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हाउ इज द खौफ

हाउ इज द खौफ

पुलवामा हमलों को हुए 12 दिन हो चुके थे और पूरा देश यह जानने की बैचेन लिए बैठा था कि उरी हमले की तरह क्या देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पुलवामा हमले का बदला ले पाएंगे? एक तरफ लोकसभा चुनाव नजदीक हैं तो दूसरी तरफ पुलवामा जैसे आंतकी हमलों में देश दहल रहा था। वहीं, विपक्ष भी मोदी सरकार को लगातार अपने निशाने पर लिए बैठा था। इस हमले की जिम्मेदारी पाकिस्तान स्थित आतंकी जैश-ए-मोहम्मद (जेईएम) ने ली थी। इससे आक्रोशित जनता लगातार पकिस्तान पर हमला करने तक की मांग उठा रही थी। इन  हमलों पर मोदी सरकार की एक सुदृढ़ प्रतिक्रिया का भी बेसब्री से इंतजार कर रही थी। आखिरकार इन सारे सवालों का जवाब देश की जनता को मिल ही गया।

जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में सीआरपीएफ के 40 जवानों के शहीद होने के 13वें दिन भारत ने पाकिस्तान के बालाकोट में जैश-ए-मोहम्मद के ठिकानों पर एयर स्ट्राइक कर अपना हिसाब बराबर कर लिया। पुलवामा आतंकी हमले के ठीक 12 दिन बाद भारतीय वायुसेना के पाक के कब्जे वाले कश्मीर में आतंकी ठिकानों पर बड़ी कार्रवाई की खबरों ने देश की जनता का दिल खुश कर दिया है।  भारतीय वायु सेना ने मंगलवार 26 फरवरी की  सुबह साढ़े 3 बजे पाकिस्तान में घुसकर आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद पर बड़ी कार्रवाई की है। इस ऑपरेशन में 12 मिराज 2000 लड़ाकू विमान ने हिस्सा लिया और एलओसी के पार आतंकी कैंपों पर 1000 किलोग्राम के बम गिराए। वायु सेना के सूत्रों के अनुसार, कैंपों को पूरी तरह नष्ट कर दिया गया। सूत्रों का कहना है कि वायुसेना के हवाई हमलों में एलओसी के पार बालाकोट, चाकोटी और मुजफ्फराबाद में आतंकी लॉन्च पैड्स पूरी तरह से नष्ट हो गए। जैश-ए-मोहम्मद का कंट्रोल रूम भी नष्ट कर दिया गया।

सूत्रों का कहना है कि आतंकी संगठनों जैश, लश्कर-ए-तैयबा और हिजबुल मुजाहिदीन के संयुक्त प्रशिक्षण शिविरों को निशाना बनाया गया है। भारतीय सेना के सूत्रों का कहना है कि जेट विमानों ने बालाकोट में लगभग 3.45 बजे, मुजफ्फराबाद में 3.48 बजे और चाकोटी में लगभग 3.58 बजे प्रशिक्षण शिविरों पर हमला किया। हमले में जैश के अल्फा-3 कंट्रोल रूम को नष्ट कर दिया।

पाकिस्तान में खैबर पख्तूनख्वा प्रांत का एक शहर बालाकोट, नियंत्रण रेखा से लगभग 50 किमी (31 मील) दूर है। भारतीय वायु सेना ने पाकिस्तान वायु सेना द्वारा किसी भी संभावित कार्रवाई का जवाब देने के लिए अंतरराष्ट्रीय सीमा और एलओसी के साथ-साथ सभी वायु रक्षा प्रणालियों को हाई अलर्ट पर रखा है। मिराज जेट के अलावा, भारतीय वायु सेना के सुखोई जेट का भी हवाई हमले में इस्तेमाल किया गया। अगर इनकी आवश्यकता होती तो, अन्य जेट किसी भी कवर के लिए मौजूद थे। बालाकोट में किया गया यह हमला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह स्थान पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर से पार है जो दर्शाता है कि यह महज नियंत्रण रेखा का उल्लंघन नहीं हैं, बल्कि पाकिस्तानी क्षेत्र के भीतर की गई दंडात्मक कार्रवाई है।

इसके पहले पाकिस्तानी सेना ने आरोप लगाया गया था कि भारतीय वायुसेना ने नियंत्रण रेखा का उल्लंघन किया है।  पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता मेजर जनरल आसिफ गफूर ने ट्वीट किया कि ‘भारतीय वायु सेना के विमानों ने नियंत्रण रेखा का उल्लंघन करते हुए मुजफ्फराबाद सेक्टर में घुस आए। पाकिस्तान वायु सेना ने तुरंत कार्रवाई की। भारतीय विमान वापस चले गए।’ यह जगह पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (क्कश्य) में पड़ता है।

विदेश सचिव की प्रेस कॉन्फ्रेंस में विदेश सचिव  विजय गोखले ने कहा कि 14 फरवरी को पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद ने पुलवामा में आतंकी हमला किया था, जिसमें हमारे 40 जवान शहीद हुए थे।  इससे पहले पठानकोट में भी जैश की तरफ से आतंकी हमला किया गया था। पाकिस्तान हमेशा इन संगठनों की अपने देश में मौजूदगी से इनकार करता आया है। पाकिस्तान को कई बार सबूत भी दिए गए लेकिन उसने आतंकी संगठन के खिलाफ आजतक कोई कार्रवाई की। पाकिस्तान के रुख को देखते हुए हमने कदम उठाने की रणनीति तैयार की। हमने  बालाकोट में एयर स्ट्राइक की है जिसमें जैश के कमांडर समेत कई आतंकियों को ढेर किया गया है। यह एक असैन्य कार्रवाई थी

जिसमें आतंकी संगठनों को निशाना बनाया गया है। गोखले ने बताया कि 20 साल से पाकिस्तान आतंकी साजिश रच रहा था और आतंकी संगठनों पर आजतक कोई कार्रवाई नहीं की गई थी।

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बालाकोट था असली टारगेट    

मुजफ्फराबाद और चिकोटी में जो स्ट्राइक किये गए वह भी कम महत्वपूर्ण नहीं थे लेकिन असली टारगेट तो बालाकोट रहा। बालाकोट  का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है कि यह पाकिस्तान के मनशेरा पास में पड़ता है या ऐसे कहें तो इस्लामाबाद के पास। मतलब पाकिस्तान के भीतर तक घुस कर हमारे रणबांकुरों ने अपना कौशल दिखाया।  ऐसा इससे पहले 1971 की लड़ाई के दौरान हुआ था।  पाकिस्तान पर स्ट्राइक के बाद हुए सर्वदलीय बैठक में विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने जानकारी दी कि यह हमला रुशष्ट से 70 किलोमीटर आगे तक टारगेट था। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह एक नॉन मिलिट्री ऑपरेशन था और यह हमला सिर्फ आतंकी कैंपों के खिलाफ था। उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान इस बात को लेकर कंफ्यूज है कि कैसे जवाब दिया जाए।

अब बालाकोट क्यों था टारगेट, यह भी जानना बहुत दिलचस्प है। दरअसल, भारत ने बालाकोट में आतंकियों के उन ठिकानों पर हमले किए हैं जहां 42 आत्मघाती हमलावरों को प्रशिक्षित किया जा रहा था। अगर खबरों की माने तो भारत की खुफिया एजेंसियों को आतंकियों की ऐसी सूची हाथ लगी थी जिससे साफ होता था कि बालाकोट में 42 आत्मघाती हमलावरों को ट्रेनिंग दी जा रही थी।  खुफिया एजेंसियों को ये सूची पाकिस्तान के बालाकोट में सक्रिय अपने सूत्रों के जरिये मिली थी। इन हवाई हमलों में जो आतंकी ठिकाने तबाह किए गए हैं वे कोई आम आतंकी ठिकाने नहीं थे। वायु सेना ने आतंकियों के स्वीमिंग पूल और ट्रेनिंग के ढांचे को नष्ट कर दिए हैं।  आतंकियों के लिए ट्रेनिंग ढांचे को पाकिस्तान आर्मी और वहां की खुफिया एजेंसी आईएसआई ने तैयार किया था। सनद रहे की  पुलवामा में सीआरपीएफ काफिले पर हमले के बाद 15 फरवरी को ही वायु सेना प्रमुख धनोआ ने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोवाल को आतंकी संगठनों के शिविरों पर स्ट्राइक की योजना के बारे में बताया था।

बदले की कहानी डोवाल की जुबानी 

26 फरवरी की तड़के 3.30 बजे भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के भीतर घुस कर पुलवामा में हुए फिदायीन हमलों का बदला ले लिया। इस कार्रवाई के बाद सीसीएस (कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी) की बैठक हुई। बैठक में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहाकार अजीत डोवाल ने सीसीएस सदस्यों को बताया कि इस कार्रवाई में जैश-ए-मोहम्मद के शीर्ष 25 कमांडरों को मार गिराया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई सीसीएस की बैठक में गृह मंत्री राजनाथ सिंह, विदेश मंत्री सुषमा स्वराज, रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण, वित्त मंत्री अरुण जेटली, एनएसए अजीत डोवाल समेत उच्च अधिकारी मौजूद थे।  अजीत डोवाल ने सीसीएस सदस्यों को जानकारी दी कि हवाई हमले में जैश के शीर्ष कमांडरों के एक बड़े हिस्से का सफाया कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि इस कार्रवाई में जैश के 25 टॉप कमांडर मारे गए हैं। जिस कैंप को तबाह किया गया है वो कोई सामान्य लॉन्च पैड या बेस नहीं था। नष्ट किए गए आतंकी कैंप में फायरिंग रेंज, विस्फोटक परीक्षण सुविधाएं, प्रशिक्षकों के लिए वातानुकूलित कार्यालय, प्रशिक्षण ले रहे आतंकियों के लिए वहां पर बैरक भी थे।  कैंपों में स्विमिंग पूल, मनोरंजन केंद्र जैसी सुविधाएं थीं। इन सुविधा को सेना और आईएसआई की सहायता से मुहैया कराया जा रहा था। पुलवामा आतंकी हमले के बाद भारत की तरफ से हमले की आशंका को देखते हुए पाकिस्तानी सेना ने भरी संख्या में आतंकियों को इस कैंप में छुपा के रखा था। हमले के लिए बालाकोट को चुने जाने की एक और वजह भी बताई गयी है। कहा जा रहा है कि पुलवामा में भारतीय सुरक्षा बलों पर हमले की साजिश पाकिस्तान के बालाकोट में आतंकियों ने तैयार की थी। बालाकोट में एयर स्ट्राइक की एक दूसरी वजह यह भी रही क्योंकि पाकिस्तान की सेना नियमित तौर पर इस इलाके में आतंकियों को प्रशिक्षित करती है ताकि भारत के खिलाफ हमला किया जा सके।

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ये थे निशाने पर

भारतीय वायु सेना ने पुलवामा में शहीद हुए जवानों की शहादत का बदला लेते हुए एक बड़ी कार्रवाई की है जिसमें पाकिस्तान की जमीन पर पलने वाले कई खूंखार आतंकी मारे गए।  इन हमलों में भारत के निशाने पर मुख्य रूप से पांच मोस्ट वांटेड आतंकी थे। इस हमले में जैश-ए-मोहम्मद का सबसे बड़ा आतंकी ठिकाना तबाह हो गया है।

इस हमले का निशाना बने पांच मुख्य आतंकी

१. मौलाना अम्मार- जैश के आका मसूद अजहर का भाई जो कश्मीर और अफगानिस्तान में आतंकी वारदातों से जुड़ा रहा है

२. मौलाना तल्हा सैफ- मसूद अजहर का भाई और प्रचार विभाग का प्रमुख

३. मुफ्ती अजहर खान कश्मीरी- कश्मीर ऑपरेशन का प्रमुख

४. इब्राहीम अजहर- मौलाना मसूद अजहर का बड़ा भाई

५. यूसुफ अजहर- मसूद अजहर का साला और प्रशिक्षण केंद्र का प्रमुख

इन हमलों में भारत के एक दर्जन मिराज विमानों ने पाक अधिकृत कश्मीर (क्कश्य) में घुसकर जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी ठिकानों पर लगभग 1000 किलो विस्फोटक गिराए हैं। पाकिस्तान के बालाकोट में आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद का ट्रेनिंग कैंप था।  जिसका संचालन मसूद अजहर के निगरानी में मौलाना यूसुफ अजहर कर रहा था।  उसका दूसरा नाम उस्ताद गौरी भी है। वो रिश्ते में जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर का साला है। वो काफी समय से जैश के साथ काम कर रहा था, लेकिन वो कभी लाइम लाइट में नहीं आता था। 1999 में कंधार विमान अपहरण में यूसुफ अजहर शामिल था। वो अपहरणकर्ताओं की टीम को लीड कर रहा था।  मसूद को छुड़ाने के बाद वो जैश में भर्ती का काम देख रहा था। बाद में मसूद अजहर ने उसे संगठन में अहम जिम्मेदारी दी। उसे बालाकोट में मौजूद आतंकी ट्रेनिंग कैंप की जिम्मेदारी दी गई। इन हमलों में युसूफ के भी हताहत होने की खबर है। उसके साथ ही जैश के कई टॉप कमांडर और ट्रेनर भी मारे गए।


 

इन खूबियों से लैस है मिराज 2000


 

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इन हमलों के दौरान भारतीय वायुसेना के 12 मिराज 2000 विमानों ने पाकिस्तान के बालाकोट स्थित जैश-ए-मोहम्मद के ठिकानों पर 1000 किलो की भारी बमबारी की है। इस हमले में भारतीय वायुसेना ने मिराज 2000 विमानों का इस्तेमाल किया है। जिसमें जैश का अल्फा-3 कंट्रोल रूम तबाह किया गया है।

इस विमान का निर्माण डासो एविएशन ने किया है। यह वहीं कंपनी है जिसने रफाल का निर्माण किया है, जिसका सौदा हाल में ही भारत ने फ्रांस से किया है। फ्रांस की डासो ने मिराज 2000 का निर्माण मिराज ढ्ढढ्ढढ्ढ को रिप्लेस करने के लिए किया था। इसका निर्माण एक हल्के फाइटर जेट के रूप में हुआ है।

कहां हुआ निर्माण

पहली बार 1970 में उड़ान भरने वाला मिराज 2000 फ्रेंच मल्टीरोल, सिंगल इंजन चौथी पीढ़ी का फाइटर जेट है। ये फाइटर जेट विभिन्न देशों में सेवा दे रहा है। इस विमान को विभिन्न वेरिएंट के रूप में विकसित किया गया है। बाद में इस जेट का मिराज 2000 एन और मिराज 2000 डी स्क्राइक वेरिएंट भी जारी किया गया। विमान में समय-समय पर विभिन्न बदलाव किए गए हैं।

मारक क्षमता

अब तक 600 मिराज 2000 विमानों का निर्माण हो चुका है और लगभग 9 देशों में ये सेवा दे रहे हैं। मिराज लड़ाकू विमान ष्ठश्वस्न 554 ऑटोकैन से लैस है, जिसमें 30 मिमी रिवॉल्वर  प्रकार के तोप हैं। तोपों में 1200 से लेकर 1800 राउंड प्रति मिनट आग की दर है। अक्टूबर 1982 में भारत ने 36 सिंगल सीटर सिलेंडर मिराज 2000 एचएस और 4 ट्वीन सीटर मिराज 2000 टीएसएस का ऑर्डर दिया था। गौरतलब है की इन दोनों नाम में ‘एच’ शब्द हिंदुस्तान को संबोधित करता है।


बौखलाया पाकिस्तान

पुलवामा हमले की जवाबी कार्रवाई में भारतीय वायुसेना की पाकिस्तान के आतंकी कैंपों पर किये हवाई हमले के बाद पाकिस्तान में हड़कंप मच गया है। भारत की तरफ से इस गैर-सैन्य कार्रवाई के ऐलान के बाद नेशनल सिक्योरिटी कमेटी की बैठक में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने बालाकोट में आतंकी कैंप पर हमले में हुए नुकसान की किसी भी खबर को सच मानने से इंकार कर दिया। खिसियानी बिल्ली खम्बा नोचे वाली कहावत को चरितार्थ करते हुए इमरान खान ने कहा कि भारत ने अनावश्यक आक्रामकता दिखाई है जिसका पाकिस्तान सही वक्त और सही जगह पर जवाब देगा।

भारत के जवाबी हमले से बौखलाए पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने राष्ट्रीय सुरक्षा समिति की बैठक बुलाई जिसमें पाकिस्तान की तीनों सेना के प्रमुख और खुफिया विभाग के अधिकारी मौजूद रहे।  इमरान खान ने इस बैठक में सुरक्षाबलों और पाकिस्तान की जनता को हर तरह के हालात के लिए तैयार रहने को कहा।  इसके साथ ही इमरान खान ने 27 फरवरी (बुधवार) को नेशनल कमांड अथॉरिटी की बैठक बुलाई थी।  बता दें कि पाकिस्तान की नेशनल कमांड अथॉरिटी ही पाकिस्तान के न्यूक्लियर हथियारों की देखरेख करती है। इसके साथ ही पाकिस्तान सरकार ने दोनों सदनों का विशेष सत्र भी बुलाया है। नेशनल सिक्योरिटी कमेटी की विशेष बैठक की जानकारी देते हुए पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने कहा कि जिस जगह पर हमला हुआ उसकी तस्वीर पूरी दुनिया के सामने हंै। विदेशी और पाकिस्तानी मीडिया को उस जगह का दौरा कराया जाएगा जहां हमले में भारी नुकसान का दावा किया जा रहा है, ताकि भारत के कथित प्रोपेगैंडा को उजागर किया जा सके। महबूबा मुफ्ती के दावों की पुष्टि सम्बंधित बयान पर ध्यान देने की बात भी कुरैशी ने कही।

बौखलाया चीन भी

सर्जिकल स्ट्राइक 2.0 के बाद चीन का बयान गौर करने लायक है। जिस चीन ने मसूद अजहर को सुरक्षा परिषद में बार-बार वीटो लगाकर बचाया है उसने भी भारत के इस ऑपरेशन को सही ठहराया है। यह भारत की महज कूटनीतिक विजय या अंतरराष्ट्रीय दबाव का परिणाम नहीं है। इसके पीछे भारत की सामरिक क्षमता का शानदार प्रदर्शन भी है। भारत ने क्कशद्म से आगे बढ़कर पाकिस्तान के भीतर बालाकोट में सफलतापूर्वक ऑपरेशन किया है। यहां से चीन का निर्माणाधीन कॉरीडोर बहुत दूर नहीं है। यह उसकी बहुत महत्वाकांक्षी परियोजना है और बहुत अधिक निवेश चीन ने इसमें किया है। यदि पाकिस्तान अब कोई कदम उठाता है तो भारत की कार्रवाई में चीन की यह परियोजना प्रभावित होगी। यदि भारत ने इस हिस्से पर बमबारी की तो चीन की अर्थव्यवस्था बुरी तरह प्रभावित होगी। चीन भारत के इस हमले से अपनी परियोजना को लेकर परेशान है। चीन यदि अपने रुख पर कायम रहा तो भारत इस कॉरिडोर को आतंकविरोधी ऑपरेशन के बहाने निशाने पर ले सकता है। भारत अभी टारगेटेड अटैक कर रहा है। पाकिस्तान यदि कोई कार्रवाई करता है तो भारत टारगेटेड अटैक के बजाय सीधे मिलिट्री ऑपरेशन कर सकता है। इसमें चीन बुरी तरह प्रभावित होगा। इसलिए चीन के पास पाकिस्तान को समझाने के सिवा कोई रास्ता नहीं। यदि भारत कोई और ठोस कदम उठाता है  या और बड़ी कार्रवाई करता है तो यह भी हो सकता है कि चीन पाकिस्तान को मजबूर करेगा कि वह हाफिज, मसूद और सलाउद्दीन का प्रत्यर्पण करे।

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पाकिस्तान पर एक्शन का चुनाव रिएक्शन

जिस तरह से मोदी सरकार ने उरी हमले की तरह पुलवामा हमले का भी बदला ले लिया है तो इसका लोकसभा चुनाव पर बड़ा असर पड़ेगा। बता दें कि जल्द ही चुनाव आयोग लोकसभा चुनाव को लेकर तारीख घोषित कर सकता है। एक तरफ देश में चुनाव का माहौल है तो दूसरी तरफ पुलवामा जैसे आतंकी हमले से देश के लोगों में गुस्सा है। जनता के इस गुस्से को शांत करना बहुत ही जरूरी हो गया था और मोदी सरकार ने यह काम बखूबी किया है।  भारत की सभी राजनितिक पार्टियों ने इस समय सरकार और सेना का साथ देकर देश के मनोबल को और ऊंचा कर दिया है। यह एक शुरूआत है और इस बार भारत को ऐसा सबक सिखाना चाहिए कि दोबारा पाकिस्तान भारत की तरफ आंख उठा कर भी न देख सकें।

अब परमाणु हमले का बयान पाकिस्तान नहीं दे रहा है। वह जानता है कि भारत के पास एंटी मिसाइल डिफेंस सिस्टम है। भारत उसके हमले विफल भी कर सकता है और इस हरकत पर नक्शे से उसके नाम मिटा भी सकता है। पाकिस्तान जानता है, क्योंकि मोदी है तो मुमकिन है। आखिर वह काम हुआ जिसका पूरे देश को बेसब्री से इंतजार था। पुलवामा का बदला लिया गया और पुरजोर लिया गया। बीते कई दशकों से जारी पाकिस्तान के इस छद्म युद्ध के खिलाफ यह अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई है। वायु सेना के इस अदम्य शौर्य और पराक्रम की जितनी भी तारीफ की जाए कम ही होगा। वायुसेना के इस कार्रवाई के व्यापक सैन्य और सामरिक परिणाम होंगे, लेकिन वो भविष्य की बातें हैं। अभी महत्वपूर्ण यह है की भारतीय वायुसेना के मिराज 2000 लड़ाकू विमानों ने नियंत्रण रेखा से बहुत दूर और पाकिस्तान की अपनी सीमा में स्थित खैबर-पख्तूनख्वा के निकट बालाकोट में किया। बालाकोट उन्नीसवीं सदी से ही जिहाद के लिए बदनाम रहा है। सैयद अहमद बरेलवी ने बालाकोट से ही महाराजा रंजीत सिंह के खिलाफ जिहाद की शुरूआत की थी। अपने पराक्रम के लिए मशहूर रंजीत सिंह की सेना ने 1831 में भी बालाकोट में पनप रहे जिहाद के कीड़े को जमींदोज कर दिया था, जैसा हमारी वायुसेना ने फिर कर दिखाया है। प्रधानमंत्री मोदी ने भी रंजीत सिंह की तरह ही पाकिस्तान के वजीरे आजम इमरान खान को यह साफ सन्देश दे दिया है की बस बहुत हुआ। इस साहसिक फैसले के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जितनी तारीफ की जाए वह कम ही है। तारीफ तो भारीतय वायुसेना की भी करनी होगी जिसने अपने अद्भुत और अदम्य शौर्य की एक नयी गाथा गढ़ी है।

नीलाभ कृष्ण

 

 

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