ब्रेकिंग न्यूज़

वीर अर्जुन की गाथा

वीर अर्जुन की गाथा

अर्जुन- पांडव योद्धा की गाथा’ नामक पुस्तक भारतवर्ष के महानतम योद्धाओं में से एक, पांडव राजकुमार अर्जुन की अमर गाथा है। इस पुस्तक में अर्जुन की कथा का, जिसकी कल्पना लाखों लोग युगों-युगों से करते आए है, विस्तार से उल्लेख किया गया है। यह कथा अर्जुन के प्रेम, उसकी मित्रता, अभिलाषाओं, दुर्बलताओं, गलतियों, उसकी असामयिक मृत्यु तथा नपुंसक-रूप में कुछ दिन के जीवन एवं उसके ह्रदय के अंतरतम विचारों को अत्यंत भावुकता से उकेरती है।

1

महाभारत की जबरदस्त पृष्ठ्भूमि में आधुनिक और विनोदी शैली में लिखी गई अर्जुन हर वर्ग के पाठक को आकर्षित करती है। लेखक लिखते है कि वनवास में बिताएं अनेक वर्षों ने पांडवों को भयंकर पीड़ा और सुख के अभाव का अभ्यस्त बना दिया था। उन्होंने बहुत कम आयु में अपने पिता को खो दिया और कष्ट उठाये। उन्हें जीवित रहने के लिए संघर्ष करना पड़ा। उन्होंने निर्धन ब्राह्मणों के रूप में समय बिताया। दूर्योधन ने उनका कठिन परिश्रम द्वारा अर्जित राज्य छिन लिया, उन्हें 13 वर्ष के लिए वनवास भेज दिया। इसलिए पाण्डवों ने निष्चय किया कि युद्ध में दोनों पक्षों की ओर होने वाली मृत्यु, विनाश और कष्ट से बचने के लिए शांति का एक प्रयास अवश्य करना चाहिये। इस पुस्तक में अर्जुन के जन्म से पूर्व के लक्षणों से लेकर (जिन्होंने जन्म के साथ ही उसकी भावी महानता के प्रमाण दे दिए थे) उसके सम्पूर्ण जीवन का महागाथा विस्तृत ढंग से प्रस्तुत की गई है।

उदय इंडिया ब्यूरो

Leave a Reply

Your email address will not be published.