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सेवा, संघ और समाज

सेवा, संघ और समाज

पिछले 1 मार्च, 2019 को भाजपा के वरिष्ठ नेता सुधांशु मित्तल द्वारा लिखि गई पुस्तक ‘आरएसएस: बिल्डिंग इंडिया थ्रू सेवा’ का लोकार्पण दिल्ली के प्रवासी भारतीय केंद्र में संपन्न हुआ। इस मौके पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सह सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले, आरएसएस के सरकार्यवाह डॉ. कृष्ण गोपाल, केंद्रीय कपड़ा मंत्री स्मृति ईरानी और इंडिया टीवी के अध्यक्ष रजत शर्मा उपस्थित थे।

आरएसएस के सह सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले ने सुधांशु मित्तल द्वारा लिखी गई  पुस्तक ‘आरएसएस: बिल्डिंग इंडिया थ्रू सेवा’ पर विस्तृत रूप से अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि हिंदुस्तान के हर गांव में आज संघ का काम है। किसी भी व्यक्ति को संघ के बारे में जानने के लिए इधर-उधर से जानकारी नहीं लेनी चाहिये। बल्कि संघ को निकट से देखना चाहिए और संघ के लोगों से बात करना चाहिए। आज पूरे विश्व में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की चर्चा है। कई विश्वविद्यालयों में लोग संघ के कार्यो को लेकर रिसर्च कर रहे हंै। और यह कई वर्षों से हो रहा है, 2014 से नहीं। उन्होंने कहा कि संघ के अनुसार सेवा कर्तव्य है। हम जिस धरती पर जन्में है, उस समाज की सेवा करना हमारा कर्तव्य हैं। स्वामी विवेकानन्द जी के अनुसार सेवा और त्याग भारत के दो राष्ट्रीय आदर्श है। यह सबकुछ हमें अपने घर के संस्कारों से प्राप्त होता है। नर सेवा ही नारायण सेवा है। मानव सेवा ही माधव सेवा है। इसलिए संघ ने कभी भी सेवा को चेरिटी से नहीं जोड़ा है। सेवाकार्य केवल कुछ लोगों के भौतिक आवश्यकताओं की पूर्ति करने के लिए नहीं है। हां जरूरतमंदों को रोटी, कपड़ा अवश्य देना चाहिये, लेकिन चेरिटी के माध्यम से नहीं।

संघ के कार्यों पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि संघ एक वैचारिक अभियान है। देश के चिंतन और विचार में परिवर्तन होना चाहिये। यही संघ का कार्य है और उसका संघ प्रचार करता है। लेकिन संघ सेवा का प्रचार नहीं करता। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के नाम से कोई प्रोजेक्ट नहीं मिलेगा। देश में किसी भी प्रकार की आपदा आती है तो स्वयंसेवक उस घटना स्थल पर जाकर सेवा करते हैं। यह किसी एनजीओ और सरकार की सहायता के माध्यम से करने का कोई कार्य नहीं है। समाज से प्रेम करने वाले हर व्यक्ति को त्याग करते हुए इस कार्य को करना चाहिये और यहीं संघ के स्वयंसेवक करते हैं। हां स्वंसेवकों के व्यवहार, चरित्र और कार्यो को देखकर लोग अवश्य कहते हंै कि यह कार्य आरएसएस के द्वारा किया जा रहा है। क्योंकि लोग आरएसएस को समझते है। हां कुछ लोग अवश्य नहीं समझते और उनमें से कुछ समझना ही नहीं चाहते। सेवा के माध्यम से राष्ट्र का निर्माण करना संघ का एक सूत्र है। यह चेरिटी नहीं बल्कि जीवन जिने की शैली है। सेवा हमारा धर्म हैं। होसबोले ने कहा कि इस बार के कुम्भ में संघ ने नेत्र कुम्भ के माध्यम से 1 लाख पैंतालिस हजार लोगों के नेत्रों का जांच कर चश्मा देने का कार्य किया। देश के कई राज्यों से नेत्र वैध सेवा करने के लिए आये। इस नेत्र-कुम्भ के माध्यम से रोज लगभग साढ़े चार हजार लोगों की आखों की जांच होती थी। उन्होंने कहा कि संघ कभी भी ‘स्लम’ क्षेत्र को सेवा-बस्ती मानता है क्योंकि यहां सेवा की आवश्यकता है। और इस कार्य को करने के लिए किसी एनजीओं और सीएसआर की आवश्यकता नहीं है।

संघ पर धार्मिक आधार पर भेदभाव करने के आरोपों पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि संघ किसी को अपना शत्रु नहीं मानता। हां देश के शत्रु जो अंदर या बाहर है, उन्हें शत्रु अवश्य मानता है। जब हम समूचे विश्व को अपना परिवार मानते हैं, तो कोई हमारा शत्रु कैसे हो सकता है? इसलिए सेवा के कार्य में कोई भेद-भाव नहीं होता है। सेवा के कार्यो में हम पंथ और मजहब के बारे में कभी नहीं सोचा। उन्होंने कहा कि कुछ वर्ष पहले हरियाण के चरखी दादरी में दो हवाई जहाज टकरा गये और उसमें कई लोगों की मृत्यु हो गई। सरकारी व्यवस्था पहुंचने से पहले स्वयंसेवकों ने लोगों की सहायता की। इसमें 80 प्रतिशत लोग मुस्लिम थे। चूंकि इसमें से एक प्लेन अरब की थी। यहां यह बताना महत्वपूर्ण है कि दुर्घटना के तीन माह के पश्चात यूएई दूतावास से चरखी दादरी के संघचालक के पास एक पत्र आया, जिसमें यह लिखा था कि आप ने हमारे लोगों की सेवा की है, इसलिए हम आपको धन्यवाद देते हैं। संघ की सेवा कार्य के लिए कई संस्थाएं चलती है और उसमें सभी संप्रदाय के लोग आते हैं और उनके साथ कभी भी भेदभाव नहीं होता।

संघ की आजादी में भूमिका के बारे में उन्होंने कहा कि कई लोग पूछते है कि देश की स्वाधीनता में संघ का क्या योगदान था। संघ 1925 में प्रारम्भ हुआ। इससे पूर्व 1921 और उसके पश्चात 1931 में संघ के संस्थापक डां. केशव हेडगवार को देश के आजादी के आंदोलन में भाग लेने के लिए जेल भेजा गया। जिस दिन लाहौर के रावी नदी के तट पर इंडियन नेशनल कांग्रेस ने पूर्ण स्वराज की घोषण की, तब डॉ. हेडगवार ने संघ के हर शाखा को एक सर्कुलर भेजा। और कहा कि आप इसे शाखा में मनाओं। इसका कारण यह है कि पांच वर्ष पूर्व 1920 में संघ के संस्थापना के पांच वर्ष पूर्व नागपुर में जब कांग्रेस का अधिवेशन हुआ था, जिसमें डॉ. हेडेगवार ‘चीफ ऑफ द वालेन्टीयर’ फोर्स थे। उसमें डॉ. हेडेगवार ने एक प्रस्ताव लाया था। हां प्रस्ताव को स्वीकार्य नहीं किया गया, वह अलग बात है। उसमें उन्होंने कहा था कि दुनिया के सभी देशों को पूंजिवाद की मुट्ठी से मुक्त करवाना चाहिये। दूसरा था कि भारत के लिए पूर्ण स्वतंत्रता की अधिघोषणा होना चाहिये। और यह आरएसएस के संस्थापना के पांच वर्ष पूर्व की घटना है। उस समय उनकी उम्र 30 वर्ष थी। इसलिए स्वभाविक रूप से लाहौर के रावी नदी के तट पर इंडियन नेशनल कांग्रेस ने जब पूर्ण स्वराज की घोषण की तो हेडगवार जी खुश हो गये। आजादी के समय देश में मुख्यत- दो प्रकार के आंदोलन चलते थे। पहला, सत्याग्रह जो पब्लिक एक्टिीविटी के माध्यम से होते थे। दूसरा, रिवोलुशनरी, तो संघ के कार्यकर्ताओं द्वारा देश के चारो-तरफ किये जाते थे। तो इसलिए सुधांशु जी के इस पुस्तक में संघ के आजादी में भाग लेने के बारे में भी लिखा गया है।

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आरएसएस के सरकार्यवाह डॉ. कृष्ण गोपाल ने सुधांशु मित्तल द्वारा लिखी गई  पुस्तक पर बोलते हुए कहा कि संघ का पूरा कार्य ही सेवा है। सेवा और संघ के कार्य को अलग करना एक कठिन काम है। लेकिन रूढ़ शब्दों में सेवा का मतलब ऐसा लगाया जाता है कि समाज के उस वर्ग के बारे में हम क्या करते हैं जिसको अत्यन्त आवश्यकता है और उसी दृष्टि से लोग देखते भी है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का प्रत्येक स्वयंसेवक यह भाव रखता है कि मेरे इस मातृभूमि का हर व्यक्ति जो कष्ट में है तो वही कष्ट मेरे को अनुभूत होना चाहिये। उसके मन में वह कष्ट नहीं होता तो पक्का मानिये वह स्वयंसेवक नहीं है। राष्ट्रीय दायित्व, बोध, कर्तव्य और सेवा कोई दो चिज नहीं है। इस देश को संविधान की धाराओं से नहीं जोड़ सकते। देश को सेनाओं की ताकत से नहीं जोड़ सकते। यह देश आत्मियता और भावनाओं से जुड़ेगा। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने वह भाव पैदा किया है।

केंद्रीय कपड़ा मंत्री स्मृति ईरानी ने अंत में अपनी बात रखते हुए कहा कि अक्सर संघ के बारे में लोगों के मन में भ्रम रहता है। जो जानबूझकर अनजान बनते हंै। आज सेविका समिती के माध्यम से शाखाओं में तीन लाख से अधिक हमारी बहने सेवा दे रही है। सेविका समिती की बहनों का यह सौभाग्य है कि लगभग चालिस देशों में वो संघ और देश के कार्य को और भी सुदृढ़ कर रहीं है। मातृत्व, कतृत्व और नेतृत्व की भावना के साथ सेविका समिति की जितनी भी बहनों के साथ मैं कार्य कर पायी हूं। मैंनें उनके द्वारा किये गये त्यागों को देखा है।

समारोह को संबोधित करते हुए रजत शर्मा ने कहा कि सुधांशु मित्तल एक चलते-फिरते टाईम बम है। उनको हर विषय की जानकारी है। सुधांशु मित्तल ने जिस सेवा का जिक्र इस किताब में किया है, मुझे लगता है कि आज पूरे विश्व में सेवा की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि पिछले दो-तीन वर्षों में संघ ने अपने बारे में जो संकाएं है, उसका समाधान करना शुरू किया है। संघ ने समाज के सामने आकर सवालों का जबाब देना शुरू किया है।

उदय इंडिया ब्यूरो

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