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राजनाथ की साहसिक उड़ान

राजनाथ की साहसिक उड़ान

केन्द्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 19 सितम्बर 2019 को बेंगलुरु मंव स्वदेशी हल्का लड़ाकू विमान तेजस में सफल उड़ान भरी। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने तेजस में उड़ान भरकर एक नया इतिहास रच दिया वे तेजस में उड़ान भरने वाले देश के पहले रक्षा मंत्री बन गये हैं। इस तरह के इतिहास रचना राजनाथ सिंह की खासियत है।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने स्वदेशी पर भरोसा जताने और प्रमोट करने का संदेश देने के लिए तेजस में उड़ान भरने का फैसला किया था। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने लड़ाकू विमान को ‘तेजस’ नाम दिया था। दरअसल हर मोर्चे पर डटकर काम करना और आवश्यक नतीजे देने की जिद का दूसरा नाम है। राजनाथ सिंह। प्रोफेसर के रूप में अपने जीवन की शुरूआत करने वाले राजनाथ पार्टी में सामान्य कार्यकर्ता से पार्टी के अध्यक्ष पद तक पहुंचे। सरकार में भी उन्होंने हर पद की गरिमा बढाई। उत्तर प्रदेश के मंत्री भी रहे और मुख्यमंत्री भी। केंद्र में गृहमंत्री भी रहे और रक्षामंत्री भी।

राजनाथ सिंह का जन्म उत्तर प्रदेश राज्य के वाराणसी जिले के एक छोटे से ग्राम भाभोरा में हुआ था। उनके पिता का नाम राम बदन सिंह और माता का नाम गुजराती देवी था। वे क्षेत्र के एक साधारण कृषक परिवार में जन्में थे और आगे चलकर उन्होंने गोरखपुर विश्वविद्यालय से प्रथम श्रेणी में भौतिक शास्त्र में आचार्य की उपाधी प्राप्त की। वे 13 वर्ष की आयु से (सन् 1964 से) संघ परिवार से जुड़े हुए हैं और मिर्जापुर में भौतिकी व्याख्यता की नौकरी लगने के बाद भी संघ से जुड़े रहे। 1974 में, माथे पर एक चमकदार लाल तिलक के साथ, उन्हें भारतीय जनसंघ की मिर्जापुर यूनिट का सचिव नियुक्त किया गया।

राजनाथ सिंह ने अपने राजनैतिक जीवन की शुरुआत उत्तर प्रदेश से की, वो 2000 से 2002 तक उत्तर प्रदेश के मुख्यमन्त्री तथा राष्ट्रीय जनतान्त्रिक गठबन्धन के शासन में कृषि मंत्री रहे। श्री सिंह दो बार पार्टी के अध्यक्ष भी रह चुके हैं। इससे पहले यह उपलब्धि केवल अटल बिहारी वाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी के पास ही थी। संघ की नजर में राजनाथ संयमी स्वयंसेवक रहे हैं। राजनाथ का कोई भी भाषण उठाकर देखिए उसमें संघ और अटल की प्रतिलिपि नजर आएगी। एक बार नागपुर में राष्ट्रीय परिषद को संबोधित करते हुए राजनाथ ने कहा कि उत्तर प्रदेश के एक छोटे से गांव के एक बाल स्वयंसेवक के रूप में जब मैंने कभी नागपुर देखा भी नहीं था, परंतु नागपुर के प्रति मेरे मन में एक अनन्य अनुराग और आस्था का भाव था। तब तक एक वैचारिक हादसा हो गया। 2005 में आडवाणी पाकिस्तान गए। वहां इमोशनल होकर उन्होंने जिन्ना की तारीफ कर दी। यहां संघ के लोग भड़क गए। सोमनाथ से रथयात्रा निकालने वाले आडवाणी पाकिस्तान से लौटे और उनको पार्टी अध्यक्ष पद से इस्तीफा देना पड़ा। नए सिरे से पार्टी अध्यक्ष की तलाश शुरू हुई। पर गली में छोरा, शहर में ढिंढोरा। कुछ दिन के बाद सबको लगा कि अरे, राजनाथ से बढिय़ा कौन है। राजनाथ सिंह भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष बन गए। 2009 तक रहे। दो बार बने। 2009 में गाजियाबाद से लोकसभा भी पहुंच गए। पर आडवाणी की नेतागिरी में भाजपा 2009 के लोकसभा चुनाव में भी पीछे ही रही। अब की बार राजनाथ को भी पद छोडऩा पड़ा। नितिन गडकरी को इम्पोर्ट किया गया।

राजनाथ सिंह पहली बार 31 दिसंबर, 2005 को भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने। दूसरी बार जनवरी 23, 2013 से जुलाई 09, 2014 तक पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे। नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में नवगठित सरकार में 26 मई, 2014 को राजनाथ सिंह ने भारत के केंद्रीय मंत्री के रूप में शपथ ली। दूसरी बार मोदी सरकार में रक्षा मंत्री बने। वे 2019 तक केंद्रीय गृहमंत्री रहे। 30 मई, 2019 को राजनाथ सिंह ने भारत के केंद्रीय मंत्री के रूप में शपथ ली। 1 जून 2019 को श्री सिंह ने केन्द्रीय रक्षा मंत्री का कार्यभार संभाला।

देश से जुड़े हर मुद्दे पर खुलकर बोलना राजनाथ सिंह का स्वभाव है। हाल ही में उन्होंने कहा कि भारत परमाणु हथियारों के ‘पहले इस्तेमाल नहीं’ (No First Use) करने के सिद्धांत पर ‘पूरी तरह प्रतिबद्ध’ है लेकिन भविष्य में क्या होगा यह परिस्थितियों पर निर्भर करेगा। रक्षा मंत्री ने पोकरण का दौरा करने के बाद ट्विटर पर यह बात कही। पोकरण में ही भारत ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल में 1998 में परमाणु परीक्षण किया था।

श्री सिंह ने कहा, ‘यह एक संयोग है कि आज मैं जैसलमेर में इंटरनेशनल आर्मी स्काउट कम्पीटिशन के लिए आया था और आज ही अटल बिहारी वाजपेयी की पहली पुण्यतिथि है। इसलिए मुझे लगा कि मुझे पोखरण की धरती पर ही उन्हें श्रद्धांजलि देनी चाहिए।’ मालूम हो कि मई 1998 में प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल में पोखरण में परमाणु परीक्षण किया गया था।

भारत पार संबंधों का मुद्दा अक्सर चर्चा में रहता है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि  पाकिस्तान के साथ बातचीत तब तक संभव नहीं है जब तक वह आतंकवाद को बढ़ावा देना बंद नहीं करता है. राजनाथ सिंह ने कहा कि अगर पाकिस्तान से बातचीत होगी तो केवल पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) पर होगी उन्होंने कहा, ‘अब पाकिस्तान हर दरवाजे को खटखटा रहा है और खुद को बचाने के लिए विभिन्न देशों से सहयोग मांग रहा है. हमने क्या अपराध किया है? हमें क्यों धमकी दी जा रही है? बहरहाल, दुनिया के सबसे शक्तिशाली देश अमेरिका ने पाकिस्तान को झिड़क दिया है और उसे भारत के साथ वार्ता शुरू करने के लिए कहा है।’ रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सवाल किया कि हम उनसे किस मुद्दे पर बात करें और क्यों करें? उन्होंने आगे कहा, ‘अगर पाकिस्तान के साथ बातचीत होती है तो यह पीओके (पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर) पर होगी न कि किसी अन्य मुद्दे पर।’

संविधान के अनुच्छेद 370 के अधिकतर प्रावधानों को खत्म करने के बारे में राजनाथ सिंह ने कहा कि इस कदम से पड़ोसी देश कमजोर हुआ है और यह उनके लिए चिंता का कारण बन गया है। उन्होंने कहा, ‘पाकिस्तान आतंकवाद का इस्तेमाल कर हमारे देश को तोडऩा चाहता था। लेकिन हमारे 56 इंच के सीने वाले प्रधानमंत्री ने देश को दिखा दिया है कि निर्णय कैसे किया जाता है।’

राजनाथ सिंह ने जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के जन्म के लिए भी अनुच्छेद 370 को जिम्मेदार ठहराया। राजनाथ ने कहा कि आतंकवाद ने जम्मू-कश्मीर को लहूलुहान कर दिया है। उन्होंने कहा कि उन्हें देखना है कि पाकिस्तान कितने आतंकी पैदा करने की कुव्वत रखता है? रक्षा मंत्री ने इमरान खान के उस बयान का जिक्र किया जिसमें उन्होंने पाकिस्तान के नौजवानों को भारत-पाक सीमा पर न जाने की सलाह दी थी। राजनाथ ने कहा कि ये अच्छी सलाह है क्योंकि हमारे जवान सीमा पर तैनात हैं और जो भी आएगा, वह वापस लौट कर नहीं जाएगा। उन्होंने पाकिस्तान को 1965 और 1971 को न दोहराने की चेतावनी दी। राजनाथ ने कहा कि अगर पाकिस्तान ने फिर से अपनी नापाक हरकत दोहराई तो पीओके का क्या होगा, इस सम्बन्ध में वह विचार कर ले। राजनाथ ने कहा कि पाकिस्तान आतंकवाद जब तक खत्म नहीं करता, कोई बातचीत नहीं होगी। उन्होंने कहा कि अगर बात होगी भी तो सिर्फ पीओके पर ही होगी। उन्होंने कहा-

‘भारत का बंटवारा मजहब के आधार पर हुआ है। गांधी और अम्बेडकर नहीं चाहते थे कि भारत के टुकड़े हों लेकिन कुछ सांप्रदायिक नेताओं ने देश का विभाजन कर दिया। मजहब के आधार पर गठित पाकिस्तान की यह हालत हो गई कि 1971 आते-आते बांग्लादेश उससे अलग हो गया। मैं पाकिस्तानी हुक्मरानों से कहना चाहता हूं कि यदि बलूचों और पख्तूनों के खिलाफ मानवाधिकारों का उल्लंघन चलता रहा तो पाकिस्तान को खंड-खंड होने से कोई नहीं बचा सकता। पाकिस्तान अपनी हरकतों की वजह से अपने आप टुकड़े-टुकड़े हो जाएगा।’ राजनाथ सिंह ने कहा कि जम्मू-कश्मीर के आतंकियों को पाकिस्तान स्वतंत्रता सेनानी कहता है। उन्होंने पूछा कि किसी एक देश का आतंकी दूसरे देश का स्वतंत्रता सेनानी कैसे हो सकता है? उन्होंने कहा कि आजादी के बाद से अब तक जम्मू-कश्मीर में 41,500 लोग मारे गए हैं। राज्य में अब तक सुरक्षा बलों के भी 5500 से अधिक जवान वीरगति को प्राप्त हो चुके हैं। उन्होंने याद दिलाया कि लाल बहादुर शास्त्री के प्रधानमंत्रित्व काल में भी संसद ने अनुच्छेद 370 हटाने का समर्थन किया था।

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उन्होंने आर्टिकल 370 को कैंसर बताया। बिहार की राजधानी पटना में आर्टिकल 370 पर संबोधन के दौरान राजनाथ सिंह ने कहा कि अनुच्छेद 370 ऐसा कैंसर था जिसने कश्मीर का बहुत खून बहाया है। राजनाथ सिंह ने पाकिस्तान को चेताया है कि अगर उसे बात करनी है तो आतंकवाद खत्म करे। राजनाथ सिंह ने कहा कि अब पाकिस्तान से बात होगी भी तो कश्मीर पर नही, बल्कि पीओके पर बात होगी। उन्होंने चेताया कि पाकिस्तान 1965 और 1971 की गलती न दोहराए वरना खंड-खंड हो जाएगा। राजनाथ सिंह ने कहा कि जम्मू कश्मीर की तीन चौथाई जनता अनुच्छेद 370 के अधिकतर प्रावधानों को निरस्त किये जाने के पक्ष में थी। उन्होंने कहा कि देखते हैं कि पाकिस्तान कितने आतंकवादी भेज सकता है, कोई लौट कर नहीं जा सकेगा।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि आर्टिकल 370 को हटाना एक सपना था। लोग कहते हैं कि उन्होंने इसका सपना देखा था, मगर यह कभी हकीकत नहीं हो पाया। लेकिन पीएम नरेंद्र मोदी ने इसे करके दिखाया। पीएम मोदी ने दिखाया कि हम भी सपने देखते हैं, मगर खुली आखों से। इसलिए हमारा सपना हकीकत में बदल पाया। राजनाथ सिंह ने कहा कि कश्मीर में आतंकवाद के पनपने की बड़ी वजह आर्टिकल 370 और आर्टिकल 35 ए था। इस आतंकवाद ने कश्मीर को लहूलुहान कर दिया। अब देखते हैं पाकिस्तान में कितनी हिम्मत है। कितने आतंकवादी अब वह पैदा करता है?

उन्होंने आगे कहा कि आप देख सकते हैं कि वे पहले से ही हतोत्साहित हो रहे हैं। पाक पीएम क्कश्य में आते हैं और कहते हैं कि ‘देशवासी भारत-पाक सीमा पर नहीं जाते’। मैं कहता हूं कि यह अच्छा है क्योंकि अगर वे ऐसा करते हैं, तो वे पाकिस्तान वापस नहीं जा पाएंगे। उन्हें 1965 और 1971 को दोहराने की गलती नहीं करनी चाहिए।

केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि देश में भीड़ द्वारा पीट-पीट कर हत्या करने के मामले दुर्भाग्यपूर्ण हैं और केंद्र ऐसी घटनाओं पर रोक लगाने के लिए प्रभावी कार्रवाई कर रहा है। उन्होंने कहा कि इस पर रोकथाम के लिए सोशल मीडिया सेवा प्रदाताओं से भी फर्जी समाचार पर रोक लगाने की व्यवस्था करने को कहा गया है।

लोकसभा में शून्यकाल के दौरान कांग्रेस के केसी वेणुगोपाल ने भीड़ द्वारा पीट-पीट कर हत्या करने के बढ़ते मामलों और असहमति के स्वर को दबाने का विषय उठाया और सरकार से जुड़े लोगों पर ऐसी घटनाओं का समर्थन करने का आरोप लगाया।

इस पर राजनाथ सिंह ने कहा कि यह सचाई है कि कई प्रदेशों में मॉब लिंचिंग की घटनाएं घटी हैं। इसमें कई लोगों की जानें भी गई है लेकिन ऐसी बात नहीं है कि इस तरह की घटनाएं विगत कुछ वर्षों में ही हुई हैं। पहले भी ऐसी घटनाएं हुई हैं। लेकिन ऐसी घटनाएं चिंता का विषय हैं। उन्होंने कहा कि मॉब लिंचिंग में लोग मारे गए हैं, हत्या हुई और लोग घायल हुए हैं, जो किसी भी सरकार के लिए सही नहीं है। ‘हम ऐसी घटनाओं की पूरी तरह से निंदा करते हैं।’

गृहमंत्री ने कहा कि ऐसी घटनाएं अफवाह फैलने, फेक न्यूज और अपुष्ट खबरों के फैलने के कारण घटती हैं। ऐसे में राज्य सरकारों की जिम्मेदारी है कि वे प्रभावी कार्यवाही करें क्योंकि कानून और व्यवस्था राज्यों का विषय है। श्री सिंह ने कहा कि ऐसे मामलों में केंद्र सरकार भी चुप नहीं है। इससे पहले भी साल 2016 में परामर्श जारी किया था और जुलाई के पहले सप्ताह में भी परामर्श जारी किया गया है।

 

सतीश पेडणेकर

 

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