ब्रेकिंग न्यूज़

येदी-राज

येदी-राज

मैं बूकानाकेरे सिद्धलिंगप्पा येदियुरप्पा भगवान की शपथ लेता हूं।’’ जब कर्नाटक के सबसे शक्तिशाली और किसान नेता ने मुख्यमंत्री बनने के लिए २६ जुलाई की शाम साढ़े छ: बजे राजभवन में इन शब्दों को पढ़ा तब केवल कर्नाटक में ही नहीं बल्कि पूरे देश में फैले पार्टी के करोड़ों कार्यकर्ताओं के लिए यह एक सपना सच होने के समान था।

लिंगायत समाज से आने वाले इस साहसी व्यक्ति ने कर्नाटक के २६वें मुख्यमंत्री की शपथ ली। शिमोगा जिले के शिकारीपूरा तालुक जैसे छोटे गांव से आने वाले येदियुरप्पा ने जिन्होंने जनसंघ से अपने राजनीतिक जीवन की शुरूआत की, अपने पांच दशक के राजनीतिक काल में चौथी बार मुख्यमंत्री की शपथ ली।

शपथ ग्रहण करने के बाद मुख्यमंत्री येदियुरप्पा मुख्य सचिव विजय भास्कर और डीजी-आईजीपी निलमणि राजु से मिले और उसके बाद उन्होंने विधानसौधा में अपनी पहली प्रेस कान्फ्रेंस की। उन्होंने कहा कि वह मैं प्रतिशोधी नहीं होंगे। ”प्रतिशोध की राजनीति करने का कोई सवाल ही नहीं है। जो हो गया सो हो गया। भूल जाओ और क्षमा करो इसमें ही मैं विश्वास करता हूं। विकास ही मेरा मंत्र होगा। मैं राज्य के सभी लोगों, वर्गों और तबकों के साथ न्याय करूंगा। मैं अपने प्रिय नेता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह जी की विकास की राजनीति का अनुसरण करूंगा,’’ उन्होंने कहा।

जैसा की कुमारस्वामी के नेतृत्व वाली सरकार के खिलाफ जेडीएस और कांग्रेस के ही कुछ विधायक बागी हो गये थे, उस संदर्भ में बी. एस. येदियुरप्पा  का मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेना ही सबसे अच्छा राजनीतिक और तार्किक विकल्प था। कांग्रेस के विधायकों का सबसे अधिक आक्रोश कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री बौर कांग्रेस के विधानसभा में नेता सिद्धारमैया  के ही खिलाफ था। इन विधायकों का मानना था कि ये सिद्धारमैया ही थे जो उन्हें न्याय दिलाने में विफल रहे।

होसकोटे के कांग्रेस विधायक एमटीबी नागराज का कहना है कि उन्हें मुख्यमंत्री और उनके बड़े भाई एच. डी. रेवाना द्वारा दर्जन से अधिक बार अपमानित किया गया। सिद्धारमैया के साथ उनकी इस पर बार-बार की गई शिकायतों के बावजूद कोई परिणाम नहीं निकला। कुछ अजीब कारणों से सिद्धारमैया ने न तो मुख्यमंत्री के साथ न ही पार्टी हाईकमान के साथ इस पर चर्चा की।

37

कांग्रेस और जेडीएस के विधायकों के बागी होने के पीछे भाजपा का हाथ बताया गया, जिसको स्वयं बी. एस. येदियुरप्पा ने सिरे से खारिज कर दिया। लेकिन दूसरी तरफ कांग्रेस की ओर से यह आवाजें उठ रही है कि विधायकों के बागी होने के पीछे स्वयं  सिद्धारमैया का हाथ था जो गठबंधन की सरकार को गिराना चाहते थे। हालांके बाद में उन्होंने सफायी दी की वह स्वयं कुमारस्वामी की सरकार की वापसी चाहते थे। ऐसा बताया जाता है कि २०१९ के लोकसभा चुनाव में हार मिलने के बाद सिद्धारमैया ने स्वयं कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी से बात की और यह साफ-साफ कहा कि इस हार का सबसे बड़ा कारण जेडीएस और कांग्रेस का गठबंधन ही रहा।

सिद्धारमैया ने बैंगलुरू में सभी के समक्ष कहा था कि जेडीएस के साथ हाथ मिलाने का तर्क इस चुनाव में बिल्कुल ही गलत साबित हुआ और हमे इस पर पुन: विचार करना चाहिये। उन्होंने यह भी कहा था की कांग्रेस के कई विधायक कुमारस्वामी सरकार की कार्यशैली से नाखुश थे। लेकिन इस पर निर्णय पार्टी नेतृत्व को लेना था। और उन्होंने सच्चाई को समक्ष लाकर अपना कार्य कर दिया था।

कांग्रेस के अलावा जेडीएस सुप्रीमो एच. डी. देवेगौड़ा और एच. डी. कुमारस्वामी भी लगभग यही मानते हैं कि विधायकों के बागी होने के पीछे सिद्धारमैया का ही हाथ हो सकता है, जो अपने विधायकों को मनाने मुम्बई भी नहीं गये। वहीं कांग्रेस के अन्य नेता और एच. डी. शिवकुमार, जो कांग्रेस का हमेशा से बचाव करते हैं, बागी विधायकों को मनाने के लिए मुम्बई गये।

कुमारस्वामी बिल्कुल सही थे, जब उन्होंने कहा कि यदि सिद्धारमैया मुम्बई जायेंगे तो सभी समस्याओं का सामाधान हो जायेगा। ”लेकिन मैं यह नहीं समझ पा रहा हूं कि वह क्यों नहीं जा रहे हैं। मुझे समझ नहीं आ रहा की कांगे्रस का नेतृत्व क्या सोचता है। लेकिन मैं यह जानता हूं कि कांग्रेस हाईकामान क्या सोचता है। लेकिन में इसमें बोलने वाला कौन होता हूं। हां मुझे इतना अवश्य पता है कि राहुल गांधी ने सरकार बनने से पहले मेरे पिता जी से हुई बातचीत के दौरान बिना शर्त पांच वर्ष तक समर्थन देने के लिए वचन दिया था,’’ कुमारस्वामी ने कहा।


 

”भाजपा का दुस्साहस इसके लिए ही महंगा पड़ेगा’’

कर्नाटक कांग्रेस के वरिष्ठ नेता डी. के. शिवकुमार की उदय इंडिया के वरिष्ठ संवाददाता एस. ए. हेमन्त कुमार से हुई खास बातचीत के मुख्य अंश।


 

 

2आपको कर्नाटक कांग्रेस का पालनहार माना जाता है और आपने कई मौकों पर चुनौतियों का सामना कर रही कांग्रेस की सहायता की है। लेकिन इस बार ऐसा क्या हुआ?

मैं कांग्रेस का एक साधारण निष्ठावान कार्यकर्ता हूं। मैं कांग्रेस के सामने आने वाली हरेक चुनौती से निपटने के लिए सामने आता हूं। यह तो मीडिया है, जो मुझे पालनहार मानती है। मुझे अभी भी समझ नही आ रहा कि आखिर क्यों नहीं मैं अपने मित्रों को मुम्बई से वापस ला पाया। इसके पीछे कोई बड़ा कारण हो सकता है।

लेकिन इन बागी विधायकों का यह कहना है कि वे कांग्रेस और कुमारस्वामी की सरकार से नाखुश थे।

मुझे भी सरकार के कामकाज से कुछ शिकायतें थी। लेकिन क्या मैंने पार्टी छोड़ दी? पार्टी तो हमारी माँ के समान होती है। क्या हम कभी अपनी माँ से रूठ सकते हैं? लेकिन इन सबके पीछे केवल एक कारण नहीं हो सकता। बल्कि मेरे अनुसार इसका मुख्य कारण भाजपा द्वारा दिया गया लालच है। लेकिन मेरे पास ऐसा कोई प्रमाण नहीं है कि मैं इसे सिद्ध कर सकूं। यह एक खुला रहस्य है। मैं इतना ही कहूंगा कि भाजपा का दुस्साहस इसके लिए ही महंगा पड़ेगा।

कुछ लोगों का तो यह भी मानना है कि  विधायकों के बागी होने के पिछे सिद्धारमैया का हाथ है।

इसमें कोई सच्चाई नहीं है। जेडीएस के साथ हाथ मिलाने का निर्णय स्वयं कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के द्वारा लिया गया था। हां इससे पार्टी के बहुत से नेताओं को नाराजगी थी, लेकिन इसका ये मतलब नहीं की हम अपने ऊपर के नेतृत्व के खिलाफ जाएं और सरकार गिरा दे। यदि ऐसा होता तो हम पहले ही पार्टी हाईकामान से इसके विषय में चर्चा करते। हमें पार्टी में बोलने की पूरी आजादी है। और जहां तक इस सरकार के गिरने के पीछे सिद्धारमैया का हाथ बताया जा रहा है तो यह केवल और केवल मीडिया द्वारा गढि़त बातें हैं।

लेकिन सच्चाई तो यह है कि ये सारे के सारे विधायक सिद्धारमैया के करीबी हैं?

ये मेरे भी करीबी हैं, न की केवल सिद्धारमैया के। सिद्धारमैया मुख्यमंत्री रह चुके हैं और वे सीएलपी के नेता भी है। और यह बिल्कुल स्वभाविक है कि वे सभी विधायकों से बात करेंगे। इसलिए करीबी होने व न होने की कोई बात नहीं है।


लेकिन कांग्रेस जेडीएस के नेताओं पर विश्वास नहीं करना चाहती। कांग्रेस नेता एमटीबी नागराज का कहना है कि कुमारस्वामी को पांच साल तक समर्थन करना मूर्खतापूर्ण और अतार्किक है। ”जिस पार्टी ने केवल ३७ सीटें जीती हैं वह पांच साल तक कैसे सत्ता में रह सकती है? यह निरर्थक है। अगर हमारी पार्टी के नेताओं ने भी ऐसी प्रतिबद्धता की भी तो यह गलत और बुरा है। हम इस फैसले की समीक्षा करने के लिए निश्चित रूप से अपने आलाकमान को अवगत कराएंगे। सरकार जेडीएस की पूरी तरह पकड़ में है। जेडीएस सुप्रीमो एच. डी. देवेगौड़ा की जानकारी और सहमति के बिना कुछ भी नहीं चलता। और वही  एच. डी. रेवना विभागों के कामकाज में हस्तक्षेप करते रहते हैं। हम इससे तंग आ चुके हैं क्योंकि हम घुटन में जी रहे हैं,’’ उन्होंने कहा।

जबकि सिद्धारमैया और कुमारस्वामी अभी भी भाजपा पर गठबंधन को डगमगाने का आरोप लगा रहे हैं। इस पर बोलते हुए भाजपा महासचिव शोभा कारांदलजे ने इस आरोप को निराधार बताते हुए कहा कि जो लोग अपने खुद के विधायकों से विरोध का सामना कर रहे हैं, वे भाजपा पर आरोप लगा रहे हैं।

भूतपूर्व विधानसभा स्पीकर रमेश कुमार जो अपने आपको कानून का अनुसरण करने वाला व्यक्ति मानते हंै, वह लोगों का यह दिखा रहे थे कि वे किसी से भेदभाव नहीं करते। लेकिन लोगों का तो यही मानना था कि वे सरकार को बचाने का प्रयास कर रहे थे। और इसलिए वह बागी विधायकों से अच्छा बर्ताव नहीं कर रहे थे। हालांकि बाद में उन्होंने इस विवाद से पल्ला झाड़ लिया।

उन्होंने एक प्रेस कान्फ्रेंस यह कहा कि वह संविधान और सुप्रीम कोर्ट दोनों का सम्मान करते हैं। उन्होंने कहा कि वह एक विनम्र परिवार से आते हैं जो कुछ मूल्यों के साथ विकसित हुआ है। उन्होंने कहा, ”मेरा विवेक स्पष्ट है। मैं यहां सरकार बचाने के लिए नहीं हूं। मुझे खुद को संतुष्ट करना होगा कि क्या इस्तीफा देने वाले विधायकों ने अपनी इच्छाशक्ति के आधार पर ऐसा किया है, न कि बाहरी ताकतों के दबाव के कारण। मुझे अध्ययन करने और उनकी राय लेने के लिए कुछ समय चाहिए। मैं भी जनता की भावनाओं के साथ जाऊंगा।’’

हालांकि, १४ विधायकों को अयोग्य घोषित करने के उनके फैसले के बारे में उनका स्पष्टीकरण न तो तर्कसंगत था और न ही तार्किक। उसी दिन जब उनसे इस्तीफा स्वीकार करने के लिए कहा गया था तो उन्होंने इसे स्वीकार करने से साफ मना कर दिया था। इस पर भाजपा के प्रवक्ता, पूर्व कानून मंत्री और वर्तमान राजाजीनगर से भाजपा विधायक एस सुरेश कुमार का कहना है कि जब इस्तीफा स्वीकार करने की बात आती है तो रविवार को कार्यालय बंद रहता है। लेकिन रविवार को विधायकों को अयोग्य घोषित किया जाता है। यह पक्षपात नहीं है तो क्या है?

यह विवाद तब खत्म हुआ जब कांग्रेस के १४ और जेडीएस के ३ विधायकों को अयोग्य करार दिया गया। जिससे विधानसभा में विधायकों की संख्या में कमी आ गई। और कुमारस्वामी के पक्ष में कुल ९९ वोट पड़े वहीं भाजपा के पक्ष में कुल १०५ वोट पड़े। अंतत: राज्यपाल वाजुभाई वाला ने कुमारस्वामी का इस्तीफा स्वीकार कर लिया।

कर्नाटक एकबार फिर कांग्रेस से हटकर भगवा रंग में रंग गया है। लेकिन सच्चाई यह भी है कि जब कांग्रेस और जेडीएस के बागी विधायक गठबंधन के विरोध में थे, तब येदियुरप्पा अपनी राजनीतिक कुशलता का प्रयोग कर भाजपा की सरकार बनाने में सफल रहे। अब वे विधायक यदि भाजपा में आना चाहते हैं तो येदियुरप्पा के सामने सबसे बड़ी चुनौती इन विधायकों को एक बार फिर चुनवाकर लाने की होगी। इसके लिए येदियुरप्पा का शासनकाल पिछली दो सरकारों से अच्छा होना चाहिये।

येदियुरप्पा की गरीबों के प्रति लाभकारी योजनाओं, स्वच्छ शासन, विचारधारा और लोगों के प्रति निष्ठा को देखते हुए, हम यह कह सकते है कि वह लोगों और भाजपा के विश्वास पर हमेशा खरा उतरेंगे।

 

बैंगलुरू से एस. ए. हेमंत कुमार

 

 

Leave a Reply

Your email address will not be published.