शाबास! मोदी सरकार

शाबास! मोदी सरकार

हमारी वायु सेना और एनडीए की मोदी सरकार को सलाम। उसने पुलवामा हमले के जवाब में पाकिस्तान में जैश-ए-मोहम्मद आतंकी गुट के खिलाफ हवाई हमले से देश का मान बढ़ाया है। पहली सर्जिकल स्ट्राइक से बात पाकिस्तान के गले से नीचे नहीं उतरी थी। उसे सपने में भी अंदाजा नहीं था कि दूसरी स्ट्राइक भी हो सकती है। इसलिए यह देखकर दिल को तसल्ली मिलती है कि आखिरकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वह करने का फैसला किया, जो हर सच्चा भारतीय चाहता था। यही इकलौती वजह है कि सभी प्रमुख पार्टियों ने इस कार्रवाई की सराहना की। इसलिए यह जिक्र करना भी सही है कि सरकार ने आतंकवाद से निबटने की नीति में बुनियादी बदलाव किया है। अब देश में हर आतंकी घटना के लिए पाकिस्तान को दर्दनाक नतीजे भुगतने होंगे। हम ऐसे जवाब का दशकों से इंतजार कर रहे थे और मोदी सरकार की इसके लिए जरूर वाहवाही की जानी चाहिए।

हालांकि पाकिस्तान पर फोकस रखते हुए हमें यह भी नहीं भूलना चाहिए कि जैश को शह देने में चीन की भी भूमिका अहम है। वैसे, चीन खुद अपनी जमीन पर मुस्लिम कट्टरवाद से सख्ती से निबटता है। पाकिस्तान धरती का सबसे अनैतिक किस्म का देश है, इसलिए बाकी दुनिया को इसको अलग-थलग करने के लिए व्यवहारिक कदम उठाना चाहिए। यह प्रक्रिया कठिन होगी क्योंकि चीन तीखी प्रक्रिया करेगा लेकिन ऐसी कठिनाई से गुजरना जायज है। भारत की प्रक्रिया दोधारी होनी चाहिए। एक, पाकिस्तान को अलग-थलग करने के लिए व्यापार पर प्रतिबंध लगाने के साथ तीखी कूटनीतिक पहल की जानी चाहिए। दूसरे, भारत को अपनी रक्षा तैयारी, हवा और जमीन पर निगारानी की तकनीक, सैन्य अस्त्र-शस्त्र का अपग्रेडेशन करके चीन के बराबर क्षमता हासिल करनी होगी। यह इसलिए जरूरी है, ताकि चीन को गुपचुप पाकिस्तान की फौजी तैयारी में मदद करने से रोका जा सके और उसे विश्व मंच पर जवाब दिया जा सके। वजह यह है कि चीन की मदद से पाकिस्ता आतंकवाद को शह देता है।

लेकिन यह कहना होगा कि भारत की सेना, राजनैतिक नेतृत्व और लोगों ने एक स्वर में आवाज उठाई है। हम पाकिस्तान को अपने यहां आतंक नहीं फैलाने देंगे। हम सिर्फ कमरों में बैठकर रणनीतियों पर चर्चा ही नहीं करते रहेंगे। हम सब कुछ तार-तार कर देंगे। बालाकोट एअर स्ट्राइक के बाद पाकिस्तान के पीएमओ में लटके चेहरे ही सारी कहानी कह देते हैं। भारतीय वायु सेना के विमान इजरायली प्रीसिशन गाइडेड म्युनिशन (पीजीएम) से मार कर चुके हैं। सो, इजरायल से पूरी मदद लीजिए और पाकिस्तान से आतंकवाद का नामोनिशान मिटा दीजिए। अब बहुत हो चुका।

नाकाम देश पाकिस्तान हम पर हमला करता रहता है, ताकि उसकी सेना भारत पर तोहमत मढ़ती रहे। वरना वहां के लोग अपनी दुर्दशा को लेकर उठ खड़े होंगे, आखिर आजादी के 70 से ज्यादा साल बाद भी वहां हालात ऐसे क्यों हैं। दरअसल भारत और पाकिस्तान के बीच टकराव तब तक नहीं मिटेगा जब तक पाकिस्तान कश्मीर में आतंकवाद को तरजीह देना बंद नहीं करता और कश्मीर मसले से अलग नहीं होता। बस एक ही रास्ता है कि भारत पाकिस्तान को राजनैतिक और आर्थिक रूप से पंगु कर दे। इस पृष्ठभूमि में यही कहा जा सकता है कि आक्रमण ही बचाव का बेहतर रास्ता है। यह बार-बार साबित हो चुका है।

हालांकि लुटियन दिल्ली का स्वयंभू सेकुलर ब्रिगेड इस हवाई हमले को पाकिस्तान के खिलाफ आक्रमण मान रही है। लेकिन आक्रमण का सवाल कहां है? पाकिस्तान में आतंकी ट्रेनिंग केंद्रों को वहां की सरकार बंद करने को तैयार नहीं है जबकि कई डोजियर दिए जा चुके हैं। पुलवामा हमला भारत की धैर्य की परीक्षा था। सो, भारत को ठोस कार्रवाई करनी पड़ी। पाकिस्तान को अब सबक लेना चाहिए, अपनी हेकड़ी छोडऩी चाहिए और अपने यहां तथा पड़ोसी देश में शांति का माहौल बनाना चाहिए। पाकिस्तान को चाहिए कि वह उसके देश में छुट्टा घुमने वाले आतंकियों को हमें सौंपे, ताकि उनके पिछले अपराधों के लिए उन्हें सजा दी जा सके। इससे कम कुछ भी नहीं चाहिए।

वजह यह भी है कि सामान्य बातचीत का कोई नतीजा नहीं निकलता, जिसके लिए भारत धैर्य से 70 से ज्यादा साल से इंतजार करता रहा है। हमारे देश में पाकिस्तान 1980 के दशक से ही आतंकी घटनाएं करता रहा है और परमाणु ताकत से ब्लैकमेल करता रहा है। उसकी इन हरकतों को पहले अमेरिका, ब्रिटेन और पश्चिम एशिया के देशों से शह मिलती रही है तो 1990 के दशक के बाद चीन उसकी पीठ के पीछे खड़ा हो गया है। अभी भी अमेरिका और पश्चिम एशिया के देश पाकिस्तान के जेहादी आतंकवाद को कभी-कभी शह देते हैं।

ऐसे में हम शांति की कामना के साथ हाथ पर हाथ धरे बैठे रहते तो यह बेमानी होता, जबकि चिट्टीसिंहपुरा, कालूचक, बादामीबाग, संसद, 26/11, उड़ी, पठानकोट और अब पुलवामा जैसे हमले हो चुके हैं। धैर्य बनाए रखने की कोई सीमा होती है। कायर ही अपनी कायरता को छुपाने के लिए हर साए में भूतों का डर देखते रहते हैं। इसलिए सर्जिकल स्ट्राइक-2 पाकिस्तान को कड़ा संदेश है। इससे आतंकी हमले करने से बाज आएंगे और उन्हें बड़ा सबक मिलेगा। लेकिन भारत को इसके बाद चुप नहीं बैठना चाहिए और ऐसे और सर्जिकल स्ट्राइक की योजना बनानी चाहिए, ताकि पाकिस्तान से आतंक शिविर हमेशा के लिए नष्ट हो जाएं। अब हमारे समर्थन में संयुक्त राष्ट्र समेत पूरी दुनिया है। यही वक्त है कि पाकिस्तान को सबक सिखाया जाए। अंत में यही कहना चाहिए कि हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सराहना करनी चाहिए और सभी विपक्षी पार्टियों को उनके साथ इस घड़ी में राजनीति छोड़कर खड़ा रहना चाहिए।

Deepak Kumar Rath

 

  दीपक कुमार रथ

(editor@udayindia.in)

 

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