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शाकाहार से स्वास्थ्य की सुरक्षा

शाकाहार से स्वास्थ्य की सुरक्षा

शाकाहार एक जीवन-प्रणाली है, जिसका भारतीय संस्कृति से बहुत गहरा सम्बन्ध है। इसीलिये आध्यात्मिक, नैतिक, आर्थिक, अहिंसा, प्रकृति, योग एवं पर्यावरण की दृष्टि से यह निर्विवाद है कि शाकाहार उतम आहार है। परंतु सबसे बड़ी बात जो पाश्चात्य देशों के  लोगों को शाकाहार की ओर आकर्षित कर रही है, वह है शाकाहार से स्वास्थ्य की सुरक्षा। प्रस्तुत लेख में वैज्ञानिक आंकड़ों के आधार पर और विश्व-प्रसिद्ध स्वास्थ्य विशेषज्ञों की राय के अनुसार यह प्रमाणित करने का प्रयास किया जा रहा है कि स्वास्थ्य की सुरक्षा मांसाहारी की तुलना में शाकाहार से अधिक है।

शाकाहार में पर्याप्त प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट एंव कैलोरी

कई बार कुछ मांसाहारी और विशेषकर विद्यार्थी वर्ग एंव डॉक्टर-वर्ग बीमार व्यक्तियों को अधिक प्रोटीन मिले। यह बात तो सही है कि स्वास्थ्य के लिये प्रोटीन भोजन का आश्यक तत्व है, परंतु हमें यह देखना चाहिये कि क्या शाकाहार से पर्याप्त प्रोटीन मिल सकता है? निम्न तालिका के देखने से यह प्रमाणित हो जाता है कि प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट और कैलोरी दृष्टि से स्वास्थ्य की सुरक्षा करने मेंं ज्यादा लाभदायक सिद्ध होता है। भारत सरकार की स्वास्थ्य-बुलेटिन संख्या 23 के द्वारा कुछ खाद्यान्नों में तुलनात्मक अध्ययन द्वारा प्रोटीन, ऊर्जा और कैलोरी की दृष्टि से विभिन्न खाद्यों की तुलना की गयी है। कुछ खाद्यान्नों का तुलनात्मक चार्ट तालिका में दिया गया है।

इस तालिका से स्पष्ट हो जाता है कि प्रोटीन, कैलोरी और कार्बोहाइड्रेट अर्थात ऊर्जा जो शरीर के लिये अत्यन्त आवश्यक है, बिल्कुल नहीं होती।

फिर अतिरिक्त  कार्बोहाइड्रेट की दृष्टि से फल शाकाहारियों को प्रोटीन प्रदान कर सकते हैं, जैसे आम, केला, अंगुर, सेब आदि। इस प्रकार विभिन्न दाल, गेहूं, चावल, आलू  आदि। इसी प्रकार विटामिन और खनिज पदार्थ भी पर्याप्त मात्रा में फलो, सब्जियों और खाद्यान्नों में मिलते हैं।

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अंडा भी स्वास्थ्यवर्धक नहीं

आजकल प्राय: यह सुनने में आ रहा है कि बच्चों को  अंड़े आदि के सेवन से अधिक स्वस्थ बनाया जा सकता है। यह एक भ्रान्ति है, जिसका निराकरण सन् 1985 ई० के नोबल पुरस्कार विजेता डॉ. माइकल एस. ब्राउन तथा डॉ. जोसेफ एल. गोल्डस्टीन नामक दो अमेरिकन डॉक्टरों ने किया, जब उन्होंने यह प्रमाणित कर दिया कि  हृदय के रोग के कारण ही अधिकांश मौंते होती हैं। उनके अनुसार कोलेस्ट्राल नामक तत्व को रक्त में जमने से रोकना बहुत आवश्यक है और कोलेस्ट्राल अंड़ों में सबसे अधिक मात्रा में अर्थात् 100 ग्राम अंडे में लगभग 500 मि.ग्रा. पाया जाता है। यह वनस्पतियों एंव फलों में शून्य सा होता है, परंतु मांस, अंड़ों और जानवरों से प्राप्त वसा में प्रचुर मात्रा में होता है। अब यह भी सिद्ध हो गया है कि अंडा सुपाच्य नहीं है। बल्कि अंडे के छिलके पर लगभग 15000, सूक्ष्म छिद्रों के द्वारा कई जीवाणु उसमें प्रवेश कर जाते है, जो उसे खराब कर देते है। इस प्रकार अब वैज्ञानिकों ने यह प्रमाणित कर दिया है कि जो व्यक्ति मांस या अंडे खाते है, उनके शरीर में  ‘रिसेप्टर’ की संख्या में कमी हो जाती है, जिससे रक्त के अंदर कॉलस्टेरोल की मात्रा अधिक हो जाती है, इससे हृदय रोग आरम्भ हो जाता है। गुर्दे के रोग एंव पथरी जैसी बीमारियों को बढ़ावा मिलता है। यही कारण है कि ‘इटरनेशनल वेजिटेरियन यूनियन’ एवं शाकाहारी संस्थाओं द्वारा शाकाहार को विदेशों में बहुत सम्मान की दृष्टि से देखा जा रहा है। सन् 1985 ई. में मात्र 60 लाख अमेरिकन शाकाहारी थे, परंतु एक नवीनतम सर्वेक्षण के अनुसार अमेरिका के दो तिहाई घरों में अब शाकाहार आकर्षक हो गया है।

शाकाहार पौष्टिक आहार है

कई बार मांसाहार के पक्ष में यह तर्क दिया जाता है कि बच्चों को अधिक शक्तिशाली बनाने की दृष्टि से उन्हें मांसाहार कराया जाना चाहिये, परंतु यह बात सही नहीं। उपरि निर्दिष्ट तालिका से यह बात सिद्ध हो जाती है कि प्रोटीन, कैलोरी और कार्बोहाइड्रेट आदि की दृष्टि से स्वास्थ्य के लिये शाकाहार ही पौष्टिक आहार है। इसके अतिरिक्त यदि हम शाकाहारी जानवरों के उदाहरण देखें तो पायेंगे कि विशुद्ध शाकाहारी जानवर मांसाहारी जानवरों की तुलना में अधिक शक्तिशाली हैं, जैसे-घोड़ा, गेंड़ा तथा हाथी।

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खिलाडिय़ों के लिये अच्छा स्वास्थ्य शाकाहार से संभव

क्रिकेट के विश्वविख्यात बहुत से खिलाड़ी पूर्णतया शाकाहारी रहे है, जैसे-गुरू हनुमान तथा गामा। मास्टर चन्दगीराम, जो पूर्णतया शाकाहारी है, वे भी अपने समय के बहुत ही प्रख्यात पहलवान रहे है। ओलम्पिक में विश्व रिकॉर्ड कायम करने वाले स्टेनप्राईस और दूर पैदल चलने में विशेष योग्यता रखने वाले स्वीटगौन तथा लम्बी दौड़ में बीस विश्व-रिकॉर्ड बनाने वाले नूरमी ये सब शाकाहारी हैं। इंग्लिश चैनल नहर को तंरकर द्रुतगति से पार करने वाले रिकॉर्ड होल्डर बिलपिकिंग और चार सौ मीटर एंव पंद्रह सौ मीटर की दौड़ में विश्व रिकार्ड रखने वाले मुरेरोज भी पूर्णतया शाकाहारी हैं। अन्तर्राष्ट्रीय बाड़ी-बिल्ंडग चैम्पियन एण्ड्रूज शिलिंग तथा पिरको वर्नोट भी शाकाहारी हैं। इतना ही नहीं, कराटे के क्षेत्र में आठ राष्ट्रीय कराटे जीतने वाले ‘एबेल’ शाकाहारी हैं। टेनिस के श्री कमलेश मेहता और विश्वविख्याता विजय मर्चेन्ट एंव वीनु मांकड शाकाहारी रहे है।

रोगों की रोकथाम में शाकाहार अधिक लाभकारी

मांसाहार की अपेक्षा शाकाहार विभिन्न रोगों की रोकथाम में अधिक सहायक सिद्ध हुआ है। विश्व स्वास्थ्य संघ ने ऐसी एक सौ साठ बीमारियों के नाम अपने समाचार पत्र में घोषित किये है, जो मांसाहार से ही फैलती हैं। इन बीमारियों में मिरगी प्रमुख है। यह बीमारी मस्तिष्क में टीनीया सोलिठम नामक कीड़े से उत्पन्न होती है। यह कीड़ा सूअर का मास खाने से उत्पन्न होता है। मानव पर सैकड़ों प्रयोगों से यह सिद्ध हो चुका है कि पशुओं वाली चिकनाई से रक्त में कोलेस्ट्राल’ की मात्रा बढ़ जाती है और वनस्पति की चिकनाई उसे कम करती है। इस बात के प्रचुर प्रमाण यह है कि ‘ऐथिरोक्लेरोसिस’ तथा ‘कोरोनरी’ हृदय रोगों में कोलेस्ट्राल बड़ा कारण है। लॉस एंजिल्स (अमेरिका) के डॉ. मारिसन का कथन है कि कोलेस्ट्रोल से अन्य कितने ही मानव रोग उत्पन्न होते हैं, यथा पथरी (शरीर विज्ञान) से सम्बन्धित प्रयोगशाला के डॉक्टर मूर ने यह प्रदर्शित किया है कि मांसाहार से हृदय का क्रिया-कलाप बढ़ जाता है। ‘न्यूयार्क लाइफ इंश्योरेंस कार्पोरेशन’ के डॉक्टर हंटर आर्थर इस निष्कर्ष पर पहुंचे हैं कि मांस खाने से रक्तचाप बढ़ता है। मंासाहार शरीर में विषाक्त पदार्थो को प्रवेश कराता है। जब पशु मारा जाता है, उस समय त्यागने योग्य द्रव्य उसके शरीर में रह जाते है, जिसके कारण मांसाहार उतेजना का तत्व होता है। इन त्याज्य पदार्थो की मात्रा मृत पशु में उसके जीवित अवस्था तथा उसके वध की अपेक्षा अधिक होती है। इसी प्रकार रक्तचाप, आर्टरीकी कठोरता और गुर्दे रोगों से पीडि़त व्यक्तियों के लिये भी मांसाहार हानिकारक है।

स्वास्थ्य के प्रेमियो के लिये स्वयं के स्वास्थ्य हेतु यह आवश्यक है कि वे अंडे और अन्य मांस आदि अभक्ष्य वस्तु का सेवन निश्चित रूप से कभी न करें।

(साभार : कल्याण आरोग्य अंक)

श्रीरामनिवासजी लखोटिया

 

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