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भ्रष्टाचार से मसखरी?

भ्रष्टाचार से मसखरी?

मशहूर विदूषक कपिल शर्मा ने मुम्बई म्युनिसिपल कॉपोर्रेशन के कथित भ्रष्टाचार पर एक ट्वीट करके फिर मुद्दे को गर्म कर दिया है। कपिल पंजाब के रहने वाले हैं और वहां चुनाव होने वाले हैं। यूं भी ‘कॉमेडी विद कपिल’ के उनके ठहाकेदार साथी नवजोत सिंह सिद्दू पंजाब के बड़े नेता हैं। इसलिए भ्रष्टाचार पर कपिल की टिप्पणी को लेकर शोर मचना तो लाजमी ही था।

ये कोई छिपी बात नहीं है की देश की ज्यादातर स्थानीय संस्थाएं सिर से पैर तक रिश्वतखोरी और भ्रष्टाचार में डूबी हुई हैं। कोई भी दल या राज्य आमतौर से इससे अछूता नहीं है। देश के तकरीबन हर शहर, कस्बे और गांव में नक्शा पास कराने से लेकर कोई भी अनापत्ति प्रमाण पत्र लेने के लिए बिना ‘चायपानी’ के काम नहीं होता। मुम्बई की बीएमसी से लेकर दिल्ली की एमसीडी में ‘सुविधा शुल्क’ के लेन-देन के बिना काम नहीं होते। इसलिए कपिल ने ऐसा कुछ भी नहीं कहा जो वास्तविकता से अलग है। मगर कपिल की कॉमेडी की तरह उनके इस ट्वीट के कई मायने निकाले जा सकते हैं। देखना चाहिए कि क्या ये कोई दो-अर्थी संवाद तो नहीं?

सबसे पहले तो कपिल बधाई के पात्र हैं कि वे पिछले तीन साल से 15 पंद्रह करोड़ रूपये साल का इन्कम टैक्स देते है। हम जानते हैं कि देश में कितने कम लोग टैक्स भरते हैं। 15 करोड़ का टैक्स यानि कपिल सालाना 45/50 करोड़ की कमाई करते हैं। इतना शुद्ध लाभ तो देश के बड़े व्यवसायी, उद्योगपति और कारखानेदार भी नहीं कमाते होंगे। अगर शाम को टीवी पर हंसाकर और फिल्मों का प्रमोशन करके कपिल शर्मा साल के पचास करोड़ कमा लेते हैं तो फिर इससे ‘अच्छे दिन’ कहां हो सकते हैं? यहां ‘अच्छे दिनों’ की याद दिलाना इसलिए जरूरी है क्योंकि कपिल शर्मा ने अपनी ट्वीट में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को टैग करके ये पूछा है कि अगर 15 करोड़ साल का आयकर देने के बाद भी 5 लाख की रिश्वत मांगी जाए तो क्या इन्हें ‘अच्छे दिन’ माना जाए?

कपिल शर्मा की ट्वीट के बाद कुछ खबरें और आई। पहली तो ये कि 4 अगस्त को बीएमसी अधिकारियों ने उनके बंगले के एक हिस्से को गिरा दिया था जिसे अधिकारी अनधिकृत बताते हैं। वहां एक एनजीओ ने गूगल मैप का हवाला देकर अवैध निर्माण की शिकायत की थी। अधिकारियों के अनुसार कपिल को इसके लिए बाकायदा नोटिस और समय दोनों दिए गए थे। इसी तरह उनके पास गोरेगांव में एक फ्लैट भी है वहां भी गैर-कानूनी निर्माण के लिए उन्हें नोटिस दिया गया है। अब सवाल है कि कपिल मेज के नीचे से जिन 5 लाख रुपये मांगे जाने की बात कर रहें हैं उनका वास्ता इन संपत्तियों से तो नहीं है। इसकी जांच होनी चाहिए।

कपिल शर्मा कोई आम शहरी नहीं हैं। वे देश के एक बड़े सेलीब्रिटी स्टार हैं। इसलिये भ्रष्टाचार को खत्म करने में उनकी भागीदारी भी जरूरी है। एक सम्मानित नागरिक होने के नाते उनका कर्तव्य बनता है कि वे आगे आकर उन लोगों के नाम बताएं जिन्होंने उनसे 5 लाख की रिश्वत मांगी। साथ ही वे ये पदार्फाश भी करें कि ये घूस उनसे क्यों मांगी गयी। इससे वे एक उदाहरण प्रस्तुत करेंगे और उनके करोंड़ो चाहने वाले उनके और भी ज्यादा मुरीद हो जाएंगे। अगर वे ऐसा नहीं करते तो लोग कहेंगे कि या तो उनके कोई राजनीतिक इरादे हैं या फिर वे कोई मसखरी कर रहे हैं। कपिल को समझना चाहिए कि भ्रष्टाचार एक गंभीर मुद्दा है और इसे फूहड़ मसखरी बनाना उचित नहीं होगा।

उमेश उपाध्याय

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