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संघ की प्रतिनिधि सभा मंथन पर सबकी नजर

संघ की प्रतिनिधि सभा मंथन पर सबकी नजर

संघ की हर वर्ष आयोजित होने वाली अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की बैठक कई मायनों में महत्वपूर्ण होती है। इसमें संघ और उससे संबद्ध संगठनों की कार्य-योजनाओं की दशा पर चिंतन और दिशा पर निर्देश जारी किए जाते हैं। वहीं हर तीसरे साल के बाद इसी बैठक में संघ और उससे जुड़े संगठन के पदाधिकारियों के दायित्वों का पुनर्समीक्षण कर सांगठनिक बदलाव भी किए जाते हैं। इस वर्ष संघ की प्रतिनिधि सभा की बैठक 13 से 15 मार्च तक नागपुर में आयोजित हुई, जिसमें देश भर से आए हुए संघ के 1400 स्वयंसेवकों ने इस बैठक में भाग लिया। इनमें संघ के शाखा प्रमुख से लेकर शीर्ष नेतृत्व तक और उससे संबद्ध सभी संगठनों के राज्य स्तर से लेकर  राष्ट्रीय स्तर तक के पदाधिकारी शामिल होते हैं।

ऐसी संभावना व्यक्त की जा रही थी कि इस बार की बैठक में सरकार्यवाह सुरेश भैयाजी जोशी के दायित्व में बदलाव किया जा सकता है और उनकी जगह संघ के सह सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले को संघ का सरकार्यवाह बनाया जा सकता है। लेकिन, इन सारे कयासों पर विराम लग गया और भैयाजी जोशी को तीसरी बार संघ का सर संघचालक के बाद दूसरे सबसे महत्वपूर्ण पद की जिम्मेदारी सौंप दी गई। 67 वर्षीय जोशी इस पद पर मार्च 2018 पर बने रहेंगे। जोशी को सरकार्यवाह की जिम्मेवारी पहली बार मार्च 2009 में और दूसरी बार मार्च 2012 में मिली थी।

वी. भागय्या : एक परिचय

04-04-2015

तेलंगाना के मेडक जिले से संबंध रखने वाले वी. भागय्या हैदराबाद के निजाम कॉलेज से स्नातक हैं। अपने विद्यार्थी जीवन से ही संघ से जुडऩे वाले भागय्या स्नातक की शिक्षा पूरी होने के बाद संघ के पूर्णकालिक प्रचारक बन गए। भागय्या 1971 से 1975 तक विशाखापत्तनम के विभाग प्रचारक रहे। 1975 से 80 तक प्रांत शारीरिक प्रमुख और विद्यालय प्रमुख के दायित्वों का निर्वहन किया। 1980 से 90 के बीच भागय्या प्रांत बौद्धिक प्रमुख रहे और उसके बाद आंध्र प्रदेश के सह प्रांत प्रचारक बने। 1991 से 2000 के बीच पूर्व आंध्र प्रांत प्रचारक रहे।

भागय्या पूर्वी क्षेत्र के सह क्षेत्र प्रचारक रहे, जिसमें ओडिशा भी शामिल था। बाद में वे दक्षिण-मध्य क्षेत्र के सह क्षेत्र प्रचारक बने, जिसमें कर्नाटक और संयुक्त आंध्र प्रदेश शामिल था। बाद में उन्हें अखिल भारतीय सह बौद्धिक प्रमुख का दायित्व मिला और अंतत: 15 मार्च 2015 को सह कार्यवाह का दायित्व दिया गया। तेलगु, हिंदी और अंग्रेजी धाराप्रवाह बोलने वाले भागय्या एक उम्दा वक्ता माने जाते हैं। उन्होंने हिंदुओं की एकता के लिए कई देशों की यात्रा की।

अब तक यही माना जा रहा है था कि जोशी को संघ और सरकार के बीच समन्वय की जिम्मेवारी दी जा सकती है। संघ के सह प्रचार प्रमुख नंद कुमार के अनुसार, भैयाजी जोशी के नेतृत्व में पिछले 6 वर्षों में संघ के विस्तार के कारण ही उन्हें यह जिम्मेवारी फिर से सौंपी गई है। इसके पहले जोशी संघ में सह सरकार्यवाह और अखिल भारतीय सेवा प्रमुख के रूप में अपने दायित्वों का निर्वहन कर चुके हैं। उनकी टीम में सह सरकार्यवाह के रूप में दत्तात्रेय होसबोले, डॉ. कृष्ण गोपाल और सुरेश सोनी रहेंगे। वहीं के. सी. कन्नन के पिछले साल शादी कर लेने के बाद उन्हें निलंबित करने के कारण लगभग एक साल से खाली पड़े इस पद पर वी. भागय्या को मनोनीत किया गया है।

संघ के संगठन में नए बदलाव के रूप में अखिल भारतीय बौद्धिक प्रमुख के रूप में स्वात रंजन जी को, अखिल भारतीय बौद्धिक सह प्रमुख के रूप में मुकुंद सी.आर. को चुना गया है। असम क्षेत्रीय प्रचारक प्रमुख के रूप में कार्य कर चुके सुनील कुलकर्णी को अखिल भारतीय शारीरिक प्रमुख बनाया गया है। अनिरूद्ध देशपांडे को अखिल भारतीय संपर्क प्रमुख बनाया गया है। वहीं सुनील देशपांडे को अखिल भारतीय सह संपर्क प्रमुख का दायित्व दिया गया है। मंगेश भेंडे को अखिल भारतीय व्यवस्था प्रमुख और अनिल ओक को अखिल भारतीय सह व्यवस्था प्रमुख की जिम्मेदारी दी गई है। संघ के केन्द्रीय कार्यकारिणी में सांकल चंद्र बगरेचा, हस्तीमल और महावीर को जगह मिली है।

04-04-2015

इन बदलावों के अलावा इस बैठक में सरकार के कामकाज की संघ ने समीक्षा की। भाजपा की पूर्ण बहुमत वाली पहली एनडीए सरकार में संघ ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के अब तक के कामकाज पर संतोष व्यक्त किया। संघ ने अपने हिंदुत्ववादी एजेंडे को आगे जारी रखने पर भी सहमति जताई। सरकार के निर्णय में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मनाए पर संघ ने प्रसन्नता जाहिर की और उम्मीद की कि सरकार भारतीय संस्कृति के विलुप्त अध्यायों को ऐसे ही सामने लाती रहेगी।

संयुक्त राष्ट्र की 69वीं महासभा में प्रति वर्ष 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मनाने का निर्णय लिया गया था, जिसका नेपाल ने तुरंत स्वागत किया था। 11 दिसंबर 2014 को बिना किसी मतदान के 175 देशों के समर्थन से इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया गया था। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 27 सितंबर 2014 को संयुक्त राष्ट्र महासभा के संबोधन के दौरान इसका प्रस्ताव रखा था।

अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा में इसका स्वागत किया गया और योग के महत्व पर चर्चा की गई। संघ का मानना है कि योग सिर्फ शारीरिक व्यायाम ही नहीं, बल्कि महर्षि पतंजली के अनुसार यह शरीर, मन, आत्मा और बुद्धि को जोडऩे की समग्र जीवन पद्धति है। शास्त्रों में ‘योगश्चित्तवृतिनिरोध:’, ‘मन: प्रशमनोपाय: योग:’ और ‘समत्वं योग उच्यते’ आदि विविध प्रकार से योग की व्याख्या की गई है, जिसे अपनाकर व्यक्ति शांत और निरामय जीवन का अनुभव करता है। योग को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता देने के लिए प्रतिनिधि सभा में विश्व समुदाय को बधाई दी गई और उम्मीद की गई कि विश्व बंधुता और आपसी सौहाद्र्र को बढ़ाने में योग महत्वपूर्ण भूमिका अदा करेगा। साथ ही राज्य सरकारों से अपील की गई कि इसे विद्यालयी पाठ्यक्रमों में शामिल किया जाए, ताकि बच्चों में उच्च मानसिक विकास हो सके।

जर्मन की जगह संस्कृत को पाठ्यक्रम में शामिल करने के केन्द्रीय मानव संसाधन मंत्रालय के निर्णय पर विवाद पर भी प्रतिनिधि सभा में मातृभाषा पर भी चर्चा हुई। प्रतिनिधि सभा का मानना है कि देश-विदेश की विविध भाषाओं का ज्ञान प्राप्त करना उचित है, लेकिन स्वाभाविक शिक्षण और सांस्कृतिक विकास के लिए शिक्षा, खासकर प्राथमिक शिक्षा मातृभाषा अथवा संविधान स्वीकृत भाषाओं में ही दी जानी चाहिए। प्रतिनिधि सभा का मानना है कि भाषा सिर्फ संवाद नहीं, बल्कि यह संस्कृति और संस्कारों की भी संवाहिका होती है। सभा में संघ ने मातृभाषा में शिक्षण को नैसर्गिक और वैज्ञानिक बताते हुए मदन मोहन मालवीय, महात्मा गांधी, रवींद्रनाथ ठाकुर, श्री मां, डॉ. अंबेडकर जैसे मूर्धन्य चिंतकों से लेकर चंद्रशेखर वेंकटरमण, जगदीश चंद्र बसु जैसे वैज्ञानिकों का उदाहरण दिया।

इस तीन दिवसीय प्रतिनिधि सभा में सरकार के कामकाज पर संतोष के साथ-साथ भारतीय मूल्यों और संस्कृति को और बढ़ावा देने पर सहमति जताई गई।

सुधीर गहलोत

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