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संकल्प-पुरूष

संकल्प-पुरूष

राजनाथ सिंह उदय इंडिया (हिन्दी) के कवर पेज पर क्यों हैं? क्या इसलिए कि वह देश के रक्षामंत्री हैं? या इसलिए कि वह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के बाद सरकार में दूसरे स्थान पर आते हैं? जब मैंने उन्हें उदय इंडिया (हिंदी) के कवर पेज पर रखने का निर्णय लिया तो कई सारे प्रश्न मेरे दिमाग में घुम रहे थे। लगातार बीस वर्षों से मैं भिन्न-भिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं, उनकी नीति और विचारों का विश्लेषण करता रहा हूं, जिनमें से अटल बिहारी वाजपेयी, लालकृष्ण आडवाणी, सोनिया गांधी, राजनाथ सिंह, नितिन गडकरी, नरेन्द्र मोदी और अमित शाह शामिल है। मैं इन सभी का नाम इसलिए ले रहा हूं, क्योंकि इन्होंने राष्ट्रीय राजनीति में अहम भूमिका निभाई। अटल बिहारी वाजपेयी अपने समय में देश के सर्वश्रेष्ठ नेताओं में से एक थे, जिनका केवल देश में ही नहीं बल्कि पूरे विश्व भर के नेताओं के बीच उनकी उदारवादी सोच ओर वैश्विक दृष्टि के लिए सम्मान था। वाजपेयी ‘शाईनिंग इंडिया’ कैंम्पेन के बाद लोकसभा चुनाव हार गये। और उनके खराब होते स्वास्थ के कारण लालकृष्ण आडवाणी भाजपा की ओर से प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार बने। लेकिन लोगों ने उनको नहीं स्वीकारा और वे राजनीति से दरकिनार कर दिये गये। उसके बाद राजनाथ सिंह दूसरी बार भाजपा के अध्यक्ष बने। लालकृष्ण आडवाणी और अटल बिहारी वाजपेयी के बाद राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का हमेशा से राजनाथ सिंह पर विश्वास रहा है। राजनाथ सिंह हमेशा से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को समझते रहे हैं। उन्होंने हमेशा ही संगठन, कैडर, विचारधारा और संघ की नीतियों को प्राथमिकता दी है। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष होने के अपने दूसरे कार्यकाल में वे शीघ्रता से मतदाताओं के मस्तिष्क को पढऩे में सफल रहे और 2014 में उन्होंने नरेन्द्र मोदी को भाजपा के प्रधानमंत्री के उम्मीदवार के रूप में घोषित कर दिया। लालकृष्ण आडवाणी व अन्य पार्टी नेताओं के दबाव के बावजूद उन्होंने काफी महत्वपूर्ण निर्णय लिया। पार्टी कैडर भी नरेन्द्र मोदी को ही प्रधानमंत्री के रूप में देखना चाहता था।

राजनाथ सिंह ने पार्टी के एक छोटे से कार्यकता से लेकर पार्टी के अध्यक्ष तक का सफर किया। यदि कोई उनके स्वभाव को पढऩे का प्रयास करे तो वह पाएगा कि वे पार्टी के सभी कैडर की सुनते हैं और उन्हें पार्टी की विचारधारा का अनुसरण करने को कहते हैं। एक अच्छे वक्ता के साथ-साथ राजनाथ सिंह भारतीय राष्ट्रवाद और मानवतावाद को लोगों के समक्ष स्पष्ट शब्दों में रखते हैं। वह भारतीय किसानों के हितों के प्रबल समर्थक रहे हैं। यह कहना गलत नहीं होगा कि वाजपेयी के बाद वह राजनाथ सिंह थे जिन्होंने हमेशा सोनिया गांधी, ओम प्रकाश चौटाला, मुलायम सिंह यादव, चंद्रबाबू नायडू, ममता बनर्जी और अन्य राजनीतिक विरोधियों के साथ अच्छा तालमेल रखा। प्रकाश सिंह बादल, टी एन चतुर्वेदी और डीपी त्रिपाठी जैसे नेता आज भी उनके सबसे बड़े मित्रों में से एक हैं। अपने राजनीतिक कार्यकाल में राजनाथ सिंह ने कभी भी विवादित बयान नहीं दिया। 2014 में जब नरेन्द्र मोदी देश के प्रधानमंत्री बने तो राजनाथ सिंह ने गृहमंत्री का पद संभाला और अपने कार्यकाल में उन्होंने सीमा सुरक्षा, आंतरिक सुरक्षा को सफलतापूर्वक सुनिश्चित किया। उन्होंने अपने इस कार्यकाल में पुलिस आधुनिकीकरण का कार्य भी किया। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि उन्होंने कश्मीर में कानून व्यवस्था को सुधारने के लिए कई सारे महत्वपूर्ण कदम उठाये। 2018 में उदय इंडिया के साथ एक साक्षात्कार में, राजनाथ सिंह ने स्पष्ट रूप से कहा था कि घाटी में बहुत जल्द शांति स्थापित की जाएगी और जम्मू कश्मीर में एक भारी बदलाव देखने को मिलेगा। इसलिए अभी हाल ही में कश्मीर से अनुच्छेद 370 और 35ए के हटाये जाने में तत्कालीन गृहमंत्री राजनाथ सिंह के अथक प्रयास शामिल है। इस प्रकार का बड़ा निर्णय कुछ महीनों या एक वर्ष में नहीं लिया जा सकता। इसके लिए पूरी तरह की तैयारी की आवश्यकता होती है। लेकिन राजनाथ सिंह इसका श्रेय नहीं लेना चाहेंगे।

अब  राजनाथ सिंह नरेन्द्र मोदी के सरकार  दूसरे कार्यकाल में देश के रक्षा मंत्री बन गये हैं और वह आज भी सरकार में दूसरे नम्बर पर आते हैं। कुछ लोगों का मानना था कि राजनाथ सिंह कमजोर हो चुके हैं, क्योंकि गृह मंत्रालय अमित शाह को दे दिया गया है। लेकिन कभी भी निराश न होने वाले, राजनाथ सिंह रक्षा मंत्रालय के कार्यो को आगे बढ़ाने में लगे हैं। उन्होंने हाल ही में पाकिस्तान को न्यूक्लियर हथियारों के संबन्ध में ‘नो फस्र्ट यूज’ पॉलिसी पर बयान देकर अपने मजबूत नेतृत्व को दर्शाया है। पीओके पर पाकिस्तान के खिलाफ राजनाथ के मजबूत रुख ने उनके नेतृत्व को और सशक्त किया। रक्षा मंत्री होते हुए उन्होंने मेक-इन-इंडिया को प्रोत्साहित किया है। स्वदेश में निर्मित तेजस (हल्का लड़ाकू विमान) को उड़ाकर उन्होंने एक मजबूत राष्ट्र की प्रतिबद्धता को दर्शाया है। यहां यह बताना आवश्यक है कि सिंगल इंजन वाले तेजस में उन्होंने प्रोटोकॉल्स को तोड़ते हुए उड़ाने का साहस दिखाया। अब भारत तेजस की स्वदेशी टेक्नोलॉजी को दूसरे देशों को बेचने के लिए तैयार है, जो मेक-इन-इंडिया को बढ़ावा देगा। यह आशा की जाती है कि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के कार्यकाल में भारत रक्षा के क्षेत्र में नई ऊचांईयों को छूएगा।

Deepak Kumar Rath

 दीपक कुमार रथ

 (editor@udayindia.in)

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