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हिंदूत्व के कई पहलू

हिंदूत्व के कई पहलू

हिंदुत्व केवल धर्म ही नहीं है। यह सफल जीवन जीने का ढंग भी है। इसे सनातन धर्म भी कहा गया है। श्रीमद भगवत गीता के अनुसार ‘सनातन’ का अर्थ होता है वह जो अग्नि से, पानी से, हवा से, अस्त्र आदि से नष्ट न किया जा सके और जो हर जीव और निर्जीव में विद्यमान है। सनातन धर्म की जडें आध्यात्मिक विज्ञान में हैं। संपूर्ण हिन्दू शास्त्र विज्ञान और अध्यात्म से जुड़े हैं। शास्त्रों में औपचारिक परम्परागत अभिवादन की पांच विधियां बताई गयी हैं। यह स्पष्ट है कि वर्षों तक हिन्दूत्व का उस प्रकार से प्रचार-प्रसार नहीं किया गया जिस प्रकार से होना चाहिये था। इतिहास में तो कई सारे साहित्यकारों ने भी अपनी मनगढंत बातों से हिन्दुत्व को बदनाम करने का भरपूर प्रयास किया। और कहीं न कहीं वे इसमें सफल भी रहे।

हांलाकि सच्चाई तो यही है कि हिन्दुत्व, जिसको हम वास्तव में सनातन धर्म कहते हैं, वह सभी को मार्ग दिखाने वाला एक सर्वोच्च रास्ता है, जो सास्वत है। सैकड़ों वर्षों की गुलामी के बावजूद इस पथ पर चलने वाले लोग अपने मार्ग से विचलित नहीं हुए, जबकि उन्हें विचलित करने का भरपूर प्रयास किया गया।

यहीं नहीं, जब हम भारत के इतिहास पर एक नजर डालते है तो मि यह पाते है कि मुगलों से लेकर अंगे्रजों तक ने भारत के मंदिरों और धार्मिक स्थानों को हानी पहूंचाने की कोशिश की। और उन्होंने ऐसा किया भी।

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इस संदर्भ में ‘हिन्दू होने का अर्थ’ नामक पुस्तक जो हिंदोल सेनगुप्ता द्वारा लिखी गई है, हिंदूत्व के विचार  अलग प्रकार से लिखती है।  संसार के सबसे प्राचीन धर्मों में से एक हिन्दू धर्म की आस्थाओं और रीति-रिवाजों का एक चिरन्तन मार्ग है जो तीर्थयात्रियों के पदचिन्हों और अध्यात्मज्ञानियों की शिक्षाओं के माध्यम से, मिथक, विज्ञान और राजनीती के जरिए अनेक सहत्राब्दियों से बना हुआ है। लेकिन आज के आधुनिक हिन्दू के लिए इस सबका क्या अर्थ है? धर्मों के इर्द-गिर्द जारी कोलाहलपूर्ण बहस से दूर, यह एक आम हिन्दू की यात्रा है।  यह इस बात को समझने की एक कोशिश है कि क्या वजह है कि बहुत सारे हिन्दुओं के लिए उनकी यह आस्था बहुलता के पक्ष में, विविधता में एकता के पक्ष में और ईश्वर की सर्वव्यापी शक्ति से ज्यादा मनुष्य के साहस और दृढ़ विशवास का एक सबसे शक्तिशाली तर्क है।

हिन्दू होने का अर्थ हिंदुत्व का एक अभूतपूर्व ढंग से किया गया अन्वेषण है । यह पुस्तक एक साहसिक और नवीन परिप्रेक्ष्य को उपलब्ध कराती है जो एक विशाल फलक के भीतर प्राचीन और आधुनिक, सांस्कृतिक और दार्शनिक हिंदुत्व को जोड़ती है। और ऐसा करते हुए लेखक एक अत्यंत निजी कहानियों का सहारा लेती है, जो आकर्षक भी है और विचारों को गीतशील बनने वाला भी है।

हिंदोल सेनगुप्ता द्वारा लिखी गई यह पुस्तक हिन्दुत्व को कई प्रकार से पाठकों के समक्ष रखती है, जो पुस्तक को और भी रोमांचित बनाता है। यह पुस्तक  पाठकों को आकर्षित करेगी।

उदय इंडिया ब्यूरो

 

 

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