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येदियुरप्पा का राजनीतिक सफर

येदियुरप्पा का राजनीतिक सफर

बी. एस. येदियुरप्पा जन्म से ही संघर्ष करने वाले व्यक्तियों में से है, जिन्होंने अपने जीवन में सफलतापूर्वक कई सारी कठिनाईयों को पार किया। नगरपालिका से लेकर मुख्यमंत्री बनने तक के रास्ते में उन्होंने कई सारी कठिनाईयों का सामना किया। उनके अंदर 76 वर्ष की उम्र में भी वही जोश, धैर्य और दृढ़ संकल्प है।

जब बात विकास की होती है तो उनके कभी हार न मानने वाले रवैये और गैर-समझौतावादी प्रकृति ने उन्हें फिर से मुख्यमंत्री बनने में सक्षम बनाया। एक मुख्यमंत्री  के रूप में अपने पिछले साढ़े तीन वर्ष के कार्यकाल में विकास ही उनका मंत्र रहा। उनके कार्यकाल में ही कर्नाटक विकास के मामले में देश में पहला स्थान प्राप्त कर पाया, लेकिन अचानक कुछ दुर्भाग्यपूर्ण परिस्थितियों के कारण बाधायें आईं। फिर भी कर्नाटक उनके कार्यकाल में विकास के मामले में दूसरे स्थान पर रहा। और ये उपलब्धियां उनके आलोचकों के लिए मुहतोड़ जवाब था।

भारतीय जनता पार्टी, जो विपक्ष में होने तक ही सीमित हो गई थी, उन्होंने इसमें एक नई जान फूंकने का काम किया। इस बात से कोई मना नहीं कर सकता कि येदियुरप्पा भाजपा के सबसे परिश्रमी कार्यकर्ताओं में से एक रहे हैं, जो राज्य के प्रदेश अध्यक्ष बने और पार्टी को सिंगल डिजिट से सत्ता तक पहुंचाने का काम किया। इसमें कोई दो मत नहीं कि उन्हें लोग अत्यंत पसंद करते हैं।

एक ऐसा भी समय था जब कर्नाटक विधानसभा के 224 सदस्यों में भाजपा के 2 सदस्य हुआ करते थे, जिसमें से एक सदस्य के दल बदलने के कारण यह संख्या घटकर एक हो गई। फिर भी लोगों को इस अकेले व्यक्ति को रोकना मुश्किल था। जैसे-जैसे वर्ष बीतते गये पार्टी और भी मजबूत होती गई। बाद में पार्टी का कद इतना बढ़ा की बीजेपी को बीएसवाई के रूप में जाना जाने लगा। 2008 में हुए कर्नाटक विधानसभा के चुनाव में भाजपा ने कुल 110 सीटों पर जीत हासिल की जो आवश्यक संख्या से केवल तीन सीट पीछे रही। फिर भी पार्टी सरकार बनाने में सफल रही। लेकिन जिन निदलीय विधायकों ने सरकार को समर्थन दिया था, सब कुछ पाने के बाद भी वे ब्लैकमेल करते रहे। बाद में यह माना गया कि  उन पर भरोसा करना मुश्किल होगा, इसलिए एक स्थिर सरकार बनाये रखने के लिए अन्य दल के सदस्य भी पार्टी में आये, जिससे संख्या बढ़कर 121 तक पहुंच गई। सरकार बनने के एक साल बाद ही लोकसभा चुनाव हुए, जिसमें भाजपा को 28 में से 19 सीटों पर जीत प्राप्त हुई। और 2008 विधानसभा में जिस भाजपा को 34 प्रतिशत वोट मिले थे, वही उस बार वोट प्रतिशत में 8 प्रतिशत की वृद्धि हुई जो 42 प्रतिशत तक पहुंच गया। वही इस बार 2019 में हुए लोकसभा चुनाव में भाजपा ने कुल 25 सीटों पर जीत हासिल की और इस बार तो राज्य में सरकार भी नहीं थी। आज येदियुरप्पा के नेतृत्व में भाजपा लोकसभा और विधानसभा से लेकर स्थानीय चुनावों में रिकॉर्ड बना रही है।

येदियुरप्पा ने जमीनी स्तर पर इतना कार्य किया कि वह लोगों के दिलों और दिमाग में अपनी छाप छोडऩे में सफल रहे। येदियुरप्पा और भाजपा को एक दूसरे का पूरक माना जाने लगा। अब वह चौथी बार राज्य के मुख्यमंत्री बने हैं तो लोग एकबार फिर उनसे विकास की आशा रखते हैं।

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ट्रस्ट वोट में जीत

बी. एस. येदियुरप्पा ने अंतत: 29 जुलाई, 2019 को विश्वास मत हासिल कर ही लिया। विधानसभा अध्यक्ष ने कांग्रेस पार्टी के 14 सदस्यों और जेडीएस के 3 सदस्यों को अयोग्य ठहराया। सभी 17 विधायकों, जिन्होंने अपना इस्तीफा सौंपा था उन्हें अयोग्य घोषित कर दिया गया और सदन की संख्या में कमी आ गई। अब 207 सदस्यों वाली विधानसभा में  येदियुरप्पा  को 105 भाजपा विधायकों का समर्थन मिला। वहीं निर्दलीय विधायकों ने भी येदियुरप्पा सरकार को समर्थन देने का निर्णय लिया। वही कांग्रेस-जेडीएस को 99 वोट मिले। इस प्रकार येदियुरप्पा एक बार फिर मुख्यमंत्री बने।

येदियुरप्पा की प्रमुख योजनाएं

कर्नाटक के 1.95 करोड़ लोगों ने बी. एस. येदियुरप्पा के पिछले कार्यकाल के 38 महीनों के दौरान विभिन्न लोकप्रिय कल्याणकारी योजनाओं का लाभ प्राप्त किया, जो उनकी लोकप्रियता, कुशल प्रशासन को प्रदर्शित करता है।

वैसे तो उन्होंने कई योजनाओं को जमीन पर लागू किया, लेकिन लोग आज भी गरीब लड़कियों के लिए उनके द्वारा आरम्भ किये गये भाग्यलक्ष्मी नामक योजना के लिए प्रशंसा करते हैं। सरकारी व अन्य विद्यालयों में आठवीं कक्षा में पढऩे वाले बच्चे और बच्चियों को मुफ्त में साईकिल बांटी। वह देश के पहले मुख्यमंत्री भी बने जिन्होंने किसानों को 1 प्रतिशत की ब्याज पर लोन दिया। उन्होंने अपने यशस्वनी योजना के तहत ग्रामीण महिलाओं को 2 रूपये प्रति लीटर दूध देने का निर्णय लिया। जब कर्नाटक बाढ़ की चपेट में आ गया था तब बी. एस. येदियुरप्पा की सरकार 298 गांवों के लोगो को एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाने में सफल रही थी। और सरकार ने इन विस्थापित परिवारों के लिए ‘आसरे’ नामक योजना के तहत 68,000 घरों का निर्माण किया। उन्होंने सरकार और लोगो को जोडऩे के लिए जनस्पंदाना नामक प्रोग्राम का आरंभ किया। उन्होंने आर्गेनिक खेती को बढ़ावा देने के लिए भी कई सारे कदम उठाये। उन्होंने एग्रीकल्चर कामर्स एंड फुड प्रोसेसिंग ग्लोबल इनवेस्टर मीट का सफल आयेजन किया।

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संघर्ष का समय

कर्नाटक को देश का नम्बर एक राज्य बनाने में येदियुरप्पा ने काफी संघर्ष किया। उन्होंने अपने सर पर किसान बजट को रखकर अपने घर से लेकर विधानसभा तक पैदल चल कर इतिहास रचा। उन पर कई आरोप लगाकर इस्तीफा देने के लिए विवश किया गया। लेकिन जब वह इस्तीफा देने के लिए राजभवन गये तो उनके साथ कुल 70-75 विधायक उनके प्रति अपनी निष्ठा दिखते हुए साथ गये थे। एक राज्य के मुख्यमंत्री को देश में पहली बार एक निजी शिकायत के आधार पर 24 दिनों के लिए जेल जाने के लिए मजबूर होना पड़ा था।

एक व्यक्ति जिसने अवैध खनन पर अंकुश लगाने का प्रयास किया, उसे अंतत: अदालत ने होली के दिन दोषी नहीं ठहराते हुए न्याय दिया। इससे साबित हुआ कि न्याय और न्याय व्यवस्था में विश्वास रखना चाहिये। अंत में उच्च न्यायालय डिवीजन बेंच ने भी उन्हें निर्दोष माना।

पहले ही दिन किसानों के लिए बम्पर ऑफर

हरे रंग के शाल में राजभवन में शपथ लेने के बाद येदियुरप्पा ने किसानों को बम्पर ऑफर दिया। विधानसभा पहुंचते ही उन्होंने वन-मेन कैबिनेट मीटिंग में तुरंत किसानों को केंद्र के समान किसान सम्मान योजना के तहत मिलने वाले 6 हजार रूपये की अलावा 4 हजार रूपये सालाना देने का निर्णय लिया। यह राशि 2000 रूपये की दो किश्तों में दी जायेगी। इस निर्णय के बाद राज्य के कुल 73 हजार किसानों को प्रति वर्ष 10,000 रूपये मिलेंगे।

बेंगलुरू से आर. पी. जगदीशा

 

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