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श्रीलंका में आतंक का खूनी खेल

श्रीलंका में आतंक का खूनी खेल

श्रीलंका में ईस्टर पर हुए आतंकी हमले ने 30 साल तक चले गृहयुद्ध की याद ताजा कर दी। लंबे समय तक श्रीलंका में अमन का माहौल था। लेकिन ताजा आठ धमाकों ने श्रीलंका को ऐसा जख्म दिया कि देश में लोग असुरक्षित महसूस करने लगे। दस दिन पहले ही विदेशी खुफिया एजेंसियों ने श्रीलंका को इस बावत चेतावनी दे दी थी कि नेशनल तौहीद जमात श्रीलंका में हमला करने वाला है। अभी तक नेशनल तौहीद जमात ने भी हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है, लेकिन माना जा रहा है कि ये काम उसी का है। वैश्विक आतंक के परिदृश्य पर एक उभरता आतंकी संगठन है तौहीद जमात। वह आतंक की दुनिया में इतना नया है कि वारदात के दिन मैंने साउथ एशियन टेररिज्म पोर्टल पर श्रीलंका के आंतकवादी संगठनों में उसका नाम देखने की कोशिश की तो वहां कई तमिल आतंकवादी संगठनों के नाम थे मगर किसी मुस्लिम आतंकवादी संगठन का नाम नहीं था। वैसे अब श्रीलंका में तमिल उग्रवाद की घटनाएं ना के बराबर हैं। लिट्टे के खत्म होने के बाद तमिल उग्रवाद संगठनों की कोई हिंसा की घटना श्रीलंका में आमतौर पर नहीं हुई है। हालांकि श्रीलंका में दर्जनों छोटे-बड़े उग्रवादी तमिल संगठन अब भी अस्तित्व में हैं लेकिन वो अब ठंडे पड़ चुके हैं। सिंहली बहुसंख्यक तो हैं लेकिन वो सीधी टक्कर में ज्यादा यकीन रखते हैं, इसलिए वो अक्सर मुस्लिमों से भिड़ते रहे हैं। उनकी भी उग्रवाद की कोई घटना नहीं मिलती। हां, अक्सर वो हिंसा के लिए सीधे सड़कों पर जरूर उतरते रहे हैं। तौहीद का आतंकवाद का कोई इतिहास नहीं रहा। ज्यादा से ज्यादा वह मुस्लिम कट्टरतावादी सांप्रदायिक संगठन कहा जा सकता है जो अपने बौद्ध विरोधी रुझान के लिए जाना जाता है। आंतकवाद के विशेषज्ञों को भी यकीन नहीं हो रहा कि उसके जैसा सामान्य सा संगठन इतने बड़े स्तर की आतंकवादी घटना को अंजाम दे सकता है।

इसलिए माना जा रहा है कि ईस्टर पर हमलों के पीछे कोई अंतर्राष्ट्रीय आतंकी संगठन होने की संभावना थी। आईएस ने इन हमलों की जिम्मेदारी ली। आईएस की लगभग हर जगह मौजूदगी है।

तौहीद जमात का नाम पहली बार 2013 में सामने आया था। श्रीलंका के तत्कालीन रक्षा मंत्री ने इस संगठन को लेकर चिंता जताई थी। उस दौरान खुफिया एजेंसियों ने इस संगठन के आईएस से तार जुड़े होने की बात कही थी। आईएस से प्रभावित लोगों के इस संगठन से जुड़े होने की बात भी सामने आई थी। इन हमलों में इस संगठन पर सबसे ज्यादा शक होने का भी यही कारण है। कुछ वर्षों पहले श्रीलंका से कुछ लोग सीरिया के युद्ध में शामिल होने के लिए आईएस में शामिल हो गए थे। इस संगठन में ज्यादातर सीरिया में जेहाद छेडऩे वाले यही लड़ाके हैं। सीरिया में पैर उखडऩे के बाद लौटे ये लोग तौहीद जमात संगठन को धार देने में लगे रहे। उन्होंने इस कट्टरतावादी संगठन को आत्मघाती हमले करनेवाला आतंकी संगठन बना दिया। श्रीलंका का आतंकी हमला नौ आत्मघाती हमलावरों ने किया था। बताते हैं कि कई विदेशी खुफिया एजेंसियों ने तौहीद जमात और उसके नापाक इरादों को लेकर श्रीलंका सरकार को पहले ही चेतावनी दे दी थी। इस चेतावनी में साफ-साफ कहा गया था कि तौहीद जमात श्रीलंका के प्रमुख चर्च और भारतीय दूतावास को बम धमाकों से उड़ाने की साजिश रच रहा है।

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पिछले कुछ समय से समय से श्रीलंका में मुस्लिमों और बौद्धों के संबंध बहुत तनावपूर्ण हैं। इस्लाम को हराने और बौद्धधर्म के उत्थान के लिए  बोदु बल सेना (बीबीएस) का गठन हुआ जिसे चरमपंथी सिंहली बौद्धराष्ट्रवादी संगठन माना जाता है। ‘टाइम पत्रिकाने इस संस्था को ‘श्रीलंका का सबसे शक्तिशाली बौद्ध संगठनÓ कहा है। विथानागे द्वारा स्थापित संगठन के अधिवेशन में 100 बौद्ध भिक्षु जुलूस का झंडा लेकर नेतृत्व करते थे।और लोगों को धर्म रक्षा की शपथ दिलाते थे। संगठन का कहना है कि श्रीलंका दुनिया का सबसे पुराना बौद्ध राष्ट्र है हमें उसकी सांस्कृतिक जड़ों को मजबूत करना चाहिए। यह संगठन पिछले वर्षों में श्रीलंका में मुसलमानों पर हुए हमलों के लिए जिम्मेदार माना गाया है। हालांकि विथानागे ने इस बात से इनकार किया कि उनका संगठन ये सब कुछ करता है । संगठन का कहना है कि बौद्ध धर्म की रक्षा के लिए इसका गठन हुआ। विथानागे मानते हैं कि श्रीलंका में भी बौद्धों पर धर्मांतरण का खतरा मंडरा रहा है। मुसलमानों और अन्य अल्पसंख्यकों ने धर्मांतरण का कुचक्र चला रखा है। वे बौद्ध महिलाओं से विवाह करते हैं, उनसे बलात्कार करते हैं और वे बौद्धों की भूमि भी हड़पने में लगे हैं। सिंहली परिवारों में एक या दो बच्चे हैं, जबकि अल्पसंख्यक आधा दर्जन या इनसे ज्यादा बच्चे पैदाकर आबादी का संतुलन बिगाड़ रहे हैं। इनके पीछे विदेशी पैसा है और सरकार इस मामले में कुछ नहीं कर रही है। यह संगठन अल्पसंख्यक वोट बैंक की सियासत पर सवाल उठाता आया है। इस संगठन का मानना है कि श्रीलंका में मुसलमान तेजी से मस्जिदें बनाने और अपनी जनसंख्या बढ़ाने में लगे हैं। श्रीलंका के बौद्ध ग्रुप (बोदु बाला सेना) को भूतपूर्व रक्षा मंत्री गोताबाया राजपक्षे का समर्थन हासिल है। राजपक्षे जो महिंदा राजपक्षे के भाई हैं। बौद्धों के संगठन बोदु बाला सेना ने श्रीलंका में पशुओं को हलाल करने का मुद्दा भी जोरशोर से उठाया। उसके सदस्यों ने बौद्ध भिक्षुओं के नेतृत्व में रैलियां निकाली, मुसलमानों के खिलाफ सीधी कार्रवाई का आह्वान किया और उनके व्यापारिक प्रतिष्ठानों के बहिष्कार की अपील की।

वैश्वीकरण के इस जमाने में श्रीलंका, बर्मा और थाईलैंड के बौद्ध बौद्धधर्म की रक्षा के लिए एक बैनर तले आ गए हैं। इन तीनों देशों के बौद्ध जो अपने देशों के बहुसंख्यक है यह महसूस कर रहे है कि उनकी जनसंख्या घट रही है। वे महसूस करते है कि मुस्लिमों के परिवार उनके परिवारों से बड़े हैं। अंतरधर्मीय विवाह भी उनके सामने एक समस्या हंै। जब दक्षिण और दक्षिण-पूर्वी एशियाई देश में अंतरधर्मीय विवाह होता है उसमें बौद्ध को ही इस्लाम कबूल करना पड़ता है। ऐसा धार्मिक और सामाजिक दबाव के कारण होता है। बौद्ध धर्म छोडऩे का कोई नतीजा नहीं होता मगर मुसलमानों में धर्म छोडऩे वाले को धर्मद्रोही माना जाता है। इस फर्क को बोदु बल सेना के लोग महसूस करते हैं। वे इस प्रवृत्ति पर रोक लगाना चाहते हैं।

म्यांमार का बौद्ध भिक्षु और विराथु बौद्ध मानते है कि सऊदी अरब से इंडोनेशिया तक वैश्विक आर्थिक नेटवर्क फैला हुआ है जो बौद्ध देशों से बौद्ध प्रभुत्व को खत्म करना चाहता है। उनके इन विचारों से म्यामांर से हजार किमी दूर स्थित श्रीलंका की बोदु बले सेना भी सहमत है। सेना ने विराथु को श्रीलंका की राजधानी कोलंबो बुलाया जहां विराथु ने हजारो सिंहली बौद्दों को संबोधित किया। अंतर्राष्ट्रीय हल्कों में विराथु को दे गेए आमंत्रण पर काफी बवाल हुआ। बोदु बल सेना के सह संस्थापक किरामा विमलकीर्ती थेरा कहते हैं -यह बहुधर्मीय देश नहीं है यह सिंहली देश है। विराथु छह महीने बाद फिर श्रीलंका गए और उन्होंने वैश्विक बौद्ध धर्म की रक्षा के लिए वैश्विक बौद्ध गठबंधन बनाया।

तौहीद जमात को श्रीलंका में रहने वाले बौद्ध समुदाय के लोगों के खिलाफ माना जाता है। कई बार भगवान बुद्ध की मूर्तियां तोडऩे और उन्हें बम लगाकर उड़ाने का आरोप भी इस संगठन पर लगता आया है। भारत के तमिलनाडु में भी इस संगठन की बड़ी सक्रियता मानी जाती है। तौहीद जमात पर वहाबी विचारधारा का प्रचार-प्रसार करने का भी आरोप लगा है। हालांकि श्रीलंका के कुछ मुस्लिम इस संगठन का विरोध भी करते रहे हैं।

श्रीलंका के इस कट्टरपंथी संगठन ने साल 2014 में भगवान बुद्ध की मूर्तियों को तोड़कर सबसे ज्यादा सुर्खियां बटौरी थी। इसे लेकर श्रीलंका में कई जगह इस संगठन का विरोध भी हुआ था।

इस संगठन के सचिव अब्दुल रैजिक अपने भड़काऊ बयानों के लिए मशहूर हैं। 2014 में अब्दुल ने बौद्ध धर्म को लेकर बेहद आपत्तिजनक बयान दिए थे। इसी तरह के कुछ और बयानों के चलते विवादों में आने के बाद अब्दुल को 2016 में पहली बार गिरफ्तार किया गया था। 2016 में ही इस संगठन पर कई इलाकों में हिंसा भड़काने का भी आरोप लग चुका है।

2014 में पीस लविंग मुस्लिम्स इन श्रीलंका (क्करुरूस्रु) ने इस संगठन पर प्रतिबंध लगाने की मांग की थी। इसके लिए उन्होंने संयुक्त राष्ट्र, संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार, श्रीलंका के राष्ट्रपति और अन्य कई राजनयिकों को पत्र तक लिखा। इस संगठन ने तर्क दिया था कि तौहीद जमात देश में असहिष्णुता फैलाने के साथ-साथ इस्लामिक आंदोलनों पर दबाव भी बना रहा है।

सतीश पेडणेकर

 

 

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