ब्रेकिंग न्यूज़

विकसित भारत के लिए जनसंख्या नियंत्रण जरूरी

विकसित भारत के लिए जनसंख्या नियंत्रण जरूरी

अब हम एक नये भारत में रह रहे हैं जो अभी भी विकासशील राष्ट्र है। भारत के गौरवशाली इतिहास को देखते हुए अब समय आ गया है कि हमें अपने राष्ट्र को विकासशील से विकसित राष्ट्र की ओर ले जाने के विषय में गंभीरता से सोचना चाहिये। आने वाले समय में अत्याधिक जनसंख्या वाला देश होने के बजाय हमें इसे रोकने के विषय में सोचना चाहिये। एक विकसित राष्ट्र होने के लिए प्रत्येक भारतीय को एक अच्छी जीवन-शैली प्रदान किये जाने के विषय में सोचा जाना चाहिये। शिक्षा, स्वास्थ्य और भोजन के अलावा भारत का प्रत्येक नागरिक आज भी अपने लिए घर नहीं पा सका है। इसी संदर्भ में स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री मोदी द्वारा दिया गया भाषण अत्यंत ही महत्वपूर्ण हो जाता है, जिसमें उन्होंने जनसंख्या नियंत्रण की बात कही। जनसंख्या नियंत्रण पर प्रधानमंत्री का दिया गया यह भाषण स्वतंत्रता दिवस पर दिये गये अब तक के सभी भाषणों में सबसे महत्वपूर्ण रहा है। प्रधानमंत्री की सोच बिल्कुल साफ है, लेकिन अभी यह देखना बाकी है कि क्या ‘लिब्रल गैंग’ इसे जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन होने देगा? जनसंख्या नियंत्रण सभी की जिम्मेदारी है। इसलिए इसमें सरकार से अधिक लोगों का योगदान महत्वपूर्ण है। लोगों को ही भारत के भविष्य को संवारना है और नरेन्द्र मोदी ने केवल इस बात पर जोर दिया है। केवल सरकार ही सबकुछ नहीं कर सकती। बढ़ती जनसंख्या भारत की सबसे बड़ी समस्या है, जो भारत के अस्तित्व के लिए खतरा बनती जा रही है। स्वास्थ्य, समाज, पार्यावरण से लेकर अर्थव्यवस्था तक के लिए यह खतरा है। भारत में जन्मदर लागातार तेजी से बढ़ रही है। 2018 के आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार, एक ‘मेल’ बच्चे को जन्म देने की चाह ने भारत में 21 मिलियन अवांछित लड़कियों को जन्म दिया है। इस प्रकार के लिंग भेद के कारण भारत में न केवल तेजी से जनसंख्या में वृद्धि हो रही है, बल्कि कन्या भू्रणहत्या में भी तेजी से वृद्धि हो रही है। इस संर्दभ में ऐसे अपराधों को रोकने के लिए कड़े कानून की आवश्यकता है। हालांकि इससे मना नहीं किया जा सकता है कि पिछले 63 महीनों में 63 वर्षों से अधिक कार्य हुआ है।

सबसे प्रमुख बात तो यह है कि सभी राजनेताओं के पास देश के भविष्य के लिए दूरदृष्टि होनी चाहिये। इसमें कोई संदेह नहीं कि प्रधानमंत्री मोदी के पास देश के लिए एक दूरदृष्टि है। उन्होंने आर्थिक ग्लोबल विषमताओं को देखते हुए अपने इस वक्तव्य से हल ढ़ूंढने का प्रयास किया। इसके लिए देश को व्यक्तिगत प्रेरणाओं, शिक्षा और दृढ़ संकल्प के साथ-साथ सामाजिक ताने-बाने में सुधार लाना होगा। जनसंख्या पर लगाम लगाने के अतिरिक्त, भारत को अपनी विशाल युवा जनसंख्या का लाभ उठाने के विषय में सोचना चाहिये। आकड़ों की मानें तो देश के 14.10 लाख विद्यालयों में 22.90 करोड़ छात्र पढ़ते हैं। लगभग 1.70 करोड़ छात्र आठवीं से नौवी कक्षा में प्रतिवर्ष प्रवेश करते हैं, जिन्हें सकेंड्री शिक्षा अच्छे से प्रदान की जानी चाहिये। उसके बाद ही हम युवा जनसंख्या का लाभ पा सकेंगे। यहां यह बताना महत्वपूर्ण है कि प्रधानमंत्री मोदी ने देश के 50 करोड़ युवाओं को 2022 तक प्रशिक्षित करने का निर्णय लिया है। यदि ऐसा होता है तो भारत को युवा जनसंख्या का लाभ अवश्य ही प्राप्त होगा। हां इसे वास्तविकता में बदलने की आवश्यकता है। नीति-निर्माताअें को एक साथ बैठकर इस विषय पर सोचना चाहिये कि हम युवा जनसंख्या का लाभ उठाते हुए मिलिट्री पावर से आर्थिक पावर कैसे बनें।

Deepak Kumar Rath

 दीपक कुमार रथ

(editor@udayindia.in)

 

Leave a Reply

Your email address will not be published.