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”आयुर्वेद सभी पद्धतियों की जननी है’’

”आयुर्वेद सभी पद्धतियों की जननी है’’

आयुर्वेद क्या है और कैसे यह दूसरी पद्धतियों से बेहतर है, इसकी जानकारी लेने के लिये बातचीत की जीवा के निदेशक डॉ. प्रताप चौहान से उदय इंदिया की संवाददाता प्रीति ठाकुर ने। प्रस्तुत हैं बातचीत के प्रमुख अंश।

आयुर्वेद और योग को लोग अकसर धर्म से जोड़ देते हैं इसके बारे में आप क्या कहेंगे?

इन्हें धर्म से जोडऩा ठीक नहीं है। क्योंकि, हर व्यक्ति के पास शरीर, मन, आत्मा है चाहें वह किसी भी धर्म से हो, किसी भी देश से हो। शरीर तो सबका एक जैसा ही है, एक ही तरह से सेल्स बन रहे हैं सबके शरीर में, शरीर के सभी अंग भी उसी तरह से काम कर रहे हैं। ऐसा तो नहीं है कि मुस्लमान का शरीर किसी और तरह से काम कर रहा है और ईसाई का किसी और तरह से। तो जब सभी धर्म के लोगों का शरीर एक तरह से ही काम करता है तो योग और आयुर्वेद भी सभी को एक समान ही लाभकारी होगा। तो मैं तो इसे धर्म या समुदाय से जोडऩा ठीक नहीं समझता। हां आयुर्वेद एक मार्ग जरूर है लोगों को

उस स्तर तक ले जाने का जहां पर आपको शरीर, मन, बुद्धि, आत्मा का ज्ञान मिलता है। हां ये जरूर है कि जो व्यक्ति आयुर्वेद के हिसाब से आपना खान-पान नहीं करता है या योग नहीं करता है वह धर्म को भी नहीं समझ सकता है। हां ये कहा जा सकता है कि  जिस वक्त यह सब विकसित हुआ उस वक्त सिर्फ हिन्दु धर्म ही था, न मुस्लमान थे और न ईसाई इसलिये भी लोग इसे हिन्दु धर्म से जोड़ कर देखते हैं।

आप शिक्षा और आयुर्वेद दोनों क्षेत्रों में सक्रिय हैं। आपका मूल उद्देश्य क्या है?

हम पूरे समाज में शांति की स्थापना करना चाहते हैं। अगर हम इसको एक लाइन में कहें तो जीवा का एक ही उद्देश्य है क्रिएट ए सोसायटी, हेल्दी, वेल्दी, हैप्पी फियरलैस। यानी शांतिप्रिय समाज हो, सब सुखी रहें, किसी के प्रति किसी के मन में कोई द्वेष न हो। इसे हम शिक्षा और आयुर्वेद के माध्यम से साकार करने की कोशिश कर रहे हैं। हमारा पूरा प्रोजेक्ट सोशल इंटरप्रेन्यूरशिप है। इसे हम बिजनेस की तरह नहीं, बल्कि सेवा के भाव से करते हैं।

मोदी सरकार बड़े पैमाने पर दवाओं की वैकल्पिक प्रणाली को बढ़ावा दे रही हैं। आपकी इस पर क्या प्रतिक्रिया है और जीवा को इससे कैसे फायदा होगा?

इसका फायदा जीवा को ही नहीं बल्कि, पूरे आयुर्वेद जगत को इसका फायदा है और इसका फायदा ये है कि पहली बार इस ओर ध्यान देते हुए मोदी जी ने आयुष मंत्रालय बना दिया है। इससे पहले जितनी भी चिकित्सा की पद्धतियां थी चाहें वह आयुर्वेद थी, यूनानी, नैचरोपैथी सभी स्वास्थ्य मंत्रालय के आधीन थे। स्वास्थ्य मंत्रालय में तो बहुत काम होते हैं जिसकी वजह से इस तरफ ज्यादा ध्यान नहीं दे पा रहा था स्वास्थ्य मंत्रालय। लेकिन अलग से एक मंत्रालय बना देने से ये फायदा है कि हमारी जो प्राचीन चिकित्सा पद्धतियां हैं उन पर पूरी तरह से ध्यान दिया जा सकता है।

भारत चरक संहिता, पतंजलि समेत दूसरी पारंपरिक पद्धतियों के सिद्धातों के पालन में विश्वास करता है। क्या जीवा भी इन सिद्धांतों का सख्ती से पालन कर रहा है?

हां, हमारा तो उद्देश्य ही यह है कि हमारी जो पारंपरिक और विश्वसनीय पद्धतियां हैं उसका पालन करते हुए ही आगे बढ़े। हमारे लिये ये बेहद खुशी की बात है कि बीबीसी रेडियों ने 50 टॉपिस्क पर इंटरव्यू की सिरीज पर एक पुस्तक छापी है इनमें भगवान बुद्ध, स्वामी विवेकानंद, गांधी जी जैसे संतों और महापुरूषों का नाम है जिन्होंने भारत के विकास में सहयोग दिया है। इसमें चरक का भी नाम आया है। जिस अध्याय में चरक का नाम आया है वहां पूरे अध्याय में जीवा की स्टोरी लिखी है। तो हम तो सीधे जुड़े हुए हैं चरक और उसकी पद्धतियों से।

आयुर्वेद कैसे दूसरी पद्धतियों से बेहतर है?

आयुर्वेद जननी है, इससे ही सभी पद्धतियां  अलग-अलग शाखाओं में बंटी हैं, और ये जननी इसलिये है क्योंकि यह अपने आप में पूरी पद्धती है। इसमें किसी चीज की कमी नहीं है। किसी भी चीज की जानकारी अगर आपकों चाहिये तो वह आयुर्वेद में मौजूद है। इसी के कुछ सिद्धांतों पर चलकर होम्योपैथिक और दूसरी पद्धतियों का जन्म हुआ है। इसी में आजकल एक नई पद्धति भी आ गई है रेकी। लोगों को पता नहीं है इसलिये वह इसे एक अलग सिस्टम समझते है। अगर हम आयुर्वेद शब्द का ही विशलेषण करें तो वेद का मतलब होता है ज्ञान और आयुर का मतलब है आयु, मन, आत्मा और इन्द्रीयां। इन चार के समावेश को आयुर कहते हैं। जिसमें यह सभी चीजें आ गईं वह अपने आप में पूर्ण है। दूसरी सभी पद्धतियों का जन्म आयुर्वेद से हुआ है इसलियें यह सभी पद्धतियों की जननी है।

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