सपनों की दुनिया का प्रवेश द्वार हैं बोर्ड परीक्षा

सपनों की दुनिया का प्रवेश द्वार हैं बोर्ड परीक्षा

सीबीएसई बोर्ड की बारहवीं कक्षा के स्टूडेंट्स के लिए मार्च का महीना काफी अहम होता है क्योंकि इसी महीने के प्राय: पहली तारीख से उनकी बोर्ड परीक्षा शुरू हो जाती हैं जिसके रिजल्ट्स काफी अहम और निर्णायक रोल वाले होते हैं। बोर्ड की परीक्षा को ‘आयरन गेट’ माना जाता है क्योंकि इस परीक्षा के रिजल्ट्स भविष्य में छात्रों के जीवन और करियर की दिशा निर्धारित करती हैं। स्कूली परफॉरमेंस के रिपोर्ट कार्ड के रूप में बारहवीं कक्षा के रिजल्ट्स आने वाले महीनों में सपनों की दुनिया के रूप में हायर एजुकेशन के लिए कॉलेज और यूनिवर्सिटी में एंट्री के गोल्डन पासपोर्ट का कार्य करता है।

किन्तु बोर्ड की परीक्षाओं में अच्छे प्रतिशत अंकों के साथ सफलता की  राहें आसान नहीं होती हैं। इसके लिए कुशल समय प्रबंधन, कठिन मिहनत, गहन अध्ययन के साथ-साथ धैर्य और पॉजिटिव थिंकिंग की नितांत जरूरत होती है। इस परीक्षा में एक्सीलेंट सक्सेस के लिए एक स्टूडेंट को निम्नांकित स्ट्रेटेजी के साथ अध्ययन करने की जरूरत होती है-

  1. कोर्स के सिलेबस को अच्छी तरह से जानना

किसी विषय का पाठ्यक्रम एक रोड मैप का काम करता है क्योंकि उसी के आधार पर परीक्षा की तैयारी के लिए प्लानिंग बनाई जाती है। लिहाजा सभी सब्जेक्ट्स के सिलेबी को अच्छी तरह से जानना बोर्ड परीक्षा की तैयारी की यात्रा में पहला महत्वपूर्ण कदम होता है। इस सन्दर्भ में स्टूडेंट्स को निम्न बातों का  भी अवश्य ध्यान रखना चाहिए –

  • एनसीइआरटी की किताबों को इगनोर नहीं करें। ये टेक्स्ट बुक्स सिलेबस और रीडिंग मैटेरियल्स की दृष्टि से स्टैण्डर्ड माने जाते हैं। लिहाजा एनसीइआरटी की किताबों का गहन अध्ययन करें और प्रत्येक चैप्टर के अंत में दिए गये एक्सरसाइज के प्रश्नों को अवश्य हल करें।
  • पाठ्यक्रम में हाई माक्र्स वाले चैप्टर्स की लिस्ट बना लेनी चाहिए।
  • मॉडल प्रश्नों के कई सेट्स को हल करें। इससे आपके आत्मविश्वास और साहस में वृद्धि होगी।
  • प्रतिवर्ष रिपीट होने वाले प्रश्नों की तैयारी से भी आपको बेहतर सक्सेस मिल सकता है। इसीलिए सभी विषयों के पीछे चार-पांच वर्षों के प्रश्नों को सोल्व कर लेने से तैयारी अधिक वैज्ञानिक और सुनिश्चित हो जाती है। इस संदर्भ में आप अपने सब्जेक्ट टीचर्स से भी डिस्कशन कर सकते हैं और उनके अमूल्य सुझाव को फॉलो कर सकते हैं।
  • सीबीएसई भी अपने मॉडल प्रश्नों का सेट्स पब्लिश करती है। छात्रों को इन सेट्स को निर्धारित समय में हल करने की प्रैक्टिस करनी चाहिए।
  • दीर्घ-उत्तरीय प्रश्न (लॉन्ग-आंसर-टाइप क्वेश्चन्स) जो प्राय: 6 अंकों वाले होते हैं, उत्कृष्ट परिणाम के लिए काफी अहम होते हैं। इसके लिए प्रत्येक चैप्टर में इस तरह के महत्वपूर्ण प्रश्नों का चयन कर लेना चाहिए और उन प्रश्नों के हल करने के लिए नियमित प्रैक्टिस करनी चाहिए।।
  • प्रश्नों के उत्तर में जरूरत के हिसाब से डायग्राम्स और ग्राफ्स का प्रयोग, विशेषकर बायोलॉजी, मैथमेटिक्स, इकोनॉमिक्स, फिजिक्स और केमिस्ट्री जैसे विषयों में अच्छे माक्र्स दिलाने में काफी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इस दृष्टिकोण से प्रत्येक यूनिट में ऐसे चैप्टर का चयन कर लेने से परीक्षा की तैयारी काफी आसान हो जाती है।
  1. एक रियलिस्टिक स्टडी प्लान अनिवार्य

प्लानिंग को हर लक्ष्य प्राप्ति का स्टेपिंग स्टोन माना जाता है। क्योंकि प्राय: ऐसा कहा जाता है कि यदि आप अपने लक्ष्य प्राप्ति के लिए योजना बनाने में असफल रहते हैं तो आप असफल होने की योजना बना रहे होते हैं। आशय यह है कि बोर्ड जैसी अहम परीक्षा की तैयारी के लिए एक परफेक्ट प्लानिंग काफी जरुरी होता है। लेकिन जब भी प्लान के बारे में सोचें तो हमेशा यही ध्यान रखें कि प्लान रियलिस्टिक हों तो बेहतर है -आदर्श योजना और देखा-देखी में दूसरों की योजना को फॉलो करना समय, संसाधन और कठिन मेहनत की बर्वादी के सिवाय कुछ नहीं होता है।

प्लानिंग करने के पूर्व स्टूडेंट्स को निम्न बातों को ध्यान में अवश्य रखनी चाहिए –

  • इस परीक्षा में आपका लक्ष्य क्या है? आप न्युनतम कितने प्रतिशत माक्र्स अचीव करना चाहते हैं?
  • आप अपने लक्ष्य के प्रति कितने कठोर, कर्तव्यनिष्ठ और समर्पित हैं?
  • परीक्षा की तैयारी के लिए आपके पास समय और संसाधानों की कितनी उपलब्धता है?
  • आप धैर्यपूर्वक एक स्थान पर बैठकर कितनी देर पढ़ सकते हैं?

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  1. फ्रेंड्स को इगनोर नहीं करें

इस सच से बिल्कुल इनकार नहीं किया जा सकता है कि हमारे जीवन में दोस्तों की अहम भूमिका होती है। लेकिन सभी दोस्त इतने महत्वपूर्ण नहीं होते हैं। कुछ दोस्तों का काम टाइम पास जैसा होता है और वे स्टडी और जीवन के प्रति सीरियस नहीं होते हैं, जबकि कुछ दोस्त परीक्षा की तैयारी में आपके लिए कैटेलिस्ट का काम कर सकते हैं। इन दोस्तों के साथ स्टडी और डिफिकल्ट टॉपिक्स पर डिस्कशन से मुश्किलें आसान होती जाती हैं। इसीलिए अपने दोस्तों की पहचान करना बेहद जरुरी है। ऐसा कर लेने पर आपका टाइम बर्वाद होने से बचा रह जायेगा और आप अपने समय का बेस्ट यूज कर पायेगे।

  1. घबराएं नहीं…और न ही चिंता करें

प्री-बोर्ड और प्रैक्टिकल की परीक्षा के बाद बोर्ड की परीक्षा की तैयारी के लिए उपलब्ध समय चार सप्ताह से अधिक का नहीं बचा रह जाता है। समय के अभाव के कारण स्टूडेंट्स मनोवैज्ञानिक रूप से काफी डर जाते हैं। यह स्थिति घबराहट और बैचेनी की होती है। लेकिन यह समय घबराने और खुद को कोसने का नहीं होता है। समय सीमा को ध्यान में रखकर धैर्यपूर्वक और पॉजिटिव सोच के साथ छात्रों को परीक्षा की तैयारी नियमित रूप से करते रहना चाहिए। इससे टास्क आसान होता जाता है।

  1. सोचिये आप का फेवरिट सब्जेक्ट कौन-सा है?

इस बात से कदाचित ही कोई इनकार कर पाए कि प्रत्येक स्टूडेंट का अपना मनपसन्द सब्जेक्ट होता है, जिसकी तैयारी के लिए उसे अधिक समय नहीं देना होता है और न ही अधिक प्रयास करना होता है। किन्तु यह भी उतना ही सच है कि सभी छात्रों के लिए कुछ विषय अपेक्षाकृत कठिन होते हैं। ऐसी स्थिति में यदि सभी विषयों को फेवरिट और नॉन-फेवरिट के आधार पर बांट लें तो तैयारी जल्दी से और अधिक आसान हो जाती है। इतना ही नहीं हर के सब्जेक्ट में कुछ चैप्टर बहुत ही आसान होते हैं जिसकी तैयारी अपेक्षाकृत कम समय में किया जा सकता है। इसलिए हर एक सब्जेक्ट में ऐसे आसान चैप्टर्स की पहचान कर लेना बहुत जरुरी होता है। डिफिकल्ट सब्जेक्ट्स की अच्छी तैयारी के लिए अधिक टाइम देना एक विवेकपूर्ण कदम होता है। प्राथमिकता के आधार पर इस प्रकार की तैयारी और प्लानिंग से टाइम मैनेजमेंट की प्रॉब्लम भी सोल्व हो जाती है और खोया हुआ आत्मविश्वास वापस लौटने लगता है।

  1. ऑब्जेक्टिव प्रश्नों की अनदेखी नहीं करें

ऑब्जेक्टिव और बहु-विकल्पी (मल्टीप्ल चॉइस) प्रश्न परीक्षा में मार्क्स दिलाने में अहम भूमिका निभाते हैं। लेकिन स्टूडेंट्स इन प्रश्नों की तैयारी पर ध्यान नहीं देते हैं। प्रत्येक विषय में इस तरह के प्रश्नों की संख्या प्राय: आठ से दस तक होती है। ऐसे प्रश्नों की तैयारी के लिए सम्पूर्ण सिलेबस का गहन और सूक्ष्म अध्ययन आवश्यक होता है। इसके अतिरिक्त इन प्रश्नों की तैयारी के क्रम में पूरा पाठ्यक्रम तैयार हो जाता है जो छात्रों के आत्मविश्वास बढाने में काफी अहम भूमिका निभाता है।

  1. स्मरण शक्ति की तकनीक फायदेमंद

किसी लेसन या लॉन्ग आंसर वाले क्वेश्चन की तैयारी में स्मरण शक्ति की तकनीक काफी मददगार साबित होती है। इस तकनीक की मदद से बड़े आंसर के महत्वपूर्ण पॉइंट्स को आसानी से लर्न कर सकते हैं। उदाहरण के लिए सूर्य से विभिन्न ग्रहों की दुरी के क्रम को ” “My Very Efficient Mother Just Served Us Nuts । के द्वारा आसानी से याद किया जा सकता है। यहां रू4 का रू मार्श अर्थात मंगल गृह के लिए यूज किया गया है जो सूर्य के सबसे नजदीक का ग्रह है। उसी प्रकार ङ्कद्गह्म्4 का ङ्क वीनस के लिए प्रयुक्त किया गया है। यह तकनीक लम्बे आंसर वाले क्वेश्चन को तैयार करने में काफी मदद करता है।

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  1. समय-समय पर मूल्यांकन करते रहें

आपने बोर्ड की परीक्षा की तैयारी के लिए जो प्लान बना रखा है उसे बीच-बीच में इवैल्यूएट भी करते रहना एक अच्छी स्ट्रेटेजी के रूप में माना जाता है। यदि आपको यह लग रहा है कि आप जिस प्लान से स्टडी कर रहे हैं उससे बहुत लाभ नहीं हो रहा है तो समय का इंतजार नहीं करें। परीक्षा की तैयारी की योजना और स्ट्रेटेजी में बदलाव करके देखें और मन को भटकने न दें। ऐसा करके आप मुकम्मल तैयारी की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं।

परीक्षा छात्र के जीवन और करियर निर्माण के लिए सर्वाधिक महत्वपूर्ण आधार का काम करती है। यह शिशु के जन्म के पूर्व की प्रसव पीड़ा सरीखा ही अनिवार्य होता है जिसके अभाव में जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती है। लेकिन इस सच से भी हम मुंह नहीं मोड़ सकते हैं कि परीक्षा कभी भी जीवन से बड़ी नहीं होती है। लिहाजा यदि आप बोर्ड परीक्षाओं के लिए अच्छी तैयारी करने में असफल रहते हैं तो इसका अर्थ कदापि यह नहीं है कि आप अपने जीवन की बाजी हार गये हैं। लगातार कोशिश और धैर्य रखकर कठिन मेहनत से ही आप सफलता के उस शिखर पर पहुंच सकते हैं जिसे पाने का आप सपना देख रहे होते हैं।

          (लेखक जवाहर नवोदय विद्यालय में प्राचार्य हैं)

श्रीप्रकाश शर्मा

 

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