और सीधे गरीब के पास पहुंचे। पीएम मोदी का मतलब था कि उनकी सरकार की योजनाओं का फायदा गरीबों और अल्पसंख्यकों को मिला है।

अल्पसंख्यकों को लेकर पीएम मोदी ने साफ शब्दों में कहा कि उसे भ्रमित और डराकर रखा गया। बेहतर होता कि अगर अल्पसंख्यकों की शिक्षा, स्वास्थ्य की चिंता की जाती। 2019 में उन्होंने इस छल को भी भेदने की बात कही। अब तक मोदी सबका साथ, सबका विकास की बात करते आए हैं। संसद भवन में इस बार उन्होंने सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास की बात की।


 

एक नजर


 

नरेन्द्र मोदी सरकार की तमाम नीतियों में मुस्लिम एवं अल्पसंख्यक वर्ग के हितों का पूरा-पूरा ध्यान रखा जाता है। इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण हैं वे अनेक योजनाएं, जिसमें इस वर्ग की व्यावहारिक समस्याओं को समझते हुए इनके विकास को प्रमुखता दी गई है। आइए एक नजर डालते हैं मोदी सरकार द्वारा अल्पसंख्यकों के विकास के लिए 10 कदमों पर-

नई मंजिल योजना 

यह योजना आरंभ करने का उद्देश्य देश में अल्पसंख्यक समुदायों की प्रगति और सशक्तीकरण के संबंध में समग्र दृष्टिकोण एवं अल्पसंख्यकों, विशेषकर मुसलमानों की शिक्षा व उनके जीविकोपार्जन की आवश्यकताओं में सहायता देना था। साथ ही इस योजना द्वारा बीच में ही पढ़ाई छोड़ देने वाले अथवा मदरसों में पढ़ाई करने वाले छात्रों को शिक्षा के लिए पुन:प्रेरित कराने के अतिरिक्त रोजगार के दृष्टिकोण से नई दिशा में प्रेरित करना भी रहा। सबसे महत्वपूर्ण यह था कि ब्रिज पाठ्यक्रमों द्वारा शैक्षिक भागीदारी उपलब्ध कराकर, डिस्टेंस एजुकेशन कोर्स के माध्यम से 10वीं और 12वीं के प्रमाणपत्र उन्हें उपलब्ध कराए जाते थे। इसके अंतर्गत उन्हें चार पाठ्यक्रमों में ट्रेड के आधार पर कौशल प्रशिक्षण भी उपलब्ध कराए जाते थे, जो इस प्रकार थे- विनिर्माण, इंजीनियरिंग, सरल कौशल तथा अन्य सेवाएं। 17 से 35 वर्ष के आयुवर्ग के लोगों के अतिरिक्त मदरसों में पढऩे वाले छात्र इसका लाभ ले सकते थे। इस योजना के तहत 650 करोड़ रुपये को मंजूरी दी गई थी, जिसका लाभ एक लाख अल्पसंख्यक युवाओं को पहुंचा। अब तक की किसी भी योजना में अल्पसंख्यकों के हित को इतनी प्राथमिकता कभी नहीं दी गई।

20

स्किल इंडिया एवं मेक इन इंडिया

इस योजना के लिए मोदी सरकार ने 2015-2016 में आबंटित धनराशि को लगभग 11 गुना बढ़ा दिया गया, जो कि वर्ष 2013-2014 के 17 करोड़ से बहुत अधिक थी। सरकार के स्किल इंडिया और मेक इन इंडिया के अनुपालन में अल्पसंख्यकों के कौशल विकास के लिए सीखो और कमाओ की अवधारणा को प्राथमिकता दी गई, जिसमें 1.23 लाख अल्पसंख्यक युवाओं को प्रशिक्षित करने के लिए 191.96 करोड़ रुपयों को स्वीकृति प्रदान की गई। यह संख्या 2015-2016 में बढ़कर 210 करोड़ हो गई, जिससे 1.25 लाख अल्पसंख्यक युवा लाभांवित हुए।

नई रोशनी योजना

अल्पसंख्यक महिलाओं की नेतृत्व क्षमता को विकसित करने हेतु एक विशेष योजना नई रोशनी को क्रियान्वित किया गया, जिससे कि सरकारी प्रणाली, बैंकों और अन्य माध्यमों के साथ समन्वयन स्थापित करने के लिए आवश्यक जानकारी उनके पास उपलब्ध हो। यह प्रयास उनके आत्मविश्वास को बढ़ाने में भी कारगर साबित होता। वर्ष 2014-15 और 2015-16 के दौरान अल्पसंख्यक मामलों के अंतर्गत मंत्रालय ने 28.98 करोड़ रुपए खर्च करके 24 राज्यों की 1.30 लाख से अधिक महिलाओं को प्रशिक्षित किया। अभी हाल में नीति आयोग ने स्वतंत्र रूप से योजना के कार्यान्वयन का मूल्यांकन किया है। सरकार के इस प्रयास को बड़े स्तर पर सराहना  प्राप्त हुई।

उस्ताद [अपग्रेडिंग द स्किल्स एंड ट्रेनिंग ट्रेडिशनल आर्टस/क्राफ्ट्स फॉर डेवलपमें

सरकार ने हस्तशिल्पियों, पारंपरिक दस्तकारों के हितों की रक्षा के लिए एवं उनकी समस्याओं को समझते हुए व्यावहारिक धरातल पर और भी कई कदम उठाए। अशिक्षा, अज्ञानता और गरीबी के चलते इस वर्ग के अनेक लोग अपनी कलाओं से दूर हो रहे थे। पारंपरिक धरोहरों के प्रति इस विमुखता को देखते हुए ही सरकार ने इस योजना को आरंभ किया था और इसमें ऐसी नीतियों को प्रमुखता दी थी, जिससे इस स्थिति में परिवर्तन लाया जा सके। साथ ही पारंपरिक कौशलों, डिजाइन विकास, क्षमता निर्माण और उस्ताद दस्तकारों और हस्तशिल्पियों के पारंपरिक कौशल को बढ़ाने संबंधी मानक भी निर्धारित किए जा सकें और कौशलों का संरक्षण भी हो सके। इस योजना के लक्ष्यों में एक उद्देश्य यह भी रहा कि विभिन्न पारंपरिक कलाओं में संलग्न अल्पसंख्यक युवाओं को इस कला में दक्ष-प्रवीण दस्तकारों और हस्तशिल्पियों द्वारा अतिरिक्त प्रशिक्षण दिलाया जा सके। डिजाइन हस्तक्षेप, उत्पाद श्रेणी विकास, पैकेजिंग, प्रदर्शनी जैसी गतिविधियों के लिए राष्ट्रीय फैशन प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईएफटी), राष्ट्रीय डिजाइन संस्थान (एनआईडी) और भारतीय पैकेजिंग संस्थान (आईआईपी) की सहायता लेना भी इस योजना का हिस्सा रहा। इसके अलावा बिक्री बढ़ाने के लिए इ-बाजार पोर्टल और ब्रांड निर्माण के लिए इन संस्थानों का सहयोग आपेक्षित रहा। राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय बाजार के साथ सम्पर्क स्थापित करने के लिए इ-वाणिज्य पोर्टल के साथ समन्वय स्थापित किया गया।

हमारी धरोहर योजना

मोदी सरकार की नीतियों में इस बात का ध्यान भी रखा गया कि अल्पसंख्यकों की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत व परंपराओं को भी सहेजा जा सके, उनका संरक्षण भी सुनिश्चित हो। इसके लिए इन इमारतों के रखरखाव पर विशेष रूप से ध्यान दिया जाता है।  हमारी धरोहर योजना प्रारंभ करने का मूल उद्देश्य भी यही है। द एवरलास्टिंग फ्लेम इंटरनेशनल प्रोग्राम इसी उद्देश्य की पूर्ति के लिए शुरू किया गया। यह अपने तौर पर अनोखी ही पहल थी।

प्रोग्रेस पंचायत कार्यक्रम

इस कार्यक्रम के अंतर्गत ग्रामीण स्तर पर जाकर मुस्लिम एवं अल्पसंख्यक वर्ग को सीधे उन योजनाओं से अवगत कराया जाता रहा है, जो विशेष रूप से उन्हें ही केंद्र में रखकर बनाई गई है, परंतु वे इससे अनभिज्ञ हैं। इस प्रयास को आरंभ हुए भी अभी कुछ ही समय हुआ है, जब केंद्र सरकार ने जिला स्तर पर गठित निगरानी सह अनुश्रवण समिति को भंग कर दिया था और उसके स्थान पर डिस्ट्रिक्ट डेवलपमेंट को-ऑर्डिनेशन एंड मॉनिटरिंग कमेटी [दिशा] गठित की गई थी। सांसदों को इसका अध्यक्ष घोषित किया गया और निश्चित किया गया कि केंद्र द्वारा प्रायोजित सारी योजनाओं पर इसी के द्वारा समीक्षा की जाएगी।

वक्फ संपत्तियों की सुरक्षा हेतु उठाए गए कदम

सरकार ने इस दिशा में भी संवेदनशीलता बरतते हुए अनेक कदम उठाए हैं। वक्फ संपत्तियों को किसी भी प्रकार के अतिक्रमण से बचाने तथा अनाधिकृत हस्तक्षेप रोकने हेतु सरकार ने राष्ट्रीय दूर संवेदी केंद्र द्वारा सबसे पहले उन संपत्तियों की मैपिंग कराई और फिर उनके संरक्षण हेतु पर्याप्त व्यवस्था की गई। इनमें शामिल स्थान भी मुस्लिम बहुल थे।

तीन तलाक पर राहत

मोदी सरकार के प्रयास से मुस्लिम महिलाओं ने अपनी सबसे बड़ी त्रासदी पर विजय प्राप्त की, वह है- तीन तलाक। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने अपने ऐतिहासिक फैसले में इसे अवैध करार दिया। इससे पहले किसी ने इस बात पर शायद ही इतनी चिंता प्रकट की हो कि तीन तलाक के कारण मुस्लिम महिलाओं की दशा कितनी शोचनीय हो जाती थी। न केवल सामने, बल्कि फोन पर या एसएमएस द्वारा भी तीन तलाक के अनेक मामले सामने आए हैं। ऐसे में समझा जा सकता है कि यह फैसला मुस्लिम महिलाओं के लिए कितनी बड़ी राहत साबित हुआ है।

एनएमडीएफसी के प्रयास

राष्ट्रीय अल्पसंख्यक विकास एवं वित्त निगम (एनएमडीएफसी) द्वारा अल्पसंख्यकों को अपना रोजगार आरंभ करने हेतु बहुत ही कम बयाज दर पर लोन उपलब्ध कराता है। यह बात ध्यान देने योग्य है कि अपने को मुस्लिम शुभचिंतक कहने वाली तत्कालीन सरकार ने वर्ष 2012-2013 से ही एनएफडीसी को दी जाने वाली इक्विटी को बाधित रखा था, क्योंकि उनके अधिकृत शेयरों में वृद्धि नहीं थी। मोदी सरकार का यह प्रयास केवल सराहनीय ही नहीं, बल्कि ऐतिहासिक है, जिसमें उन्होंने एनएमडीएफसी की अधिकृत शेयर पूंजी को एक बार में ही 1500 से बढ़ाकर 3000 रुपये करके दोगुना कर दिया।

‘कोलेट्रल’ से मिला बड़ा लाभ

सरकार के प्रयासों से गरीबों के बैंक एकाउंट खुले, जिससे बचत के रूप में उनका आर्थिक सशक्तीकरण हुआ। मुद्रा योजना का सबसे अधिक लाभ सीधे-सीधे मुसलमानों को ही मिला है, क्योंकि मुस्लिम समुदाय में अधिकांश युवा अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़कर छोटे-मोटे काम-धंधों में लग जाते हैं। अपना इस तरह का कोई भी व्यवसाय शुरू करने में मुद्रा योजना के द्वारा उन्हें आर्थिक सहायता सहजता से प्राप्त हो जाती है। साथ ही ‘कोलेट्रल’ भी एक ऐसा ही सशक्त माध्यम है, जिसके अन्तर्गत बिना कोई संपत्ति या आभूषण इत्यादि गिरवी रखे भी सीधे लोन लिया जा सकता है। इससे पहले ऐसा होने की कोई कल्पना भी नहीं कर सकता था।

इसके अतिरिक्त केंद्र सरकार के 17 विभागों के वार्षिक बजट का 15 प्रतिशत भाग अल्पसंख्यकों पर खर्च किए जाने संबंधी योजनाओं पर भी कार्य हुआ।

(साभार:परफॉर्म इंडिया डॉट कॉम)

 


3 ई से होगा विकास

केंद्र सरकार ने अल्पसंख्यकों को लेकर कई योजनाएं बनाई हैं। इसमें अगले 5 साल में अल्पसंख्यक वर्ग के 5 करोड़ छात्रों को प्रधानमंत्री छात्रवृत्ति योजना का लाभ देने, 25 लाख युवाओं को टेक्निकल ट्रेनिंग देकर रोजगार में सक्षम बनाए जाने की योजना शामिल है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी पार्टी की प्रचंड जीत के बाद ‘सर्वमत और विश्वास बहाली’ का संदेश दिया था जिसमें समाज के हर वर्ग को साथ लेकर चलने की बात कही गई। सरकार ने इस ओर अपना कदम बढ़ा दिया है।

अल्पसंख्यक लड़कियों की शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए सरकार दृढ़संकल्प है और इसी के तहत राष्ट्रीय स्तर पर ‘पढ़ो-बढ़ो’ अभियान की शुरुआत की जा रही है। मुख्तार अब्बास नकवी मोदी सरकार में दोबारा अल्पसंख्यक मंत्री बनाए गए हैं। नकवी के पदभार ग्रहण करते ही थ्री ई का लक्ष्य तय किया है। ये थ्री ई हैं-एजुकेशन, एंप्लॉयमेंट और एम्पावरमेंट। इस अभियान का लक्ष्य है अल्पसंख्यक लड़कियों को शिक्षा देकर रोजगार दिया जाए ताकि उनका सशक्तिकरण हो सके। मुख्तार अब्बास नकवी ने अपने मंत्रालय के अधिकारियों के साथ पहली बैठक में स्पष्ट कर दिया कि थ्री ई के माध्यम से ही विकास की गाड़ी को आगे बढ़ाया जा सकता है। अल्पसंख्यक मंत्रालय की कोशिश है कि जिन 5 करोड़ छात्रों को छात्रवृत्ति दी जाएगी उनमें 50 फीसदी हिस्सा लड़कियों की होगी। गौरतलब है कि गरीब अल्पसंख्यक खासकर मुस्लिम लड़कियों में पढ़ाई लिखाई का स्तर काफी नीचे है जिस कारण एक खास वर्ग का विकास तेजी से नहीं हो पा रहा है। सरकार ने इस कमी को दूर करने का संकल्प लिया है।

अल्पसंख्यक मंत्रालय शिक्षा और रोजगार की जानकारी देने के लिए खास माध्यम का सहारा ले रही है। इस काम में 100 से ज्यादा मोबाइल वैन लगाई जाएंगी जो अलग अलग इलाकों में घूम कर लोगों को इस बारे में जागरूक करेंगी। सरकार का ध्यान पंचायतों पर भी है जहां से इस अभियान को तेजी दी जा सकती है। सरकार पंचायतों के माध्यम से अल्पसंख्यकों को छात्रवृत्ति की जानकारी देने के साथ ही उन्हें लाभान्वित करने की तैयारी में है।

मोदी सरकार ने अपने पहले कार्यकाल में ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ अभियान चलाया था जो समाज के हर वर्ग को लाभ देने के मकसद से शुरू किया गया। इस अभियान में सरकार ने कन्या भ्रूण हत्या रोकने और लड़कियों को शिक्षा के माध्यम से आगे बढ़ाने का नारा दिया था। इस अभियान को देश में अच्छी पहचान मिली।

ऐसा नहीं है की मोदी सरकार कोई पहली बार अल्पसंख्यकों की सुधि ले रही है। अगर पिछले पांच साल के दस्तावेजों पर नजर डाले तो यह साफ हो जायेगा की मोदी सरकार पहले से ही अल्पसंख्यंकों का पूरा ख्याल रख रही है और उनके साथ कोई भेद भाव नहीं किया जा रहा। अल्पसंखयक मंत्रालय की एक रिपोर्ट के मुताबिक प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में राजग सरकार ‘सबका साथ, सबका विकास’ के सिद्धांत के अनुरूप अल्पसंख्यकों के समावेशी विकास के लिए प्रतिबद्ध है तथा अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय के योजना बजट में लगातार बढोतरी की जा रही है। वर्ष 2016-17 में इस संबंध में 3800 करोड़ रुपए का आबंटन किया गया जो वर्ष 2015-16 के खर्च स्तर से 168 करोड़ रुपए अधिक है। पिछले वर्ष 2015-16 में मोदी सरकार ने वर्ष 2013-14 में पूर्व सरकार द्वारा किए गए खर्च से बीस प्रतिशत अधिक खर्च किया है, जो भारी वृद्धि है।

21

अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय ने अल्पसंख्यक समुदायों के बीच शिक्षा और रोजगार को प्रोत्साहित करने के लिए गहन प्रयास किए हैं और पिछले दो वर्षों में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। एकीकृत शिक्षा और आजीविका पहल के संदर्भ में वर्ष 2015 में एक नई योजना नई मंजिल शुरू की गई। इस योजना के लिए 650 करोड़ रुपए स्वीकृत किए गए जिससे लगभग एक लाख अल्पसंख्यक युवाओं को फायदा होगा। अल्पसंख्यक कल्याण कार्यक्रमों के इतिहास में यह पहली बार हो रहा है कि जब विश्व बैंक ने ऐसे कार्यक्रम के लिए 50 प्रतिशत वित्तीय सहायता देने के लिए सहमति दी है। कार्यक्रम के क्रियान्वयन के संबंध में वर्ष 2016-17 के लिए 155 करोड़ रुपए निर्धारित किए गए हैं। यह योजना इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें बीच में पढ़ाई छोडऩे वालों की औपचारिक शिक्षा तथा कौशल विकास को महत्व दिया गया है, जिससे उनके रोजगार के अवसरों का विकास होगा। सरकार के स्किल इंडिया और मेक इन इंडिया प्राथमिकता के अनुपालन में अल्पसंख्यकों के कौशल विकास के लिए सीखो और कमाओ को मजबूती दी गई है। इसके अलावा, इस योजना के लिए वर्ष 2015-16 में आबंटित धनराशि को मोदी सरकार द्वारा लगभग 11 गुना (वर्ष 2013-14 के 17 करोड़ रुपए के स्तर से ऊपर) तक बढ़ाया गया है। लगभग 1.23 लाख अल्पसंख्यक युवाओं के प्रशिक्षण के लिए 191.96 करोड़ रुपए स्वीकृत किए गए। वर्ष 2014-15 और 2015-16 को मिलाकर 1.43 लाख अल्पसंख्यक युवाओं को प्रशिक्षित किया गया। वर्ष 2016-17 में 1.25 लाख अल्पसंख्यक युवाओं के प्रशिक्षण के लिए बजट में 210 करोड़ रुपए का और इजाफा किया गया।

अल्पसंख्यक महिलाओं के नेतृत्व विकास के लिए मंत्रालय ने एक विशेष योजना नई रोशनी को क्रियान्वित किया है ताकि सरकारी प्रणाली, बैंकों और अन्य माध्यमों के साथ बातचीत करने के लिए महिलाओं को जानकारी उपलब्ध हो तथा उनमें आत्मविश्वास पैदा किया जा सके। राजग सरकार के पिछले दो वर्षों (2014-15 और 2015-16) के दौरान अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय ने 28।98 करोड़ रुपए खर्च करके 24 राज्यों की 1।30 लाख से अधिक महिलाओं को प्रशिक्षित किया। अभी हाल में नीति आयोग ने स्वतंत्र रूप से योजना के कार्यान्वयन का मूल्यांकन किया है और उसने देखा है कि समाज के ज्यादातर वर्गों ने कार्यक्रम की प्रशंसा की है। इस कार्यक्रम से अल्पसंख्यक महिलाओं में आत्मविश्वास बढ़ा है और उनमें नेतृत्व की भावना का विकास हुआ है।

सरकार पारंपरिक दस्तकारों/हस्तशिल्पियों की समस्याओं से अवगत है। गरीबी और विश्व रुझानों के अनुरूप कौशन उन्नयन न होने के कारण कई दस्तकार और हस्तशिल्पी अपना कौशल छोड़कर दूसरे रोजगार तलाश रहे हैं। सरकार देश की विरासत में होने वाले इस भारी नुकसान की उपेक्षा नहीं कर सकती। इसलिए अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय ने एक नई योजना उस्ताद (अपग्रेडिंग द स्किल्स एंड ट्रेनिंग इन ट्रेडिशनल आर्ट्स/ क्राफ्ट्स फॉर डेवलपमेंट) शुरू की है।

इस योजना का उद्देश्य पारंपरिक कौशलों, डिजाइन विकास, क्षमता निर्माण और उस्ताद दस्तकारों और हस्तशिल्पियों के पारंपरिक कौशल को बढ़ाने संबंधी मानक निर्धारित करना है। इसके अलावा कौशलों का संरक्षण भी इसके तहत किया जाएगा। योजना का यह उद्देश्य भी है कि विभिन्न पारंपरिक कलाओं में संलग्न अल्पसंख्यक युवाओं को उस्ताद दस्तकारों और हस्तशिल्पियों द्वारा प्रशिक्षण दिया जाए। मंत्रालय ने डिजाइन हस्तक्षेप, उत्पाद श्रेणी विकास, पैकेजिंग, प्रदर्शनी जैसी गतिविधियों के लिए राष्ट्रीय फैशन प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईएफटी), राष्ट्रीय डिजाइन संस्थान (एनआईडी) और भारतीय पैकेजिंग संस्थान (आईआईपी) की सहायता ली है। इसके अलावा बिक्री बढ़ाने के लिए ई-बाजार पोर्टल और ब्रांड निर्माण के लिए इन संस्थानों का सहयोग लिया जाएगा। राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय बाजार के साथ सम्पर्क स्थापित करने के लिए मंत्रालय ने ई-वाणिज्य पोर्टल के साथ दस्तावेज समझौते पर दस्तखत भी किए हैं।

अल्पसंख्यक समुदायों की कौशल विकास आवश्यकताओं को पूरा करने और स्वरोजगार तथा उद्यमशीलता के जरिए उन्हें सतत रोजगार प्रदान करने के संबंध में ऋण उपलब्ध कराने के लिए मंत्रालय ने 2014-15 में विशेष पहल करते हुए मौलाना आजाद राष्ट्रीय कौशल अकादमी (एमएएनएस) की स्थापना की। एमएएनएस ने मदरसों और अन्य पारंपरिक शिक्षा संस्थानों के छात्रों के कौशल विकास के लिए कई विशेष प्रयास किए हैं। अब तक एमएएनएस ने 31 मदरसों सहित विभिन्न अल्पसंख्यक समुदायों के 39 पारंपरिक शिक्षा संस्थाओं के साथ सहयोग किया है। अल्पसंख्यक बहुल क्षेत्रों में मुस्लिम लड़कियों के लिए उनके घर तक कौशल विकास सुविधा पहुंचाने के लिए मदरसों को प्रोत्साहित किया गया है। यदि मुस्लिम लड़कियों के लिए इस तरह के मदरसे उपलब्ध न हों तो ऐसी स्थिति में एमएएनएस उनके पड़ोस में प्रशिक्षण की व्यवस्था करता है। अपनी स्थापना से लेकर अब तक एमएएनएस ने कौशल प्रशिक्षण के लिए 65 हजार अल्पसंख्यक युवाओं को अपने दायरे में लिया है।

19

छात्रों के बैंक खातों में छात्रवृत्ति जमा करने के लिए मंत्रालय ने 2015-16 से राष्ट्रीय छात्रवृत्ति पोर्टल (एनएसपी) के जरिए प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) का इस्तेमाल शुरू कर दिया है। इस कदम से धनराशि के अंतरण की प्रक्रिया छोटी हो गई है और भुगतान के विलम्ब में कमी आई है। इसके अलावा डीबीटी स्तर के बैंक खातों को आधार के साथ जोड़कर मंत्रालय को हितधारकों की पहचान करने और धनराशि के संबंध में गड़बडिय़ों से निपटने में सहायता मिल रही है।

निशुल्क कोचिंग योजना के अंतर्गत प्रदान किए जाने वाली वित्तीय सहायता से अल्पसंख्यक समुदायों को मेडिकल, इंजीनियरिंग, सरकारी नौकरियों आदि की प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने में सहायता हो रही है। मोदी सरकार के पिछले दो वर्षों के दौरान धनराशि आबंटन 23 करोड़ रुपए से दोगुना होकर 45 करोड़ रुपए हो गया है और इसके दायरे में आने वाले अल्पसंख्यक अभ्यर्थियों की संख्या भी 9997 से बढ़कर 16,427 हो गई है।

अल्पसंख्यकों की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के लिए मंत्रालय द्वारा शुरू की गई हमारी धरोहर योजना के तहत ‘द एवरलास्टिंग फ्लेम इंटरनेशल प्रोग्राम’ शुरू किया गया है जो अपने तरह का अनोखा कार्यक्रम है। इसमें पारसी संस्कृति पर तीन यात्रा प्रदर्शनियां शामिल हैं। ‘द एवरलास्टिंग फ्लेम’, ‘पेंटटिड एनकाउन्टर्स, पारसी ट्रेडर्स एंड द कम्युनिटी एंड नो पारसी इज एन आइलैंड’और ‘थ्रेड्स ऑफ कंटीन्यूटी’ प्रदर्शनियों का आयोजन राष्ट्रीय संग्रहालय, राष्ट्रीय आधुनिक कला वीथिका और इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केन्द्र में मार्च-मई 2016 के दौरान किया गया। पहली बार प्रदर्शनी के लिए कृतियों को ब्रिटिश म्यूजियम, लंदन, हरमिटेज, रूस; इरान, उज्बेकिस्तान आदि से लाया गया ताकि पारसी संस्कृति को पेश किया जा सके।

मंत्रालय वक्फ सम्पत्तियों की सुरक्षा और प्रबंधन के लिए भी कदम उठा रहा है। मंत्रालय आईआईटी कानपुर, रुड़की, मुम्बई और राष्ट्रीय दूर संवेदी केंद्र की सहायता से वक्फ संपत्तियों की जीआईएस मैपिंग कर रहा है। इससे वक्फ बोर्डों को मूल्यवान भू-संसाधनों के कब्जों को रोकने और निगरानी के लिए सहायता मिलेगी।

राष्ट्रीय अलपसंख्यक विकास एवं वित्त निगम (एनएमडीएफसी) अल्पसंख्यकों को स्वरोजगार के लिए कम दर पर ऋण उपलब्ध कराता है। वर्ष 2012-13 से ही एनएफडीसी को दी जाने वाले इक्विटी बाधित थी क्योंकि तत्कालीन सरकार ने अधिकृत शेयर पूंजी में वृद्धि नहीं की थी। पूर्व सरकार के कार्यकाल के दौरान 2013-14 में कोई केंद्रीय सरकार इक्विटी नहीं दी जा सकी। एनएमडीएफसी के इतिहास में पहली बार मोदी सरकार ने 10 फरवरी 2015 को एनएमडीएफसी की अधिकृत शेयर पूंजी को एक बार में ही दोगुना करके उसे 1500 करोड़ रुपए से बढ़ाकर 3000 करोड़ रुपए कर दिया। तब से ही मंत्रालय ने एनएमडीएफसी को 290 करोड़ रुपए के रूप में योगदान किया है। इसके कारण एनएमडीएफसी अल्पसंख्यकों को अधिक ऋण देने में सक्षम हो गया है।

18

चूंकि शासन में पारदर्शिता मोदी सरकार के एजेंडे में सबसे ऊपर है, इसलिए इसे ध्यान में रखते हुए मंत्रालय ने सीखो और कमाओ, एमएएनएस, नई रोशनी (महिला सशक्तिकरण कार्यक्रम) और नई उड़ान (संघ लोकसेवा आयोग की प्रवेश परीक्षा और मुख्य परीक्षा में सफल उम्मीदवारों की सहायता के लिए कार्यक्रम) के ऑनलाइन पोर्टल शुरू किए हैं। इन पोर्टलों में जनता के लिए सभी महत्वपूर्ण जानकारियां उपलब्ध हैं।

इन सभी कार्यक्रमों को देखते हुए विपक्ष का यह कहना की मोदी सरकार अल्पसंख्यकों के प्रति उदासीन रवैया रखती है बड़ी बेमानी सी लगती है। अल्पसंख्यकों को आजतक विपक्ष एक वोटबैंक की तरह इस्तेमाल करता रहा है  और मोदी के इन कार्यक्रमों से उसे  अपने वोटबैंक में सेंध लगती दिख रही है जिससे वह छटपटाहट की स्थिति में आ रही है। यकीनन इन कार्यक्रमों से भाजपा को चुनावी गणित में लाभ होना तय है लेकिन कहीं न कहीं अल्पसंख्यकों की बेहतरी की भावना भी इस गणित में दिखती है। नेशन फर्स्ट के मोदी के सिद्धांत की यह तो बस बानगी भर है आगे आगे देखिये होता है क्या।

(उदय इंडिया ब्यूरो)

 

 

 

 

Leave a Reply

Your email address will not be published.