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छोड़ा गया आतंकी भस्मासुर बन गया

छोड़ा गया आतंकी भस्मासुर बन गया

चौबीस दिसंबर 1999 को आतंकियों ने काठमांडू से दिल्ली आ रहे इंडियन एयरलाइंस के विमान आईसी 814 का अपहरण कर लिया, बाद में इसे कांधार ले जाया गया। इसमें सवार 176 लोगों को बचाने के लिए तत्कालीन एनडीए सरकार ने आतंकियों की मांग मान ली और हरकत-उल-अंसार से जुड़े मसूद अजहर सहित तीन आतंकियों को छोड़ दिया। जसवंत सिंह खुद उन्हें लेकर कांधार गए थे। उन्हें रिहा करने के बाद विमान यात्री छूटे। इन आतंकवादियों में से मसूद अजहर  को छोडऩा भारत को बहुत भारी पड़ा। उसने आतंकवादियों के स्वर्ग पाकिस्तान लौटने के बाद कुख्यात आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद की स्थापना की और भारत के लिए आतंक बन गया। सेना ने उरी में हमले के पीछे मसूद अजहर के आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के आतंकियों का हाथ बताया है। इससे नौ महीने पहले  जैश ने  पठानकोट पर आतंकी हमला किया था। जैश के 2000 में बनने के बाद उसका बड़ा आतंकवादी कारनामा यह था कि उसने 2001 में  लश्कर-ए-तैयबा के साथ भारत की संसद पर आतंकी हमला किया था। तब संसद के परिसर में 100 से ज्यादा सांसद मौजूद थे।

उरी में सेना के कैंप पर हमले को लेकर कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह ने एनडीए की पिछली सरकार को कटघरे में खड़ा किया है। उन्होंने ट्विटर पर लिखा, ‘हमने भारतीय विमान अपहरण के बाद मसूद अजहर को छोड़कर गलती की थी। सबक: राष्ट्रीय सुरक्षा से कभी कोई समझौता न करें। ‘अगर किया जैश-ए-मोहम्मद और मसूद अजहर जैसे आतंकवादी पैदा होते हैं। वैसे पाकिस्तान तो आतंकवादियों के लिए सबसे ऊपजाऊ देश है। कई बार तो लगता है कि आतंकवाद उसका डीएनए बन गया है। हालांकि पाकिस्तान में रहकर मौलाना मसूद अजहर के अपने संगठन जैश-ए-मोहम्मद के गतिविधियां चलाने से अंतरराष्ट्रीय समुदाय में पाकिस्तान को शर्मिंदगी उठानी पड़ी क्योंकि विमान अपहरण की घटना से मौलाना अजहर पहले से ही काफी सुर्खियों में आ गया था। जब वो छूटा तो वह आतंकी संगठन हरकत-उल-मुजाहिदीन से अलग हो गया और नया गुट बनाया। नाम रखा, जैश-ए-मोहम्मद। मौलाना मसूद अजहर के साथ हरकत उल मुजाहीदीन के कई बड़े आतंकी नए गुट में शामिल हो गए। जैश-ए-मोहम्मद कश्मीर के सबसे खतरनाक आतंकी संगठनों में से है और वह कश्मीर में  कई आतंकी हमले कर चुका है। वह पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर से ज्यादा ऑपरेट करता है। उसका एक ही लक्ष्य है- जम्मू-कश्मीर को भारत से अलग कराना। बताया जाता है कि जैश-ए-मोहम्मद को बनाने में पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई, अफगानिस्तान की तालिबान आलाकमान, ओसामा बिन लादेन और पाकिस्तान के कई सुन्नी संगठनों ने मदद की थी।

कश्मीर में आतंकवाद फैलाने के लिए उसका तरीका यह है कि मसूद अजहर कट्टरपंथी विचारों वाले ऑडियो कैसेट कश्मीर घाटी में बांटकर नौजवानों को अपनी ओर आकर्षित करता है। अपनी स्थापना के दो महीने के भीतर ही इस संगठन ने श्रीनगर में भारतीय सेना के स्थानीय मुख्यालय पर आत्मघाती हमले की जिम्मेदारी ली थी। 23 अप्रैल 2000 को हुए इस हमले में एक नौजवान ने विस्फोटक पदार्थों से भरी कार मुख्यालय के दरवाजे पर ठोक दी।

15-10-2016

सितंबर 2001 में अमेरिका में न्यूयॉर्क पर हुए हमलों के हादसे से दुनिया उबर भी नहीं पाई थी कि 1 अक्टूबर को भारत के जम्मू-कश्मीर की राजधानी श्रीनगर में राज्य विधानसभा पर हुए आत्मघाती हमलों ने उसे चौंका दिया। 24 सितंबर 2001 को एक नौजवान ने विस्फोटक पदार्थों से भरी कार श्रीनगर में विधानसभा भवन से टकरा दी। इसी बीच कुछ दूसरे आतंकी विधानसभा की पुरानी बिल्टिंग में घुस गए और उन्होंने वहां आग लगा दी। इस घटना में 38 लोग मारे गए। फिर जैश के आतंकियों ने 28 जून 2000 को भी जम्मू कश्मीर सचिवालय पर हुए एक हमले की भी जिम्मेदारी ली।

हालांकि जैश और लश्कर-ए-तैयबा के रिश्ते बहुत अच्छे हैं। दोनों ने भारतीय संसद पर हमले में संयुक्त रूप से हिस्सा लिया था। लेकिन जैश की रणनीति लश्कर-ए-तैयबा से अलग है क्योंकि लश्कर इस्लाम में आत्महत्या पर कड़ी पाबंदियों के कारण आत्मघाती हमलों के बजाय फिदायीन हमलों पर जोर दिया करता है। साथ ही जैश का तालिबान से जुड़ाव था हालांकि लश्कर के साथ ऐसा कुछ नहीं था। जैश के भारत में हमले इतने भयंकर थे कि उनके कारण भारत और पाकिस्ताकन में कई बार भयानक तनाव पैदा हो गया था। जैश के आतंकवादियों ने 2003 में दो बार पाकिस्तानी राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ को मारने की कोशिश भी की। 2007 में इस्लामाबाद में लाल मस्जिद हमलों में जैश की भूमिका सामने आने के बाद पाक सेना ने सप्ताहभर तक आतंकियों के खिलाफ अभियान चलाया था। पाकिस्तान में कदम उखडऩे के बाद जैश ने कश्मीर में भी जमीन खो दी।

मसूद अजहर का जन्म बहावलपुर में 1968 में हुआ था। कराची के बिनोरी मदरसे में पढऩे के बाद वह शिक्षक बन गया। हरकत उल मुजाहिदीन से जुडऩे के बाद अजहर जेहाद  के ट्रैनिंग कैंप में शामिल होने अफगानिस्तान चला गया। उसने सोवियत संघ के विरूद्ध युद्ध में हिस्सा लिया। इसके बाद अजहर हरकत का महासचिव बन गया।

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जनवरी 1994 में अजहर ढाका से नई दिल्ली आया। यहां से फिर श्रीनगर चला गया। 10 फरवरी को उसे और हरकत के कमांडर सज्जालद अफगानी को सुरक्षा बलों ने पकड़ लिया। आईसी-814 अपहरण के बाद अजहर को उमर शेख और मुश्ताक अहमद जरगार के साथ छोड़ा गया। विमान अपहरण के दौरान अजहर के तालिबान से रिश्ते मजबूत हुए। अजहर ने हरकत के कुछ साथियों के साथ मिलकर जैश का गठन किया और कश्मीरी उग्रवाद का पूरा चेहरा बदल गया। संसद हमले के बाद भारत ने पाक से टॉप 20 आतंकियों को मांगा जिसमें अजहर टॉप पर था। पाकिस्तान ने उसे गिरफ्तार किया लेकिन 2002 में उसे रिहा कर दिया। जनवरी 2002 में परवेज मुशर्रफ के दौर में पाकिस्तान ने भी इस गुट पर बैन लगा दिया। बताया जाता है कि इसके बाद संगठन नए नाम ‘खद्दाम उल-इस्लाम।’ के नाम से ऑपरेट करने लगा। दिसंबर 2003 में मुशर्रफ को निशाना बनाकर किए गए हमले के बाद जैश कश्मीर से गायब हो गया। इन सालों में अजहर को अपने घर से निकलने की अनुमति नहीं दी गई। लेकिन पिछले कुछ समय में पाकिस्तानी सेना और आईएसआई ने महसूस किया कि सईद हाफिज की लश्कर-ए-तैयबा के मुकाबले जैश ज्यादा कामयाब साबित हो सकता है। बदली रणनीति के तहत आईएसआई अब लश्कर के बजाय जैश-ए-मोहम्मद को जम्मू-कश्मीर में आतंकी गतिविधियों के लिए ज्यादा तरजीह दे रहा हैं। आईएसआई के ऐसा करने के पीछे का मकसद यह है कि जम्मू-कश्मीर एवं भारत के अन्य हिस्सों में और अधिक आतंकी हमलों को अंजाम दिया जा सके। दूसरी तरफ खबर है कि आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा भारत में बड़े हमले की तैयारी में हैं। मीडिया में चल रही खबरों की मानें तो एलओसी में 300 से अधिक आतंकी घुसपैठ की तैयारी में हैं। सेना के एक आतंकी के हवाले से खबर है कि पाक अधिकृत कश्मीर के 17 कैंप में हजार से अधिक आतंकियों को ट्रेनिंग दी जा रही है।

पठानकोट हमले के बाद कहा जा रहा था कि जैश-ए-मोहम्मद के खिलाफ पाकिस्तान सख्त रुख अपना रहा है। पाकिस्ताान की सरकार और फौज ने आदेश जारी किया था  कि वहां के पंजाब प्रांत में जैश-ए-मोहम्मद का पूरा नेटवर्क नेस्तोनाबूत कर दिया जाए। हालांकि इसके विपरीत पाकिस्तान के ही एक मंत्री ने पाकिस्तान की नीयत पर सवाल उठा दिए। उन्होंने कहा है कि पाकिस्तान जैश-ए -मोहम्मद पर सिर्फ दिखावा कर रहा है। पाकिस्तान ने कई दिनों से लगातार यह दिखाने की कोशिश की है कि वह आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्माद के खिलाफ कार्रवाई के लिए प्रतिबद्ध है। पाकिस्तान ने पहले यह दिखाने की कोशिश की कि उसने मसूद अजहर को गिरफ्तार कर लिया है। लेकिन फिर खबर आई कि उसे गिरफ्तार नहीं बल्कि सुरक्षात्मक हिरासत में रखा गया है।

मसूद अजहर के आतंकी संगठन पर अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और भारत समेत कई देशों में प्रतिबंधित है। फिर भी मसूद अजहर पाकिस्तान में खुलेआम रैलियों में भारत के खिलाफ जहर उगलता है। तभी अमेरिका ने एक रिपोर्ट में कहा है कि पाकिस्तान ने भारत में हमलों के लिए जिम्मेदार लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे आतंकी संगठनों के खिलाफ ”पर्याप्त कार्रवाई’’ नहीं की है। जैश-ए-मोहम्मद पाकिस्तान का एक कट्टरपंथी इस्लामिक संगठन है उसका उद्देश्य कश्मीर को पाकिस्तान के साथ जोडऩा और यह सुनिश्चित करना है कि पाकिस्तान में शरिया कानून लागू हो। इसने सार्वजनिक तौर पर अमेरिका के खिलाफ हमले का ऐलान किया था। इसके साथ ही यह संगठन हिंदुओं और गैर मुसलमानों को देश से बाहर भेजना चाहता है। आखिर  इस संगठन के पास पैसे कहां से आते हैं तो आपको बता दे कि यह संगठन अल रशीद जैसे चेरिटेबल फाउंडेशन से फंड लेता है। साथ ही मैगजीन और पैम्फलेट लोगों में बांटकर चंदे की मांग की जाती है। उसको पाकिस्तान के बाकी आतंकवादी संगठन जैसे हरकत-उल-मुजाहिद्दीन, हरकत-उल-जिहाद से भी चंदा मिलता है। साल 2002 में इस संगठन के चंदा मांगने पर बैन लगा दिया गया, तो इस आतंकी संगठन ने रियल एस्टेट में भारी निवेश किया और अब उसी निवेश से यह कानूनी तरीके से अपने लिए पैसे का इंतजाम करता है।

कुछ दिनों पहले अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस ने कराची शहर के कई वीडियो हासिल किए थे इनमें कोई इंसान खुफिया कैमरा लेकर पाकिस्तान में 2002 से ही बैन आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद की काली करतूत का पर्दाफाश कर रहा है। आतंकवाद पर पाकिस्तान के दोमुंहेपन का इससे बड़ा सबूत शायद ही कोई मिले। मस्जिद के बाहर सुनाई दे रही आवाजों में हर मुसलमान को ईमान से जोड़ा जा रहा है। जन्नत का लालच दिया जा रहा है, क्योंकि जैश कंगाल है, उसकी जेब में पैसे नहीं हैं  लेकिन दिल में भारत के प्रति दुश्मनी का भंडार है। मसूद अजहर की चंदा ब्रिगेड कराची की गलियों में मस्जिद के बाहर कुछ इस तरह हाथ फैलाए खड़ी हुर्ई है। इस वीडियो में सबसे खास बात ये है कि जब लोगों से चंदा इकट्ठा किया जा रहा था तो पास ही में पुलिस भी खड़ी थी जो वहां सिर्फ तमाशा देख रही थी।

भारत की संसद पर हमले के बाद अपनी खूंखार छवि बनाने वाले जैश के पर आईएसआई ने करीब दस साल पहले ही कतर दिए थे। क्योंकि इसके प्रमुख मौलाना मसूद अजहर ने पाक सेना को ही चुनौती देनी शुरु कर दी थी। लेकिन कश्मीर में आतंक फैलाने के नाम पर जैश की वापसी हो गई है। मगर पाकिस्तान में ऐसे आतंकी संगठन थोक के भाव में हैं।

सतीश पेडणेकर

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