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साईबर क्राईम रोकने के लिए काननू लाने की आवश्यकता

साईबर क्राईम रोकने के लिए काननू लाने की आवश्यकता

पिछले 20 नवम्बर से 22 नवम्बर तक दिल्ली के स्कोप कम्प्लेक्स में साईबर लॉ, साईबर क्राईम और साईबर सिक्योरिटी पर एक अंतर्राष्ट्रीय कांफ्रेंस का आयोजन हुआ, जिसमें देश-विदेश से आये विशषज्ञों ने भाग लिया। इस तीन दिवसीय कांफ्रेंस का मुख्य बिन्दु साईबर लॉ रहा। कांफ्रेंस को संबोधित करते हुए सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता और पवन दुग्गल एसोसिएट के प्रमुख डॉ. पवन दुग्गल ने कहा कि देश में साईबर क्राईम के खतरे लगातार बढ़ते ही जा रहे है, लेकिन दूर्भाग्य की बात यह है कि इससे निपटने के लिए देश में कोई कानून नहीं है। वहीं दूसरी तरफ  जापान, वियतनाम और न्यूजीलैंड जैसे अन्य देशों ने साईबर क्राईम रोकने के लिए कानून लाये हैं। उन्होंने कहा की आज देश की अधिकतम जनसंख्या सोशल मीडिया पर है, लेकिन ये सारे सोशल मीडिया के ऐप बाहर के देशों से आपरेट होते हैं। लोग आज यह सुनीश्चित नहीं कर सकते कि उनका डाटा सुरक्षित है। यहां तक की विश्व-भर में सार्वाधिक प्रयोग किये जाने वाला मेसेजिंग ऐप व्हाट्सप भी लोगों के डाटा की सुरक्षा की पूर्ण गारेंटी नहीं लेता। यहां प्रश्न यह उठता है कि लोगों के डाटा की गारंटी कौन ले? उन्होंने आगे कहा कि आज देश में करोड़ों लोग इंटरनेट बैंकि ग का प्रयोग कर रहे है। आज वे यह आसानी से नहीं कह सकते कि उनका धन बिल्कुल ही सुरक्षित है। यहां यह बताना आवश्यक है कि एक आंकड़े के मुताबिक प्रत्येक वर्ष साइबर अपराधी दुनिया में लगभग 2.5 ट्रिलियन डॉलर पर हाथ साफ कर रहे हैं। यह आंकड़ा कई देशों की जीडीपी से बड़ा है।

भ्रष्टाचार और फ्रॉड के क्षेत्र में काम कर रही ग्लोबल फर्म क्रोल के सीनियर मैनेजिंग डायरेक्टर एलन ब्रिल ने कहा  कि साइबर क्राईम करने के लिए लोगों को पूरी तरह से तैयार किया जा रहा है। अब ये लोग छुप-छुप कर अपराधी नहीं कर रहे  हैं, कुछ देशों में तो साइबर अपराध खुलेआम घूम रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना हैं कि आज साईबर टेररिज्म को भी गंभीर रूप से लिया जाना चाहिये। क्योंकि विश्व के किसी भी कोने में बैठकर किसी भी व्यक्ति को रेडिकलाइज्ड किया जा सकता है। और इसलिए सरकार को इसे रोकने पर जितना हो सके उतना काम करना चाहिये। विशेषज्ञों का मानना है कि फेक न्यूज का भी साईबर टेररिज्म में बहुत बड़ा योगदान है। आज टेररिज्म केवल गोले बारूद से ही नहीं फैलाया जा रहा, बल्कि फेक न्यूज के माध्यम से प्रोपेगंडा करके भी फैलाया जा रहा है। और सरकार को इसे गंभीरतापूर्वक लैते हुए रोकने का प्रयास करना चाहिये। इस कांफ्रेंस में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर भी चर्चा हुई और किस प्रकार से नये किस्म का आधुनिकता लाने में इसका योगदान है, उस पर सभी विशेषज्ञों ने चर्चा की।

(उदय इंडिया ब्यूरो)

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