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सेहतमंद गांव विकास की पहली शर्त

सेहतमंद गांव विकास की पहली शर्त

हाल ही में राष्ट्रपति श्री प्रणब मुखर्जी ने अस्वस्थ भारत के बारे में अपने विचार प्रकट करते हुए कहा था की भारत जैसे विकासशील देश में स्वास्थ्य क्षेत्र में बुनियादी ढांचे की जरूरत है। उन्होंने कहा था की सस्ती, सुलभ और कारगर स्वास्थ्य सेवा सुनिश्चित करने की आवश्यकता है। देश के नीति-निमार्ताओं के लिए भी यह निरंतर चिंता का विषय रहा है। आज भी जहां भारत की सत्तर प्रतिशत जनता गांव में रहती है, किस प्रकार से देश के हर नागरिक तक स्वस्थ्य सुविधाएं पहुंचाई जाएं, यह निरंतर चिंता का विषय रहा है। इस लिहाज से देखा जाए तो शिक्षा की कमी और दुर्गम स्थलों तक पहुंचने की चुनौतियां हमेशा इस लक्ष्य प्राप्ति में आड़े आ जाती हैं। देश में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन और उससे संबंधित कार्यक्रमों के द्वारा ग्रामीण भारत के स्वास्थ्य के स्तर को सुधारने के प्रयासों के बावजूद सफलता का प्रतिशत नगण्य है। इस कटु सत्य को स्वीकारते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी कहा था कि भारत सरकार द्वारा स्वास्थ्य  सुविधाओं के विकास के लिए पिछले दशक में उठाये कदम अपर्याप्त रहे हैं। इस वजह से वर्ष 2000 से 2015 तक के लिए निर्धारित सहस्राब्दी लक्ष्य (मिलेनियम डेवलपमेंट गोल) तक भारत नहीं पहुंच सका।

इन सभी समस्याओं को देखते हुए पॉलिसी एडवोकेसी ग्रुप भारत नीति और इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने मिलकर दिल्ली में एकदिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया। रूरल हेल्थ ऐंड सस्टेनेबल डेवलपमेंट के टॉपिक के तहत विभिन्न डॉक्टरों और अन्य जानकारों ने दिन भर इस विषय पर मंथन किया और इस मंथन से जो अमृत निकला उसे सरकार के सामने पेश किया। कार्यशाला में बोलते हुए स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्यमंत्री फग्गन सिंह कुलस्ते ने सरकार की स्वास्थ्य क्षेत्र में उपलब्धियां गिनाते हुए कहा कि देश आर्थिक उन्नति की तरफ तभी बढ़ सकता है जब उसके सभी नागरिक स्वस्थ हों। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा लाया गया रूरल हेल्थ मिशन तभी सफल हो सकता है जब उसमें सबकी भागीदारी हो। कार्यशाला को संबोधित करते हुए स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्यमंत्री अनुप्रिया पटेल ने कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि स्वास्थ्य बीमा के साथ-साथ स्वास्थ्य सुविधाओं तक सभी की पहुंच बने। अमृत फार्मेसी की बात करते हुए उन्होंने कहा कि एनडीए सरकार का लक्ष्य है कि यह अमृत फार्मेसी सभी जिला अस्पतालों में हो। उन्होंने बताया कि किस तरह से आयुष के आने से देश भर में स्वास्थ्य सुविधाओं में बढ़ोतरी हुई है।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए असम के अर्थ, स्वास्थ्य एवं शिक्षा मंत्री हेमंत कुमार बिस्वा ने कहा की देश में ग्रामीण स्वास्थ्य को देखने का नजरिया बदलना होगा। उन्होंने राष्ट्रीय स्वस्थ्य मिशन को एक गेम चेंजर बताते हुए कहा कि ‘सभी के लिए स्वास्थ्य’ ही नागरिकों का सपना है। कार्यशाला को संबोधित करते हुए भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री मुरलीधर राव ने कहा कि स्वास्थ्य एक ऐसा मानक है जिससे सरकार की कल्याण क्षमता को मापा जाता है और जब तक जीवनशैली जनित रोगों को स्वास्थ्य कैंपेन में शामिल नहीं किया जायेगा, असली विकास संभव नहीं है। उन्होंने बताया कि कैसे गरीबी स्वास्थ्य सुविधाओं को पाने में बाधक हो सकती है। उन्होंने कहा कि ऐसे अनेक मामले सामने आये हैं जिसमें स्वास्थ्य सुविधाओं को पाने के चक्कर में अनेक लोग गरीबी रेखा से नीचे चले गए हैं। उन्होंने आगे कहा कि सरकार को स्वास्थ्य संरचनाओं के विस्तार के लिए वैकल्पिक साधन अपनाने होंगे और लोगों को सोशल सिक्यूरिटी कवर देने की तरफ फौरन काम करना होगा। कार्यशाला के समापन पर इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के प्रेसिडेंट इलेक्ट डॉ के.के. अग्रवाल ने कार्यशाला से निकले निष्कर्षों को बताया जिसमें सभी नागरिकों को उच्चतम स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान कराना, देश में हुई मौतों का ऑडिट करना और समान वेतनमान का निर्धारण करना प्रमुख था।

उदय इंडिया ब्यूरो

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