सतर्कता सुरक्षा का सबसे महत्वपूर्ण भाग

सतर्कता सुरक्षा का सबसे महत्वपूर्ण भाग

व्यक्तिगत सुरक्षा, कानून और व्यवस्था, आपराधिक गतिविधियों की रोकथाम व समाज में शांति बनाये रखने और नागरिकों की विभिन्न जरूरतों को पूरा करने के लिए पुलिस व्यवस्था एक संस्थागत प्रतिक्रिया है। लेखक लिखते हैं कि दिल्ली जैसे महानगर में अपने पुलिस कैरियर के दो दशकों से भी अधिक समय में उन्होंने हमेशा दिन-प्रतिदिन की पुलिसिंग में नागरिकों एवं समुदायों को शामिल करने की कोशिश की है और उनसे भरोसे और आत्मविश्वास की उम्मीद की है। इस प्रयास का मुल उद्देश्य समुदायों को नवीनतम अपराध प्रविृतियों और उनके द्वारा अपराध को रोकने के लिए अपनाई जाने वाली सावधानियों और उपायों के बारे में जागरूक बनाना था। यह सामूहिक निकायों के साथ नियमित बातचीत के माध्यम से किया गया था। यह पुस्तिका अधिक संगठित और ठोस रूप में जीवन के कुछ महत्वपूर्ण क्षेत्रों में अपराध की रोकथाम पर लेखक के विचारों का संग्रह है। लेखक लिखते हैं कि हमारे शहरों में घरेलू नौकर एक महत्वपूर्ण सेवा प्रदाता है। लेकिन, कुछ समय से उनमें से कई अपराध, डकैती और हत्या जैसे अपराधों में पकड़े गये हैं। नौकरों से संबंधित मामलों की जांच करने से पता चलता है कि वे अक्सर बिना जांच-पड़ताल के ही काम पर रखे जाते हैं।

सतर्क रहें

सुरक्षित रहें

लेखक             : ओ. पी. मिश्रा

प्रकाशक         : नियोगी बुक्स

मूल्य              : १२५ रु.

पृष्ठ                : ७३

लेखक आगे लिखते हैं कि आज आतंकवाद दुनिया भर की प्रमुख समस्याओं और चुनौतियों में से एक है। इनमें से अधिकांश घटनाएं शहरों में भीड़ वाले स्थानों पर होती हैं, फिर भी हर आतंकी घटना उचित योजना, सहयोग, समन्वय और लक्ष्यों की पहचान के माध्यम से घटित होती है। ऐसी घटनाओं को अंजाम देना एक दिन का परिणाम नहीं हो सकता। इसके लिए संसाधन, बुनियादी ढांचे और अन्य सामग्री जुटाने में महीनों लग जाते हैं। आखिरकार, इन घटनाओं को अंजाम देने के लिए एक आतंकवादी को रहने और काम करने के लिए स्थान की आवश्यकता होती है।  आतंकवाद की रोकथाम के लिए विभिन्न मोर्चों पर एक वैश्विक रणनीति बनाने की आवश्यकता है, जहां कहीं भी हमारे हित जुड़े होते हैं वहां आतंकवाद की घटनाएं घट सकती है। आतंकवाद की घटनाओं को रोकने में रेसिडेंट वेलफेयर एसोशिएसन, मार्केट एसोशिएसन, गेस्ट हाऊस एसोशिएसन के कर्मचारियों का बहुत बड़ा योगदान होता है।

साइबर सुरक्षा पर लेखक चाक लिखते हैं कि अपने बच्चों को आनलाईन के लुभावने खतरों के बारे में शिक्षित करने के लिए इंटरनेट सबसे प्रभावी तरीका है। बच्चों का भोलापन और जल्द भरोसा करने की प्रकृति उन्हें इंटरनेट के खतरों जैसे बदमाशी, उत्पीडऩ, अश्लील साहित्य, सूचना की चोरी और वितीय धोखाधड़ी के जाल में फंसा सकती है। लेखक बच्चों की सुरक्षा के संदर्भ में यह लिखते है कि यदि कोई आपको लुट रहा है तो अपने किमती सामान उसे दें दे उससे लड़े नही। अपने माता-पिता को उन स्थानों या लोगों के बारे में बताये जिनसे आप असुरक्षित महसूस करते हैं। उन लोगों पर भरोसा न करें जो आपके माता-पिता के बनाये नियम तोडऩे के लिए कहते है।

ओपी मिश्रा द्वारा लिखी गई सतर्क रहें, सुरक्षित रहें पुस्तक पाठकों को अपनी ओर आकर्षित करेगी, क्योंकि यह पुस्तक सुरक्षा से जुड़े मुख्य बिन्दुओं को उठाती है।

उदय इंडिया ब्यूरो

 

 

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